Chepter-5
Memories Of Voksvar
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लगभग रात के 2:00 बजे ।
एक हेलीकॉप्टर उड़ता हुआ एक अंधेरे जंगल के ऊपर आकर रुका। हेलीकॉप्टर काले रंग का था और उस पर सफेद अक्षरों में स्पेस अकैडमी लिखा हुआ था। थोड़ी ही देर में एक सुरक्षित जगह देखकर हेलीकॉप्टर सतह पर की और आया। आस पास ज्यादा पेड़ होने की वजह से हेलीकॉप्टर ने काफी सावधानी बरती। नीचे उतरते ही हेलीकॉप्टर से तीन चार आदमी उतर कर बाहर आते ही एक लाइन में खड़े हो गए। चारों आदमियों ने स्पेस एकेडमी के स्पेशल सूट पहन रखा था। उनके पीछे निधि भी उतरी। चारों आदमी उसे सैल्यूट करते हैं। आसपास की स्थिति का जायजा लेने के बाद निधि आगे की ओर बढ़ी और वह चारों आदमी भी उसके पीछे पीछे चल दिए। यह चारों आदमी एक तरह से निधि के बॉडीगार्ड थे। जंगल घना था ऐसे में यहां किसी भी प्रकार का खतरा हो सकता था। ऊपर से सर्दी की रातें होने की वजह से ठंड भी ज्यादा थी। निधि और चारों आदमी कुछ पेड़ों के बीच में से होते हुए एक पगडंडी की तरफ जाने लगे। इस दौरान चारों आदमी अपने आसपास भी नजर रख रहे थे। उनके हाथों में अधिक रोशनी वाली टॉर्च थी जो चलने वाली जगह पर दिन वाला माहौल बना रही थी। निधि ने अपनी स्पेस अकैडमी वाली स्पेशल जैकेट पहन रखी थी जो पीछे के चार आदमियों से अलग थी।

कुछ देर चलने के बाद उन्हें सामने की ओर एक मकान नजर आया जहां बाहर दरवाजे पर एक लालटेन जल रही थी। निधि ने फौरन पीछे के आदमियों को रुकने का संकेत दिया और वह खुद भी वहां ठहर कर उस मकान को देखने लगी। उसने अपने पीछे के एक आदमी को इशारा किया और उसे आगे बुलाया।
" तुम सब यहीं रुको, मुझे आने में 20 मिनट लगेंगे" निधि ने उस आदमी को आदेश दिए ।
" जी मेम "
वह आदमी पीछे गया और बाकी के आदमियों को वहीं रुकने का संकेत दिया। चारों आदमी थोड़ा दूर दूर हो गए और आसपास फेल गए। वह यह सुरक्षित कर लेना चाहते हैं कि आसपास कोई खतरा नहीं। संतुष्टि होने के बाद उन्होंने निधि को इशारा किया कि आप आगे जा सकते हैं।
निधि अकेले ही मकान की तरफ बढ़ी। दूर से दिखने वाला मकान अब धीरे धीरे पास नजर आने लगा था। मकान के आस-पास सन्नाटा पसरा हुआ था। किसी तरह का कोई शोर नहीं और ना ही किसी तरह की हरकत। आस पास कोई नजर भी नहीं आ रहा था। मकान के अंदर ज्यादा रोशनी नहीं थी पर ऐसा जरूर लग रहा था जैसे अंदर कोई चिमनी जल रही है।
मकान के पास पहुंचते ही निधि वापस ठहरी और आसपास देखा। किसी तरह का कोई खतरा नहीं। उसकी जासूसी निगाहें अन्य जासूसों की अपेक्षा अधिक तेज थी। मात्र कुछ पलों की देरी में ही उसने पूरी स्थिति का जायजा ले लिया। जायजा लेने का उसका अंदाज भी अलग था। एक पल भी ऐसा नहीं लगा कि वह अपने आसपास की स्थितियों को देखकर आशवत हो रही है।

अब बारी मकान का दरवाजा खटखटाने की थी निधि ने वैसा ही किया। वह आगे बढ़ी और उसने दरवाजा खटखटाया।
अंदर से कोई हलचल बाहर नहीं आई। निधि ने दोबारा दरवाजा खटखटा दिया।
