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Saturday, June 20, 2020

NIDHI VOL-2 THE SECRET AGENT-17 LAST PART





निधि और रोजर्स अपनी पूरी टीम के साथ चॉपर में बैठ कंपनी की ओर बढ़ रहे थे। उनका यह मिशन पूरी तरह से खुफिया था। दोनों ने मिलकर प्लेन किया था कि वह छत के रास्ते से कंपनी के अंदर जाएंगे। ‌कंपनी के अंदर जाने के बाद वह पहले एक-एक कर आदमियों को ठिकाने लगाएंगे और उसके बाद उस बोस को पकड़ लेंगे। उनके साथ उनके ही 40 स्पेशल ट्रेन कमांडोज और होंगे जो उनकी सहायता करेंगे।

कुछ ही देर में चोपर कंपनी की छत के ऊपर पहुंच चुका था।
सभी रस्सी के माध्यम से एक-एक कर नीचे उतरे।

सीढ़ियों के रास्ते से उतरते हुए वो सीधे ऊपर के बेसमेंट में आए जहां कोई नहीं था। ना कोई पहरेदार, ना कोई सिक्योरिटी कैमरा, ना ही कुछ और।

निधि और रोजर्स बाकी कमांडर्स के साथ बेसमेंट से भी नीचे उतरे पर वह जगह भी खाली थी।

इस तरह आसपास की जगह को खाली देख दोनों को कुछ गड़बड़ होने का अंदेशा लग रहा था, पर गड़बड़ क्या थी इसका पता लगा पाना मुश्किल था।

निधि ने चीजों को गौर से देखा और फिर अचानक बोली "उन लोगों को पहले से पता था कि हम यहां आने वाले हैं"

" क्या पर कैसे" रोजर्स निधि की इस बात पर हैरान हुआ।

लेकिन रोजर्स की जिज्ञासा एक भारी-भरकम आवाज में निधि क्या बताने से पहले ही तोड़ दी थी। "तुमने सही समझा"

दोनों ने मुड़ कर पीछे देखा और बाकी कमांडोज भी उस तरफ पलटे।

उनके सामने एक लोहे का रोबोट खड़ा था। लेटेस्ट हथियारों से लैस, काले पदार्थ की अद्भुत शक्ति, वह खूंखार और खतरनाक लग रहा था "क्योंकि मैं चाहता था कि तुम लोग यहां आओ और फिर सीधे परलोक सिधार जाओ, पिछली बार तो बच गए पर इस बार नहीं बचोगे"

"यह क्या बड़ बड़ कर रहा है, पिछली बार कहां बचे थे" रोजर्स उसकी बात सुनते ही बोला, दरअसल वह उसकी बात का मजाक उड़ा रहा था "निधि तो बचारी मरती मरती बची थी"उसने अपनी बात पूरी की।

"हा हा हा, कहते हैं कि जब गीदड़ की मौत आती है तो वह आग तरफ भागता है" कंपनी का बॉस उसे इतनी हिंदी नहीं आती थी इस वजह से उसने गलत मुहावरे का प्रयोग कर दोनों को डराने की कोशिश की। ‌

"आग नहीं जंगल, जंगल!! वह जंगल की तरफ भागता है जब उसकी मौत आती है" रोजर्स ने फिर से उसकी बात को टोका

"और जब तुम जैसे लोगों की मौत आती है तो वह मेरे पास आते हैं" कंपनी के बॉस ने अपनी बात जारी रखी।"मुझे पता था तुम लोग पता लगा लोगे की ट्रेन वाले एक्सीडेंट के पीछे घूम फिर कर मेरा ही हाथ है, भले ही साथ में कुछ और लोग हो पर वह अपने मकसद के पीछे मेरा ही मकसद पूरा कर रहे थे। मेरी कंपनी नए नए गैजेट्स और तकनीक बनाती है पर इन तकनीकों का फायदा ही क्या जब यह काम ही ना आए। यह खतरनाक तकनीकें किसी युद्ध में ही काम आने वाली है, पर पिछले 70 सालों से युद्ध जैसे हालात पैदा होना तो दूर की बात, उसकी संभावना भी नहीं पैदा हुई। मुझे अपने तकनीकों की अहमियत इस दूनिया को समझाने के लिए अपना यह प्लेन बनाना पड़ा। सतीश विजयवर्गीय मेरे इस काम में मेरे लिए मुसीबत बन चुका था।  मैंने ट्रेन को कुछ इस तरह से दुर्घटनाग्रस्त करवाया जिससे लगे कि यह एक तकनीकी खराबी थी और उसमें सतीश विजयवर्गीय की मौत हो गई। पूरी योजना बिल्कुल सही थी, काम भी उसी हिसाब से हुआ पर अंत में एक गड़बड़ी हो गई। एक नहीं दो..पहली गड़बड़ हमने जिस आदमी को काम के लिए भेजा था उसने अपना दिमाग कुछ ज्यादा ही इस्तेमाल कर लिया, मामला बिगड़ने के बाद मैंने इस हादसे से अपने हाथ पीछे खींच लिए और चीजों को वैसे ही होने दिया जैसे हो रही थी। इंटेलिजेंट एजेंसियों को कुछ समझ नहीं आ रहा था इस हादसे का कारण क्या है पर तुम लोगों की वजह से और खासकर निधि, इसकी वजह से तुम लोगों को मुझ तक पहुंचने की कड़ी मिल गई। एक बार कड़ी मिलने के बाद पीछे का सारा काम आसान होता है यह बात मैं भी जानता हूं इसलिए मैंने तुम लोगों को अपने रास्ते से हटाने की कोशिश की जिससे भी तुम लोग बच कर आ गए। अब अगर तुम लोग जिंदा रहे तो ना तो इस दुनिया में एक और युद्ध होगा और ना ही मेरी इस तकनीक की अहमियत लोगों को समझ में आएगी। इसलिए तुम लोगों को खत्म करना तो जरूरी है पर तुम लोगों की मौत की वजह दुनिया को पता नहीं लगेगी। ठीक आधे घंटे में यह पूरी बिल्डिंग बम से उड़ जाएगी, लोगों को लगेगा कि तुम लोग धमाके में मारे गए हो, जो सबुत लोगों ने मेरे खिलाफ इकट्ठे किए थे इतने काबिल नहीं है कि मुझे दोषी करार करवा सकें।  तुम लोग तो सरकार को यह भी विश्वास नहीं दिला सकते इस हादसे में मेरा थोड़ा सा भी रोल है।तुम्हारी पूरी स्पेस एकेडमी को मैं अपने साईबर अटैक में उलझा दूंगा। लोग धीरे-धीरे भूल जाएंगे कि तुम लोग कौन थे और यहां क्या करने आए थे‌।"

बोस को बातें कर देख निधि समझ गई थी कि यहां जरूर कुछ बड़ी गड़बड़ होने वाली है, उसने आंखों ही आंखों में रोजर्स को इशारा किया और पीछे हटने को बोला। रोजर्स ने ठीक वैसा ही किया वह थोड़ा सा पीछे हट गया।

इधर बॉस ने अपने दोनों हाथ को जमीन पर मारा जिससे उसकी मशीन से बिजली निकली और वह पूरे फर्श पर फैल गई। रोजर्स और निधि दोनों के पैरों में पहने जूते बिजली के संपर्क से अभेद्य थे पर अब उनका कोई भी दूसरा कदम उनकी जान ले सकता था क्योंकि बाकी का शरीर ऐसा नहीं था।

तीनों बिजली के समंदर में खड़े थे।

निधि ने हल्के हल्के कदम बढ़ाते हुए रोजर्स को बोला"आसपास की चीजों को छूना मत वरना एक ही झटके मैं मर जाओगे"

वह धीमे धीमे कदमों के साथ बोस के सामने आने की कोशिश कर रही थी। बॉस के सामने आते ही उसने अपना सबसे पुराना रिवाल्वर निकाला और उससे फायर किया पर इन फायर का उस मशीनी शरीर पर बिल्कुल असर नहीं हुआ।

बॉस ने जोर का ठहाका मारा। "हा हा हा, और लोग तुम्हें नंबर वन एजेंट कहते हैं, तुम तो यह भी नहीं जानती कि एक लोहे की मशीन का तुम इस रिवाल्वर से कुछ नहीं बिगाड़ सकती"

निधि भी मुस्कुरा दी और खुद से ही बोली
"शुक्रिया बताने के लिए कि तुम्हारी यही मशीन लोहे की है" इसके बाद उसने मशीन के पैरों की ओर देखा जो प्लास्टिक के बने हुए थे और वह समझ गई कि अब उसे आगे क्या करना है।

अपने शानदार एथलीट्स कला का प्रदर्शन करते हुए उसने एक बैक फ्लिप मारा और सीढ़ियों पर जा चढ़ी। इस दौरान उसे इस बात का खास ध्यान रखना था कि वह आसपास की किसी भी चीज को ना छूऐ।

सीढ़ियों पर चढ़ने के बाद वह ऊपर गई जहां से उसे नीचे का नजारा साफ दिख रहा था। सीढ़ियां फर्श और ऊपर के फ्लोर और सभी पर लोहे की दिवारे ( इंगलेरन )।

रोजर्स भी सावधानी से दाएं से बाएं और जा रहा था। बॉस अभी भी कुछ बड़बड़ा रहा था। " इस दुनिया को मैं जीत कर रहूंगा"
"यह दुनिया मेरी है"
कुछ ऐसे ही शब्द वह लगातार बोलते जा रहा था।

इधर निधि ऊपर जाने के बाद सीधे दरवाजे से एक लंबे हॉल में घुस गई। इस लंबे हॉल में चार आदमी पहरा दे रहे हैं जिसने निधि को देखते ही अपनी भुजाएं तान ली।
सभी के सभी आदमी निधि की तरफ लड़ने के लिए दोडें और निधि भी उनकी ओर।
जैसे ही आदमी पास आए निधि ने अपनी रफ्तार थोड़ी सी बढ़ाई और पास की दीवार के ऊपर से कदमों को लेते हुए उन चारों आदमियों के पीछे जा धमकी।
इसके बाद उसने पहले दो आदमियों के टांगों पर वार करते हुए नीचे गिराया और फिर दूसरे दोनों आदमियों के मुंह पर एक एक मुका दे मारा।
कुछ देर और लड़ने के बाद उसने चारों आदमियों को चित कर दिया और फिर वापस आगे की ओर बढ़ने लगी।

होल के अंदर से होते हुए उसका लक्ष्य मैन स्विच के पास जाना था जहां से उसे करंट को कुछ देर के लिए बंद करना था पर इस तरह से कि वह 5 या 10 मिनट बाद अपने आप से शुरू हो जाए। इसके पीछे उसकी वजह क्या थी यह तो वही जानती थी।
लंबे होल को पार करने के बाद वह स्विच से कुछ ही दूरी पर थी कि उसे 2 आदमी और मिल गऐ। दोनों आदमी हथियारों से लैस थे लेकिन उनकी नजर सामने की ओर थी।

निधि ने अपने कदमों की रफ्तार धीमी की और वह धीमे कदमों से उन दोनों आदमियों के पास एक-एक कर गई और पीछे से उन पर हमला बोल उन्हें भी गहरी नींद सुला दिया।

स्विच अभी भी दूर था निधि ने अपने पॉकेट से रिवाल्वर निकाला। पुराने जमाने का रिवाल्वर होने के कारण उसमें एक टाइम में सिर्फ 6 ही गोली होती थी जिसमें से एक गोली वह खर्च कर चुकी है और अब उसने पांच ही गोलियां बची थी।

वैसे तो उसके पास और भी गैजेट्स थे पर कोई भी दूसरा गैजेट्स दूर से हमला करने के लिए काम नहीं आने वाला था। उसकी शुरू से ही आदत रही है कि वह हमेशा अपने साथ सिर्फ यही रिवाल्वर लेकर चलती है चाहे खतरा कितना भी बड़ा क्यों ना हो। इस रिवाल्वर ने उसे कभी धोखा नहीं दिया था।

इधर रोजर्स अब उस बोस का ध्यान बटकाने में बिजी था। बाकी के कमांडर दूसरे फ्लोर से और आदमीयों का काम तमाम कर रहे थे।

निधि स्विच के पास पहुंच चुकी थी। स्विच के पास पहुंचते ही उसने अपने सूट के एक दाएं हिस्से पर बंधा गैजट निकाला और उसे उस मीटर पर चिपका दिया। मीटर पर चिपकाते ही पूरे बिल्डिंग की लाइट बंद हो गई। गैजेट्स खास तरह का था और लाइट को बंद करने के लिए ही बनाया गया था। उसमें टाइमर भी सेट होता था जिस टाइमर के बाद वह अपने आप लाइट को ऑन कर देता था।

निधि ने उस पर 10 मिनट का टाइम सेट किया और वहां से वापस उस जगह की ओर जाने लगी हो जहां बॉस और रोजर्स थे।

ऊपर वाले हाल और गलियारे से गुजरते हुए वह जैसे ही उस जगह पर पहुंची बोस ने उसे देख लिया। बॉस नीचे था तो वह ऊपर। ऊपर एक रास्ता था जो नीचे के छोटे-छोटे लोहे के पिलर्स की मदद से दूसरी ओर जाता था। निधि को इसी रास्ते से दुसरी ओर जाना था।

इस दौरान उसे पूरी सावधानी बरतनी थी क्योंकि वह यह बात जानती थी कि हर एक लोहे की चीज में पता नहीं कितने वोट का करंट दौड़ रहा है। बॉस को भी इस बात का पता था।

अपनी अद्भुत क्षमता का परिचय देते हुए उसने लोहे के मशीनी शरिर से दो खतरनाक लेड की बनी हुई तलवार निकाली।

यह तलवारें लैड की जरूर बनी हुई थी पर अब उसमें उस काले पदार्थ की शक्ति भी शामिल थी जिसने इसे हजार गुना मजबूत बना दिया था। यह तलवार इतनी मजबूत थी की हीरे को भी मक्कखन की तरह काट सकती थी।

निधि ने दौड़ते हुए कदम उस रास्ते की ओर बढ़ाएं जो किसी छोटे लोहे के ब्रिज जैसा ही प्रतीत हो रहा था।

इधर बॉस भी उस ब्रिज जैसे रास्ते के नीचे लगे लोहे के डंडों की ओर बढ़ा ताकि उन्हें काटकर निधि को नीचे गिरा सके।

निधि ने उस रास्ते पर आगे बढ़ना शुरू किया तो उधर बोस ने नीचे के डंडा को काटना शुरू कर दिया। इस दौरान रोजर्स मौका पाकर वहां से दूसरी और जा चुका था जहां उन्हें अपने प्लेन को अंजाम देना था पर उसके लिए जरूरी था कि निधि सुरक्षित वहां तक पहुंचे।

ब्रिज को पार करते हुए निधि ब्रिज के टूटने के कारण थोड़ा सा लड़खड़ाई। वह ब्रिज नीचे की ओर गिरने लगा साथ ही निधि भी उस ब्रिज के साथ ही नीचे की ओर हो गई पर अभी ब्रिज पूरी तरह से नीचे नहीं गिरा था। नीचे की डंडों के टूटने की वजह से वह सिर्फ झुक रहा था।

लगभग 20 डिग्री का एंगल बनाए हुए ब्रिज पर निधि के पास एक और मौका था। खुद के कदमों को संभालते हुए निधि अब वापस आगे की ओर हो गई।

दौड़ते हुए और अपने कदमों पर जोर देकर एक लंबी छलांग लगाकर उसने जैसे तैसे कर ब्रिज को पार किया।

हर एक पल उसकी आंखों में ब्रिज के आसपास लगे स्पोर्ट्स लाइनें ही देख रही थी जिसमे खतरनाक करंट दौड़ रहा था नीचे से बॉस ब्रिज को काटता जा रहा था तो ऊपर से निधि काफी मुश्किल से बचते हुए उस ब्रिज को पार कर रही थी। अंत में निधि की जीत हुई और वह दूसरी और पहुंच चुकी थी। अब बॉस इस जगह पर अकेला बचा था जबकि निधि और रोजर्स किसी दूसरी जगह की ओर जा रहे थे।

बॉस भी अब मजबूर था दूसरी ओर जाने के लिए। वह भी तुरंत मुड़ा और तेजी से सामने वाली दीवार को तोड़ता हुआ दूसरे जगह जा पहुंचा।

उसका सूट इतना बड़ा था कि वह दरवाजे से नहीं जा सकता था इसलिए उसने दीवार को तोड़ना ही अपने लिए सही समझा। वैसे भी यह उसकी बिल्डिंग है वह इसे जैसे चाहे वैसे तोड़े मरोड़े और कुछ समय बाद तो इस बिल्डिंग में धमाका होने वाला ही है।

इधर रोजर्स और निधि एक जगह पर खड़े थे।
"क्या प्लान है तुम्हारे पास" रोजर्स ने निधि से पूछा
" यह बहुत खतरनाक हो चुका है, इसे एक प्लान से नहीं हराया जा सकता इसलिए मैंने 3-4 प्लान एक साथ तैयार किए हैं। अगर यह एक प्लान से बचा तो दूसरे में फंस जाएगा। सबसे पहले हमें इसी के खास हथियार चाहिए। इसका सूट बहुत खतरनाक है जिस पर हमारे आम हथियारों का कोई फर्क नहीं पड़ रहा। तुमने कहा था ना कि नीचे इसकी एक लैब है जहां पर यह खतरनाक हथियार और मशीनें बनाता है चलो हमें भी वहां चलना है और वहां से अपने लिए कुछ लेना है।"

सच में, आमतौर पर सुना है कि प्लान A के बाद प्लान B भी होता है पर निधि यहां इस खतरनाक हालात में भी इस पर गौर कर रही थी। एक साथ कई सारे प्लान का यह आइडिया तो शायद ही किसी के दिमाग में आए। यही वजह है कि मात्र 21 साल की उम्र में निधि स्पेस एकेडमी की नंबर वन एजेंट बन गई वरना यहां तक पहुंचने में लोगों को साथ 60 साल लग जाते हैं। वह अब तक अपने 2 प्लान लगा चुकी थी पहला लाइट के स्विच पर लगा पड़ा था तो दूसरा प्लान अब उसके हत्यारों से उस को हराने का था। कुछ और प्लेन भी निधी के पास थे जो अभी सामने नहीं आए।

 जल्दी दोनों नीचे वाली लैब में आ गए। स्पेस एकेडमी के कमांडो ने पहले ही यह लैब आसपास के गार्ड से सूरक्षित कर ली थी।

लैब में समान आसपास बिखरा पड़ा था। उन सामानों के बीच में से गुजरते हुए कुछ एकेडमी के कमांडर चीजों को एक-एक कर देख रहे थे।

वहां पहुंचते ही निधि ने तुरंत एक आदमी को बुलाया और उसे यह बिल्डिंग खाली करने का आदेश दिया। कारण साफ था यह बिल्डिंग जल्दी ही एक बड़े धमाके में उड़ने वाली है।

सभी को बाहर भेजने के बाद इन्हें वहां पड़े अविष्कारों में से एक लंबी तलवार जैसी दिखने वाली बंदूक उठाई जिसका एक सिरा रोशनी से चमक रहा था।

यह एक लैजर फायर गन थी जिससे 0.01 सेंटीमीटर परमाणु बम जितनी उर्जा वाली बुलेट को फायर किया जा सकता था और उसका असर भी कुछ मीटर तक ही होता था।

निधि और रोजर्स दोनों ने एक-एक बंदूक उठाई और वापिस ऊपर की ओर चल दिए।

अब दोनों को कंपनी के बॉस से आमने सामने ही लडना था इधर दूसरी और बोस भी दीवारों और छतों को तोड़ता हुआ नीचे वाले फ्लोर में आ रहा था।  ऐसी ही एक दीवार को तोड़ते हुए उसका सामना निधि और रोजर्स से हो गया।

दोनों को देखते ही बोस का गुस्सा सातवें आसमान पर था। ऊपर से उनके हाथ में उसके ही अविष्कार थे। वह चिल्लाया-

"तुम लोग मुझे मेरे ही हथियारों से मारना चाहते हो ... पागल हो तुम लोग...इस सुट पर किसी भी हत्यार का कोई असर नहीं पड़ने वाला। इस काले पर्दाथ की शक्ति ने इसे हीरे से भी ज्यादा मजबूत कर दिया है। "

बॉस अभी अपनी बातें बोल ही रहा था कि रोजर्स ने एक फायर उस पर कर दिया जिससे वह उछलता हुआ सीधे बिल्डिंग से बाहर जा गिरा।

रोजर्स की इस हरकत को देख निधी ने उसे घुरा तो रोजर्स भी बोल पड़ा-

"क्या!! कुछ ज्यादा ही बकवास कर रहा था वो"

निधि ने गुस्से में जवाब दिया-"मेंने यहा उसे फंसाने का प्लान बनाया था... और तुम... तुमने उसे बाहर धकेल दिया"

"ओह सोरी..... अब क्या"

"कुछ नहीं... नीचे जाकर पकड़ते हैं उसे"

________________

विनम्र की फ्लाइट आने वाली थी और वह एयरपोर्ट पर खड़ा बस उसी का इंतजार कर रहा था। एक जासूस होने के कारण उसके लिए यह सब काम बहुत आसान था। वह पुलिस के सामने से भी चोरी कर आराम से निकल सकता था। इतना कुशल था अपने काम में।

स्पेस एकेडमी से सजा मिलने के बाद उसने हर तरह की काम करना शुरू कर दिया। क्रिमिनलों, आतंकवादियों सभी के लिए
वो काम करता था पर सिर्फ ऐसे काम इसमें उसे किसी का खून ना करना हो।

इस काम के बदले उससे जो पैसे मिलते थे वह उसे इकट्ठा कर रहा था ताकि आने वाले समय में वह उसका उपयोग कर सकें। इसके पीछे की क्या रणनीति है यह तो वही जानता है पर फिलहाल उसका मकसद ज्यादा से ज्यादा पैसा इकट्ठा करना ही था।

इधर बिल्डिंग में हो रही लड़ाई की खबर सबको लग चुकी थी।

स्पेस अकैडमी ने भले ही इस मिशन को खुफिया रखा हो पर जिस तरह का खतरनाक सीन यहां हो रहा था उसके बाद तो शायद ही यह घटना किसी की नजर से बचती।

अब तो लड़ाई भी सड़कों के बीच हो रही थी जिसमें मशीन वाला बॉस खतरनाक हथियार और बिजली वाले हमले इधर-उधर कर रहा था।

यह खबर टीवी पर भी आ रही थी और वही विनम्र का ध्यान उस टीवी पर गया जहां वह निधि को सड़क पर दौड़ता हुआ देख रहा था।

"अरे यह तो निधि है…."

