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न्यूयॉर्क एयरपोर्ट
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लगभग रात के 9:00 बज रहे थे। ( न्यूयॉर्क समय, आगे से कहानी में यही समय रहेगा) जहाज कुछ ही देर में उतरने वाला था। एयरपोर्ट पर भारी चहल कदमी थी। कोट पैंट पहने दो सज्जन व्यक्ति बाहर एयरपोर्ट पर निधि का इंतजार कर रहे थे। एयरपोर्ट के बाहर खड़े दोनों व्यक्तियों में से एक व्यक्ति के हाथ में एक बोर्ड था जिस पर लिखा था वेटिंग फॉर निधी। पास ही तीन काले रंग की स्पेस अकैडमी की खास गाड़ियां खड़ी थी जो बुलेट प्रूफ होने के साथ-साथ स्टाइलिश भी थी। उन में से बीच वाली गाड़ी काफी लंबी थी इसे देख लग रहा था कि निधि इसी गाड़ी में बैठेगी। थोड़ी देर बाद एयरपोर्ट पर एक अनाउंसमेंट हुआ जिसमें जहाज के आने की सूचना वहां के लोगों को दी गई। जहाज आ चुका था। बाहर खड़े आदमियों की आंखें उल्लू की भांति एयरपोर्ट के मुख्य दरवाजे पर सट गई और दोनों वहां से आने वाले हर एक यात्री का चेहरा देखने लगे इस इंतजार में कि इनमें से कोई एक निधि होगी। लगभग 20-25 यात्रियों के निकल जाने के बाद उन्हें काले लेदर वाले जैकेट में एक लड़की दिखाई देती है जो उन्हीं की और चली आ रही थी। यह निधि ही थी जिसने दूर से उन आदमियों के हाथ में पकड़ा बोर्ड देखा था। पास आते ही निधि ने दोनों से बोला।
"hay i am nidhi" निधि जेब से एक काले रंग का बेज निकाला और उन लोगों को दिखाया। दरअसल स्पेस एकेडमी वाले ऐसे ही एक दूसरे की पहचान करते हैं। बेज देखते ही दोनों आदमीयों ने हाथ आगे बढ़ाते हुए निधि को हेलो बोला और उन्हें गाड़ी की तरफ जाने का इशारा किया। निधि बीच वाली गाड़ी की तरफ बढ़ी और उसमें बैठ गई। इसके बाद गाड़ियां एओआई स्पेस अकैडमी की तरफ रवाना होने लगी।
गाड़ी एक हाईवे के ऊपर से गुजर रही थी। इस हाईवे से आधे शहर का खूबसूरत नजारा आराम से दिखाई दे रहा था। नीचे चल रही शानदार गाड़ियां, गजब की तकनीक रखने वाली बसे, छोटी ट्रेनी जो सड़क पर चलती है, सब न्यूयॉर्क की भव्यता को प्रदर्शित कर रही थी। निधि को इसे देख ज्यादा हैरानी नहीं हो रही थी क्योंकि आजकल यही सब इंडिया में भी चलता है। यह पहले का अर्थात 2020 दशक का समय नहीं है जब इंडिया के पास ज्यादा तकनीक नहीं थी। यह 2140 दशक का समय है जिसमें इंडिया भी तकनीक में पीछे नहीं। इसी हाईवे से न्युयोर्क की शानदार ऊंची ऊंची बिल्डिंग के नजारे भी दिख रहे थे। यह बिल्डिंग आसमान छूने को उतारू थी। एक बिल्डिंग तो बुर्ज खलीफा के रिकॉर्ड को तोड़ने की तैयारी कर रही थी। ( सन 2140 , इसे याद रखिएगा बहुत सी चीजें ऐसी होंगी जिन पर आपको हैरानी हो सकती हैं, ) इसी हाईवे के साथ सटा हुआ एक दूसरा हाईवे भी था जिसकी ऊंचाई इससे 5 मीटर अधिक थी। इस हाईवे पर सामने से आने वाले वाहन