" कौन है....आता हू" अंदर से एक बारी आवाज वाले लड़के ने कहा। बेड से उठते हुए वह दरवाजे की ओर बढ़ा। लड़के की उम्र तकरीबन 22 साल के आसपास होगी । वो दिखने में हष्ट-पुष्ट, सुंदर और मजबूत था। छाती उभरी हुई जो उसके भारी व्यायाम और जिम करने की ओर इशारा कर रही थी। कदमों में भी एक अलग तरह की गति और चाल थी। नींद में उसने आंखें मसलते हुए दरवाजा खोला।
" कौन है भाई आधी रात को...." वह अभी भी अपनी आंखें मसल रहा था।
" दरवाजा खोलेगे तो पता चलेगा... विनम्र " निधि ने शुष्क आवाज में धीमे से कहा।
निधि की आवाज सुनते ही जैसे लड़के की खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। वह कुदता हुआ निधि को गले लग गया और निधि ने भी उसे ऐसा करने से नह रोका।
" यार मुझे पता था तुम जरूर आओगी....ओ गोड मैंने तुम्हें बहुत मिस किया" विनम्र थोड़ा भावूक होते हूए बोला।
" हां मी टू ... मैंने भी मिस किया" निधि भी थोड़ी सी भावुक थी।
" किया होगा पर मुझसे ज्यादा नहीं!!" विनम्र ने तुरंत जवाब दिया।
" यह अब हमारे बीच में कम-ज्यादा कब से होने लगा!!" दोनों अभी भी गले लगे हुए थे। ऐसा लग रहा था जैसे दोनों बहुत समय बाद मिल रही हैं और एक दूसरे को अच्छे से जानते हैं और ऐसा ही था। विनम्र निधि के बचपन का दोस्त था।
" ओ यार मत पूछो " विनम्र ने निधि को छोड़ा और उसके भावुक चेहरे को देखने लगा। " चलो आओ अंदर आओ अब क्या यहीं बाहर खड़ी होगी" वह आगे बोला।

दोनों अंदर चलते हैं। अंदर से मकान काफी बिखरा हुआ था। जगह-जगह खाली पैकट, खाने के पैकेट इत्यादि पड़े थे। कमरे में देखने को ज्यादा कुछ नहीं था। एक छोटा सा सोफा था जो कोनों से फटा हुआ था। एक पुराने जमाने का बेड, और एक छोटा सा गैस चुलहा जो कि टेबल पर रखा गया था। कमरे के एक कोने पर एक चिमनी बनी हुई थी जिसमें आग जल रही थी। उस चिमनी के पास दो कुर्सियां रखी गई थी। विनम्र निधि को उस चिमनी के पास लगी कुर्सी की ओर लेकर गया और उसे वहां बैठने को बोला। निधि उस चिमनी के पास लगी कुर्सी पर बैठ गई।
" तुम यहीं रुको मैं तुम्हारे पीने के लिए कुछ लाता हूं.." विनम्र ने निधि से बोला और वह दूसरी ओर लगें गैस चूल्हे की ओर चला गया।
निधि कमरे की चीजों को देख मुस्कुरा रही थी। अक्सर एक लड़के का कमरा इसी हालत मे ही मिलता है। कहीं भी किसी तरह की व्यवस्था नहीं। सब इधर-उधर बिखरा पड़ा था। निधि तो अपने काम चलाऊ कमरे को भी व्यवस्थित तरीके से रखती थी। कमरे में देखते देखते उसकी नजर दीवार पर पड़ी जहां उसकी कुछ तस्वीरें लगी हुई थी। यह तस्वीरें उसकी उम्र के अलग-अलग पड़ाव की थी। कुछ बचपन की तो कुछ उसके बड़े होने की। बचपन की तस्वीरों में उसके साथ एक लड़का भी खड़ा था जो वही लड़का था जिससे वह अब मिलने आई अर्थात विनम्र। तस्वीर में दोनों के पीछे उनके मां-बाप थे जो काफी खुश दिखाई दे रहे थे। निधि उस तस्वीर को देख थोडी भावुक हो गईं। उसका चेहरा रोने वाला था पर वो खामोशी से तस्वीर पर नजरें गड़ाए हुई थी।

थोड़ी देर में लड़का कॉफी के दो बड़े बड़े कप लेकर आ गया और उन्हें चिमनी के पास पड़े एक टेबल पर रख दिया। उसने पास की कुर्सी की खिसकाई और उसे निधि के सामने करते हुए उस पर बैठा। दोनों आमने सामने बैठे थे। लड़के ने कुछ देर निधि को देखा जो अभी भी तस्वीर की ओर देख रही थी और फिर उसे बुलाया__
"निधि!! कहां खो गयी.."
