निधि और रोजर्स अपनी पूरी टीम के साथ चॉपर में बैठ कंपनी की ओर बढ़ रहे थे। उनका यह मिशन पूरी तरह से खुफिया था। दोनों ने मिलकर प्लेन किया था कि वह छत के रास्ते से कंपनी के अंदर जाएंगे। कंपनी के अंदर जाने के बाद वह पहले एक-एक कर आदमियों को ठिकाने लगाएंगे और उसके बाद उस बोस को पकड़ लेंगे। उनके साथ उनके ही 40 स्पेशल ट्रेन कमांडोज और होंगे जो उनकी सहायता करेंगे।
कुछ ही देर में चोपर कंपनी की छत के ऊपर पहुंच चुका था।
सभी रस्सी के माध्यम से एक-एक कर नीचे उतरे।
सीढ़ियों के रास्ते से उतरते हुए वो सीधे ऊपर के बेसमेंट में आए जहां कोई नहीं था। ना कोई पहरेदार, ना कोई सिक्योरिटी कैमरा, ना ही कुछ और।
निधि और रोजर्स बाकी कमांडर्स के साथ बेसमेंट से भी नीचे उतरे पर वह जगह भी खाली थी।
इस तरह आसपास की जगह को खाली देख दोनों को कुछ गड़बड़ होने का अंदेशा लग रहा था, पर गड़बड़ क्या थी इसका पता लगा पाना मुश्किल था।
निधि ने चीजों को गौर से देखा और फिर अचानक बोली "उन लोगों को पहले से पता था कि हम यहां आने वाले हैं"
" क्या पर कैसे" रोजर्स निधि की इस बात पर हैरान हुआ।
लेकिन रोजर्स की जिज्ञासा एक भारी-भरकम आवाज में निधि क्या बताने से पहले ही तोड़ दी थी। "तुमने सही समझा"
दोनों ने मुड़ कर पीछे देखा और बाकी कमांडोज भी उस तरफ पलटे।
उनके सामने एक लोहे का रोबोट खड़ा था। लेटेस्ट हथियारों से लैस, काले पदार्थ की अद्भुत शक्ति, वह खूंखार और खतरनाक लग रहा था "क्योंकि मैं चाहता था कि तुम लोग यहां आओ और फिर सीधे परलोक सिधार जाओ, पिछली बार तो बच गए पर इस बार नहीं बचोगे"
"यह क्या बड़ बड़ कर रहा है, पिछली बार कहां बचे थे" रोजर्स उसकी बात सुनते ही बोला, दरअसल वह उसकी बात का मजाक उड़ा रहा था "निधि तो बचारी मरती मरती बची थी"उसने अपनी बात पूरी की।
"हा हा हा, कहते हैं कि जब गीदड़ की मौत आती है तो वह आग तरफ भागता है" कंपनी का बॉस उसे इतनी हिंदी नहीं आती थी इस वजह से उसने गलत मुहावरे का प्रयोग कर दोनों को डराने की कोशिश की।
"आग नहीं जंगल, जंगल!! वह जंगल की तरफ भागता है जब उसकी मौत आती है" रोजर्स ने फिर से उसकी बात को टोका
"और जब तुम जैसे लोगों की मौत आती है तो वह मेरे पास आते हैं" कंपनी के बॉस ने अपनी बात जारी रखी।"मुझे पता था तुम लोग पता लगा लोगे की ट्रेन वाले एक्सीडेंट के पीछे घूम फिर कर मेरा ही हाथ है, भले ही साथ में कुछ और लोग हो पर वह अपने मकसद के पीछे मेरा ही मकसद पूरा कर रहे थे। मेरी कंपनी नए नए गैजेट्स और तकनीक बनाती है पर इन तकनीकों का फायदा ही क्या जब यह काम ही ना आए। यह खतरनाक तकनीकें किसी युद्ध में ही काम आने वाली है, पर पिछले 70 सालों से युद्ध जैसे हालात पैदा होना तो दूर की बात, उसकी संभावना भी नहीं पैदा हुई। मुझे अपने तकनीकों की अहमियत इस दूनिया को समझाने के लिए अपना यह प्लेन बनाना पड़ा। सतीश विजयवर्गीय मेरे इस काम में मेरे लिए मुसीबत बन चुका था। मैंने ट्रेन को कुछ इस तरह से दुर्घटनाग्रस्त करवाया जिससे लगे कि यह एक तकनीकी खराबी थी और उसमें सतीश विजयवर्गीय की मौत हो गई। पूरी योजना बिल्कुल सही थी, काम भी उसी हिसाब से हुआ पर अंत में एक गड़बड़ी हो गई। एक नहीं दो..