गुजर रहे थे। निधि अपना ध्यान शहर की भीड़ बाढ़ से हटाकर इन वाहनों पर लगाया। वो एक के बाद एक गुजर रही गाड़ियों को बड़े गौर से देखती है। हर गाड़ी 80 किलोमीटर पर घंटे की स्पीड से चल रही थी। निधि ने मन ही मन आक्लन किया कि यह गाड़ियां 75 के आसपास चल रही होगी। दराअसल यह हर एक जासूस की पुरानी आदत है, फ्री टाइम में वह अपने मन ही मन में कुछ ना कुछ आकलन करता रहता है। इसके बाद निधि ने पास पड़े बेग से अपना लैपटॉप निकाला और कुछ पुरानी फोटो देखने लगी। उसकी हर एक फोटो शानदार थी। जंगलों में झरनों के नीचे, बीच पर मस्ती करते, स्विमिंग पूल में तैरते, होटलों में डांस करते, बड़ी-बड़ी छतों से लटक कर सेल्फी की तस्वीरें, बहुत कुछ शामिल था उसके कलेक्शन में। वह हर एक फोटो को कुछ देर रोक कर देख रही थी। उसकी अन्य फोटो में पार्क में मायूसी वाला चेहरा बनाकर बैठे हुए की फोटो , झूला झूलते की फोटो, टेडी बेयर से खेलते की फोटो, न जाने क्या क्या था।
सभी फोटो देखने के बाद वह एक 35 सेकंड की वीडियो प्लेय करती है। यह तब की वीडियो थी जब वह मात्र 10 साल की हुआ करती थी। इस वीडियो में वह आगे दौड़ रही थी। पीछे उसके पापा उसे पकड़ने की कोशिश कर रहे थे। वीडियो में दोनों खुश दिखाई दे रहे थे पर 28 सेकंड की वीडियो के बाद अचानक कैमरा हिलता है और दो गोलियों की आवाज सुनाई देती है और वीडियो वहीं खत्म हो जाती है। अंत में वीडियो के अंदर खुला आसमान दिखाई दे रहा था जहां खून उस कैमरे के ऊपर आ जाता है और पूरा आसमान लाल हो जाता है इसके बाद आगे का दृश्य दिखाई नहीं देता। वीडियो देख निधि की आंखों में हल्के से आंसू आते हैं। तुरंत उसने लेपटोप को बंद किया और वापिस बैग में रख दिया। " अभी और कितना समय लगेगा" उसने पास के आदमी से पूछा जो मेप का आकलन कर रहा था। " तकरीबन 13 मिनट" उसने जवाब दिया। निधि जवाब सुन वापस बाहर की तरफ देखने लगती है। उसने अपने दोनों हाथों को समेटा और उन्हें बगल में दबा थोड़ा नीचे की ओर खिसक कर आराम वाली मुद्रा में लंबी सांस ली।
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ठीक 15 मिनट बाद ।
गाड़ी एओआई स्पेस अकैडमी के ऑफिस के सामने आकर ठहरी गाड़ी के रुकते ही दो आदमी दूर से दौड़े दौड़े आए और दरवाजा खोला। दरवाजा खुलते ही निधि बाहर निकली और और खुली हवा में ताजी सांस लेते हुए उन दोनों आदमी की तरफ देखती हैं। चारों तरफ कड़ी सुरक्षा थी। दीवारों पर ताराबदीं और मजबूत दरवाजे दिख रहे थे।
"गुड इवनिंग, वेलकम टु न्यूयॉर्क, आशा करता हूं कि आपको आने में किसी तरह की दिक्कत नहीं हुई होगी" एक आदमी ने निधि का स्वागत किया।
"थैंक्स"
जबकि दूसरा आदमी निधि का सामान निकालने लगा।
"आईए मेंम, आपको इस तरक जाना है" ऑफिसर्स ने निधि को आगे की और इशारा किया। यह रास्ता विलियमसन के ऑफिस तक जाता था। निधि का पहले उसे मिलना जरूरी था उसके बाद ही आगे का काम शुरू होगा।