निधि के चेहरे पर अभी भी खामोशी थी और आंखों में हल्के हल्के से आंसू जिन्हें उसने पोछां।" कहीं नहीं " वह मायुसी से बोली " बस कुछ पुरानी यादें सामने आ गई थी... जो आज भी दर्द देती है"
" अब उन्हें याद करने का क्या फायदा जो हो गया सो हो गया... वह दिन सच में कठिन थे पर वह अब निकल चुके। चीजें कब की खत्म हो चुकी है"
" काश । किस्सा मात्र चीजें खत्म होने से खत्म हो जाता पर यह जो यादें हैं वह मिटाने से नहीं मिटती" निधि के चेहरे पर व्याकुलता के भाव थे। वह अपनी जिंदगी में हुए कुछ पुराने किस्सों की बात कर रही थी।
"मानता हूं तुम्हारे मां-बाप की यादें तुम्हें तंग करती हैं, और उससे भी ज्यादा बड़ी बात कि तुम अभी तक उनके कातिलों को नहीं पकड़ पाई पर यकीन मानो जिंदगी आगे बढ़ने का ही नाम है। जिंदगी में अक्सर ऐसे कई सारे पल सामने आते हैं जब हमें हार माननी पड़ती है और उसके इस निर्णय को स्वीकार कर आगे बढ़ना पड़ता है। इस निर्णय को भी तुम मानो। "
" यह तुम्हारे लिए आसान होगा पर मेरे लिए नहीं .. खैर उन बातों को छोड़ो... बुरा तो तुम्हारे मां-बाप के साथ भी हुआ था और तुमने उसका बदला भी ले लिया इसलिए तुम निश्चिंत हो... तुम्हें किसी तरह का कोई खेद नहीं पर मेरे साथ ऐसा नहीं है "
" होगा तुम्हारे साथ भी होगा वक्त पर भरोसा रखो... ये लो कॉफी पियो वरना ठंडी हो जाएगी" लड़के ने कॉफी का कप उठाया और उसे निधि को दे दिया। निधि भी वह कॉफी का कप लेती हुई कुछ सरगोशीया भरती है ।
दोनों काॅफी की एक एक चुस्की ले चुके थे। इस दौरान निधि के चेहरे मायुसी वाले मुड़ को बदलने की कोशिश कर रहा था।।
"और बताओ तुम्हारा क्या चल रहा है आजकल??" निधि ने काॅफी का एक घूंट लेंते हुए कहा," सुना है तुम्हारी सजा जल्दी खत्म होने वाली है"
"हां काश !! ऐसा हो हो जाए, स्पेस अकैडमी ने 3 साल इस जंगल की सेवा करने की सजा दी है। अभी 2 साल ही हुए हैं 1 साल और बाकी है। देखो ...क्या होता है!"