पहली गड़बड़ हमने जिस आदमी को काम के लिए भेजा था उसने अपना दिमाग कुछ ज्यादा ही इस्तेमाल कर लिया, मामला बिगड़ने के बाद मैंने इस हादसे से अपने हाथ पीछे खींच लिए और चीजों को वैसे ही होने दिया जैसे हो रही थी। इंटेलिजेंट एजेंसियों को कुछ समझ नहीं आ रहा था इस हादसे का कारण क्या है पर तुम लोगों की वजह से और खासकर निधि, इसकी वजह से तुम लोगों को मुझ तक पहुंचने की कड़ी मिल गई। एक बार कड़ी मिलने के बाद पीछे का सारा काम आसान होता है यह बात मैं भी जानता हूं इसलिए मैंने तुम लोगों को अपने रास्ते से हटाने की कोशिश की जिससे भी तुम लोग बच कर आ गए। अब अगर तुम लोग जिंदा रहे तो ना तो इस दुनिया में एक और युद्ध होगा और ना ही मेरी इस तकनीक की अहमियत लोगों को समझ में आएगी। इसलिए तुम लोगों को खत्म करना तो जरूरी है पर तुम लोगों की मौत की वजह दुनिया को पता नहीं लगेगी। ठीक आधे घंटे में यह पूरी बिल्डिंग बम से उड़ जाएगी, लोगों को लगेगा कि तुम लोग धमाके में मारे गए हो, जो सबुत लोगों ने मेरे खिलाफ इकट्ठे किए थे इतने काबिल नहीं है कि मुझे दोषी करार करवा सकें। तुम लोग तो सरकार को यह भी विश्वास नहीं दिला सकते इस हादसे में मेरा थोड़ा सा भी रोल है।तुम्हारी पूरी स्पेस एकेडमी को मैं अपने साईबर अटैक में उलझा दूंगा। लोग धीरे-धीरे भूल जाएंगे कि तुम लोग कौन थे और यहां क्या करने आए थे।"
बोस को बातें कर देख निधि समझ गई थी कि यहां जरूर कुछ बड़ी गड़बड़ होने वाली है, उसने आंखों ही आंखों में रोजर्स को इशारा किया और पीछे हटने को बोला। रोजर्स ने ठीक वैसा ही किया वह थोड़ा सा पीछे हट गया।
इधर बॉस ने अपने दोनों हाथ को जमीन पर मारा जिससे उसकी मशीन से बिजली निकली और वह पूरे फर्श पर फैल गई। रोजर्स और निधि दोनों के पैरों में पहने जूते बिजली के संपर्क से अभेद्य थे पर अब उनका कोई भी दूसरा कदम उनकी जान ले सकता था क्योंकि बाकी का शरीर ऐसा नहीं था।
तीनों बिजली के समंदर में खड़े थे।
निधि ने हल्के हल्के कदम बढ़ाते हुए रोजर्स को बोला"आसपास की चीजों को छूना मत वरना एक ही झटके मैं मर जाओगे"
वह धीमे धीमे कदमों के साथ बोस के सामने आने की कोशिश कर रही थी। बॉस के सामने आते ही उसने अपना सबसे पुराना रिवाल्वर निकाला और उससे फायर किया पर इन फायर का उस मशीनी शरीर पर बिल्कुल असर नहीं हुआ।
बॉस ने जोर का ठहाका मारा। "हा हा हा, और लोग तुम्हें नंबर वन एजेंट कहते हैं, तुम तो यह भी नहीं जानती कि एक लोहे की मशीन का तुम इस रिवाल्वर से कुछ नहीं बिगाड़ सकती"
निधि भी मुस्कुरा दी और खुद से ही बोली
"शुक्रिया बताने के लिए कि तुम्हारी यही मशीन लोहे की है" इसके बाद उसने मशीन के पैरों की ओर देखा जो प्लास्टिक के बने हुए थे और वह समझ गई कि अब उसे आगे क्या करना है।
अपने शानदार एथलीट्स कला का प्रदर्शन करते हुए उसने एक बैक फ्लिप मारा और सीढ़ियों पर जा चढ़ी। इस दौरान उसे इस बात का खास ध्यान रखना था कि वह आसपास की किसी भी चीज को ना छूऐ।
सीढ़ियों पर चढ़ने के बाद वह ऊपर गई जहां से उसे नीचे का नजारा साफ दिख रहा था। सीढ़ियां फर्श और ऊपर के फ्लोर और सभी पर लोहे की दिवारे ( इंगलेरन )।
रोजर्स भी सावधानी से दाएं से बाएं और जा रहा था। बॉस अभी भी कुछ बड़बड़ा रहा था। " इस दुनिया को मैं जीत कर रहूंगा"