विनम्र अपना समान वहीं पर छोड़ता और एयरपोर्ट से बाहर निकल उस जगह की ओर जाने लगा जहां लड़ाई हो रही थी।


*****


निधि बोस के हमलों से बचते हुए उसी के खतरनाक हथियारों से उस पर हमला कर रही थी पर बॉस के सूट पर उसका कोई असर नहीं पड़ रहा था।

रोजर्स सड़क के एक किनारे पर घायल पड़ा था। वह बॉस के एक हमले की चपेट में आ गया था।

बॉस और निधि दोनों बिल्डिंग के पास कुछ ही दूरी पर लड़ रहे थे। बॉस ने पहले से ही बिल्डिंग में बम लगा रखे थे जिनमें एक के बाद एक धमाके हो रहे थे।

बम के फटते ही पूरी की पूरी 35 मंजिला बिल्डिंग ताश के पत्तों की तरह ढह रही थी। उसका मलबा सड़क पर गिरता हुआ चारों और फैल रहा था। निधि और बॉस भी पास ही थी तो उन पर भी मलबा गिरने का खतरा था।

मलबे को घिरते देख दोनों तुरंत सामने की ओर मुड़े। रोजर्स भी पास ही था पर वह मलवे वाले खतरे से कोसों दूर था दौड़ते हुए निधि की नजरें दोनों ही तरफ थी, पीछे से आ रहे हैं मलबे पर भी और दाएं और कुछ दूरी पर दौड़ रहे बोस पर भी।

मौके का फायदा उठाते हुए निधि ने एक हमला बॉस पर कर दिया जिससे बॉस वहीं पर गिर गया और ऊपर से आ रहे मलबे के नीचे दब गया।

भागते हुए निधि किसी तरह से दाएं बाएं घूमते हुए अपनी जान पीछे वाले मलबे से बचा रही थी। मलबे का एक हमला भी उसे स्वर्ग की सैर करवा सकता था।

कुछ आगे जाने के बाद उसने खुद को सुरक्षित महसूस किया और फिर पीछे मुड़कर देखा।

बॉस मलबे के नीचे दब चुका था पर यह उसका अंत नहीं था। एक खतरनाक बम धमाके के साथ वह मलबे को ऊपर उठा और उठता हुआ बाहर आ गया।

"मैंने कहा ना मैं अब अनश्वर हूं, मुझे खत्म नहीं किया जा सकता"

निधि फिर से उसे सामने देख तंग आ गई। "आखिर इसका करे तो करे क्या? कैसे खत्म करें इसे? इसकी यह मशीन जब तक इसके साथ है तब तक इसे खत्म करना मुश्किल है और अब ऊपर से मुझमें इतनी हिम्मत भी नहीं मैं वापस इससे लडुं"

निधि घुटने टेक कुछ देर के लिए बैठ गई। स्पेस एकेडमी के कमांडो इधर बॉस पर हमला कर उसका ध्यान दूसरी और भटका रहे थे।

नीचे बेठी निधि को इस दौरान अपने वही दिन याद आते हैं जो उसने कभी बचपन में महसूस किए थे। अपने उस बचपन की एक याद में वह वैसे ही इस पार्क के अंदर बैठी थी जहां उसके सामने उसकी मां और बाप की लाश पड़ी थी। कुछ देर पहले तीनों इसी पार्क में मस्ती कर रहे थे कि किसी ने उसके मां-बाप के सर पर गोली मार दी। निधि उस वक्त मात्र 10 साल की थी मजबूरन कुछ कर भी नहीं सकती थी सिवाय इसी तरह बैठने के।

उस दिन की तरह आज भी वह खुद को लाचार और बेसहारा महसूस कर रही थी। उसके पास करने को तो बहुत कुछ था पर वह कर नहीं पा रही थी। दिमाग साथ दे रहा था, पर दिल नहीं। शरीर भी ठंडा पड़ा था। उस दिन के बाद से निधि ने कसम खाई थी कि वह जिंदगी में कभी भी ना तो मरने से डरेगी और ना ही हारने से। अपने आपको एक लक्ष्य दिया। समाज में पल रहे मुजरिमों से मिलने का फैसला किया , उन्हें खत्म करने की शपथ ली। एक वो दिन है और एक आज का दिन, आज वह स्पेस एकेडमी की नंबर वन एजेंट है। किस्मत सब का भविष्य, वर्तमान और भूतकाल तय करती है। लेकिन सही समय पर उठाया गया हमारा एक कदम हमारी पुरी किस्मत बदल देता है।

बॉस खतरनाक से भी खतरनाक होता जा रहा था। उसकी मशीन में लगी बंदूकों से निकल रहे फायर स्पेस एकेडमी के कमांडो को घायल कर रहे थे।

निधि आसपास के गिरे मलबे से बचते हुए और उसके ऊपर से कुदत्ते हुए लेजर मशीनगन से फायर करते हुए उसके पास जाने लगी।

जैसे ही वह पास आई बोस के पास आई उसने अपने दाएं हाथ को उस पर हमला किया लेकिन निधि तूरंत नीचे झुककर बच गई।

बॉस ने अगले हमले के लिए अपने पैर का उपयोग किया और  निधि को नीचे गिरा दिया। इससे पहले वह निधी को दूसरा हमला करने का मौका देता उसने निधि को और पकड़ा हवा में उछालते हुए दुर फैंक डाला।

निधि सीधे मलबे पर जा गिरी। वह इतनी जोर से गिरी थी उसकी 2-4 अंदर की हड्डिया तो टुट ही गई होगी। ‌

निधि को फेंकते ही बॉस वापिस एकेडमी के दूसरे एजेंट्स की तरफ हो गया।

निधि ने कुछ हिम्मत जुटाई और वापस खड़ी हो अपना पुराना रिवालर निकाल लिया। उसने उसका एक फायर सीधे उस मशीनी बॉस के सर पर किया। बोस निधि की तरफ पलटा और उसने अपने दोनों हाथों वाली गनो को उसकी ओर कर  अपने कदम आगे की ओर बढ़ाएं।

निधि को मौत सामने से अपनी ओर आते हुए दिख रही थी। बॉस भी मशीन के अंदर शैतानी हंसी लिए हुए था। आज वह अपने एक छोटे से मकसद में कामयाब होने जा रहा था जिसके बाद उसे पूरे विश्व में अपना डंका बजाना है।

उसने अपनी बंदूक से एक-एक कर गोलियां चलाना शुरू कि जिसकी दिशा निधि की तरफ ही थी।ज्ञनिकल रही गोलियां काफी तेजी से अपना सफर निधि की और तय कर रही थी।
एक साथ बॉस ने कई सौ गोलियां निधि पर बरसा दी थी।

मात्र चंद पलों का फासला था निधि और मौत के बीच, पर, अचानक एक रुकावट सामने आ गई।
कोई था जो उनके बीच खड़ा था।
निधि की आंखें तो बंद थी। वह तो बस मौत को महसूस करना चाह रही थी पर शायद अभी उसके भाग्य में मौत नहीं लिखी।

गोलियों की आवाज अभी भी चल रही थी धाएं धाएं धाएं।

पर एक भी गोली निधी को नहीं लग रही थी।
निधि ने धीरे-धीरे आंखें खोली पर शायद यही उसकी जिंदगी का सबसे भयानक दृश्य था।
सामने के व्यापक दृश्य को देखते ही उसके मुंह से यकायक निकला
"नहीईईईईईईईघीईईई...!!"

वह इतनी जोर से चिल्लाई कि पूरा आसमा दहल गया। धरती के अंदर तक यह आवाज गूंज गई।
क्योंकि उसके और गोलियों के बीच एक शख्स खड़ा था जो रोजर्स था ‌।

निधि के लिए रोजर्स ने सारी गोलियां अपने सीने पर ले ली।

वैसे तो उसमें बुलेट प्रूफ जैकेट पहन रखी थी पर गोलियों की संख्या इतनी ज्यादा थी कि वह उसकी बुलेट प्रूफ जैकेट को भी भेद कर उसके सीने में चली गई।

निधि की आंखों के सामने ही रोजर्स बेधड़क जमीन पर गिर गया।
उसकी मौत इतनी दर्दनाक थी कि वह अंत में अपने आखिरी शब्द भी नहीं बोल पाया। रोजर्स की मौत के बाद सब थम चुका था।

दौड़ते हुए निधि ने उसके गिरते शरीर को सहारा देकर उसे अपने घुटनों पर ले लिया।

इधर मशीनी बॉस अकैडमी के कुछ दूसरे एजेंट के साथ फिर से लड़ने में बिजी हो गया।

निधि को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वह रोजर्स को क्या बोले क्या नहीं, वह तो अब जिंदा भी नहीं था।

आंसुओं की बाढ उसकी आंखों में साफ देखी जा सकती थी।

" रोजर्स !! यह तुमने क्या किया और क्यों, क्या जरूरत थी तुम्हें हम दोनों के बीच में आने की। मुझे मरने से डर नहीं लगता ना ही मौत की फ़िक्र थी.... पर तुम…. तुम यह क्या कर बैठे"

कहते हैं कि जिंदगी अच्छी तो होती है पर उसको शानदार नहीं कहा जा सकता। यही अब निधि के साथ हो रहा था।

अजीब कशमकश की भवर धाराओं में फंसी निधि के पास अब सोचने और समझने के लिए विचार नहीं थे। अब तो उसे बस दो ही चीजें दिख रही थी एक रोजर्स ओर एक सामने का मशीनी बॉस।

उस मशीनी बॉस ने आसपास के सभी स्पेस एकेडमी के एजेंट को निपटा कर अपनी बंदूक वापिस निधि की तरफ तान ली थी।‌ वह अब अपने आगे के कार्य के लिए तैयार था जिसमें उसे निधि को खत्म करना था।

वह एक बार फिर अपने बंदूक की गोली चलाने वाला था लेकिन अचानक हवा में उड़ती हुई एक पतली रस्सी आई और उसके दाएं हाथ से लिपट कर उसके हाथ को पीछे की तरफ कर दिया।

वह मशीनी बॉस कुछ नहीं समझ पाया कि उसके साथ क्या हो रहा है।

उसने अपना दूसरा हाथ उस रस्सी को हटाने के लिए बढ़ाया पर हवा में  उड़ती हुई दुसरी रस्सी ने उसके दूसरे हाथ को भी पकड़ कर पीछे की ओर कर दिया ।

अब उसके दोनों हाथ जकड़े जा चुके थे।
हालात देखकर पता चला कि पीछे से विनम्र आ चुका था।
जिसके शानदार गैजेट से निकली रसीया लोहे से भी ज्यादा मजबूत बॉस को घेर कर खड़ी थी।

बॉस रस्सी की गिरफ्त में था। मौके की नजाकत को देखते हुए भावुक निधि भी दौड़ते हुए उस पर कूद पड़ी।

पहले उसने बॉस की गर्दन को पकड़ कर पीछे की ओर खींचा और फिर उसके पैर पर लात मार उसे नीचे गिरा दिया।

इसके बाद उसी रस्सी को जोर से खींचते हुए सबसे पहले उसने उस काले पत्थर को उसके सूट से  बाहर निकाल जिसके बाद उसके सूट ने काम करना बंद कर दिया।

मात्र कुछ पलों में ही निधि ने बॉस को असहाय और लाचार बना दिया।

बॉस अब अपने भारी-भरकम सूट के साथ टूटी हुए बिल्डिंग के टुकड़ों पर गिर पड़ा।

थोड़ी ही देर में स्पेस एकेडमी की एक और स्पेशल टीम वहां आ गई और उसने इलाके की घेराबंदी कर पूरे इलाके को आम लोगों के लिए नजरबंद कर दिया।

इलाके को बंद करने के लिए उन्होंने एक ऐसी तकनीक का उपयोग किया जिसमें आसपास के लोग वही देख पा रहे थे जो वह दिखाना चाहते थे।

बॉस को पकड़कर गिरफ्तार कर लिया गया। ‌ निधि भी लाचार और बेबस जमीन पर पड़ी थी और विनम्र जो अभी अभी आया था वह निधि के पास खड़ा था।

रोजर्स अब दुनिया में नहीं रहा। इसका अफसोस सभी को था पर दुख तो इस बात का था कि जब यह बात विलियमसन को पता लगेगी तब क्या होगा?


निधि ने जो काला पत्थर निकाला था वह स्पेस एकेडमी के एजेंट के हाथों दे दिया। जहां से उसे एस एकेडमी की स्पेशल वेन में लजाया गया। एकेडमी की एक टीम चाय वाले आदमी को भी पकड़ चुकी थी।


सुबह-सुबह का वक्त।

रोजर्स के शरीर को मिट्टी में दफनाया जा रहा था। आसपास एकेडमी के जाने-माने लोग खड़े थे। विलियमसन भी वहीं था। दुख में डूबा अपने पुराने दिनों को याद कर रहा था। रोजर्स को डांटते हुए, उसे फटकारते हुए।

निधि भी वहीं थी। वह रोजर्स के साथ बस अपनी कुछ बातों को याद कर रहीं थीं।

रोजर्स की मौत सच में एक दर्दनाक हादसा थी।‌ जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता लेकिन कुर्बानी तो देनी पड़ती हैं।‌

हर एक चीज एक नई शुरुआत का प्रतीक होती है। रोजर्स की मौत और कहानी में घटा घटनाक्रम भी कुछ ऐसा ही थें।

जो अगली कहानी की नींव रखेंगे।

THE END ......?

NIDHI VOL-2 THE SECRET AGENT-15





शाम के 6:00 बजे।

Aj2  फ्यूचर कंपनी।

रोजर्स और सेजो अब इस जगह पहुंच चुके थे। शाम का वक्त था इसलिए कंपनी में सन्नाटा पसरा हुआ था। काम करने वाले लोग अपने-अपने घरों की ओर जा चुके थे। बस कुछ गिने-चुने लोग ही दिखाई दे रहे। यह लोग भी ज्यादातर सिक्योरिटी गार्ड थे।

रोजर्स और सेजो दोनों एक कमरे में बैठ बोस के आने का इंतजार कर रहे थे। उन्हें ज्यादा देर इंतजार नहीं करना पड़ा, लगभग 2 मिनट की देरी के बाद एक हटा कटा मोटा सा आदमी कमरे में घुसा और दोनों को देखा। इस कंपनी का बॉस वही आदमी था जिसे  खास तत्व अजिकसम की तलाश थी।

"जी कहिए मैं आपकी क्या मदद कर सकता हूं" कमरे में आते ही मोटा आदमी बोला।

"हेलो सर मेरा नाम रोजर्स हैं और मैं...." अभी रोजर्स इतना ही बोला था कि बॉस ने उसे टोक दिया।

"मुझे तुम्हारे नाम से कोई मतलब नहीं काम बताओ" यह सुनते ही रोजर्स उसके तो जैसे पैरों तले जमीन खिसक गई । आज तक कभी किसी ने उससे इस तरह से बात नहीं की।

"काम!!" रोजर्स एक पल ठहरा " हां वही तो बता रहे हैं। हम स्पेस अकैडमी से हैं और हम जानना चाहते हैं कि आपकी कंपनी सतीश विजयवर्गीय के बारे में क्या जानती हैं??"