"पर तुम इस जंगल की सेवा करते लग नहीं रहे?" निधि ने टेडी नजरों से लड़के को ताड़ा। वो एक तरह से उसे परख रहीं थी। यह बात सुन लड़का थोड़ा हैरान जरूर हुआ पर उसने तुरंत स्थिति को संभालने की कोशिश की। वह किसी तरह अपने हाव-भाव को संभाल बोला--
" लग नहीं रहे, क्या मतलब !! पिछले 2 सालों से इस जंगल से बाहर नहीं निकला। ऊपर से नजरबंद और हूं, बाहर निकलता तो पकड़ा जाता" लड़के ने अपना जवाब तलब किया पर सचाई यह थी कि वह अक्सर यहां के सुरक्षाकर्मियों को धोखा देकर जंगल से निकल जाया करता था। निधि होशियार थी। वह उसके हाव-भाव देख तुरंत समझ गई कि कुछ गड़बड़ है।
" तुम यहां के सुरक्षाकर्मियों से बच सकते हो पर मुझसे नहीं। पिछले हफ्ते ही तुमने तीन बार नियम तोड़े हैं। " निधि ने अपनी चाल चलना शुरू की। वह नहीं जानती थी कि उसने नियम तोड़े हैं या नहीं पर उसने अपनी बात कह दी।
"तीन बार !! नहीं नहीं तुम्हें गलत जानकारी मिली है। मैं तो सिर्फ एक बार ही बाहर गया था" विनम्र अचानक से बोला पर बीच में ही रुक गया। वह समझ गया कि निधि ने उसे अपनी बातों में फंसाया है," ओह यार तुम भी बहुत चालाक हो .. फसा लिया ना मुझे अपनी बातों में... तुम्हारी यह बेमतलब बोलने वाली कला सच में बहुत गजब है। बड़े-बड़े इस चाल में फंस जाते हैं।" विनम्र ने अटठाहस किया। निधि भी मुस्कुरा दी।
" वैसे क्या मैं जान सकती हूं तुम्हारा बाहर क्या काम था? क्योंकि यह तुम्हारी सुरक्षा के लिए जरूरी है। मेरी जान पहचान में एक तुम ही बचे हो जो मेरे सबसे नजदीक हो, मैं नहीं चाहती तुम किसी भी तरह की परेशानी में पड़ो" निधि ने अपनी चिंता व्यक्त की।
" नहीं, परेशानी वाली कोई बात नहीं है। कुछ छोटे-मोटे काम मिल रहे हैं आजकल। अब तुम्हें भी पता है मैं भी एक जासूस हूं काम काम किए बिना नहीं रह सकता। स्पेस अकैडमी ने तो सजा दी है अगले 3 साल तक मैं ऑफिसली सीक्रेट एजेंट नहीं हूं तो वह तो काम देने से रही, इसलिए बाहर के ही कुछ छोटे-मोटे मिशन पकड़ रहा हूं ताकि टाइमपास होता रहे। तुम्हें क्या लगता है मैं 3 साल ऐसे ही इस वीरान जंगल में गुजार दूंगा, वह भी अकेले रहकर"
" मुझे तुम्हारी यह बात ठीक नहीं लगी। सजा मतलब सजा। ऊपर से तुम्हें खतरा भी है तो बाहर निकलना ठीक नहीं"
"ओ यार" विनम्र थोड़ा अजीब से अंदाज में बोला"तुम भी बेमतलब डर रही हो, हमने एक साथ कितना बड़ा मिशन किया था, तब मुझे कुछ नहीं हुआ तो अब क्या होगा। वैसे वो सब छोड़ो मुझे यह बताओ तुम आजकल क्या कर रही हो?कौन से मिशन पर हो?कुछ मजेदार है भी या नहीं!!"