"यह दुनिया मेरी है"
कुछ ऐसे ही शब्द वह लगातार बोलते जा रहा था।
इधर निधि ऊपर जाने के बाद सीधे दरवाजे से एक लंबे हॉल में घुस गई। इस लंबे हॉल में चार आदमी पहरा दे रहे हैं जिसने निधि को देखते ही अपनी भुजाएं तान ली।
सभी के सभी आदमी निधि की तरफ लड़ने के लिए दोडें और निधि भी उनकी ओर।
जैसे ही आदमी पास आए निधि ने अपनी रफ्तार थोड़ी सी बढ़ाई और पास की दीवार के ऊपर से कदमों को लेते हुए उन चारों आदमियों के पीछे जा धमकी।
इसके बाद उसने पहले दो आदमियों के टांगों पर वार करते हुए नीचे गिराया और फिर दूसरे दोनों आदमियों के मुंह पर एक एक मुका दे मारा।
कुछ देर और लड़ने के बाद उसने चारों आदमियों को चित कर दिया और फिर वापस आगे की ओर बढ़ने लगी।
होल के अंदर से होते हुए उसका लक्ष्य मैन स्विच के पास जाना था जहां से उसे करंट को कुछ देर के लिए बंद करना था पर इस तरह से कि वह 5 या 10 मिनट बाद अपने आप से शुरू हो जाए। इसके पीछे उसकी वजह क्या थी यह तो वही जानती थी।
लंबे होल को पार करने के बाद वह स्विच से कुछ ही दूरी पर थी कि उसे 2 आदमी और मिल गऐ। दोनों आदमी हथियारों से लैस थे लेकिन उनकी नजर सामने की ओर थी।
निधि ने अपने कदमों की रफ्तार धीमी की और वह धीमे कदमों से उन दोनों आदमियों के पास एक-एक कर गई और पीछे से उन पर हमला बोल उन्हें भी गहरी नींद सुला दिया।
स्विच अभी भी दूर था निधि ने अपने पॉकेट से रिवाल्वर निकाला। पुराने जमाने का रिवाल्वर होने के कारण उसमें एक टाइम में सिर्फ 6 ही गोली होती थी जिसमें से एक गोली वह खर्च कर चुकी है और अब उसने पांच ही गोलियां बची थी।
वैसे तो उसके पास और भी गैजेट्स थे पर कोई भी दूसरा गैजेट्स दूर से हमला करने के लिए काम नहीं आने वाला था। उसकी शुरू से ही आदत रही है कि वह हमेशा अपने साथ सिर्फ यही रिवाल्वर लेकर चलती है चाहे खतरा कितना भी बड़ा क्यों ना हो। इस रिवाल्वर ने उसे कभी धोखा नहीं दिया था।
इधर रोजर्स अब उस बोस का ध्यान बटकाने में बिजी था। बाकी के कमांडर दूसरे फ्लोर से और आदमीयों का काम तमाम कर रहे थे।
निधि स्विच के पास पहुंच चुकी थी। स्विच के पास पहुंचते ही उसने अपने सूट के एक दाएं हिस्से पर बंधा गैजट निकाला और उसे उस मीटर पर चिपका दिया। मीटर पर चिपकाते ही पूरे बिल्डिंग की लाइट बंद हो गई। गैजेट्स खास तरह का था और लाइट को बंद करने के लिए ही बनाया गया था। उसमें टाइमर भी सेट होता था जिस टाइमर के बाद वह अपने आप लाइट को ऑन कर देता था।
निधि ने उस पर 10 मिनट का टाइम सेट किया और वहां से वापस उस जगह की ओर जाने लगी हो जहां बॉस और रोजर्स थे।
ऊपर वाले हाल और गलियारे से गुजरते हुए वह जैसे ही उस जगह पर पहुंची बोस ने उसे देख लिया। बॉस नीचे था तो वह ऊपर। ऊपर एक रास्ता था जो नीचे के छोटे-छोटे लोहे के पिलर्स की मदद से दूसरी ओर जाता था। निधि को इसी रास्ते से दुसरी ओर जाना था।
इस दौरान उसे पूरी सावधानी बरतनी थी क्योंकि वह यह बात जानती थी कि हर एक लोहे की चीज में पता नहीं कितने वोट का करंट दौड़ रहा है। बॉस को भी इस बात का पता था।
अपनी अद्भुत क्षमता का परिचय देते हुए उसने लोहे के मशीनी शरिर से दो खतरनाक लेड की बनी हुई तलवार निकाली।