"नहीं, हमारी कंपनी उनके बारे में कुछ नहीं जानती। वह बस यहां काम करते थे और इस्तीफा देकर चले गए" बॉस ने तुरंत से जवाब दिया।

"क्या आप शुयर हैं"

"व्हाट यू मीन बाय शुयर? कहा ना नहीं तो नहीं" बॉस रोजर्स पर चढ़कर उसे जवाब दे रहा था।

"जी शुक्रिया"

इसके बाद रोजर्स और सेजो दोनों उस कंपनी से बाहर आ गए और गेट के पास खड़े होकर वापस पीछे से कंपनी की ओर देखा।

"कुछ ना कुछ तो गड़बड़ है सेजो " रोजर्स ने हाथ हिलाते हुए सेजो को कहा" आज रात को हम यहां पर छापा मारेंगे और इस कंपनी की सच्चाई पता करेंगे, मुझे यहां दाल में कुछ काला लग रहा है"

सेजो ने भी रोजर्स की हां में हां मिलाई जिसके बाद दोनों वहीं पास की एक जगह पर रात होने का इंतजार करने लगे।

दूसरी ओर निधि और वह चाय वाला आदमी एक दूसरे के आमने सामने खड़े थे।

सीढ़ियों से उतरते वक्त निधि उस चाय वाले आदमी से पहले नीचे आ गई थी और आकर उस आदमी को घेर लिया था।

" अब तुम बचकर कहीं नहीं जा सकते" निधि ने कहा।

" अच्छा, तुम्हें क्या लगता है तुम जैसी लड़की मुझे पकड़ पाएगी"

" तुम पहले से ही पकड़े जा चुके हो"

निधि ने अपने कदम उस आदमी की तरफ बढ़ाएं। आदमी भी धीरे-धीरे पीछे हटने लगा पर कुछ कदम पीछे हट कर वह निधि की तरफ दौड़ा और पास आते ही उसने एक बैक फिलिप मारकर निधि को चौंका दिया। उसकी यह बैक फिलिप निधि को नीचे गिराने के लिए थी पर चौकन्नी निधि उससे बच गई।

खुद को संभालने के तुरंत बाद वह चाय वाला आदमी निधी की ओर कुदा और उसे लड़ने लगा। ‌ जवाबी कार्रवाई में निधि भी उसके हमलों का जवाब देने लगी। दोनों के बीच कराटे वाली फाइट हो रही थी।

चाय वाला आदमी कभी ऊपर से हमला करता तो कभी नीचे से और निधि कभी ऊपर से अपना बचाव करती तो कभी नीचे से। दोनों अपनी अपनी कला में दक्ष लग रहे थे इसलिए कोई भी हमले में एक दूसरे को टच नहीं कर रहा था बस वह बच बच ही रहे थे।

थोड़ी देर ऐसे ही लड़ने के बाद चाय वाले आदमी ने निधि को चकमा देते हुए उसे नीचे गिरा दिया और वापस भाग खड़ा हुआ।

निधि भी तुरंत एक झटके से कुदते हुए खड़ी हुई और वापस उस आदमी के पीछे हो गई।

" जितना चाहो उतना भाग लो, मैं तुम्हें आज पकड़कर ही रहूंगी"


जल्द ही अंधेरा हो गया था। रात के अंधेरे का फायदा उठाते हुए रोजर्स  बिल्डिंग के पीछे से सेजो को साथ लेकर कंपनी में घुस गया।

दोनों वहां के सुरक्षाकर्मियों को चकमा देते हुए सीडीओ के पास पहुंचे और वहां से इलेक्ट्रिक प्लग से सभी सीसीटीवी कैमरा को जाम कर दिया।

कैमरे जाम करने के बाद दोनों बिना किसी डर के हॉल में से होते हुए सीधे उस ऑफिस में पहुंचे जहां बोस का कमरा था।

दरवाजे के बाहर लोक लगा हुआ था। ‌ रोजर्स ने अपनी जेब से एक डिवाइस निकाला और उसे दरवाजे से चिपका दिया।

थोड़ी देर में वह दरवाजा अपने आप खुल गया जिसके बाद दोनों अंदर कमरे में घुस गए।

कमरे में जाते ही रोजर्स ने टेबल पर पड़े लैपटॉप को खोला और उसके बटनो को स्कैन करने लगा।

" यह तुम क्या कर रहे हो" पास खड़े सेजो ने पूछा।

" लैपटॉप का पासवर्ड जानने की कोशिश कर रहा हूं, इस डिवाइस से हमें उन बटनों के बारे में पता लग जाएगा जिन बटनो को सबसे ज्यादा बार दबाया गया"

थोड़ी देर में कुछ बटन स्केनर पर शो हुए जिन्हें रोजर्स ने दबा दिए। पर संयोगवश वह बटन लैपटॉप के पासवर्ड कि नहीं बल्कि कमरे के नीचे जाने वाली लिफ्ट के थे।

देखते ही देखते आसपास की दीवारों पर एक सफेद स्क्रीन छा गई और वह दोनों कमरे के फर्श के साथ-साथ नीचे जाने लगे।

" अरे यह क्या हो रहा है" सेजो चिल्लाया।

इधर वह आदमी भागता भागता एक डिस्को बार में जा घुसा। निधि भी उसके पीछे-पीछे उस डिस्को बार में चली गई।

अंदर काफी भीड़ थी और इस भीड़ के बीच किसी को भी पहचानना बहुत मुश्किल था। डिस्को में आज लोगों के कपड़ों का कोड भी यूनिक था जिस वजह से सभी लोग एक जैसे लग रहे थे। बस एक निधि ही थी जो भीड़ से अलग दिख रही थी। निधि ने अपनी नजरें चारों तरफ घुमाई और उस आदमी को ढूंढने की कोशिश की। बाहर डिस्को का दरवाजा बंद हो चुका था जिसके ऊपर लिखा था कि यह दरवाजा अब ठीक रात के 12:00 बजे ही खुलेगा उससे पहले नहीं।

डिस्को में शानदार नाच गाना हो रहा था। लड़कियां ना मात्र वस्त्र पहन इधर-उधर घूम रही थी जो इस बात का संकेत था कि यह डिस्को निधि के लिए किसी भी तरह से अनुकूल नहीं

और हुआ भी ऐसा। जब निधि आगे बढ़ रही थी तो एक मोटे गैंडे ने उसे "और छम्मक छल्लो आज चलें क्या, बड़ा मस्त माल लग रही है तू"  कह कर संबोधित किया पर अगले ही पल वह जमीन पर गिरा था और निधि वहां से गायब थी।

उस आदमी की तलाश में वह ऊपर वाले फ्लोर पर आ चुकी थी।

जबरदस्त शोर के बीच उसे अपने मोबाइल फोन की घंटी अभी सुनाई नहीं दे रही थी जो स्पेस एकेडमी से आ रही थी।

इधर उधर नजरे घुमाते उसने पूरे डिस्को को गौर से देखा। बाहर जाने और अंदर आने के सभी रास्तों को नोट किया।

***

रोजर्स और सेजो कंपनी के एक शानदार दृश्य के सामने खड़े थे जहां उनकी आंखों के आगे हजारों एक्सपेरिमेंट आधे अधूरे पड़े थे।

" साला, यह क्या?? यहां तो एक अलग ही खिचड़ी पक रही है" रोजर्स अपने आप में बोला।

दोनों अब आगे जाकर उन एक्सपेरिमेंटस को पास से देखने लगे। दोनों कभी कोई एक्सपेरिमेंट उठाते तो कभी कोई।

" ऐसा लग रहा है जैसे यह लोग किसी विश्व युद्ध की तैयारी कर रहे हैं, सब के सब एक्सपेरिमेंट बहुत ही उन्नत लेवल के हैं और अपनी दुनिया में तो ऐसे एक्सपेरिमेंट किसी ने किए भी नहीं"

अचानक बात करते करते रोजर्स का हाथ उस रिमोट पर पड़ा जो सामने वाली स्क्रीन को ऑन करता था। जाते वक्त बॉस वह रिमोट यही छोड़ गया था।

स्क्रीन के चलते ही उस पर वह दृश्य आने लगे जो उस खास तत्व को लेकर थे।

अजीकसम……. एक ऐसा तत्व….. जिसका टेंपरेचर अनंत है…... असीम शक्तियां….. कभी न खत्म होने वाली एनर्जी

यह सब चीजें फिर से आने लगी और उसे देख रोजर्स और सेजो की आंखें फटी की फटी रह गई।

" कौन है वहां" अचानक पीछे से एक सिक्योरिटी गार्ड की आवाज आई।

सिक्योरिटी गार्ड की आवाज सुनते ही दोनों आनन-फानन में इधर-उधर होने लगे।

" मैंने कहा रुको" सिक्योरिटी गार्ड की नजर उन पर पड़ चुकी थी। उसने अपनी शोल्डर पर टंगा एक डिवाइस निकाला और उस पर लाल बटन दबा दिया। जिससे पूरी कंपनी में एक खतरे वाला सायरन बजने लगा और देखते ही देखते वहां कई सारे सिक्योरिटी गार्ड आ धमके।

रोजर्स और उसके दोस्त के पास अब भागने के सिवा और कोई रास्ता नहीं था। दोनों अब बाहर की ओर जाने लगे पर उन्हें यह नहीं पता था कि बाहर कहां से निकला जाए।

इधर सिक्योरिटी गार्ड ने उन पर बंदूकें  तान दी। ‌

" मर गए अब तो" रोजर्स बोला और उन्होंने अपने हाथ ऊपर उठा लिए।

वहीं डिस्को में घूमते घूमते निधि की नजरें उस आदमी पर पड़ गई जो एक कोने पर एक लड़की के पीछे छुपा बैठा था। लड़की आधी निर्वस्त्र थी और कोरिया की लग रही थी। ध्यान से देखने पर पता चला कि उस आदमी ने उस लड़की पर चाकू तान रखा था।

" आगे मत बढना वरना मैं इसे खत्म कर दूंगा" वह आदमी चाकू दबाते हुए बोला।

" कर दो, मुझे इससे क्या" निधि भी मुस्कुराते हुए बोली और वह आगे की ओर बढ़ने लगी।

पास ही एक खिड़की थी जो नीचे एलिवेटर की ओर जा रही थी। नीचे जाने का रास्ता दुर्गम था और रास्ते में कई सारी कांच की दिवारें आ रही थी।

उस आदमी ने उस लड़की को निधि की तरफ धकेला और खिड़की से नीचे की और कूद गया।

कांच की दीवारों से टकराता हुआ और उन्हें तोड़ता हुआ वह सीधे नीचे जा गिरा। इस भयावहक कूद में उसकी हालत काफी खराब हो गई थी।

तभी डिस्को में भी एक अजीब सा साउंड होने लगा जो इस बात का संकेत था कि डिस्को के अंदर आग लग गई है और यह आग और किसी ने नहीं उस आदमी ने ही जाते वक्त लगाई थी।

डिस्को में पूरी तरह से भगदड़ मंच गई और निधि के लिए अब उस रास्ते से कुदना भी आसान नहीं था जिस रास्ते से वह आदमी कूदा था । क्योंकि  पहले वहां कांच की दीवारे थी जो अब टूट चुकी थी पर पास में ही नीचे जाने का एक और रास्ता था जो उसे भी ज्यादा दुर्गम था।

कई सारे नुकीले भालों के बीच से थोड़ी सी जगह थी जिससे आगे जाकर वापस कांच वाला रास्ता शुरू हो जाता था। जगह  इतनी कम थी कि वहां से आदमी बड़ी मुश्किल से ही निकल पाए और वह भी जब ऊंचाई से कूदे तो इस बात का अनुमान लगाना मुश्किल हो जाए कि वह उस जगह से ही गुजरेगा या भालों से टकराएगा।

पर इन सबके बावजूद निधि ने रिश्क लिया ‌और वह काम किया जिसके लिए वह जानी जाती है। अर्थात हथेली पर जान लेकर घूमने वाली बात।

उसने कुछ कदम पीछे की ओर खींचे और फिर आगे उन भालों की और कूद गई।

कुदत्ते वक्त उसकी निगाहें ठीक उस रास्ते की ओर थी जिस रास्ते से गुजरना था। यह बिल्कुल वैसा ही दृश्य था जैसा दृश्य सर्कस में होता है और जहां सर्कस में एक आदमी ऊपर से कुदता हुआ वह एक छोटे सी सर्कल रिंग से निकलता है।

निधि ने भी एक ऐसे ही कारनामे का परिचय दिया। उस छोटे से रास्ते के पास आते ही उसने अपने शरीर को अजीब तरीके से मोड़ा और शानदार एथलीट्स वाली कला का प्रदर्शन करते हुए वहां से निकल गई और सीधे जाकर कांच की दीवार पर एक सुपर हीरो वाली लैंडिंग की। उसकी लैंडिंग से कांच टूटा नहीं। वह बहुत हल्के से उस कांच पर कूदी थी। सच में यह दृश्य देखने वाला था और इसको जितनी बार देखा जाए उतना ही मजा आए। स्लो मोशन में प्रतीत होने वाला यह दृश्य किसी फिल्मी सीन से कम नहीं था। उन भालाओं के बीच में से एक छोटे सी जगह से निकलना एक चुनौतीपूर्ण काम था जिसे निधि ने बेझिझक पूरा किया।

वह आदमी अब तक दौड़ता हुआ सामने की एक पुरानी विरान फैक्ट्री में घुस चुका था। निधि भी उस कांच से नीचे उतरी और उस फैक्ट्री की ओर चल दी।

निधि को उसका पीछा करते हुए काफी समय हो गया। दूसरी तरफ रोजर्स भी भारी मुसीबत में फंस चुका था और वह कई सारे सिक्योरिटी गार्डों से गिरा पड़ा था।

रोजर्स और सेजो दोनों एक फर्श पर घुटनों के बल बैठे हुए थे और उनकी आसपास सिक्योरिटी गार्डों की बंदूके तनी हुई थी। सिक्योरिटी गार्ड को अपने बॉस के आने का इंतजार था जिन्हें फैसला करना था कि अब इन दोनों का आगे क्या किया जाए।

कंपनी में मौजूद सिक्योरिटी गार्ड उनके साथ बहुत बुरा व्यवहार कर रहे थे। इस व्यवहार को देखकर अंदाजा तो यही लग रहा है कि इन दोनों का बचना शायद मुमकिन नहीं।

लगभग चंद मिनटों की देरी के बाद बॉस वहां आ पहुंचा। उसने आते ही दोनों को देखा और गुस्से से लाल हो गया।

" मैंने तुम लोगों को कहा था ना मेरी कंपनी से दूर रहना"

इसके बाद वह परेशानी से इधर-उधर घूमने लगा।

" समझ में नहीं आ रहा मैं तुम लोगों का क्या करूं, जिंदा भी नहीं छोड़ सकता और मार भी नहीं सकता। अगर जिंदा छोड़ा तो तुम लोग मेरे लिए सबसे बड़ा खतरा बन जाओगे। अगर मार दिया तो यह स्पेस अकैडमी मेरी जान खा लेगी। आखिर तुम लोगों को किसने कहा था मेरे एक्सपेरिमेंट देखने को, यह ऐसे वैसे एक्सपेरिमेंट नहीं दुनिया को कामयाब करने वाले एक्सपेरिमेंट हैं"

" वह तो दिख ही रहा है" रोजर्स बोला।

" ए नादान बच्चे , बच कर रहे मुझसे।"

इसके बाद वह एक कोने में गया और उसने अपनी जेब से फोन निकाल कर किसी बंदे को फोन किया।

" हेलो, मियारसो बोल रहा हूं, वक्त आ गया है मेरे एहसान का बदला चुकाने का।"

इसके बाद उसने कुछ और बातें की और वापस उन दोनों के पास आ गया। पास आकर उसने अपने आदमियों को ऑर्डर दिया।

" हम इन्हें नहीं मार सकते पर कोई और तो इन्हें खत्म कर सकता है, ऊपर हेलीकॉप्टर खड़ा है जाओ और जाकर इन्हें उस हेलीकॉप्टर से सीक्रेट चैंबर में ले जाओ"

सिक्योरिटी गार्ड ने हामी भरी और इसके बाद उन्होंने बंदूक की एक नोक से दोनों को बेहोश कर दिया।  बहोश करने के बाद उन्होंने दोनों को उठाया और ऊपर छत की ओर ले गए।

इधर निधि एक फैक्ट्री के अंदर थी। फैक्ट्री चारों तरफ अंधेरे से भरी थी और कबाड़ के समान से भी। निधि ने अपनी पॉकेट से अपना सबसे प्यारा रिवाल्वर निकाला और उसे अपने हाथों में कस कर पकड़ लिया। यह उसके पिताजी का रिवाल्वर था जो सन उन्नीस सौ अस्सी के दशक का था और निधि आज भी उसी रिवाल्वर को यूज करती थी। रिवाल्वर से उसने कभी भी कोई निशाना नहीं चुका।

रिवाल्वर को इधर-उधर घुमाते हुए वह विरान फैक्ट्री में उस आदमी को ढूंढने लगी जो अंधेरे का फायदा उठाकर फैक्ट्री में जा छुपा था।

पर शायद नहीं!! यह हमारी गलतफहमी थी।

अंधेरे में छिपने की बजाय उसने पीछे से निधि पर झपटा मारा और उसे जमीन पर गिरा दिया।

जमीन पर गिरते ही निधि का रिवाल्वर भी उसके हाथ से छूट गया।

अब वह आदमी निधि के ऊपर था और निधि नीचे।

वह पूरी तरह से उस आदमी की लातों के बीच जकड़ी जा चुकी थी। उसके हाथ भी उस आदमी ने दबोच लिए थे। वह पूरी तरह से उसकी गिरफ्त में आ चुकी थी।

उसने  अपने आप को छुड़ाने की कोशिश की पर उस आदमी की पकड़ इतनी मजबूत थी की निधि सिर्फ कोशिश ही कर सकी।

उस आदमी ने अपने हाथ के दो जबरदस्त मुक्के निधि के जबड़े पर मारे और उसे बहोश कर दिया।

बेहोश करने के बाद वह उसके ऊपर से खड़ा हुआ हूं और इधर उधर देखने लगा।

इस लड़की को यहां छोड़ना किसी भी तरह से  सुरक्षित नहीं। उसने मन ही मन सोचा और फिर उस फैक्ट्री के एक कोने की ओर गया और वहां से पुरानी बोरी ले आया। उसने उस पुरानी बोरी में निधि को उठाया और उसमें डाल दिया। इसके बाद बोरी को कंधे पर उठा बाहर की तरफ चल दिया।

निधि और रोजर्स तथा रोजर्स का दोस्त, तीनों अब भारी मुसीबत में फंस चुके थे।

NIDHI VOL-2 THE SECRET AGENT-14



निधि एक छोटे से हॉल में सतीश विजयवर्गीय की पत्नी के सामने बैठी थी। उन्होंने सफेद साड़ी पहन रखी थी और वह सुबक सुबक कर रो रही थी।

"जब मुझे पता चला उनकी हत्या हुई है तब मैंने सबसे पहले आप ही को याद किया था" विजयवर्गीय की पत्नी ने अपने आंसू संभालते हुए कहा"लेकिन बाद में यहां की एजेंसी ने भी आप को चुन लिया। सब लोग कहते हैं कि वह अपने आप मरे हैं लेकिन मैं ऐसा बिल्कुल नहीं मानती"

"क्या मैं जान सकती हूं इसके पीछे का आप का कारण क्या है..." उसके ऐसा बोलते ही निधि ने सवाल पूछा।

"दरअसल 2 दिन पहले ही उन्होंने सभी कंपनियों मैं इस्तीफा दे दिया था। वो बोल रहे थे कोई भी कंपनी उनके टैलेंट का सही तरीके से उपयोग नहीं कर रही। मैंने यह बात पुलिस वालों को भी बताई लेकिन उन्होंने मेरी बात पर यकीन ही नहीं किया। इसके बाद उन्हें कुछ फोन कॉल आए और कहा गया तुम अंधविश्वास का प्रचार कर रहे हो। यह बेमतलब की धमकियां थी जिनका उनसे कोई लेना-देना नहीं था। फिर एक दिन उन्हें किसी ने बुलाया और उसके बाद वह वापस नहीं आए। फिर तो उनकी मौत की खबर ही आई...."


"कमाल है..!! समझ में नहीं आ रहा पुलिस ने आपकी बातों को सीरियसली क्यों नहीं लिया। अगर इतना कुछ हो जाए तो हत्या की साजिश तो अपने आप बनती। अच्छा क्या आप मुझे उस आदमी का एड्रेस दे सकते हैं जिसे आपके पति आखिरी बार मिलने गए थे"

"हां... रुकिए... मेरे पति ने वह एड्रेस एक नोट पैड पर लिखा था। मैं अभी लाकर देती हूं" इतना कहने के बाद विजयवर्गीय की पत्नी अंदर गई और एक नोटपैड लेकर बाहर आई। उसने वह नोटपैड निधि की ओर बढ़ा दिया।"यह लीजिए.... वह बता रहे थे कि उनकी कोई चाय की दुकान है"

"जी...मैं देख लूंगी...धन्यवाद...."