निधि उस आदमी के पीछे पीछे चल दी। थोड़ी ही देर में दोनों विलियमसन के ऑफिस पहुंचे। आदमी ऑफिस का दरवाजा खटखटाता है।
"मे आई कम इन सर " आदमी ने दरवाजे के पास खड़े होकर कहा।
"हां जरूर, क्या निधि आ गई"
"यस सर, निधि मैम आ गई है, वह हमारे साथ ही है" तभी उसके पीछे से निधि आगे आई। निधि को देखते ही विलियमसन की तो जैसे आंखें चौधियां गई। क्या यही है वह लड़की जो स्पेस एकेडमी की नंबर वन एजेंट है। देखने से तो कहीं से भी ऐसा नहीं लग रहा। ना चेहरे पर चलाकी के भाव, ना शरीर में कठोरपन, यह तो बिल्कुल उलट लग रही है। अक्सर एक एर्जेंट के चेहरे पर खतरनाक एटीट्यूड होता है पर निधि के चेहरे से मासूमियत झलक रही थी।
निधि ने आगे बढ़कर विलियमसन से हाथ मिलाया।
"हेलो सर, आई एम हेयर फोर ए मिशन" निधि ने हाथ मिलाते हुए कहा।
विलियमसन को तो अभी भी यकीन नहीं आ रहा था कि वह इसी एजेंट को केस देने वाला हैं।
"वेल डन, तुम्हारी बहादुरी के किस्से बहुत सुने हैं, पर देख कर लग नहीं रहा कि तुमने इतने बड़े-बड़े कारनामों को अंजाम दिया होगा" जो बात विलियमसन के मन में थी वह उसके मुंह पर आ ही गई।
"सर अक्सर जो दिखता है वह होता नहीं, और जो होता है वह दिखता नहीं" निधि ने मासूमियत से जवाब दिया
"ग्रेट, आने में कोई तकलीफ तो नहीं हुई"
"नो सर!!"
"तुम शायद अभी थक गई होगी, मेरे ख्याल अभी तुम्हें आराम कर लेना चाहिए, केस की जानकारी तुम्हें सुबह तक प्रोवाइड करवा देंगे। हम सुबह एक मीटिंग कर रहे हैं जिसमें इस केस की चर्चा करेंगें।"
"ओके सर, एज यू विश, " निधि ने जवाब दिया। थकी हुई तो वह लग रही थी। पहले इंडिया में सारी रात काम किया और अब यहां भी रात के 10:00 बज रहे हैं। पिछले 12-13 घंटों से वह लगातार काम कर रही थी।
"ऑफिसर्स!!!" विलियमसन ने पास खड़े ऑफिसर्स को अपनी और बुलाया।
"यस सर!!"
"उम्मीद करता हूं तुमने निधि के ठहरने की व्यवस्था अच्छे से कर दी होगी"
"जी सर!!"
इसके बाद विलियमसन ने निधि की तरफ देखा
"किसी भी तरह की कोई शिकायत या मदद की आवश्यकता हो तो मैं यही हूं, सुबह तुम्हें पूरा ऑफिस दिखा दिया जाएगा, फिलहाल यह आदमी तुम्हें तुम्हारी कमरे तक छोड़ देगा"
"थैंक्स सर" निधि ने जवाब दिया, और वापिस विलियमसन से हाथ मिला उस आदमी के साथ बाहर की ओर चली गई।
विलियमसन उसके जाने के बाद अभी भी सोच में पड़ा था। यह लड़की कर तो लेगी ना। समझ में नहीं आ रहा कैसे विश्वास करूं। कल इसकी परीक्षा लेता हूं, कोई छोटा मोटा केस देख कर देखता हूं इसकी क्या प्रतिक्रिया रहती है। वहां से इसके टैलेंट का अंदाजा लगाया जा सकता है। वैसे शक तो नहीं होना चाहिए क्योंकि इसे स्पेस एकेडमी की नंबर वन एजेंट कहा जाता है, पर मैं भी तो एक एजेंट हूं शक के बिना नहीं रह सकता। जांच करनी होगी!!