यह तलवारें लैड की जरूर बनी हुई थी पर अब उसमें उस काले पदार्थ की शक्ति भी शामिल थी जिसने इसे हजार गुना मजबूत बना दिया था। यह तलवार इतनी मजबूत थी की हीरे को भी मक्कखन की तरह काट सकती थी।
निधि ने दौड़ते हुए कदम उस रास्ते की ओर बढ़ाएं जो किसी छोटे लोहे के ब्रिज जैसा ही प्रतीत हो रहा था।
इधर बॉस भी उस ब्रिज जैसे रास्ते के नीचे लगे लोहे के डंडों की ओर बढ़ा ताकि उन्हें काटकर निधि को नीचे गिरा सके।
निधि ने उस रास्ते पर आगे बढ़ना शुरू किया तो उधर बोस ने नीचे के डंडा को काटना शुरू कर दिया। इस दौरान रोजर्स मौका पाकर वहां से दूसरी और जा चुका था जहां उन्हें अपने प्लेन को अंजाम देना था पर उसके लिए जरूरी था कि निधि सुरक्षित वहां तक पहुंचे।
ब्रिज को पार करते हुए निधि ब्रिज के टूटने के कारण थोड़ा सा लड़खड़ाई। वह ब्रिज नीचे की ओर गिरने लगा साथ ही निधि भी उस ब्रिज के साथ ही नीचे की ओर हो गई पर अभी ब्रिज पूरी तरह से नीचे नहीं गिरा था। नीचे की डंडों के टूटने की वजह से वह सिर्फ झुक रहा था।
लगभग 20 डिग्री का एंगल बनाए हुए ब्रिज पर निधि के पास एक और मौका था। खुद के कदमों को संभालते हुए निधि अब वापस आगे की ओर हो गई।
दौड़ते हुए और अपने कदमों पर जोर देकर एक लंबी छलांग लगाकर उसने जैसे तैसे कर ब्रिज को पार किया।
हर एक पल उसकी आंखों में ब्रिज के आसपास लगे स्पोर्ट्स लाइनें ही देख रही थी जिसमे खतरनाक करंट दौड़ रहा था नीचे से बॉस ब्रिज को काटता जा रहा था तो ऊपर से निधि काफी मुश्किल से बचते हुए उस ब्रिज को पार कर रही थी। अंत में निधि की जीत हुई और वह दूसरी और पहुंच चुकी थी। अब बॉस इस जगह पर अकेला बचा था जबकि निधि और रोजर्स किसी दूसरी जगह की ओर जा रहे थे।
बॉस भी अब मजबूर था दूसरी ओर जाने के लिए। वह भी तुरंत मुड़ा और तेजी से सामने वाली दीवार को तोड़ता हुआ दूसरे जगह जा पहुंचा।
उसका सूट इतना बड़ा था कि वह दरवाजे से नहीं जा सकता था इसलिए उसने दीवार को तोड़ना ही अपने लिए सही समझा। वैसे भी यह उसकी बिल्डिंग है वह इसे जैसे चाहे वैसे तोड़े मरोड़े और कुछ समय बाद तो इस बिल्डिंग में धमाका होने वाला ही है।
इधर रोजर्स और निधि एक जगह पर खड़े थे।
"क्या प्लान है तुम्हारे पास" रोजर्स ने निधि से पूछा
" यह बहुत खतरनाक हो चुका है, इसे एक प्लान से नहीं हराया जा सकता इसलिए मैंने 3-4 प्लान एक साथ तैयार किए हैं। अगर यह एक प्लान से बचा तो दूसरे में फंस जाएगा। सबसे पहले हमें इसी के खास हथियार चाहिए। इसका सूट बहुत खतरनाक है जिस पर हमारे आम हथियारों का कोई फर्क नहीं पड़ रहा। तुमने कहा था ना कि नीचे इसकी एक लैब है जहां पर यह खतरनाक हथियार और मशीनें बनाता है चलो हमें भी वहां चलना है और वहां से अपने लिए कुछ लेना है।"
सच में, आमतौर पर सुना है कि प्लान A के बाद प्लान B भी होता है पर निधि यहां इस खतरनाक हालात में भी इस पर गौर कर रही थी। एक साथ कई सारे प्लान का यह आइडिया तो शायद ही किसी के दिमाग में आए। यही वजह है कि मात्र 21 साल की उम्र में निधि स्पेस एकेडमी की नंबर वन एजेंट बन गई वरना यहां तक पहुंचने में लोगों को साथ 60 साल लग जाते हैं। वह अब तक अपने 2 प्लान लगा चुकी थी पहला लाइट के स्विच पर लगा पड़ा था तो दूसरा प्लान अब उसके हत्यारों से उस को हराने का था। कुछ और प्लेन भी निधी के पास थे जो अभी सामने नहीं आए।