*****

अब तक दिन के 3:30 बज चुके थे। रोजर्स और निधी दोनों अपना काम अलग अलग तरीकों से कर रहे थे। निधि की गाड़ी कुछ छोटी-मोटी गलियों से होते हुए उस एड्रेस पर पहुंची जो एड्रेस उसे सतीश विजयवर्गीय की पत्नी के द्वारा दिया गया था।

देखने से यह महोला काफी देहाती टाइप का लग रहा था। आसपास के लोग मवाली टाइप और थोड़ी अजीब किस्म के थे। उनमें से ज्यादातर लोग किसी प्राचीन समुदाय का हिस्सा थे।


गाड़ी से जाते वक्त निधि आसपास की हर चीज पर नजर रख रही थी। उसने वहां के लोगों और उन निशानों को भी देखा जो उनके घरों के बाहर बने हुए थे। जैसे ही गाड़ी किसी नुक्कड़ चौराहे के पास से गुजरती वहां पर कुछ अजीब तरह की काली मूर्तियां बनी हुई नजर आ जाती। उन काली मूर्तियों पर भी अजीब रंग का लाल पीला सा रंग रंगा हुआ था जो खतरे के निशान के सापेक्ष ही था।

ठीक उस एड्रेस के सामने जाकर गाड़ी रुकी जो निधि को दिया गया था। निधि गाड़ी से बाहर निकली। स्पेस एकेडमी से निकलते वक्त निधि ने अपनी ड्रेस चेंज कर ली थी और इस वक्त वह एक जींस जैकेट और जींस पैंट मै थी। जींस जैकेट के नीचे उसने आसमानी रंग की टी-शर्ट पहन रखी थी जो उस पर काफी जच रही थी। आंखों पर लगा काले रंग का चश्मा भी उसकी खूबसूरती पर चार चांद लगा रहा था। ‌बालों का आधा हिस्सा पीछे बंधा हुआ था तो आधा हिस्सा बिखरा हुआ था।  कुल मिलाकर निधि की खूबसूरती की जितनी तारीफ की जाए उतनी कम है। उसके पास भगवान की दी हुई कुदरती खूबसूरती और अच्छे हेयर स्टाइल  दोनों का अच्छा खासा मेल था।

घर को अच्छी तरह से देखने के बाद निधि घर की और गई और उसने वहां का दरवाजा खटखटाया।

अंदर से कोई आवाज नहीं आई।

निधि ने दोबारा दरवाजा खटखटाया।

इस बार एक औरत ने दरवाजा खोला। औरत ने काले रंग के कपड़े पहने हुए थे जो काफी अजीब लग रहे थे। यहां के समुदायों के बाकी लोगों ने भी कुछ ऐसा ही पहनावा अपना रखा था।

"यस टेल" अंदर से औरत ने कहा।

"आई वांट टू मिट विद हाउस ओनर व्हो हैव ए टी शॉप"

घर देखने से आसपास के घरों से अच्छा लग रहा था। कम से कम इतना अच्छा था कि इस घर के मालिक को चाय की दुकान खोलने की बिल्कुल जरूरत ना पड़े।

"ओह कम इन"

उस औरत ने निधि को अंदर आने के लिए कहा। घर पर लगी तस्वीरें घर का सामान सब यहां के मकान मालिक का अच्छा खासा पैसे होने की ओर इशारा कर रहा था। अंदर जाने के बाद औरत ने वहां से अंदर की ओर एक आवाज लगाई और अपनी भाषा में कहा कि बाहर आपको कोई बुला रहा। अंदर से किसी आदमी ने भी उसे अपनी भाषा में पूछा कि बाहर कौन है। तो औरत ने अपनी भाषा में जवाब दिया पता नहीं। दोनों की भाषा प्राचीन जमाने की लग रही थी जो आम लोगों को तो समझ में ही ना आए। अंदर बैठा आदमी उम्र में लगभग 50 साल के आस पास होगा पर उसका शरीर हष्ट पुष्ट था। दिखने में अंग्रेज जैसा था। उसके बाद आदमी ने कहा तुम पूछो कौन है मैं आता हूं।

बाहर खड़ी निधि यह सब सुन रही थी पर उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था वह दोनों क्या बातें कर रहे हैं। थोड़ी देर इधर-उधर ठहलने के बाद वह वहां पास पड़े सोफे पर बैठ गई।

औरत ने निधि से पूछा।

"वाए दे वे हु आ यू"

"एम निधि फ्रॉम स्पेस अकैडमी"

जैसे ही निधि ने स्पेस अकेडमी बोला अंदर से बाहर आ रहे आदमी के कानों में यह आवाज गूंज गई। वह अभी लगभग दरवाजे के पास ही खड़ा था। स्पेस अकैडमी का नाम सुनते ही उसके पैरों तले से मानो ज़मीन खिसक गई। वह उसी दरवाजे से पीछे की ओर मुड़ा और वहां की खिड़की से नीचे कूद गया वह भी इतनी जल्दी कि उसे यह भी याद नहीं रहा कि खिड़की की ओर जाते वक्त उसने काफी सारी आवाज कर दी । निधि ने उस आवाज को तुरंत भांप लिया और उसे पता लग गया कि कोई आदमी यहां से भाग रहा है।

निधि भी उस खिड़की की तरफ हो गई। बीच रास्ते में ही उसने अपनी जींस की जैकेट उतारी और खिड़की से नीचे की ओर छलांग लगा दी ठीक उस आदमी के पीछे।

निधि को पता था कि दौड़ते वक्त जैकेट उसके लिए परेशानी बनेगी इसलिए उसने जैकेट रास्ते में ही उतार दी और उस आदमी के पीछे पीछे दौड़ने लगी।

आदमी आगे था और निधि उसके पीछे। दोनों काफी तेजी से दोड़ रहे थे।

कुछ देर भागने के बाद आदमी संकरी गलियों में चला गया और निधि भी उसके पीछे-पीछे उन संकरी गलियों में हो गई। संकरी गलियां काफी छोटी थी इतनी कि उसमें से सिर्फ दो आदमियों के आने-जाने की जगह थी। ऐसे में वहां की भीड़ से बच बचाते दोनों आगे की ओर जा रहे थे।

यह इलाका दूसरे अन्य इलाकों से थोड़ा ऊपर था जिस वजह से इस इलाके के खत्म होते ही नीचे दुसरे घर शुरू हो गए। संकरी गलियों के खत्म होते ही सामने घरों की छतों वाला इलाका शुरू हो गया और उस आदमी ने उस छत पर छलांग लगा दी।

उसके पीछे पीछे निधि भी कूद गई। कूदने के बाद वह जमीन पर गोल गोल घूमी और वापिस खड़ी हो गई। गोल गुमना कूदने से होने वाले लॉस को कम करने का एक अच्छा तरीका होता है।

अब दोनों छतों पर दौड़ रहे थे और दूसरे घरों की छतों को क्रॉस कर रहे थे पर एक बात अभी भी समझ में नहीं आ रही थी कि आखिर उस आदमी का भागना और उसका इस केस से लेना देना!! आखिर कौन सी ऐसी कड़ी है जो इन दोनों को जोड़ती है।



________

अनजान साइंस लैब, वही जगह यहां खतरनाक एक्सपेरिमेंट हो रहे थे और जहां के बॉस ने एक खास तरह के तत्व जिसे अजिकसम कहा जाता है को ढूंढने के लिए कहा था।

इस साइंस लैब में वही दो आदमी जो पहले दिखे थे वह अपने बॉस के पास दौड़ते दौड़ते पहुंचे। ‌

"सर!!" उन्होंने अपने बॉस को पीछे से टोका जो आगे की ओर जा रहा था।

"हां" बॉस ने भी पीछे मुड़ जवाब दिया।

"सर हमें इंडिया में लड़का मिल गया जो हमारा यह काम करेगा"

"वाह बहुत खूब मेरे जवानों"

"लड़के का नाम विनम्र हैं, हमने उस तक टारगेट के नक्शे पहुंचा दिए हैं। वह 1 हफ्ते के अंदर अंदर हमें अजिकसम लाकर दे देगा"

"क्या सच में, अगर ऐसा हो गया तो यह तो किसी अमृत मिलने से कम खुशी वाली खबर नहीं, मुझे अब इस संसार का सबसे हाईटेक हुमन होने से कोई नहीं रोक सकता। देखना मेरे पास ऐसी टेक्नोलॉजी होगी जिसके बारे में किसी ने सोचा भी नहीं होगा"

बॉस अंदर ही अंदर खुश हो रहा था। उसकी खुशी जायज भी थी क्योंकि वह किसी ऐसे तत्वों को पाने वाला था जो खतरनाक होने के साथ-साथ दिलचस्प भी था। एक ऐसा तत्व जिसका टेंपरेचर अनंत है अर्थात वह कभी पिघलता नहीं।


***


 निधि और चाय वाले आदमी की पकड़म पकड़ाई जारी थी। चाय वाला आदमी एक बिल्डिंग के ऊपर चढ़े जा रहा था वह भी सीडीओ से। निधि भी सीडीओ पर चढ़ रही थी।

सीढ़ियों पर चढ़ने के बाद आदमी एक कमरे में घुसा और बाल्कनी तक जा पहुंचा। बाल्कनी से आगे जाने का रास्ता नहीं था पर बाहर लटक रहे ए.सी. के ऊपर ऐसी जगह जरूर थी जिससे बिल्डिंग के नीचे वापस नीचे उतरा जा सके।

वह चाय वाला वाला आदमी अपनी कमाल की कला का प्रदर्शन करते हुए सीधे उस ऐ.सी. पर जा कुदा।

हैरत वाली बात थी कि उसे यह करने से बिल्कुल डर नहीं लगा। ‌ ऐसा लग रहा था जैसे उसे खुद पर इतना विश्वास है कि वह मरेगा नहीं या फिर उसने इतना अभ्यास कर रखा है कि उसके लिए यह चीज बिल्कुल आम हैं। वह spider-man की भांति एक जगह से दूसरी जगह की ओर जा रहा था।

निधि ने बालकनी से नीचे जाने का रिस्क नहीं लिया। वह वापस पीछे सीढियों की और मूड गई।

सीढ़ियों के पास पहुंचते ही वह कूदकर सिढियों से नीचे की ओर उतरने लगी। निधि भी spider-man से कम नहीं थी। सीडीओ के साइड में जो स्टिक लगी होती है निधि उन्ही स्टिक पर एक स्टिक से दूसरी स्टिक पर लटकते हुए नीचे जा रही थी जिस वजह से उसे नीचे पहुंचने में बहुत कम टाइम लगा । यहां निधि ने अपनी कमाल की एथलीट प्रतिभा का एक नमूना दिया था जिसमें वह इतनी परफेक्ट थी कि बिल्कुल भी चूक ना हो।



NIDHI VOL-2 THE SECRET AGENT-13





begin the meeting  And catch up

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मीटिंग शुरू हुई।

सब अपनी अपनी जगह पर बैठे थे।

निधि और रोजर्स एक दूसरे के सामने बैठे थे तो बाकी आए पदाधिकारी उनके अगल-बगल तशरीफ़ रखे हुए थे।

बीच बीच में रुक रुक कर रोजर्स की नजर निधि की ओर जा रही थी हालांकि वह सामने थी पर फिर भी रोजर्स उससे नजरें चुराने की कोशिश कर रहा था और आई कांटेक्ट से बच रहा था। रोजर्स का दिमाग इस वक्त निधि को लेकर कम पर इस बात के बारे में ज्यादा सोच रहा था कि निधि को पता कैसे चला मैं कल रात कहां था ??

विलियमसन, वह इस मीटिंग में आगे ही आगे खड़े थे, एक बड़ी सी कंप्यूटर स्क्रीन के पास। उनके हाथ में एक लंबी स्टिक थी जिसे वह स्क्रीन के ऊपर अलग अलग जगह पर रख रहे थे। स्टिक के रखने के साथ ही स्क्रीन के दृश्य भी चेंज हो रहे थे। काफी सारे दृश्य चेंज करने के बाद वह एक दृश्य पर रुके और उन्होंने बोलना शुरू किया।

" लेडीस एंड जेंटलमेन, जरा ध्यान दीजिए। मैं आपको पूरी घटना शुरू से और विस्तार से बताने वाला हूं। वैसे तो इस घटना के बारे में हर कोई जानता है पर फिर भी कुछ चीजों पर बारीकी से नजर डालना आवश्यक हैं।"

"यह घटना 25 दिसंबर की है। एक ट्रेन 110 किलोमीटर पर हौर की स्पीड से न्यूयॉर्क के क्षेत्र की ओर जा रही थी।"

जैसे जैसे वह बोल रहे थे वैसे वैसे स्क्रीन पर ट्रेन की वीडियो और दृश्य भी दिख रहे थे।

" सबसे पहले ट्रेन में कुछ हलचल हुई। यात्रियों का कहना है कि लाइट जगने बुझने लगी और ट्रेन की स्पीड भी एकदम से बढ़ गई‌। लोग डरे हुए थे। किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था वह क्या करें क्या नहीं। अचानक इसके बाद सब कुछ सही हो गया। ट्रेन एक स्टेशन से जाकर अगले स्टेशन पर रूकी और यात्रियों को नीचे उतारा गया। कुछ कर्मचारी अंदर गए और उन्होंने देखा कि वहां ट्रेन के डब्बे में एक लाश पड़ी थी। इस पूरे मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच ने यही बताया कि उसके मरने का कारण किसी तरह का हार्ट अटैक था। मतलब साफ साफ शब्दों में कहा जाए तो इस बात का एक भी सुराग नहीं मिला कि उसका कत्ल हुआ है। लेकिन उसकी पत्नी वह पहली ऐसी शख्स थी जिसने उस पूरे घटना को कत्ल से जोड़ दिया। अब आप बताओ??"

विलियमसन ने मीटिंग में आए लोगों की तरफ अपना ईशारा किया। मीटिंग में एक अधेड़ उम्र का व्यक्ति जो दूसरी जांच एजेंसी का सदस्य था वह उठा और बोला।

"मुझे तो यह पानी की तरह साफ लग रही है। अब इतने सारे लोगों ने देखा है तो कोई छोटी गड़बड़ होती तो पता लग जाता"

" आपका कहना बिल्कुल सही है पर बिना सबूतों के हम कुछ भी नहीं कह सकते" मीटिंग में आया दूसरा व्यक्ति बोला।

"मैंने इस इलाके को कल नजदीक से देखा था" रोजर्स खड़ा हुआ और बीच में ही बोलने लगा।

"ओ सच में" इसी बीच निधी भी बोल पड़ी।"पर कल रात......" इसके बाद वह चुप हो गयी।

"हां कल मैं...... बारिश से पहले...वहीं था" रोजर्स थोड़ा सा हड़बड़ाया। एक तरह से वह निधि वाली बात को टालने की कोशिश कर रहा था" वहां ऐसा कुछ नहीं मिला जिससे इस केस में आगे बढ़ा जा सके.... सिवाए इस बात की वो अपनी पिछले जिंदगी में चार रिसर्च कंपनियों में एक साथ काम करता था। हालांकि ऐसी चीज कभी देखने को नहीं मिली लेकिन अगर हम चारों कंपनी से बात करें तो क्या पता कोई सुराग मिल जाए। हमें बस एक कड़ी ही चाहिए उसके बाद केस पूरा का पूरा खोल देंगे"

जब रोजर्स अपनी बात बोल रहा था निधि ने टेबल पर पड़ा लैपटॉप उठा उस पर अपने हाथ चलाना शुरू कर दिए थे।

"रॉयल बटालियंस, aj2 फ्यूचर, मेक मी अपग्रेड और द अमेरिका स्टेट.. क्या उन कंपनियों के नाम यही है" निधि ने तुरंत जवाब दिया।

"यह सब तो विश्व की जानी-मानी संस्थाएं हैं" विलियमसन बोला।

"हो सकता है इनमें से किसी का इसमें हाथ हो"रोजर्स ने जवाब दिया।

"यह संभव नहीं"निधि बोली" अगर इस संस्था को शामिल होना होता तो वह ऐसे काम ना करती। वह इससे कुछ बड़ा भी कर सकती थी। वैसे भी यह संस्थाएं इतनी फेमस हैं कि डायरेक्ट या इनडायरेक्ट यह किसी भी कत्ल में शामिल नहीं हो सकती'

"हो सकता है इन कंपनियों में काम कर रहा कोई आदमी इसमें शामिल हो"रोजेस बोला।

"हां यह हो सकता है" निधि ने जवाब दिया।

"हमें बस उसी आदमी को ढूंढना है" रोजर्स उठा और फटाक से बोला पर बीच में ही विलियमसन ने उसे टोक दिया।

"अरे रुको बेटा इतनी भी जल्दी क्या है! तुम अभी बैठो आराम से"इसके बाद उसने निधि की तरफ देखा"निधि!! मुझे ऐसा क्यों लग रहा है कि तुम इस केस के बारे में कुछ बताना चाहती हो पर बता नहीं रही"

"नहीं सर!! ऐसा कुछ नहीं, मैं बस एक बार घटनास्थल का मुआयना करना चाहती थी और उसकी बीवी से भी बात करनी है"

"हां क्यों नहीं!! हमारे आदमी तुम्हें घटनास्थल तक ले जाएंगे और तुम्हारी मुलाकात उसकी बीवी से भी करवा देंगे"

"अरे वहां कुछ नहीं है, मैं उस जगह को अच्छे से देख चुका हूं" रोजर्स ने सबका ध्यान अपनी तरफ खींचा। "तुम मेरे साथ चलो हम उस आदमी को ढूंढते जो इन चारो कंपनी में से किसी एक कंपनी में है"

"शांत रहो रोजर्स" विलियम्स ने फिर दोबारा रोजर्स को शांत रहने के लिए कहा।।"निधि पहले तुम घटनास्थल का मुआयना करो क्या पता तुम्हें वहां से कुछ खास मिल जाए"

"जी सर!!!" निधि ने जवाब दिया।

"और किसी को कुछ कहना है?"

"नहीं!! मीटिंग के बाकी सदस्य बोले"

"तो ठीक है यह मीटिंग यहीं खत्म होती है, निधि तुम घटना स्थल का मुआयना करोगी। रोजर्स!! तुम और सेजो दोनों इन चारों कंपनीयों से पूछताछ कर पता लगाओ"

"ठीक है सर" रोजर्स बोला।



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ठीक 9:00 बजे के आसपास निधि नाश्ता कर बाहर की और निकल चुकी थी। वही गाड़ी और वही रास्ता। निधि के ड्राइवर ने गाड़ी को मुख्य सड़क पर ले लिया और उसे निश्चित गति से आगे बढ़ाने लगा। वहीं दूसरी ओर रोजर्स और सेजो भी अपने कार्य के लिए निकल चुके थे। ‌

गाड़ी का ड्राइवर स्पेस एकेडमी का सदस्य था पर उसकी उम्र काफी थी। लगभग 60 साल के आसपास। निधि ने उससे बोल चाल शुरू की।

"क्या तुम यही के हो?" निधि को पता था कि ड्राइवर यहीं का है पर फिर भी उसने यह सवाल पूछा क्योंकि उसे बातचीत शुरू करनी थी और बातचीत शुरू करने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि आपको पता हो या ना हो, पर पूछ लो।

"जी मैडम , मैं यही का हुं" ड्राइवर ने टूटी-फूटी हिंदी में जवाब दिया।

"तुम्हारी हिंदी तो बड़ी अच्छी है, इतनी अच्छी हिंदी कैसे बोल लेते हो"

"जी मेम अब सारा दिन इंडियन लोगों के साथ काम करूंगा तो हिंदी तो सीख लूंगा ही"

"अच्छा है!! वैसे क्या तुमने इस ट्रेन वाली घटना के बारे में सुना है"  निधि ने अपनी बातचीत को ट्रेन वाली घटना की ओर मोड़ा। वह कुछ तथ्य जुटाना चाहती थी जिसका सबसे अच्छा तरीका फिलहाल तो उसके लिए यह ड्राइवर ही था।

"क्या बात कर रही है मैम, इस घटना के बारे में तो काफी लोग जानते है। इसके पीछे किसी का हाथ नहीं और यह बात में पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूं"

"अओह , और तुम्हें कैसे पता इसके पीछे किसी का हाथ नहीं"

"क्योंकि ऐसा कुछ होता अपराधी अब तक पकड़ा जाता"ड्राइवर ने जवाब दियाड

"आजकल के अपराधी शातिर हो गए हैं, वो अब किसी भी कत्ल को इस तरह से अंजाम देते हैं कि कोई यह भी पता ना लगा पाए कि उसका कत्ल हुआ है या फिर मौत। जब तक चीजों को अच्छे से देख ना लिया जाए तब तक कुछ नहीं कहा जा सकता" निधि ने एक लंबी सांस ली और अपनी बात वहीं खत्म कर दी। वह जानती थी कि इसके आगे बात करने का कोई फायदा नहीं है। इस आदमी से उसे सिर्फ इसी प्रकार की चीजों का पता चलेगा जो फिलहाल उसके लिए काम की नहीं।