विलियमसन निधि की परीक्षा लेना चाहता था। एक तरह से कहा जाए तो वह अपनी तरफ से सही था, कोई भी निधि के चेहरे से यह अंदाजा नहीं लगा सकता था कि वह कितनी खतरनाक है।
ऑफिस के बाहर निधि एक टेबल मैनेजमेंट के पास रुकी हुई थी। उसके साथ वाला आदमी वहीं पास में कमरे की चाबी ले रहा था। साथ में उसने निधि के लिए खाने का ऑर्डर भी दिया। कुछ देर बात करने के बाद में आदमी वापस निधि के पास आया।
पास ही लिफ्ट थी। वहां से आदमी 6 नंबर का बटन दबाता है और कुछ देर दोनों इंतजार करते हैं। थोड़ी ही देर में लिफ्ट 6 नंबर पर जाकर रुकती है।
"मैम, आपको तेरहा नंबर कमरा दिया गया है, इस तरफ है" उस आदमी ने एक दिशा की ओर इशारा किया। निधि उस और मुड़ गई। तेरहा नंबर कमरे के पास जाकर उस आदमी ने निधि को छोड़ दिया।
" मैम यह लीजिए चाबी" उसने चाबी निधि को दी" थोड़ी देर में आपका खाना यहां आ जाएगा, डिनर करने के बाद आप आराम कर सकती हैं"
"ठीक है थैंक्स" निधि ने वह चाभी ली। चाबी एक डेबिट कार्ड की तरह लग रही थी। जिसको दरवाजे के आगे स्वीप करना पड़ता था। चाबी देने के बाद आदमी वहां से चला गया। उसके जाने के बाद निधि भी कमरे में चली गई।
कमरा बहुत शानदार था। किसी फाइव स्टार होटल की तरह लग रहा था। मखमली बेड, खुला हॉल, बड़ा सा बाथरूम, यह सब निधि के लिए आम था। न जाने उसने ऐसे कितने कमरे तबाह कर दिए होंगे। तबहा से मतलब उसका किसी भी चीज से खास लगाव नहीं होता था। उसने अपनी जैकेट उतारी और एकदम से बेड पर गिर गई। थकावट उसके शरीर को सुस्त कर रही थी।
लगभग 5 मिनट बाद उसके कमरे की घंटी बजी, और एक 65 साल की बूढ़ी महिला उसका खाना और सामान लेकर आई।
"गुड इवनिंग मैम, आपका डिनर और आपका समान"
"ठीक है इसे यहां रख दो" निधि ने एक कोने की ओर इशारा किया।
बूढ़ी महिला वैसा ही करती है। समान रखने के बाद वह वहां से चली गई। उसके जाने के बाद निधि ने खाने को पास किया और चेक किया क्या क्या बना है। खाना उसकी पसंद का था।
" लगता है स्पेस एकेडमी ने मेरी पसंद पहले ही यहां भेज दी" निधि खुद से बड़बड़ाई।
उसने जल्दी ही अपना खाना खत्म किया और उसके बाद बाथरूम में फ्रेश होने चली गई।
लगभग 10-15 मिनट नहाने के बाद में वापस बाहर आई। नहाने के बाद उसने एक व्हाइट कलर की बलियान ओर सुती लोहर पहना था। निधि की यह पुरानी आदत थी वह अक्सर खाना खाने के बाद ही नहाती है और रात को ऐसे ही कपड़े पहन कर सोती है।
सब काम हो चुका था और इस वक्त लगभग न्यूयॉर्क में रात के 11:00 बज रहे थे। नींद निधि की आंखों के ऊपर ही घूम रही थी। बेड के ऊपर गिरते ही उसे सोना था। सोने से पहले वह यह निश्चित कर लेना चाहती थी कि सुबह कोई चीज उऐ जगाए ना।
फोन की आवाज... साइलेंट।
कंप्यूटर डेस्कटॉप..... स्विच ऑफ।
खिड़कियां... पूरी तरह से बंद।
दरवाजा.... लोक।
अलार्म घड़ी......कमरे में कुल 3 अलार्म गाड़ियां थी तीनों में 6:00 बजे का अलार्म सेट था..... सब के सब बंद।
खिड़की के पास कुछ आवाज करने वाले झूले टंगे थे..... निधि ने सभी उतार नीचे रख दिए।
अब किसी तरह का शोर नहीं....।।
निधि ने अपनी बैग से रिवाल्वर निकाला और उसमें बुलेट चेक की। कुल 12 गोलियां थी उसमें। उसने उसे अपने पास रख लिया।
इसके बाद वह आंखें मूंद बिल्कुल खामोश हो गई। यह उसके सोने का समय था। बेड के पास जाते हैं वह वैसे ही बेड पर गिरी जैसे पहले गिरी थी। सब कुछ शांत हो चुका था, खामोश......!! अब उसे गहरी नींद आ रही थी।
गुड नाइट निधि।
सो तो वह गई पर यह देखना दिलचस्प था वह सुबह किस तरह से उठती है। क्योंकि निधि को जगाना मतलब मौत से पंगा लेना और खुद निधि जग जाए यह तो हो ही नहीं सकता।

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