जल्दी दोनों नीचे वाली लैब में आ गए। स्पेस एकेडमी के कमांडो ने पहले ही यह लैब आसपास के गार्ड से सूरक्षित कर ली थी।
लैब में समान आसपास बिखरा पड़ा था। उन सामानों के बीच में से गुजरते हुए कुछ एकेडमी के कमांडर चीजों को एक-एक कर देख रहे थे।
वहां पहुंचते ही निधि ने तुरंत एक आदमी को बुलाया और उसे यह बिल्डिंग खाली करने का आदेश दिया। कारण साफ था यह बिल्डिंग जल्दी ही एक बड़े धमाके में उड़ने वाली है।
सभी को बाहर भेजने के बाद इन्हें वहां पड़े अविष्कारों में से एक लंबी तलवार जैसी दिखने वाली बंदूक उठाई जिसका एक सिरा रोशनी से चमक रहा था।
यह एक लैजर फायर गन थी जिससे 0.01 सेंटीमीटर परमाणु बम जितनी उर्जा वाली बुलेट को फायर किया जा सकता था और उसका असर भी कुछ मीटर तक ही होता था।
निधि और रोजर्स दोनों ने एक-एक बंदूक उठाई और वापिस ऊपर की ओर चल दिए।
अब दोनों को कंपनी के बॉस से आमने सामने ही लडना था इधर दूसरी और बोस भी दीवारों और छतों को तोड़ता हुआ नीचे वाले फ्लोर में आ रहा था। ऐसी ही एक दीवार को तोड़ते हुए उसका सामना निधि और रोजर्स से हो गया।
दोनों को देखते ही बोस का गुस्सा सातवें आसमान पर था। ऊपर से उनके हाथ में उसके ही अविष्कार थे। वह चिल्लाया-
"तुम लोग मुझे मेरे ही हथियारों से मारना चाहते हो ... पागल हो तुम लोग...इस सुट पर किसी भी हत्यार का कोई असर नहीं पड़ने वाला। इस काले पर्दाथ की शक्ति ने इसे हीरे से भी ज्यादा मजबूत कर दिया है। "
बॉस अभी अपनी बातें बोल ही रहा था कि रोजर्स ने एक फायर उस पर कर दिया जिससे वह उछलता हुआ सीधे बिल्डिंग से बाहर जा गिरा।
रोजर्स की इस हरकत को देख निधी ने उसे घुरा तो रोजर्स भी बोल पड़ा-
"क्या!! कुछ ज्यादा ही बकवास कर रहा था वो"
निधि ने गुस्से में जवाब दिया-"मेंने यहा उसे फंसाने का प्लान बनाया था... और तुम... तुमने उसे बाहर धकेल दिया"
"ओह सोरी..... अब क्या"
"कुछ नहीं... नीचे जाकर पकड़ते हैं उसे"
________________
विनम्र की फ्लाइट आने वाली थी और वह एयरपोर्ट पर खड़ा बस उसी का इंतजार कर रहा था। एक जासूस होने के कारण उसके लिए यह सब काम बहुत आसान था। वह पुलिस के सामने से भी चोरी कर आराम से निकल सकता था। इतना कुशल था अपने काम में।
स्पेस एकेडमी से सजा मिलने के बाद उसने हर तरह की काम करना शुरू कर दिया। क्रिमिनलों, आतंकवादियों सभी के लिए
वो काम करता था पर सिर्फ ऐसे काम इसमें उसे किसी का खून ना करना हो।
इस काम के बदले उससे जो पैसे मिलते थे वह उसे इकट्ठा कर रहा था ताकि आने वाले समय में वह उसका उपयोग कर सकें। इसके पीछे की क्या रणनीति है यह तो वही जानता है पर फिलहाल उसका मकसद ज्यादा से ज्यादा पैसा इकट्ठा करना ही था।
इधर बिल्डिंग में हो रही लड़ाई की खबर सबको लग चुकी थी।
स्पेस अकैडमी ने भले ही इस मिशन को खुफिया रखा हो पर जिस तरह का खतरनाक सीन यहां हो रहा था उसके बाद तो शायद ही यह घटना किसी की नजर से बचती।
अब तो लड़ाई भी सड़कों के बीच हो रही थी जिसमें मशीन वाला बॉस खतरनाक हथियार और बिजली वाले हमले इधर-उधर कर रहा था।
यह खबर टीवी पर भी आ रही थी और वही विनम्र का ध्यान उस टीवी पर गया जहां वह निधि को सड़क पर दौड़ता हुआ देख रहा था।
"अरे यह तो निधि है…."