*****

दूसरी ओर रोजर्स रोयल बटालियंस पहुंच चुका था जो उन संस्थाओं में से एक की जिसके पास सतीश विजयवर्गीय काम करता था। रोजर्स अपनी आदत के अनुरूप आसपास की लड़कियों को घूरते हुए साथ में सीटी बजाते हुए और मवालीयो वाली चाल चलते हुए सीधे ऑफिस में गया।

" और भाई क्या हाल-चाल है, ऑफिस तो बड़ा चमका रखा है तुमने, कौन सा डिटर्जेंट यूज करते हो??" जाते ही रोजर्स वहां के बॉस से बोला।

"वट, आई कांट अंडरस्टैंड एनीथिंग बिकॉज आई डोंट नो हिंदी"

"लो साले टकले को हिंदी नहीं आती" संस्था का बॉस टकला था जिस वजह से रोजर्स ने उस पर तंज कसा वह भी हिंदी में। "डूब मर कहीं जाकर"

"व्हाट यू वांट टू आस्क"संस्था के बॉस ने बड़े अजीब ढंग का मुंह बनाते हुए पूछा।

"ओके डन लिसन, आई एम फ्रॉम स्पेस अकैडमी एंड आई वांट टू नो , ऐ मैन हूज नेम इज सतीश विजयवर्गीय इजी वर्किंग हेयर"

"नो , इज नॉट वर्किंग, ही वाज वर्किंग। ई लेफ्ट माय जॉब 3 डे विफोर"

"आर यू सुयर"

"यस, यू कैन चेक अयूर कंपनी रिपोर्ट"

"ओके गिव मी टू इट"

रोजर्स ने कंपनी के कुछ कागजात और डॉक्यूमेंट लिए और उसे सेजो को दिया। "लो इसे बैग में रख लो, स्पेस अकैडमी जाकर इसकी जांच करेंगे"

इसके बाद दोनों वहां से निकल गए। निकलते वक्त काउंटर पर उनके सामने एक खूबसूरत फीमेल गर्ल्स खड़ी थी जिसके जाते-जाते रोजर्स नंबर ले गया।" बाय स्वीटहार्ट, नाइट को मिलते हैं"  और फिर इसके बाद दोनों दूसरी कंपनी के लिए रवाना हो गए।

इधर निधि घटना स्थल पर पहुंच चुकी थी। घटनास्थल पर वही के वही दृश्य उसके सामने थे जो कल रात रोजर्स को दिखे थे पर निधि के देखने का नजरिया अलग था और रोजर्स का अलग। बारिश का पानी अब सूख चुका था। पानी की सैलाब ही बाकी थी।

कार से नीचे उतर निधि ने एक काला चश्मा अपनी आंखों पर लगाया जो कोई आम चश्मा नहीं था। यह चश्मा आंखों को धूप से बचाने के साथ-साथ आसपास की जगहों को स्कैन करने के काम भी आता था। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो यह एडवांस चश्मा था जो नई टेक्नोलॉजी मे अब ज्यादा चलता नहीं। आज से 50-60 ( 2070-80) साल पहले भी इस चश्मे को उपयोग होता था और अब भी होता है पर बहुत कम। चश्मे में आसपास की जगहों का एक्सरे विजन साफ दिख रहा था और कुछ इंपोर्टेंट जगह पीले रंग में हाईलाइट भी हो रही थी। उंगलियों के निशान पैरों के कदमों के निशान इत्यादि भी चश्मे में हाईलाइट हो रहे थे और पीले रंग के दिखाई दे रहे थे। चश्मे की वजह से तेज धूप का दृश्य भी हरे रंग का दिखाई दे रहा था जो बिल्कुल वैसा ही था जैसा रात को नाइट लेंस लगाने के बाद दिखाई देता है।

निधि ने इसके बाद चश्मे को उतारा और उन हाइलाइटेड जगहों की ओर रुख किया। इस दौरान सबसे पहले वह उसी जगह पर गई जहां पर ट्रेन की चद्दर पर कई सारी उंगलियां के निशान बने हुए थे। निधि ने उन निशानों को हाथों से छुआ और फिर अपनी उंगलियों को छूकर देखा।

"बहुत पुराने हो चुके हैं यह तो" इसके बाद वह पीछे की ओर मुड़ी और उसने उस जगह की ओर नजर दौड़ाई जहां पर कभी लाश पड़ी थी।

उस जगह पर जाकर निधि कुछ देर तक उसे वैसे का वैसा ही देखती रही। काफी देर देखने के बाद वह दाएं और घुमी और उसके पास की सीट को देखने लगी।

तभी उसके फोन पर एक मैसेज आया। उस मैसेज में सतीश विजयवर्गीय की पत्नी का एड्रेस था। निधि ने वह मैसेज देखा और वहां से खड़ी होकर वापस ड्राइवर की तरफ चल दी।

_________

रोजर्स  कंपनी मेक मी अपग्रेड पहुंच चुका था। इसके बाद एक और कंपनी की जांच करना बाकी थी। दूसरी कंपनी की जांच में भी वह कुछ जरूरी दस्तावेज लेकर आ गया था।

इस कंपनी के बॉस काफी व्यस्त आदमी था जिस वजह से रोजर्स और उसके दोस्त को बाहर सोफे पर बैठकर वेट करना पड़ा। दोनों सोफे पर बैठे ईधर-उधर ताका झांकी कर रहे थे।

"सेजो" रोजर्स ने अपने पास बेठैं अपने दोस्त को बुलाया।

"हां बोल " सेजो ने जवाब दिया

"यार गड़बड़ हो गई"

"क्यों?? अब तुमने क्या कर दिया" सेजो अचानक से चौंक गया था।

"वह अपनी न्यू एजेंट है ना निधि वह तो एक नंबर की कमीनी निकली" रोजर्स धीरे से बोला।

"काहे रे"

"यार मैंने इतना ध्यान रखा, सबुत के नाम पर सुई की एक नोक तक नहीं छोड़ी, पर फिर भी पता नहीं उसे कैसे पता चल गया मैं कल रात कहा था"

सेजो ने अपनी आंखें बड़ी की "क्या सच में वह जानती हैं"

"हां यार, उसे पता लग गया मैं कल रात लड़की के साथ इलू इलू ...."

"बाप रे मतलब वह तो बहुत होशियार खोपड़ी है"

"हां यार साला बच के रहना पड़ेगा उस से , पर सोचने वाली बात है उसे पता कैसे चला। मैं भी एक जासूस हूं मुझे पता है एक जासूस की नजर कहां कहां तक जा सकती हैं। मैंने उन सभी सबूतों को छिपा दिया पर फिर भी उसने ढूंढ लिया पता नहीं वह कौन सी बारिक कड़ी थी जो उसे मुझ में दिख गई"

"अगर ऐसा है तो वह उस जगह से भी कुछ ढूंढ लेगी जहां वह अभी जांच करने गई" सेजो ने अनुमान लगाया।

"हां , हो सकता है पर मुझे नहीं लगता उसे वहां से कुछ मिलेगा क्योंकि मैंने मतलब हमने कल रात उस जगह को अच्छे से देखा था"

"तुम ऊपर ऊपर से चीजों को देखते हो या फिर बारिक से भी देखते हो तो ज्यादा बारिक से, पर मुझे लग रहा है कि निधि तो बारिक से भी नीचे जाकर देखती है माइक्रो लेवल पर!! क्योंकि जिस तरह से उसने तुम्हारा राज पता लगाया उस हिसाब से तो वह कुछ भी कर सकती है।"

"साला मुझे तो लगता है वह तो माइक्रो से भी नीचे जाती होगी एटम वटम को चाट मारती होगी!! हाहाहा" रोजर्स ने मजाकिया वाले अंदाज में कहा।

थोड़ी ही देर बाद अंदर से एक लड़की बाहर आई और उसने दोनों को अंदर जाने के लिए कहा जिसके बाद रोजर्स और उसका दोस्त दोनों ऑफिस के अंदर की ओर चल गए और उन्होंने वहां बातचीत शुरू कर दी।

NIDHI VOL-2 THE SECRET AGENT-12




अब तक 7:20 मिनट हो चुके थे और निधि का कोई अता-पता नहीं था।

रोजर्स को इस बात का पता चल गया था कि निधि अभी तक कमरे से बाहर नहीं आई तो शान शान में वह भी निधि के कमरे की ओर चल पड़ा।

"क्या बात है शहजादी अभी उठी नहीं"

रोजर्स ने निधि के कमरे के बाहर खड़े दो आदमियों को कहा जो अभी तक इसी इंतजार में थे कि वह दरवाजा खटखटाया या नहीं।

"नहीं सर, अभी तक अंदर से कोई जवाब नहीं आया"

"दरवाजे तो खटखटाओ"

"सररर...." आदमी अचानक बोलते बोलते खामोश हो गया।

"क्या सर..!! दरवाजा खटखटायो" रोजर्स ने ऐसी रोबदार आवाज में कहा कि आदमी ने एक झटके में ही डरते हुए दरवाजा खटखटा दिया।

अंदर से कोई हलचल नहीं हुई।

थोड़ी देर और इंतजार करने के बाद भी अंदर से कोई हलचल नहीं हुई।

"दोबारा खटखटायो"

आदमी ने दरवाजा दोबारा खटखटाया।

फिर से वही प्रतिक्रिया, अंदर से कोई हलचल नहीं।

"सब ठीक तो है ना" रोजर्स ने कहा।

"पता नहीं सर" दोनों आदमी में से एक आदमी ने जवाब दिया

"दरवाजा तोड़ दो"

"क्या सर.. पर मेंम"

"मैम को मारो गोली, दरवाजा तोड़ दो"

"सर हम उनकी प्राइवेसी भगं नहीं कर सकते"

"तुम टेंशन क्यों ले रहे हो । मैं हूं ना, कह देंगे बाहर इमरजेंसी आ गई थी। या फिर कह देना आग लग गई"

रोजर्स ने मजाकिया अंदाज में बात को टालते हुए कहा।

"सर..!!" दोनों आदमियों की तो अभी भी हिम्मत नहीं हो रही थी निधि के दरवाजे को हाथ लगाने की।

"सरवर नहीं तुम दरवाजा तोड़ दो"

अब दोनों आदमियों के पास जवाब देने के लिए और कुछ नहीं था। दोनों ने हिम्मत कर दरवाजे की ओर कदम बढ़ाएं और दरवाजे को एक ही झटके में तोड़ दिया।

धड़ाम

दरवाजा टूटा.

और खच खच खच , निधि के रिवाल्वर की गोलीयां भी चली। पर खुदा की मेहरबानी पिस्तौल खाली था।

दोनों आदमी जो इस दृश्य को देख रहे थे और रोजर्स तीनों का मुंह खुला का खुला रह गया।

कारण समझ में नहीं आ रहा था, वह अपनी तरफ तने पिस्तौल को देखकर हैरान थे या निधि की खूबसूरती को।

आनन-फानन में निधि ने पिस्तौल पीछे की ओर किया और अपने बाल कानों के पीछे करने लगी।

रोजर्स तो अभी भी खामोश था और निधि को घूर रहा था।

"मैम सॉरी वो सर" दोनों आदमियों में से एक आदमी ने बोलना शुरू ही किया था कि रोजर्स ने उसे बीच में ही टोक दिया।

"क्या सर सर सर, मैंने इनसे कुछ नहीं कहा था उन्होंने अपने आप दरवाजा तोड़ा है । " रोजर्स ने कहा और खामोशी से निधि की तरह वापिस देखने लगा।

दोनों आदमी तो धर्म संकट में फंस चुके थे एक तरफ खाई और एक तरफ कुआं। सामने निधि थी तो पीछे रोजर्स। दोनों अपने अपने बड़े पदों पर थे। अगर एक की भी बात पर कोई प्रतिक्रिया दी तो दोनों की नौकरी जा सकती थी। इसलिए उन्होंने बिना कुछ बोले कमरे से बाहर का रुख किया।

"तुम... तुम कौन?" निधि ने सामने खड़े रोजर्स से पूछा जो उसे बड़े ही अजीब ढंग से घूर रहा था।

"मैं, कमाल है तुम मुझे नहीं जानती, क्यों तुम्हारे घर अखबार नहीं आता" रोजर्स ने एक बड़ा ही पुराना यो यो हनी सिंह का गाना दोहराते हुए उसी स्टाइल में कहा।

"यह गाना बहुत पुराना हो चुका है, ??"

"मैं रोजर्स हुं, यहां का नंबर वन जासूस" रोजर्स ने इतराते हुए जवाब दिया।

"ओ अच्छा है" निधि बोली और पीछे की ओर पलट पानी की बोतल उठा पानी पीने लगी।

रोजर्स भी पास के सोफे पर बैठ गया।

"तुम्हें ज्यादा सोने की आदत है क्या?" रोजर्स ने कहा और निधि पानी पीते पीते बीच में ही रुक गई। उसने अभी तक यह किसी को भी पता चलने नहीं दिया था कि उसे सोने का बहुत बड़ा शौक है।

"नहीं तो... बस रात को सफर किया था इसलिए ज्यादा नींद आ गई"

"तुम एक जासूस को चकमा दे रही हो, वह भी एक जासूस हो कर , अरे हम तो सामने वाले की आंखों को देख कर बता देते हैं कि वह कौन से देश से हैं, जैसा कि तुम इंडिया से हो" ।

"इसमें कौन सी बड़ी बात है, यह तो मैं भी बता दूंगी तुम न्यूयॉर्क से हो और कल रात!!" निधि कुछ पल रुकी और उसने रोजर्स के हावभाव को देखा, एक नजर उसके कपड़ों की तरफ दौड़ाई और जूते भी देखें। इस दौरान रोजर्स का भी माथा पसीना पसीना हो गया था क्योंकि वह जानता था एक जासूस की नजर बहुत पेंनी होती है और उसकी एक गलती उसका भांडा फोड़ सकती है।

"तुम कल रात.." निधि ने आगे बढ़ना शुरू किया"किसी लड़की के साथ... नहीं नहीं । शक्ल से तो तुम ऐसे नहीं लगते बाकी होने को कुछ भी हो सकता है" निधी ने अपनी पानी की बोतल का पूरा पानी खत्म किया और फिर बाथरूम की और चली गई।

बाहर रोजर्स हैरान का हैरान था। वह शीशे की ओर जा कर खुद को देखने लगा।

"अरे साली ने पकड़ लिया, मैंने क्या सुराग छोड़ दिया" उसने अपने कपड़े अच्छे से टटोले , जूतों को देखा। आंखें चेक की। "कमाल है साला कहीं भी सुराग नहीं तो उसको पता कैसे चला"

इतने में वही दो आदमी वापस आ गए जो अब से कुछ देर पहले गए थे।

"सर नीचे मीटिंग शुरू हो चुकी है आपको और निधि मैम को बुलाया है"

"ठीक है तुम चलो मैं आता हूं, और वह भी आती है"

दोनों आदमी कमरे से चले गए। रोजर्स ने एक बार फिर से खुद को आईने में देखा।

लगभग 15 मिनट बाद।

सब लोग मीटिंग में निधि का इंतजार कर रहे थे। दूर से निधि सैंडल की टिक टॉक आवाज करते हुए सीधे मीटिंग हॉल में आयी। वह अपनी स्पेस अकैडमी वाली ब्लैक ड्रेस में थी।

"ओ आओ निधि आओ , हमें कब से तुम्हारा ही इंतजार था।"रोजर्स के पिता ने कहा। सब लोग निधि की तरफ मुंह फाड़ देखने लगे। पूरी मीटिंग में निधि एकमात्र फीमेल ऑफिसर्स थी।

"बेटा यह लोग तुम्हारा टैलेंट देखना चाहते हैं, और तुम अपना टैलेंट उस आदमी पर दिखाओगी।"

"टैलेंट, किस तरह का टैलेंट" निधि ने मासूमियत से पूछा

" कुछ नहीं है, बस तुम जो वह सामने आदमी देख रही हो वह हमें बता नहीं रहा कि उसके इरादे क्या हैं। अगर तुम हमें पता कर बता दो तो हमारा बहुत बड़ा काम हो जाए। हम उनके पूरे के पूरे ग्रुप को पकड़ लें जिन्हें हम अभी तक नहीं पकड़ पाए।"

"इसमें कौन सी बड़ी बात है, यह तो बहुत आसान है, आप लोग भी कर सकते हैं"

सब लोग एक दूसरे के चेहरे की तरफ देखने लग गए। "हु...आसान है पहले जाकर बात तो करो एक बार" एक आदमी मन ही मन बोला।

"हां बेटा हां, आसान है इसीलिए तो तुम्हें यह काम दिया" रोर्जस का पिता भी बड़े अजीब ढंग में बोला। "तुम जाओ और हमें बताओ उनका इरादा क्या है और उनका ग्रुप कहां है।??"

" ठीक है, मुझे बस कॉफी के दो कप चाहिए" निधि ने बॉस से कहा।

"कॉफी के दो कप, उसका क्या करोगी?" बॉस ने बड़े जिज्ञासु अंदाज में पूछा।

"कॉफी पीने के लिए होती है करना क्या है उसका" निधि ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया।

"हां भिजवाते हैं, तुम चलो अंदर"

उसने कहा इसके बाद निधि ने टेबल पर पड़े एक लैपटॉप को उठाया और अंदर की ओर चल दी जहां वह आदमी कुर्सी पर बैठा था। आदमी का शरीर जंजीरों से जकड़ा पड़ा था और उसके हाथों में भी हथकड़ीया लगी हुई थी।

"इसकी हथकड़ियां खोल दो, और यह बाकी जो भी बांध रखा है इसे भी खोल दो। तुम लोगों ने तो इसे ऐसे बांध रखा है जैसे यह किसी बाजार का पागल हाथी हो" निधि ने हल्के से कहा और पास खड़े आदमी को उसे आजाद करने का इशारा किया।

"मेम जी यह बहुत खतरनाक है आजाद करना ठीक नहीं रहेगा"

"तुम्हें किसने कहा यह खतरनाक हैं" निधि ने कहा और वह उसके सामने एक चेयर पर जाकर बैठ गई और उसकी आंखों में आंखें डाल कर देखने लगी।" मुझे तो यह कहीं से भी खतरनाक नहीं लग रहा"

इतने में कॉफी के दो कप भी अंदर आ गए। आदमी की जंजीरे इत्यादि खोल दिया जाता है।

अब निधि और वह आदमी दोनों एक दूसरे के आमने सामने बैठे थे और कॉफी के कप उनके सामने की टेबल पर पड़े थे। निधि की आंखें अभी भी उस आदमी की आंखों को घूर रही थी। निधि का इरादा गलत नहीं था वह उसकी आंखों को पढ़ रही थी और यह जानने की कोशिश कर रही थी कि उस आदमी का स्वभाव कैसा है। यह कुछ जासूसी कलाए होती हैं जो हर एक जासूस को आती हैं।

"तो तुम यहां के सबसे खतरनाक ग्रुप के खतरनाक और खूंखार टेररिस्ट हो" निधि ने कॉफी का कप उठाया और उसे पूछा।

आदमी ने कोई जवाब नहीं दिया। वह खामोशी से बैठा रहा और उसने कॉफी के कप को भी नजरअंदाज किया।

"मैंने तुमसे कुछ पूछा है" निधि ने फिर पूछा।

आदमी अभी भी कुछ नहीं बोला।

"तुम चिंता मत करो । अगर तुम इतना बता दोगे तो तुम्हारा राज बाहर नहीं आ जाएगा। मैं तुमसे सिर्फ इतना पूछ रही हूं क्या तुम इस शहर के सबसे खतरनाक आंतकवादी ग्रुप के एक खतरनाक आंतकवादी हो या नहीं"

आदमी अभी भी खामोश था।

"नहीं" कुछ देर खामोश रहने के बाद आंतकवादी बोला।

"बहुत अच्छे, बस इतना ही तो जवाब देना था। तुम ऐसे ही बिना मतलब के घबरा रहे हो। तुम चिंता मत करो मैं तुम से ऐसे सवाल बिल्कुल नहीं पूछने वाली जिसका जवाब तुम नहीं देना चाहते। मैं सिर्फ ऐसे सवाल पूछूंगी जो नॉर्मल हो और जिसका जवाब कोई भी दे सकता हो। जैसे कि तुम कहां से हो, पहले क्या करते थे। क्या तुम्हारी फैमिली है या नहीं। बस ऐसे सवाल जो कि कॉमन होते हैं। इनका जवाब देने से तुम्हारा कोई राज बाहर नहीं आने वाला। लो यह कॉफी लो और पियो। बिंदास रहो यार टेंशन किस बात की है। आंतकवादी हो तो क्या हुआ, सब होते हैं तुम अकेले थोड़ी ना हो" निधि सामने वाले आतंकवादी को अपनी बातों में उलझा रही थी। उसकी कम्युनिकेशन स्किल सच में बहुत शानदार है। इससे पहले उसने डॉन को भी अपनी बातों में बुरी तरह से फंसा दिया था और वहां की आदमियों को भी। ‌वहां उसने बहुत चलाकी से काम लिया था और एक-एक कर आदमियों को बाहर भेजा था जिसके बाद उसने अपने लिए खतरा कम कर डॉन को पकड़ा। यहां भी वह कुछ ऐसा ही कर रही थी। पहले कुछ बातों से वह उस आदमी का मनोबल बढ़ाना चाहती थी और उसके कॉन्फिडेंस को  अधिक और डर को कम करना चाहती थी ताकि वह खुलकर बात कर सके।

वह आदमी अर्थात आतंकवादी आदमी अब कॉफी का कप उठा कॉफी पीने लगा।

"तो बेसिकली क्या तुम यही न्यूयॉर्क से हो?"

"हां" आदमी ने जवाब दिया।

"झूठ" निधि बोली"देखो तुम झूठ मत बोलो, सिर्फ सिंपल सी चीज पूछी है। अगर इसमें भी झूठ बोलोगे तो कैसे चलेगा"

"नहीं मैं सच बोल रहा हूं, मैं यही न्यूयॉर्क से हूं"

"तुम्हारी आंखें और दाढ़ी का अंदाज और स्किन का कलर बता रहा है कि तुम इरान या इराक के लगते हो" निधि भी उसे बातों में उलजाने में कामयाब हो रही थी। असल में निधि को कोई फर्क नहीं पड़ रहा था वह झूठ बोल रहा है या सच वह तो सिर्फ उससे ज्यादा से ज्यादा बातें करवाना चाहती थी। एक तरह से यह निधि के तुके ही थे जो हो सकता है सही भी लग जाए जैसा कि अक्सर लगते आ रहे हैं।

"यह दाढ़ी और लुक हमें रखने के लिए कहा जाता है ताकि कोई हम पर शक ना करें"

"दाढ़ी का स्टाइल बदलने से तुम शक की नजरों से कैसे बच जाओगे , यह बात समझ में नहीं आई। मतलब अगर तुम सच में बाहर से होते ओर न्यूयॉर्क के आदमियों के हिसाब से दाढ़ी और स्टाइल रखते तब तो चलो माना कि तुम बच रहे हो पर न्यूयॉर्क में रहकर और न्यूयॉर्क के होकर इराक वाला हुलिया रख रहे हो तो इसमें कैसा शक वक"

"मैं यहां जिस कंपनी में काम करता था वहां इराक के बंदों की भर्ती की जाती थी"

"ओह तब ठीक है, समझी"

"तुम्हारी फैमिली है" बीच में ही निधि लैपटॉप पर कुछ टाइप करने लग गई। आदमी थोड़ा परेशानी में आ गया और सोचने लगा कि निधि क्या टाइप कर रही है और निधि ने भी इस बात को समझ लिया था तो उसने स्क्रीन उसकी ओर घुमा दी। "चिंता मत करो, मैं अपनी फेसबुक टाइमलाइन चेक कर रही हूं क्या है कि काम के चक्कर में टाइम नहीं मिल पाता तो सोचा अभी कर लुं। घबराओ मत तुम बताओ" निधि ने अपने लैपटॉप पर खुली अपनी फेसबुक आईडी उस आदमी को दिखाई जिसके बाद उसे भी यकीन हो गया कि निधि लैपटॉप पर कुछ गलत नहीं कर रही पर जैसे ही निधि ने सक्रिन अपनी और कि उसने स्पेस अकैडमी को ऑफिशल एप खोलो और बॉस अर्थात रोजर्स के पिता को मैसेज कर दिया।"पता करो यहां कितनी कंपनियां है जहां इराक के लोगों की भर्ती की जाती है??" उसने अपनी मैसेज में टाइप किया।

इधर बाहर रोजर्स के पिता के पास मैसेज पहुंचा।

"निधि ने कुछ पता करने को कहा है, मतलब वह कामयाब हो रही है‌ । मानना पड़ेगा उसके टैलेंट को" उसने सभी लोगों के बीच कहा जिसके बाद सभी लोग वाही वाही करने लगे। पर सिर्फ ऊपर ऊपर से। यह तो अभी शुरूआत है वह ज्यादा कामयाब नहीं हो पाएगी। अंदर ही अंदर से लोग तो यही सोच रहे थे।

"क्या मैं यह जान सकती हूं तुम्हारे बच्चे हैं? वह पढ़ाई करते हैं या नहीं? मतलब आजकल स्टडी बहुत जरूरी हो गई है"

"हां छोटी बच्ची है , सिक्स क्लास में पढ़ती है" आंतकवादी आदमी इतना बताना तो नहीं चाहता था पर निधि ने जिस अंदाज और मासूमी से पूछा था कि उसके मुंह से निकल गया। निधि की बातों ने आसपास के माहौल को थोड़ा भावुक कर दिया था और उसके बात करने के अंदाज ने भी उस आदमी को काफी प्रभावित किया। इतना कि वह अपने आप दूसरी बातों का जवाब देने लग गया।

"ग्रेट" निधि ने फौरन लैपटॉप में दूसरा मैसेज टाइप किया"आंतकवादीयों के पास पैसों की कमी नहीं होती, यकीनन लड़की किसी बड़े स्कूल में पढ़ती होगी। पता करो यहां ऐसे कितने स्कूल है जहां की फीस अधिक है और सिक्स क्लास में ऐसी कुल कितनी लड़कियां हैं"

"लड़की की मॉम है या नहीं , आई मीन तुम लोगों का काम खतरनाक होता है बस इसलिए पूछा"

"हां है"

"ओह कहां से हैं वह"

"वह कैनेडियन है"

"गुड मतलब कनाडियन लड़की से शादी की है। क्यों? न्यूयॉर्क में लड़कियों की कमी थी" निधि ने फौरन दूसरा मैसेज टाइप किया "पता करो कुल कितनी लड़कियां हैं जो कनाडियन है और सिक्स क्लास में है और उनका एड्रेस निकलवायो और फिर पता करो उनमें से कौन है जिसके पापा ईराक कंपनी में काम करते हैं"

"तुम्हारे ग्रुप का सबसे खतरनाक रूल क्या है" निधि ने आगे पूछा।

"मर जाएंगे पर कभी अपने संगठन का राज नहीं बताएंगे"

"सच में, क्या तुम लोगों को मरना इतना आसान लगता है, मतलब क्या, मरने में मजा आता है, या मरने से कुछ ऐसा मिलता है जो जीते जी नहीं मिलता"

"हां, मरने के बाद इंसान परमात्मा के पास जाता है"

"ग्रेट ऐसे काम करके परमात्मा के पास जाओगे,पर क्या बोलोगे परमात्मा को!!! हम नीचे 400-500 आदमियों को टपका कर आए हैं"

"तो इसमें गलत क्या है, वह आदमी भी कौन सा भलाई का काम कर रहे हैं। उनकी वजह से न जाने कितने लोगों को परेशान होना पड़ता है। मेरी बेटी जो अब एक अच्छे स्कूल में पढ़ रही है उसे पहले अच्छे स्कूल में दाखिला सिर्फ इसलिए नहीं मिला था क्योंकि वहां सीटें ही नहीं थी। अगर वह अच्छे स्कूल में ना पढे तो आगे जाकर उसे काम नहीं मिलने वाला, उसकी शादी नहीं होने वाली। ऐसा ही न जाने कितने लोगों के साथ होता होगा। मैंने उस स्कूल के 10 लड़की को मारा तब जाकर मेरी बेटी को एडमिशन मिला और इसके बाद और 9 बेटियों को। क्या मैंने कुछ गलत किया" आतंकवादी आदमी ने जवाब दिया जो पूरी तरह से पागलों वाली बातें कर रहा था। उसने जो बात कही वह उसके नजरिए से सही थी पर सब जानते हैं कि यह बिल्कुल गलत है।

"नहीं नहीं तुमने कुछ गलत नहीं किया, गलती तो उन लोगों की है जिन्होंने उस स्कूल में अपनी बेटी का दाखिला किया था। तुमने अपनी बेटी के दाखिले के लिए 10 छोटे बच्चों की जान ली हो सकता है कल को कोई दूसरा आतंकवादी अपनी बेटी के दाखिले के लिए और 10 बच्चों की जान लें और इस बात का भी चांस है कि उन 10 बच्चों में तुम्हारी बच्ची भी हो" निधि ने अपनी बात कही। बात सुनते ही आतंकवादी पूरी तरह से भड़क उठा। वह लगभग अपनी कुर्सी पर से खड़ा हो चुका था।

"तुम अपने आपे से बाहर जा रही हो" उसने निधि को धमकाते हुए कहा

"तो मैंने इसमें गलत क्या कहा, अगर कुछ कहा हो तो बताओ!! क्या मैंने कुछ गलत कहा। अगर ऐसा है तो माफ कर देना भाई और क्या कर सकती हूं" निधि ने बोला और इस बात को यहीं पर खत्म करने की कोशिश की।

सामने वाला आदमी भी कुछ देर खड़ा रहा और फिर शांत होकर वापस बैठ गया।

कमरे में कुछ देर शांति रही। ‌ तभी निधि के लैपटॉप स्क्रीन पर एक मैसेज आया।

ऐसी 12 लड़कियां हैं जो बड़े स्कूल में पढ़ती है और छठी क्लास में है तथा उनका हुलिया कनाडियन है। पता करो उसकी उम्र क्या है ताकि हम उन 12 लड़कियों में से उस उम्र वाली लड़कियों को अलग कर सकें।

निधि ने मैसेज पढ़ने के बाद वापस अपनी बात शुरू की।

"देखो ऐसे छोटे-छोटे बच्चों की जान लेना गलत है, पता नहीं क्या उम्र होगी उनकी। शायद तुम्हारी बेटी की उम्र की होगी कितने साल की हैं वह, क्या तुम बता सकते हो ताकि तुम्हें इस बात का अंदाजा हो तुमने कितनी बड़ी गलती की है"

"नहीं"

"तुम अपनी बेटी की उम्र नहीं जानते या तुम्हें खुद पर पछतावा हो रहा है जिस वजह से बताना नहीं चाहते"

"वह 14 साल की है"

निधि ने तुरंत मैसेज टाइप किया ....14 साल....।

"सच में काश तुम्हें थोड़ा सा भी गिल्टी फील होता, और तुम हमें बता देते कि तुम्हारा ग्रुप कहां हैं।"

'नहीं मैं यही राज कभी नहीं बताऊंगा, मरने के बाद भी नहीं" आंतकवादी आदमी अपनी बातों पर पूरी तरह से अडिग था।

निधि के लैपटॉप स्क्रीन पर दोबारा मैसेज आया है। ऐसी सिर्फ तीन लड़कियां हैं, साइना, सरीवा और नायला।

निधि ने तुरंत टाइप किया" मुझे फोन करो"

सामने वाला एक आदमी ऐसा ही करते हैं और निधि को फोन मिला देता हैं।

"एक्सक्यूज मी" निधि ने सामने वाले आतंकवादी को कहा और फोन उठाया। कुछ देर सामने की बात सुनने के बाद वह बोली।

"क्या तीन लड़कियां किडनैप हो गई है, कहां, क्या, उसे उसी ग्रुप ने गिरफ्तार किया है जिसका आदमी हमने पकड़ रखा है" निधि जानबूझकर ऐसा बिहेव कर रही थी जैसे सामने से वह बिल्कुल ऐसी ही बातें कर रही हो"तीन लड़कियां किडनैप हुई है जिनका नाम है साइना, सरीवा और नायला" नायला का नाम सुनते ही आंतकवादी का चेहरा पसीनो पसीना हो गया। "क्या वह उसे जान से मारने की धमकी दे रहे है, नहीं हमें उन्हें बचाना होगा।" निधि आगे जानबूझ कर ऐसे ही बातें करने लगी।

"कोई बात नहीं, यह नहीं बताएगा तो हम खुद ढूंढ लेंगे पर हम उन लड़कियों को कुछ नहीं होने देंगे"

"ऐसे कैसे पॉसिबल नहीं है उस ग्रुप को ढूंढना"

"नहीं"

"मतलब कोई चांस नहीं उन लड़कियों को बचाने का"

"अच्छा एक तरीका है, अगर हमें उस ग्रुप का पता लग जाए कि वह कहां है तब बचा सकते हैं"

निधि ने मायूसी वाला चेहरा बनाया।

"काश मैं उन तीनों लड़कियों को बचा पाती"

सामने वाला आतंकवादी निधि की बातें सुन पूरी तरह से परेशान हो चुका था।‌एक तरह से वह निधि के जाल में फस चुका था तो बिना कुछ सोचे समझे उसने बोल दिया।

"मैं बताने के लिए तैयार हूं पर वादा करो तुम उन लड़कियों को कुछ नहीं होने दोगीं"

"क्या.. पर क्यों... तुम्हारा दिल इतनी जल्दी कैसे पिघल गया"

"दरअसल" आतंकवादी बोलते बोलते बीच में ही रुक गया।

सही कहा है किसी ने, रिश्ते बड़े बड़े आदमी को मजबूर और लाचार बना देते हैं। जब बात खुद पर और अपनों पर आती है तो आदमी कुछ का कुछ कर जाता है। आज जो आतंकवादी अपना राज़ किसी भी हाल पर बताने के लिए तैयार नहीं था वह अपनी बेटी की बात आते ही सब बताने को राजी हो गया। यह एक तरफ से निधि के चलाकी थी और दूसरी तरफ से एक इंसान की कमजोरी।

निधि का मिशन पूरा हुआ। ग्रुप का पता चल गया। सामने वाले आदमी जो मीटिंग में आ रखे थे उनके हैरानी तो कब की खत्म हो चुकी थी। सब लोग अंदर ही अंदर से मान चुके थे कि निधि कोई ऐसी वैसी चीज नहीं। ‌ निधि तो खतरनाक है भाई। वैसे भी यह तो अभी ट्रेलर है आगे आगे देखो होता है क्या।

कॉफी का कप कब खत्म कर निधि बाहर आई और उसने लैपटॉप को उसी टेबल पर रख दिया और एक कुर्सी पर जाकर बैठ गई।

"लो आपका काम हो गया"

रोजर्स का पिता, वह तो नि-शब्द था और रोजर्स कि होश तो पहले ही उठ चुके थे जब निधि ने बताया कि वह कल रात कहां था। ‌

NIDHI VOL-2 : THE SECRET AGENT 11




Title - Tell me

____________________________

एक अनजान जगह

देखने से कोई साइंस लैब लग रही थी।

जगह के हावभाव, वहां का साजो सामान भी वैसा ही था।

दो आदमी डॉक्टर के वेश में या फिर यूं कह लो कि वह वहां के कर्मचारी होंगे जिन्होंने सफेद पोशाक पहन रखी थी। दोनों के हाथों में एक फाइल थी और वह एक कमरे की और जा रहें थे जहां एक मोटा आदमी लैपटॉप पर कुछ देखने में व्यस्त था।

मोटा आदमी शक्ल से उनका बॉस लग रहा था। उसके आसपास फाइलों का ढेर लगा पड़ा था। नजर सामने लैपटॉप स्क्रीन पर थी। आंखों पर बड़े-बड़े चश्मा और मुंह की सफेद दाढ़ी उसकी उम्र लगभग 50 साल के आसपास बता रही थी।

"सर एक बुरी खबर है।" दोनों सफेद पोशाक वाले आदमियों में से एक आदमी बोला। वह आदमी थोड़ा सहमा हुआ था मानो उसे अपने शब्द कहने से डर लग रहा हो।

"क्या" बॉस ने अपने चश्मे को थोड़े नीचे करते हुए पूछा।

"वोकसवर में हमारा आदमी पकड़ा गया, किसी निधि नाम की एजेंट ने पकड़ा है"

"इसमें कौन सी बुरी खबर है, पकड़ा गया तो पकड़ा गया"

"सर उसे जिस काम के लिए इंडिया में अपॉइंटमेंट दिया गया था वह अब नहीं हो सकता"बस यह सुनते ही बॉस का जैसे पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया ।

"क्या कहा, मेरा काम नहीं हो सकता। तुम्हें पता है ना मुझे वह चीज हर हाल में चाहिए और वह मुझे इंडिया में ही मिलेगी अब तुम क्या चाहते हो मैं खुद उसे इंडिया जाकर ढूंढूं" बॉस ने सख्त लहजे में कहा।

"नहीं सर हम कोशिश करेंगे कि कोई दूसरा आदमी मिल जाए जो हमारा यह काम कर सके बस आप हमें थोड़ा सा वक्त कीजिए"

"वक्त ही तो नहीं है हमारे पास"

इतना कहने के बाद उस आदमी ने अपने लैपटॉप की स्क्रीन पर एक बटन दबाया। बटन दबाने के तुरंत बाद कमरे की आस पास की दीवारें हिलने लगी। वहां का दरवाजा अचानक बंद हो गया और आसपास की खिड़कियों के सामने सफेद स्क्रीन आ गई। धीरे धीरे कमरे का फर्श नीचे खिसकने लगा और कमरा एक लिफ्ट की भांति नीचे जाने लगे। थोड़ी देर नीचे जाने के बाद उनके सामने एक दरवाजा खुला जिसके बाद अंदर से दूसरा ही शानदार दृश्य नजर आया।

अंदर कोई एक्सपेरिमेंट हो रहा था।

"वक्त ही तो नहीं है हमारे पास, हमारे एक्सपेरिमेंट धीरे धीरे फेल होते जा रहे हैं। उसके बिना हम वह हासिल नहीं कर सकते जो हमें हासिल करना है। उसका होना बहुत जरूरी है बहुत मतलब बहुत"

बॉस और दोनों सफेद पोशाक वाले आदमी पास ही टेबल पर हो रहे एक्सपेरिमेंट पर पहुंचे।

"क्या यह मशीन अब काम कर रही है??" बॉस ने उस एक्सपेरिमेंट को पूरा कर रहे आदमी से पूछा।

"हां सर बस एनर्जी की कमी है, अगर इसको 12000 वोल्ट के आसपास एनर्जी मिले तो यह परमाणु बम से भी ज्यादा तबाही मचा दे"

"बहुत शानदार"

इसके बाद वह दूसरे एक्सपेरिमेंट टेबल के पास गया।

"क्या तुमने वह केमिकल बना लिया जिससे एक इंसान की ताकत डेढ़ गुना हो जाती है"

"हां सारे केमिकल बना पड़ा है, बस उसमें एक एलिमिनेट की कमी है और अगर वह मिल जाए तो हम आदमी की ताकत डेढ़ गुना तो क्या 10 गुना भी बढ़ा सकते हैं"

"देखा" बॉस ने सफेद पोशाक वाले आदमियों से कहा"बस सभी एक्सपेरिमेंट में सिर्फ एक चीज की कमी है वह खास एलिमिनेट जो इंडिया में है"

इसके बाद बोस ने अपनी जेब से एक रिमोट निकाला और उसका बटन दबाकर सामने एक बड़ी सी स्क्रीन को ऑन किया।

स्क्रीन को ऑन करने के बाद वहां एक डीएनए जैसी संरचना आ रही थी जो काले रंग की थी। ( डीएनए कि रचना सफेद रंग की होती है पर जहां जो सरचना दिखाई दे रही थी वह काले रंग की थी)