विनम्र अपना समान वहीं पर छोड़ता और एयरपोर्ट से बाहर निकल उस जगह की ओर जाने लगा जहां लड़ाई हो रही थी।
*****
निधि बोस के हमलों से बचते हुए उसी के खतरनाक हथियारों से उस पर हमला कर रही थी पर बॉस के सूट पर उसका कोई असर नहीं पड़ रहा था।
रोजर्स सड़क के एक किनारे पर घायल पड़ा था। वह बॉस के एक हमले की चपेट में आ गया था।
बॉस और निधि दोनों बिल्डिंग के पास कुछ ही दूरी पर लड़ रहे थे। बॉस ने पहले से ही बिल्डिंग में बम लगा रखे थे जिनमें एक के बाद एक धमाके हो रहे थे।
बम के फटते ही पूरी की पूरी 35 मंजिला बिल्डिंग ताश के पत्तों की तरह ढह रही थी। उसका मलबा सड़क पर गिरता हुआ चारों और फैल रहा था। निधि और बॉस भी पास ही थी तो उन पर भी मलबा गिरने का खतरा था।
मलबे को घिरते देख दोनों तुरंत सामने की ओर मुड़े। रोजर्स भी पास ही था पर वह मलवे वाले खतरे से कोसों दूर था दौड़ते हुए निधि की नजरें दोनों ही तरफ थी, पीछे से आ रहे हैं मलबे पर भी और दाएं और कुछ दूरी पर दौड़ रहे बोस पर भी।
मौके का फायदा उठाते हुए निधि ने एक हमला बॉस पर कर दिया जिससे बॉस वहीं पर गिर गया और ऊपर से आ रहे मलबे के नीचे दब गया।
भागते हुए निधि किसी तरह से दाएं बाएं घूमते हुए अपनी जान पीछे वाले मलबे से बचा रही थी। मलबे का एक हमला भी उसे स्वर्ग की सैर करवा सकता था।
कुछ आगे जाने के बाद उसने खुद को सुरक्षित महसूस किया और फिर पीछे मुड़कर देखा।
बॉस मलबे के नीचे दब चुका था पर यह उसका अंत नहीं था। एक खतरनाक बम धमाके के साथ वह मलबे को ऊपर उठा और उठता हुआ बाहर आ गया।
"मैंने कहा ना मैं अब अनश्वर हूं, मुझे खत्म नहीं किया जा सकता"
निधि फिर से उसे सामने देख तंग आ गई। "आखिर इसका करे तो करे क्या? कैसे खत्म करें इसे? इसकी यह मशीन जब तक इसके साथ है तब तक इसे खत्म करना मुश्किल है और अब ऊपर से मुझमें इतनी हिम्मत भी नहीं मैं वापस इससे लडुं"
निधि घुटने टेक कुछ देर के लिए बैठ गई। स्पेस एकेडमी के कमांडो इधर बॉस पर हमला कर उसका ध्यान दूसरी और भटका रहे थे।
नीचे बेठी निधि को इस दौरान अपने वही दिन याद आते हैं जो उसने कभी बचपन में महसूस किए थे। अपने उस बचपन की एक याद में वह वैसे ही इस पार्क के अंदर बैठी थी जहां उसके सामने उसकी मां और बाप की लाश पड़ी थी। कुछ देर पहले तीनों इसी पार्क में मस्ती कर रहे थे कि किसी ने उसके मां-बाप के सर पर गोली मार दी। निधि उस वक्त मात्र 10 साल की थी मजबूरन कुछ कर भी नहीं सकती थी सिवाय इसी तरह बैठने के।
उस दिन की तरह आज भी वह खुद को लाचार और बेसहारा महसूस कर रही थी। उसके पास करने को तो बहुत कुछ था पर वह कर नहीं पा रही थी। दिमाग साथ दे रहा था, पर दिल नहीं। शरीर भी ठंडा पड़ा था। उस दिन के बाद से निधि ने कसम खाई थी कि वह जिंदगी में कभी भी ना तो मरने से डरेगी और ना ही हारने से। अपने आपको एक लक्ष्य दिया। समाज में पल रहे मुजरिमों से मिलने का फैसला किया , उन्हें खत्म करने की शपथ ली। एक वो दिन है और एक आज का दिन, आज वह स्पेस एकेडमी की नंबर वन एजेंट है। किस्मत सब का भविष्य, वर्तमान और भूतकाल तय करती है। लेकिन सही समय पर उठाया गया हमारा एक कदम हमारी पुरी किस्मत बदल देता है।