"पिछले कई सालों से हमें इसी एलिमिनेट की तलाश थी। एक खास तरह का तत्व जिसे अजीकसम कहा जाता है। यह तीन प्रकार का होता है और तीनों ही अवस्थाएं इस धरती पर उपलब्ध है। 2021 के आसपास इस तत्व को अंतरिक्ष से धरती पर लाया गया था जहां इससे अद्भुत प्रयोग किए गए। इसके खास गुणों का पता लगाया गया। इसका सबसे शानदार गुण था कि इसका टेंपरेचर अनंत है अर्थात यह कभी पिघलता नहीं। "

जैसे-जैसे बॉस कह रहा था वैसे वैसे स्क्रीन के परिदृश्य भी बदल रहे थे और वहां उसके शब्दों से मेल खाते चित्र आ रहे थे।

बॉस ने आगे कहना शुरू किया"हजारों कोशिशें कर ली गई इसका टेंपरेचर ढूंढने की पर इसका टेंपरेचर नहीं मिला, धीरे-धीरे इसकी उपलब्धता के बारे में बाकी लोगों को भी पता लग गया और दुनिया में इसे पाने की होड़ मच गई जिसके बाद यह अचानक से गायब हो गया, या फिर गायब कर दिया गया कुछ लोगों द्वारा। पर अभी कुछ दिन पहले हमें पता चला कि इस तत्व के कुछ अंश किसी विशेष तरह के समुदायों के पास हैं और हमें इसे उन्हीं समुदायों से हासिल करना है।"

"सर आपका काम जल्दी हो जाएगा"

"होना चाहिए, इस तत्व जो गुण हैं वह किसी गॉड पार्टिकल से कम नहीं, यह अनंत ऊर्जा अवशोषित कर सकता है और उत्सर्जित भी, अगर इसकी क्रिया साथ वाले तत्वों से करवा दी जाए तो वह उसे भी अपने अनुरूप कर देता है। अर्थात यह तत्व दूसरे तत्वों को भी अपनी भांति बना देता है"

"जी सर अबकी बार पक्का हो जाएगा"

दोनों सफेद पोशाक वाले आदमियों ने कहा और उसके बाद वह वहां से चले गए। उनके जाने के बाद बॉस कुछ देर तक स्क्रीन को देखता रहा और उसके बाद वह भी वहां से चला गया।

बॉस के जाने के बाद जो आदमी अपने एक्सपेरिमेंट से ध्यान हटा चुके थे वह वापस अपने एक्सपेरिमेंट की ओर लग गए। उनके एक्सपेरिमेंट सच में बहुत खतरनाक थे और उनकी तलाश और खतरनाक होने वाली थी।

फिलहाल अब तक सुबह के 7:00 बज चुके थे। स्पेस एकेडमी के ऑफिस में सभी आदमी अपनी अपनी दिनचर्या पर लग गए थे। 8:00 बजे मीटिंग शुरू होनी थी जो ट्रेन वाली घटना को लेकर थी। सुबह होते ही एकेडमी में लोगों की आवाजाही ऐसी थी जैसे दोपहर के 2:00 बजे हो।

पर इस हलचल से कोसों दूर निधि के कमरे में।।

यहां तो तहलका मचा हुआ था।

निधि बेड की बचाए नीचे लेटी हुई थी। पास ही उसका रिवाल्वर पड़ा था जिसके नोक पर साइलेंसर लगा हुआ था। रिवाल्वर का धुआ बता रहा था कि इससे गोलियां चल चुकी है। आसपास गोलियों के कुछ निशान भी थे।

अलार्म घड़ी अगैरा वगैरह तो निधि रात  ही बंद कर चुकी थी पर यह जो गोली चली थी वह दरवाजे के बाहर लगी डुर बेल को बताने वाले स्पीकर पर चली थी।

सुबह के समय से लेकर अब तक चार आदमी निधि के कमरे का राउंड लगा चुके थे और उन्होंने कमरे वाली बेल भी बजाई थी। पर मजाल है कि निधि उठ जाए। यही कारण है कि आज सुबह यह स्पीकर निधि के रिवाल्वर का निशाना बना। बाद में आने वाले 2 आदमी तो हैरान थे कि बेल बजाने के बाद भी बज क्यों नहीं रही। उनमें इतनी हिम्मत भी नहीं थी कि वो दरवाजा खटखटाए तो वह बस वापस लौट वहीं से वापस लौट गए। ऊपर से निधि के ऑर्डर भी थे कि सुबह कोई उसका दरवाजा ना बजाएं जबकि उसने तो उसे डिस्टर्ब ना करने को भी कहा था पर वह आदमी भी क्या करते बॉस का ऑर्डर था कि निधि को जगा दिया जाए।

अंदर निधि फर्श पर लेटी पड़ी थी। बेड वाली चद्दर उसके आधे  बदन को ढक रही थी जबकि बाकी वह जयों की त्यों थी। उसने एक छोटी सफेद कलर की बनियान और पजामा पहन रखा था।

खिड़की बंद थी तो उसे आने वाली हवा भी नहीं आ रही थी जिस वजह से उसके बाल जैसे थे वैसे के वैसे ही पड़े थे, बिखरे हुए उसकी कमर पर। बालों की लंबाई कुछ ज्यादा ही थी क्योंकि वह कमर तक आराम से आ रहे थे।

गुलाबी गाल फर्श पर सटे हुए थे और चेहरे के दबाव के कारण थोड़ा रूखसाए हुए भी।

उसने एक लंबी ऊवासी ली और चद्दर को अपने ऊपर पूरा ओढ लिया।

---

वहीं निधि के कमरे के बाहर भी हलचल मची हुई थी। यह मैडम अभी तक बाहर क्यों नहीं आई, मैडम अभी तक जगी क्यों नहीं, क्या मैडम अभी भी सो रही है, यह मैडम कितना सोती है। बाहर लोग तरह-तरह की बातें कर रहे थें। मीटिंग शुरू होने में अभी आधे घंटे का वक्त था। ठीक 7:30 से लेकर 8:00 बजे के बीच बीच मीटिंग शुरू होनी थी और निधि की नींद है कि अभी भी पूरी नहीं हुई।

रोजर्स और उसका दोस्त ऑफिस में आ चुके थे। दोनों ऑफिस की कैंटीन में बैठ कर नाश्ता कर रहे थे।

अचानक खाना खाते खाते रोजर्स धीरे से फुसफुसाया।

"किसी को पता नहीं चलना चाहिए हम कल रात कहां थे?"

"क्यों , हम तो कल केस की छानबीन कर रहे थे!!" सेजो ने चुपके से जवाब दिया।( उसने दोस्त का नाम सेजो था)

"अरे वह नहीं, केस के बाद हम कहां गए थे उसका किसी को पता नहीं चलना चाहिए वरना बहुत मार पड़ेगी"

"तो वह मैं थोड़ी ना गया था, तुम गए थे, तुम मरोगे... मैं तो नहीं मरता, किसने बोला था तुझे पब मे जाने को और लड़कियों के साथ मस्ती करने को"

"अबे अबे अबे धीरे बोल, मरवाएगा क्या, यार जवान है अब मस्ती नहीं करेंगे तो कब करेंगे, जब बूढ़े हो जाएंगे तब। ऐसा थोड़ी ना होता है"

"ठीक है तो फिर पकड़े गए तो मुझे मत कहना कुछ"

"हां बस तुम बताना मत किसी को"रोजर्स बोला और खाना खाने लगा।

वहीं दूसरी ओर मीटिंग में लोग धीरे-धीरे आने लगे थे। सबसे पहले सीनियर और बड़े लोग आए जिन्हें काम करते हुए काफी वक्त हो गया था।

सभी पूरी तरह से अनुशासित तरीके में सुव्यवस्थित थे। सही ढंग के कपड़े बूट इत्यादि सब बढ़िया था। आने के बाद सभी अपनी-अपनी फाइलों को देखने लगे और उन्होंने इस केस के बारे में जो भी छानबीन की है उस पर एक नजर दौड़ाने लगे।

दूसरी एजेंसियों के कुछ लोग भी वहां आए हुए थे जो अपनी प्रतिक्रिया इस केस पर देंगे।

स्पेस एकेडमी का बॉस अर्थात न्यूयॉर्क में बने स्पेस अकेडमी का बॉस या फिर रोजर्स के पिता वह भी यहीं बैठे थे और अपने साथी से कुछ बतिया रहे थे।

"तुम्हें क्या लगता है निधि अपना काम कर पाएगी" रोजर्स का पिता बोला ‌।

"शक तो मुझे भी हो रहा है , आपके हिसाब से हमें उसे आजमाना चाहिए जैसा कि आपने पहले कहा था" दूसरा आदमी बोला जिससे वह बतिया रहा था।

"सही कहा, हमने कल ही एक टेरेरिस्ट पकड़ा है वह कुछ भी बता नहीं रहा क्यों ना निधि को कहा जाए कि वह उससे सच उगलवाय, वह जिस ग्रुप का टेरेरिस्ट है उस ग्रुप का नियम है कि मर जाएंगे पर कुछ भी नहीं बताएंगे। अब से पहले भी हम ऐसे कई आदमी को पकड़ चुके हैं जिनसे कुछ पता नहीं चला। ऐसे में निधि ने अगर सच बुलवा लिया तो हमें उसकी काबिलियत पर यकीन करना पड़ेगा"

"नहीं कुछ और, निधि यह नहीं कर पाएगी। वह आदमी किसी भी हाल में सच्चाई नहीं बताएगा। "

दोनों ने एक नजर उस आदमी की तरफ घुमाई जो एक शीशे की दीवार के पीछे एक चेयर पर आराम से बैठा था।

आदमी काफी भयानक लग रहा था । बड़ी-बड़ी दाढ़ी। आंखों में खतरनाक लाल रंग, और डरावनी शक्ल।

"देख लेते हैं, निधि को कहते हैं फिर देखते हैं क्या होता है"

इसके बाद दोनों ने मीटिंग में आए बाकी आदमियों की तरफ ध्यान दिया और एक-एक कर उनसे भी हल्की फुल्की बातें करने लगे।




***

Wednesday, June 17, 2020

NIDHI VOL-2 : THE SECRET AGENT-10



Let check the accident place

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लगभग रात के 1:30 बजे।

देर रात से ही मूसलाधार बारिश हो रही थी। लगभग 10:00 बजे के आसपास बारिश शुरू हो गई होगी और बारिश भी ऐसी कि रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी। गली मोहल्लों इत्यादि में पानी सड़कों पर ऐसे गुजर रहा था जैसे किसी नदी से गुजरता है। ऐसे में जिस जगह पर ट्रेन वाली दुर्घटना हुई थी वह जगह पानी से भरी हुई थी। जगह के आसपास पीली पट्टियां बंधी हुई थी जो लोगों को उसके अंदर ना जाने का संकेत दे रही थी। आस पास भरपूर अंधेरा था बस कुछ बल्ब ही थे जो कभी जग रहे थे तो कभी बुझ। लगातार हो रही बारिश के कारण उनमें स्पार्क हो रहा था। जगह के आस-पास खामोशी वाला सन्नाटा फैला हुआ था। दूर दूर तक देखने पर भी कोई दिखाई नहीं दे रहा था। हल्की बूंदाबांदी अभी भी चल रही थी।

लगभग आधे मिनट बाद रोजर्स और उसके साथी की गाड़ी वहां आकर रुकी। वह दोनों दुर्घटना स्थल का मुआयना करने आए थे। रोजर्स के लिए दिन-रात कोई मायने नहीं रखता उसका जब मन होता है वह काम के लिए निकल जाता है यही वजह है कि वह इस वक्त रात के 1:30 बजे भी यहां पर था। उसके हाथ में कुछ उपकरण थे जो हमेशा उसके साथ रहते हैं। यह उपकरण आसपास की जगह को स्कैन करने, मिले हुए सबूत को उसमें रखने तथा कुछ हथियारों से लैस थे। ‌

इस वक्त ट्रेन की छत से टपक टपक पानी नीचे बरस रहा था। ट्रेन की हालत काफी बिगड़ी हुई थी। ट्रेन की चद्दर पूरी तरह से फट चुकी थी तो उसका इंजन भी पूरी तरह से जला हुआ था।

आसमान में ठहर ठहर कर बिजली कड़क रही थी। बादल की गर्जना भी साफ सुनाई दे रही थी। एक लंबा ओवरकोट पहने रोजर्स और उसका दोस्त कार से कुछ दूर आए। उन्होंने हाथ जेब में डाले और एक टॉर्च निकाल उसे जगाया। टॉर्च के जगाने के बाद आसपास की जगह दिखने लगी।

"हालात तो बहुत नाजुक लगते हैं,देखने से तो ऐसा लग रहा है जैसे जहां हजारों लोगों की भीड़ के बीचो बीच कोई तांडव नृत्य हुआ हो।" रोजर्स इधर उधर देखते हूए बोला"आसपास की दीवारें छतिग्रस्त है, ऐसे लग रहा है जैसे इन दीवारों के साथ कोई चमेली डांस कर रहा हो। " रोजर्स की पैनी निगाहें इलाके को चारों तरफ से घूर रही थी।

हालात ही कुछ ऐसे थे कि रोजर्स को ना चाहते हुए भी यह शब्द बोलने पड़े। जगह देख कर तो ऐसे लग रहा था जैसे यहां पर कोई विश्व युद्ध लड़ा गया हो।

"सबूत वबूत तो क्या बचा होगा, इसे पहले भी 15 टीम आकर इस जगह को देख चुकी है ऊपर से जो भी बचा होगा वह इस बारिश के पानी ने खराब कर दिया। " उसके दोस्त ने उसकी बात में बात मिलाई।

"नहीं बरखुरदर, गलत बात" रोजर्स की नजर जमीन पर पड़े एक पॉलीथिन थैली पर पड़ी" एक जासूस के लिए मामूली से मामूली चीज भी सबूत का काम कर देती है, शेरलॉक होम लेस की कहानियों में वह एक मिट्टी के कण मात्र से अपराधी को पकड़ लेता था ऐसे में तुम जासूस की काबिलियत का अंदाज़ा नहीं लगा सकते " रोजर्स ने लिफाफे को इधर-उधर पलटा और उसे वापस फेंक दिया। "यह टीम भी ना पता नहीं कब खाना यहां खाना बंद करेंगी, चलो आओ आगे देखे।"

रोजर्स और उसका दोस्त दोनों आगे की ओर बढ़े। जल्द ही उनके हाथ ट्रेन की चादर को छू रहे थै।

"दिलचस्प, ट्रेन की चादर तो बहुत मजबूत हैं। वैसे उस आदमी का नाम क्या था जो मरा??" रोजर्स ने अपनी बात कही

"सतीश विजयवर्गीय, पर भाई , कहा जा रहा है कि वह मरा नहीं उसे मारा गया है। लेकिन लोगों की गवाही के अनुसार और पिछले टीमों की कार्रवाई के हिसाब से यहां किसी तरह के ऐसे तथ्य होने की पुष्टि नहीं हुई है जिससे यह साबित हो सके। लोगों का कहना है कि उन्होंने तो कुछ देखा ही नहीं, ट्रेन में एकदम से भगदड़ मच गई थी"

"और यह भगदड़ कैसे मची??"

" ट्रेन का इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम कुछ देर के लिए खराब हो गया था, इससे ट्रेन की स्पीड ओवर लोड हो गई और लोगों में डर का माहौल बन गया। तभी यह भगदड़ मची"


अपने दोस्त की बात का जवाब दे रोजर्स ने अपने कदम ट्रेन के अंदर बढ़ाए। वह दरवाजे से अंदर की ओर गुस्सा ही था जहां उसे फर्श पर पानी बिखरा हुआ मिला।

"वह देखो," रोजर्स का दोस्त बोला। उसने किसी चीज की ओर इशारा किया था "वहां उस बंदे की लाश पड़ी थी" वो एक निशान था जिसे अक्सर लाश के इर्द-गिर्द बना दिया जाता है।

रोजर्स की नजर भी उस निशान की ओर घूमी"हर इंसान के हाथों में चार उगलियां ही होती है, और पांचवें चीज हमेशा अंगूठा होती है। अगर किसी ने कहा इस आदमी का कत्ल हुआ है तो उसकी बात में दम हो सकता है"


रोजर्स ने अपने हाथ से उस निशान को छुआ और उसे रगड़ कर देखा"इंटरनेट पर इसके बारे में क्या खबर है" रोजर्स ने सवाल पूछा।

रोजर्स के सवाल पूछते ही उसके दोस्त ने अपने बैग से लैपटॉप निकाला और कुछ सर्च करने लगा।

"इंटरनेट पर उपलब्ध डाटा के हिसाब से लोग इस घटना को कलयुग के पहले प्रलयकारी मौसम की शुरुआत होने का बता रहे हैं। उनके हिसाब से कलयुग अब ऐसे मोड़ पर आ चुका है जहां दानवी शक्तिया मजबूत होगी और वह इस संसार पर कब्जा करने की कोशिश करेंगी। "

"ओहो क्या बकवास है"

"इसमें यह भी लिखा है यह दानवी शक्तियां अंधेरे की प्रतीक होगी और अंधेरे के माध्यम से रोशनी को खत्म कर अंधेरे का राज इस पूरे संसार और ब्रह्मांड पर कायम करेगी और उन्हें इससे रोकने वाला कोई नहीं होगा भी नहीं। रोशनी के रक्षक खत्म हो चुके हैं ऐसे में कोई और दूसरी उम्मीद भी नहीं"

"क्या तुम सतीश विजयवर्गीय के बारे में ही पढ़ रहे हो" रोजर्स ने पूछा। उसका दोस्त जो भी बता रहा था वह कुछ अटपटी बातें थी।

"हां, पता नहीं किसने इसके केस में यह सब लिखा"

रोजर्स ने कुछ देर और मुआयना किया और फिर दोनों बाहर की ओर चले गए। अभी तक उनके हाथ कुछ खास लगा नहीं जिसकी सहायता से वह इस केस में आगे की कड़ी को खोल सके।

"भाई कंट्रोल रूम से एक मैसेज आ रखा है" उसके दोस्त ने कुछ समय बाद स्क्रीन को देख कर जवाब दिया"कोई निधि नाम की एजेंट न्यूयॉर्क पहुंच चुकी है उसी के बारे में बता रखा है"

"निधि !!यह कौन है? " रोजेस ने उत्साहपूर्वक पूछा

"इंडिया की एजेंट है, फोटो भी दे रखी है। फोटो देखकर तो मस्त माल लगता है । जबरदस्त है । अब तक ऐसा कोई केस नहीं जिसे वह साल्व नहीं कर सकी"

"अच्छा बेटा, लगता है इसने बहुत बड़े बड़े तीर मार रखे हैं । इंडिया की है क्या ? "

"हां"

"तो यहां क्या कर रही है, इंडिया में काम नहीं मिला क्या" रोजर्स ने अपने दोस्त की आंखों में आंखें मिलाते हुए कहा। दरअसल उसका इरादा कटाक्ष करने का था।

"वह इंडिया की नंबर वन एजेंट है, इसीलिए उसे यहां भेजा है"

"क्यों, क्या इंडिया वालों को हमारी काबिलियत पर विश्वास नहीं?"

"नहीं उन्हें लगता है कि निधि इस केस को जल्दी सॉल्व कर देगी"

"हां देख लेंगे इस निधि को भी, इसे तो अजमाना पड़ेगा पता तो चले इसकी काबिलियत क्या है??"

"उसकी बायोग्राफी चेक करता हूं"दोस्त बोला और उसने फटाक से दूसरे ऑप्शन निकाले।

"बाप रे बाप"उसका दोस्त निधि के बायोग्राफी देखते ही चौंक गया"स्टेटस तो देखो लड़की का!! क्या डाल रखा है, लिखा है

*मैं समंदर की गहराई में डुबना चाहती हूं, रेगिस्तान की रेत में खोना चाहती हूं कुछ इस कदर कि खुद को ढूंढने पर भी ना मिलुं*

"यह भला क्या है"रोजर्स चकित और थोड़ी मिले-जुले अंदाज वाली प्रतिक्रिया में बोला"यह लड़कियां पागल ही होती है ऐसे ही कुछ भी लिख देती है, चल छोड़ आ हम केस पर ध्यान दें"

रोजेस ने बिना एक पल निधि की बातों पर ध्यान दिए अपनी बात कही और दोस्त को लैपटॉप बंद करने का इशारा किया। रोजर्स नहीं जानता कि आने वाले समय में निधि क्या कहर बरसाने वाली है जो फिलहाल इस वक्त अपनी जबरदस्त नींद में खोई हुई है।

दोनो ट्रेन से निकल कर बाहर के परिदृश्य की ओर बढ़े ।सामने कुछ दुकाने नजर आ रही थी जो अभी बंद थी। दुकानों पर अलग-अलग तरह के नाम लिखे हुए थे। गिफ्ट कॉर्नर, आइसक्रीम पार्लर इत्यादि। वहां एक चाय वाली टूटी सी दुकान भी थी जिस पर किसी का ध्यान नहीं गया। रोजर्स और उसके दोस्त ने भी उस दुकान को ऐसे ही छोड़ दिया और आगे बढ़ एक टूटे कांच वाली दुकान के सामने जाकर खड़े हो गए।

"वैसे उस गवाह का क्या नाम था जिसने कहा कि उसका कत्ल हुआ है" रोजर्स ने पूछा

"सुप्रिया विजयवर्गीय, वह इसकी पत्नी थी"

"ठीक ठीक" रोजर्स ने अपनी गर्दन हिला दी।"और उसका पेशा क्या था??" रोजर्स ने अगले ही पल दूसरा सवाल पूछा

"वो एक साइंटिस्ट था और एक साथ चार कंपनियों में रिसर्च का काम कर रहा था" उसके दोस्त ने जवाब दिया।

"यह मजेदार बात है। क्या उस में इतनी काबिलियत थी कि वह एक साथ चार कंपनियों में काम करता था??" रोजर्स ने अपनी प्रतिक्रिया दी।

"हां, काबिलियत तो थी। सतीश विजयवर्गीय ने अपनी पीएचडी की डिग्री ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से ली थी। वहां उसने एडवांस टेक्निकल गैजेट्स बनाने का रिकॉर्ड बनाया था"


"क्या बात है" रोजर्स ने तारीफ में कहा इसके बाद रोजर्स एक पल ठहरा और वापिस बोला"चलो आज का मुआयना तो पूरा हुआ। यहां कुछ भी खास नहीं जिससे हम आगे की कड़ी का पता लगा सके। कल हम उन चारों कंपनियों से बात करेंगे जहां वह काम करता था, और फिर सुबह इंडिया की उस खास एजेंट से भी मुलाकात करनी है"

"वाव सची में" रोजर्स की बात सुनते ही उसके दोस्त की आंखें खुशी से भर आई"मेरा तो उससे मिलने का बहुत मन कर रहा है"

"बस कर बेटा । एक दिन में ही बदल गया अभी तो मिले ही नहीं उससे!!! चल चलें "

इसके बाद दोनों अपनी गाड़ी की ओर निकल गए । गाड़ी की ओर जाते वक्त उन्होंने पीछे मुड़कर पूरी जगह को एक बार फिर से देखा और इसके बाद गाड़ी में बैठ वहां से चले गए।


NIDHI VOL-2 : THE SECRET AGENT-9



***

न्यूयॉर्क एयरपोर्ट

___________

लगभग रात के 9:00 बज रहे थे। ( न्यूयॉर्क समय, आगे से कहानी में यही समय रहेगा) जहाज कुछ ही देर में उतरने वाला था। एयरपोर्ट पर भारी चहल कदमी थी। कोट पैंट पहने दो सज्जन व्यक्ति बाहर एयरपोर्ट पर निधि का इंतजार कर रहे थे। एयरपोर्ट के बाहर खड़े दोनों व्यक्तियों में से एक व्यक्ति के हाथ में एक बोर्ड था जिस पर लिखा था वेटिंग फॉर निधी। पास ही तीन काले रंग की स्पेस अकैडमी की खास गाड़ियां खड़ी थी जो बुलेट प्रूफ होने के साथ-साथ स्टाइलिश भी थी। उन में से बीच वाली गाड़ी काफी लंबी थी इसे देख लग रहा था कि निधि इसी गाड़ी में बैठेगी। थोड़ी देर बाद एयरपोर्ट पर एक अनाउंसमेंट हुआ जिसमें जहाज के आने की सूचना वहां के लोगों को दी गई। जहाज आ चुका था। बाहर खड़े आदमियों की आंखें उल्लू की भांति एयरपोर्ट के मुख्य दरवाजे पर सट गई  और दोनों वहां से आने वाले हर एक यात्री का चेहरा देखने लगे इस इंतजार में कि इनमें से कोई एक निधि होगी। लगभग 20-25 यात्रियों के निकल जाने के बाद उन्हें काले लेदर वाले जैकेट में एक लड़की दिखाई देती है जो उन्हीं की और चली आ रही थी। यह निधि ही थी जिसने दूर से उन आदमियों के हाथ में पकड़ा बोर्ड देखा था। पास आते ही निधि ने दोनों से बोला।

"hay i am nidhi" निधि जेब से एक काले रंग का बेज निकाला और उन लोगों को दिखाया। दरअसल स्पेस एकेडमी वाले ऐसे ही एक दूसरे की पहचान करते हैं। बेज देखते ही दोनों आदमीयों ने हाथ आगे बढ़ाते हुए निधि को हेलो बोला और उन्हें गाड़ी की तरफ जाने का इशारा किया। निधि बीच वाली गाड़ी की तरफ बढ़ी और उसमें बैठ गई। इसके बाद गाड़ियां एओआई स्पेस अकैडमी की तरफ रवाना होने लगी।

गाड़ी एक हाईवे के ऊपर से गुजर रही थी। ‌ इस हाईवे से आधे शहर का खूबसूरत नजारा आराम से दिखाई दे रहा था। नीचे चल रही शानदार गाड़ियां, गजब की तकनीक रखने वाली बसे, छोटी ट्रेनी जो सड़क पर चलती है, सब न्यूयॉर्क की भव्यता को प्रदर्शित कर रही थी। निधि को इसे देख ज्यादा हैरानी नहीं हो रही थी क्योंकि आजकल यही सब इंडिया में भी चलता है। यह पहले का अर्थात 2020 दशक का समय नहीं है जब इंडिया के पास ज्यादा तकनीक नहीं थी। यह 2140 दशक का समय है जिसमें इंडिया भी तकनीक में पीछे नहीं। इसी हाईवे से न्युयोर्क की शानदार ऊंची ऊंची बिल्डिंग के नजारे भी दिख रहे थे। यह बिल्डिंग आसमान छूने को उतारू थी। एक बिल्डिंग तो बुर्ज खलीफा के रिकॉर्ड को तोड़ने की तैयारी कर रही थी। ( सन 2140 , इसे याद रखिएगा बहुत सी चीजें ऐसी होंगी जिन पर आपको हैरानी हो सकती हैं, ) इसी हाईवे के साथ सटा हुआ एक दूसरा हाईवे भी था जिसकी ऊंचाई इससे 5 मीटर अधिक थी। इस हाईवे पर सामने से आने वाले वाहन गुजर रहे थे। निधि अपना ध्यान शहर की भीड़ बाढ़ से हटाकर इन वाहनों पर लगाया। वो एक के बाद एक गुजर रही गाड़ियों को बड़े गौर से देखती है। हर गाड़ी 80 किलोमीटर पर घंटे की स्पीड से चल रही थी। ‌ निधि ने मन ही मन आक्लन किया कि यह गाड़ियां 75 के आसपास चल रही होगी।‌ दराअसल यह हर एक जासूस की पुरानी आदत है, फ्री टाइम में वह अपने मन ही मन में कुछ ना कुछ आकलन करता रहता है। इसके बाद निधि ने पास पड़े बेग से अपना लैपटॉप निकाला और कुछ पुरानी फोटो देखने लगी।‌ उसकी हर एक फोटो शानदार थी। जंगलों में झरनों के नीचे, बीच पर मस्ती करते, स्विमिंग पूल में तैरते, होटलों में डांस करते, बड़ी-बड़ी छतों से लटक कर सेल्फी की तस्वीरें, बहुत कुछ शामिल था उसके कलेक्शन में। वह हर एक फोटो को कुछ देर रोक कर देख रही थी। उसकी अन्य फोटो में पार्क में मायूसी वाला चेहरा बनाकर बैठे हुए की फोटो , झूला झूलते की फोटो, टेडी बेयर से खेलते की फोटो, न जाने क्या क्या था। ‌

सभी फोटो देखने के बाद वह एक 35 सेकंड की वीडियो प्लेय करती है। यह तब की वीडियो थी जब वह मात्र 10 साल की हुआ करती थी। इस वीडियो में वह आगे दौड़ रही थी। पीछे उसके पापा उसे पकड़ने की कोशिश कर रहे थे। वीडियो में दोनों खुश दिखाई दे रहे थे पर 28 सेकंड की वीडियो के बाद अचानक कैमरा हिलता है और दो गोलियों की आवाज सुनाई देती है और वीडियो वहीं खत्म हो जाती है। अंत में वीडियो के अंदर खुला आसमान दिखाई दे रहा था जहां खून उस कैमरे के ऊपर आ जाता है और पूरा आसमान लाल हो जाता है इसके बाद आगे का दृश्य दिखाई नहीं देता। वीडियो देख निधि की आंखों में हल्के से आंसू आते हैं। तुरंत उसने लेपटोप को बंद किया और वापिस बैग में रख दिया। " अभी और कितना समय लगेगा" उसने पास के आदमी से पूछा जो मेप का आकलन कर रहा था। " तकरीबन 13 मिनट" उसने जवाब दिया। निधि जवाब सुन वापस बाहर की तरफ देखने लगती है। उसने अपने दोनों हाथों को समेटा और उन्हें बगल में दबा थोड़ा नीचे की ओर खिसक कर आराम वाली मुद्रा में लंबी सांस ली।

***

ठीक 15 मिनट बाद ।

गाड़ी एओआई स्पेस अकैडमी के ऑफिस के सामने आकर ठहरी गाड़ी के रुकते ही दो आदमी दूर से दौड़े दौड़े आए और दरवाजा खोला। दरवाजा खुलते ही निधि बाहर निकली और और खुली हवा में ताजी सांस लेते हुए उन दोनों आदमी की तरफ देखती हैं। चारों तरफ कड़ी सुरक्षा थी। दीवारों पर ताराबदीं और मजबूत दरवाजे दिख रहे थे।

"गुड इवनिंग, वेलकम टु न्यूयॉर्क, आशा करता हूं कि आपको आने में किसी तरह की दिक्कत नहीं हुई होगी" एक आदमी ने निधि का स्वागत किया।

"थैंक्स"

जबकि दूसरा आदमी निधि का सामान निकालने लगा।

"आईए मेंम, आपको इस तरक जाना है" ऑफिसर्स ने निधि को आगे की और इशारा किया। यह रास्ता विलियमसन के ऑफिस तक जाता था। निधि का पहले उसे मिलना जरूरी था उसके बाद ही आगे का काम शुरू होगा।

निधि उस आदमी के पीछे पीछे चल दी। थोड़ी ही देर में दोनों विलियमसन के ऑफिस पहुंचे। आदमी ऑफिस का दरवाजा खटखटाता है।

"मे आई कम इन सर " आदमी ने दरवाजे के पास खड़े होकर कहा।

"हां जरूर, क्या निधि आ गई"

"यस सर, निधि मैम आ गई है, वह हमारे साथ ही है" तभी उसके पीछे से निधि आगे आई। निधि को देखते ही विलियमसन की तो जैसे आंखें चौधियां गई। क्या यही है वह लड़की जो स्पेस एकेडमी की नंबर वन एजेंट है। देखने से तो कहीं से भी ऐसा नहीं लग रहा। ना चेहरे पर चलाकी के भाव, ना शरीर में कठोरपन, यह तो बिल्कुल उलट लग रही है। अक्सर एक एर्जेंट के चेहरे पर खतरनाक एटीट्यूड होता है पर निधि के चेहरे से मासूमियत झलक रही थी।

निधि ने आगे बढ़कर विलियमसन से हाथ मिलाया।


"हेलो सर, आई एम हेयर फोर ए मिशन" निधि ने हाथ मिलाते हुए कहा।

विलियमसन को तो अभी भी यकीन नहीं आ रहा था कि वह इसी एजेंट को केस देने वाला हैं।

"वेल डन, तुम्हारी बहादुरी के किस्से बहुत सुने हैं, पर देख कर लग नहीं रहा कि तुमने इतने बड़े-बड़े कारनामों को अंजाम दिया होगा" जो बात विलियमसन के मन में थी वह उसके मुंह पर आ ही गई।

"सर अक्सर जो दिखता है वह होता नहीं, और जो होता है वह दिखता नहीं" निधि ने मासूमियत से जवाब दिया

"ग्रेट, आने में कोई तकलीफ तो नहीं हुई"

"नो सर!!"

"तुम शायद अभी थक गई होगी, मेरे ख्याल अभी तुम्हें आराम कर लेना चाहिए, केस की जानकारी तुम्हें सुबह तक प्रोवाइड करवा देंगे। हम सुबह एक मीटिंग कर रहे हैं जिसमें इस केस की चर्चा करेंगें।"

"ओके सर, एज यू विश, " निधि ने जवाब दिया। थकी हुई तो वह लग रही थी। पहले इंडिया में सारी रात काम किया और अब यहां भी रात के 10:00 बज रहे हैं। पिछले 12-13 घंटों से वह लगातार काम कर रही थी।

"ऑफिसर्स!!!" विलियमसन ने पास खड़े ऑफिसर्स को अपनी और बुलाया।

"यस सर!!"

"उम्मीद करता हूं तुमने निधि के ठहरने की व्यवस्था अच्छे से कर दी होगी"

"जी सर!!"

इसके बाद विलियमसन ने निधि की तरफ देखा

"किसी भी तरह की कोई शिकायत या मदद की आवश्यकता हो तो मैं यही हूं, सुबह तुम्हें पूरा ऑफिस दिखा दिया जाएगा, फिलहाल यह आदमी तुम्हें तुम्हारी कमरे तक छोड़ देगा"

"थैंक्स सर" निधि ने जवाब दिया, और वापिस विलियमसन से हाथ मिला उस आदमी के साथ बाहर की ओर चली गई।

विलियमसन उसके जाने के बाद अभी भी सोच में पड़ा था। यह लड़की कर तो लेगी ना। समझ में नहीं आ रहा कैसे विश्वास करूं। कल इसकी परीक्षा लेता हूं, कोई छोटा मोटा केस देख कर देखता हूं इसकी क्या प्रतिक्रिया रहती है। वहां से इसके टैलेंट का अंदाजा लगाया जा सकता है। वैसे शक तो नहीं होना चाहिए क्योंकि इसे स्पेस एकेडमी की नंबर वन एजेंट कहा जाता है, पर मैं भी तो एक एजेंट हूं शक के बिना नहीं रह सकता। जांच करनी होगी!!

विलियमसन निधि की परीक्षा लेना चाहता था। एक तरह से कहा जाए तो वह अपनी तरफ से सही था, कोई भी निधि के चेहरे से यह अंदाजा नहीं लगा सकता था कि वह कितनी खतरनाक है।

ऑफिस के बाहर निधि एक टेबल मैनेजमेंट के पास रुकी हुई थी। उसके साथ वाला आदमी वहीं पास में कमरे की चाबी ले रहा था। साथ में उसने निधि के लिए खाने का ऑर्डर भी दिया। कुछ देर बात करने के बाद में आदमी वापस निधि के पास आया।

पास ही लिफ्ट थी। वहां से आदमी 6 नंबर का बटन दबाता है और कुछ देर दोनों इंतजार करते हैं। थोड़ी ही देर में लिफ्ट 6 नंबर पर जाकर रुकती है।

"मैम, आपको तेरहा नंबर कमरा दिया गया है, इस तरफ है" उस आदमी ने एक दिशा की ओर इशारा किया। निधि उस और मुड़ गई। तेरहा नंबर कमरे के पास जाकर उस आदमी ने निधि को छोड़ दिया।

" मैम यह लीजिए चाबी" उसने चाबी निधि को दी" थोड़ी देर में आपका खाना यहां आ जाएगा, डिनर करने के बाद आप आराम कर सकती हैं"

"ठीक है थैंक्स" निधि ने वह चाभी ली। चाबी एक डेबिट कार्ड की तरह लग रही थी। जिसको दरवाजे के आगे स्वीप करना पड़ता था। चाबी देने के बाद आदमी वहां से चला गया। उसके जाने के बाद निधि भी कमरे में चली गई।

कमरा बहुत शानदार था। किसी फाइव स्टार होटल की तरह लग रहा था। मखमली बेड, खुला हॉल, बड़ा सा बाथरूम, यह सब निधि के लिए आम था। न जाने उसने ऐसे कितने कमरे तबाह कर दिए होंगे। तबहा से मतलब उसका किसी भी चीज से खास लगाव नहीं होता था। उसने अपनी जैकेट उतारी और  एकदम से बेड पर गिर गई। थकावट उसके शरीर को सुस्त कर रही थी।

लगभग 5 मिनट बाद उसके कमरे की घंटी बजी, और एक 65 साल की बूढ़ी महिला उसका खाना और सामान लेकर आई।

"गुड इवनिंग मैम, आपका डिनर और आपका समान"

"ठीक है इसे यहां रख दो" निधि ने एक कोने की ओर इशारा किया।

बूढ़ी महिला वैसा ही करती है। समान रखने के बाद वह वहां से चली गई। उसके जाने के बाद निधि ने खाने को पास किया और चेक किया क्या क्या बना है। खाना उसकी पसंद का था।

" लगता है स्पेस एकेडमी ने मेरी पसंद पहले ही यहां भेज दी" निधि खुद से बड़बड़ाई।

उसने जल्दी ही अपना खाना खत्म किया और उसके बाद बाथरूम में फ्रेश होने चली गई।

लगभग 10-15 मिनट नहाने के बाद में वापस बाहर आई। नहाने के बाद उसने एक व्हाइट कलर की बलियान ओर सुती लोहर पहना था। निधि की यह पुरानी आदत थी वह अक्सर खाना खाने के बाद ही नहाती है और रात को ऐसे ही कपड़े पहन कर सोती है।

सब काम हो चुका था और इस वक्त लगभग न्यूयॉर्क में रात के 11:00 बज रहे थे। नींद निधि की आंखों के ऊपर ही घूम रही थी। बेड के ऊपर गिरते ही उसे सोना था। सोने से पहले वह यह निश्चित कर लेना चाहती थी कि सुबह कोई चीज उऐ जगाए ना।

फोन की आवाज... साइलेंट।

कंप्यूटर डेस्कटॉप..... स्विच ऑफ।

खिड़कियां... पूरी तरह से बंद।

दरवाजा.... लोक।

अलार्म घड़ी......कमरे में कुल 3 अलार्म गाड़ियां थी तीनों में 6:00 बजे का अलार्म सेट था..... सब के सब बंद।

खिड़की के पास कुछ आवाज करने वाले झूले टंगे थे..... निधि ने सभी उतार नीचे रख दिए।

अब किसी तरह का शोर नहीं....।।

निधि ने अपनी बैग से रिवाल्वर निकाला और उसमें बुलेट चेक की। कुल 12 गोलियां थी उसमें। उसने उसे अपने पास रख लिया।

इसके बाद वह आंखें मूंद बिल्कुल खामोश हो गई। यह उसके सोने का समय था। बेड के पास जाते हैं वह वैसे ही बेड पर गिरी जैसे पहले गिरी थी। सब कुछ शांत हो चुका था, खामोश......!! अब उसे गहरी नींद आ रही थी।

गुड नाइट निधि।

सो तो वह गई पर यह देखना दिलचस्प था वह सुबह किस तरह से उठती है। क्योंकि निधि को जगाना मतलब मौत से पंगा लेना और खुद निधि जग जाए यह तो हो ही नहीं सकता।