बॉस खतरनाक से भी खतरनाक होता जा रहा था। उसकी मशीन में लगी बंदूकों से निकल रहे फायर स्पेस एकेडमी के कमांडो को घायल कर रहे थे।
निधि आसपास के गिरे मलबे से बचते हुए और उसके ऊपर से कुदत्ते हुए लेजर मशीनगन से फायर करते हुए उसके पास जाने लगी।
जैसे ही वह पास आई बोस के पास आई उसने अपने दाएं हाथ को उस पर हमला किया लेकिन निधि तूरंत नीचे झुककर बच गई।
बॉस ने अगले हमले के लिए अपने पैर का उपयोग किया और निधि को नीचे गिरा दिया। इससे पहले वह निधी को दूसरा हमला करने का मौका देता उसने निधि को और पकड़ा हवा में उछालते हुए दुर फैंक डाला।
निधि सीधे मलबे पर जा गिरी। वह इतनी जोर से गिरी थी उसकी 2-4 अंदर की हड्डिया तो टुट ही गई होगी।
निधि को फेंकते ही बॉस वापिस एकेडमी के दूसरे एजेंट्स की तरफ हो गया।
निधि ने कुछ हिम्मत जुटाई और वापस खड़ी हो अपना पुराना रिवालर निकाल लिया। उसने उसका एक फायर सीधे उस मशीनी बॉस के सर पर किया। बोस निधि की तरफ पलटा और उसने अपने दोनों हाथों वाली गनो को उसकी ओर कर अपने कदम आगे की ओर बढ़ाएं।
निधि को मौत सामने से अपनी ओर आते हुए दिख रही थी। बॉस भी मशीन के अंदर शैतानी हंसी लिए हुए था। आज वह अपने एक छोटे से मकसद में कामयाब होने जा रहा था जिसके बाद उसे पूरे विश्व में अपना डंका बजाना है।
उसने अपनी बंदूक से एक-एक कर गोलियां चलाना शुरू कि जिसकी दिशा निधि की तरफ ही थी।ज्ञनिकल रही गोलियां काफी तेजी से अपना सफर निधि की और तय कर रही थी।
एक साथ बॉस ने कई सौ गोलियां निधि पर बरसा दी थी।
मात्र चंद पलों का फासला था निधि और मौत के बीच, पर, अचानक एक रुकावट सामने आ गई।
कोई था जो उनके बीच खड़ा था।
निधि की आंखें तो बंद थी। वह तो बस मौत को महसूस करना चाह रही थी पर शायद अभी उसके भाग्य में मौत नहीं लिखी।
गोलियों की आवाज अभी भी चल रही थी धाएं धाएं धाएं।
पर एक भी गोली निधी को नहीं लग रही थी।
निधि ने धीरे-धीरे आंखें खोली पर शायद यही उसकी जिंदगी का सबसे भयानक दृश्य था।
सामने के व्यापक दृश्य को देखते ही उसके मुंह से यकायक निकला
"नहीईईईईईईईघीईईई...!!"
वह इतनी जोर से चिल्लाई कि पूरा आसमा दहल गया। धरती के अंदर तक यह आवाज गूंज गई।
क्योंकि उसके और गोलियों के बीच एक शख्स खड़ा था जो रोजर्स था ।
निधि के लिए रोजर्स ने सारी गोलियां अपने सीने पर ले ली।
वैसे तो उसमें बुलेट प्रूफ जैकेट पहन रखी थी पर गोलियों की संख्या इतनी ज्यादा थी कि वह उसकी बुलेट प्रूफ जैकेट को भी भेद कर उसके सीने में चली गई।
निधि की आंखों के सामने ही रोजर्स बेधड़क जमीन पर गिर गया।
उसकी मौत इतनी दर्दनाक थी कि वह अंत में अपने आखिरी शब्द भी नहीं बोल पाया। रोजर्स की मौत के बाद सब थम चुका था।
दौड़ते हुए निधि ने उसके गिरते शरीर को सहारा देकर उसे अपने घुटनों पर ले लिया।
इधर मशीनी बॉस अकैडमी के कुछ दूसरे एजेंट के साथ फिर से लड़ने में बिजी हो गया।
निधि को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वह रोजर्स को क्या बोले क्या नहीं, वह तो अब जिंदा भी नहीं था।
आंसुओं की बाढ उसकी आंखों में साफ देखी जा सकती थी।
" रोजर्स !! यह तुमने क्या किया और क्यों, क्या जरूरत थी तुम्हें हम दोनों के बीच में आने की। मुझे मरने से डर नहीं लगता ना ही मौत की फ़िक्र थी.... पर तुम…. तुम यह क्या कर बैठे"
कहते हैं कि जिंदगी अच्छी तो होती है पर उसको शानदार नहीं कहा जा सकता। यही अब निधि के साथ हो रहा था।
अजीब कशमकश की भवर धाराओं में फंसी निधि के पास अब सोचने और समझने के लिए विचार नहीं थे। अब तो उसे बस दो ही चीजें दिख रही थी एक रोजर्स ओर एक सामने का मशीनी बॉस।
उस मशीनी बॉस ने आसपास के सभी स्पेस एकेडमी के एजेंट को निपटा कर अपनी बंदूक वापिस निधि की तरफ तान ली थी। वह अब अपने आगे के कार्य के लिए तैयार था जिसमें उसे निधि को खत्म करना था।
वह एक बार फिर अपने बंदूक की गोली चलाने वाला था लेकिन अचानक हवा में उड़ती हुई एक पतली रस्सी आई और उसके दाएं हाथ से लिपट कर उसके हाथ को पीछे की तरफ कर दिया।
वह मशीनी बॉस कुछ नहीं समझ पाया कि उसके साथ क्या हो रहा है।
उसने अपना दूसरा हाथ उस रस्सी को हटाने के लिए बढ़ाया पर हवा में उड़ती हुई दुसरी रस्सी ने उसके दूसरे हाथ को भी पकड़ कर पीछे की ओर कर दिया ।
अब उसके दोनों हाथ जकड़े जा चुके थे।
हालात देखकर पता चला कि पीछे से विनम्र आ चुका था।
जिसके शानदार गैजेट से निकली रसीया लोहे से भी ज्यादा मजबूत बॉस को घेर कर खड़ी थी।
बॉस रस्सी की गिरफ्त में था। मौके की नजाकत को देखते हुए भावुक निधि भी दौड़ते हुए उस पर कूद पड़ी।
पहले उसने बॉस की गर्दन को पकड़ कर पीछे की ओर खींचा और फिर उसके पैर पर लात मार उसे नीचे गिरा दिया।
इसके बाद उसी रस्सी को जोर से खींचते हुए सबसे पहले उसने उस काले पत्थर को उसके सूट से बाहर निकाल जिसके बाद उसके सूट ने काम करना बंद कर दिया।
मात्र कुछ पलों में ही निधि ने बॉस को असहाय और लाचार बना दिया।
बॉस अब अपने भारी-भरकम सूट के साथ टूटी हुए बिल्डिंग के टुकड़ों पर गिर पड़ा।
थोड़ी ही देर में स्पेस एकेडमी की एक और स्पेशल टीम वहां आ गई और उसने इलाके की घेराबंदी कर पूरे इलाके को आम लोगों के लिए नजरबंद कर दिया।
इलाके को बंद करने के लिए उन्होंने एक ऐसी तकनीक का उपयोग किया जिसमें आसपास के लोग वही देख पा रहे थे जो वह दिखाना चाहते थे।
बॉस को पकड़कर गिरफ्तार कर लिया गया। निधि भी लाचार और बेबस जमीन पर पड़ी थी और विनम्र जो अभी अभी आया था वह निधि के पास खड़ा था।
रोजर्स अब दुनिया में नहीं रहा। इसका अफसोस सभी को था पर दुख तो इस बात का था कि जब यह बात विलियमसन को पता लगेगी तब क्या होगा?
निधि ने जो काला पत्थर निकाला था वह स्पेस एकेडमी के एजेंट के हाथों दे दिया। जहां से उसे एस एकेडमी की स्पेशल वेन में लजाया गया। एकेडमी की एक टीम चाय वाले आदमी को भी पकड़ चुकी थी।
सुबह-सुबह का वक्त।
रोजर्स के शरीर को मिट्टी में दफनाया जा रहा था। आसपास एकेडमी के जाने-माने लोग खड़े थे। विलियमसन भी वहीं था। दुख में डूबा अपने पुराने दिनों को याद कर रहा था। रोजर्स को डांटते हुए, उसे फटकारते हुए।
निधि भी वहीं थी। वह रोजर्स के साथ बस अपनी कुछ बातों को याद कर रहीं थीं।
रोजर्स की मौत सच में एक दर्दनाक हादसा थी। जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता लेकिन कुर्बानी तो देनी पड़ती हैं।
हर एक चीज एक नई शुरुआत का प्रतीक होती है। रोजर्स की मौत और कहानी में घटा घटनाक्रम भी कुछ ऐसा ही थें।
जो अगली कहानी की नींव रखेंगे।
THE END ......?