"अभी तक तो कोई मिशन नहीं था पर हाल फिलाल में एक नया मिशन मिला है, न्यूयॉर्क में कोई ट्रेन हादसा हुआ है उसकी जांच करनी है"
" क्या!! ट्रेन हादसा! बस अब यही बचा था तुम्हारे लिए,हा हा हा" लड़का निधि का मजाक उड़ाने की कोशिश करता है।
"सुना है यह कोई नॉरमल ट्रेन हादसा नहीं है। अब तक 13 जांच एजेंसियों ने इसकी जांच करने की कोशिश की पर किसी को सफलता नहीं मिली। यहां तक की यह भी कहा जा रहा है कि इस ट्रेन हादसे की कड़ी शातिर अपराधियों से जुड़ी है" निधि को मिशन की ज्यादा जानकारी नहीं थी पर जितना वह जानती थी उस हिसाब से उसने बताया।
"यह कैसा अजीब कैस है??"
" पता नहीं अब केस आया है...और इसकी जिम्मेदारी मुझको सौंपी गई है। अभी कुछ देर बाद 4:00 बजे की फ्लाइट है न्यूयॉर्क की वहां जाकर ही पता चलेगा क्या है क्या नहीं। तब तक कुछ नहीं कहा जा सकता"
दोनों की कॉफी खत्म हो चुकी थी और निधि को भी यहां आए हुए काफी वक्त हो गया था। ऐसे में उसके मन में यहां से जाने का विचार आया इसलिए वह बोली, " शायद मुझे यहां से चलना चाहिए , काफी देर हो गई है। अभी पैकिंग भी करनी है"
" ओ ह" लड़के ने दुखी मन से कहा, " मुझे लगा था तुम यह कुछ देर ठहरोंगी"
" चाहती तो मैं भी ऐसा थी पर वक्त इस बात की इजाजत नहीं देता, टेंशन मत लो तुम्हारी सजा जल्दी खत्म हो जाएगी उसके बाद हम फिर से साथ काम करेंगे"
" उम्मीद तो मुझे भी ऐसी है... " लड़के ने भावुकता से कहा। उसके शब्दों में एक उम्मीद थी जो आगे काम करने को लेकर जुड़ी थी।
" शायद अब मुझे यहां से चलना चाहिए" निधि ने अपने आखिरी शब्द कहे और वह कुर्सी से खड़े होते हुए एक बार फिर से कमरे को देखती है। लड़का भी अपनी जगह से खड़ा हो गया।
"आओ तुम्हें बाहर तक छोड़ आऊं" लड़के ने निधि को बाहर दरवाजे की ओर जाने का इशारा किया। वह पास पड़ा एक कंबल उठाता है और उसे अपने ऊपर और ओढ़ लेता है। बाहर सर्दी ज्यादा थी तो उसकी यह प्रतिक्रिया आम थी। दोनों साथ-साथ बाहर की ओर चलने लगे।
" उम्मीद करूंगी तुम आने वाले समय में गैरकानूनी हरकतें कम करोगे" निधि ने लड़के के बाहर जाने वाली बात पर कटाक्ष किया।
" जरूर करूंगा, जरूर, अब तुम्हारी बात को टाला भी नहीं जा सकता तुम मेरी सीनियर हो " लड़के ने हसमुख अंदाज में जवाब दिया।
बाहर काफी अंधेरा था इसलिए लड़का दरवाजे पर टंगी लालटेन उठा लेता है और उसके सहारे आगे चलता है। निधि ने उस लालटेन की तरफ देखा।
" तुम्हारी वजह से हमारी पुरानी संस्कृति सुरक्षित है इतने टेक्नोलॉजी के जमाने में भी तुम लालटेन का इस्तेमाल कर रहे हो!! यह दिलचस्प है। "
"नहीं ऐसी कोई बात नहीं है, मुझे लालटेन अच्छी लगती है। पुरानी तकनीक में रहने का अपना ही अलग मजा है। अंदर नई टेक्नोलॉजी वाली लाइट पड़ी है पर मैं उसका इस्तेमाल नहीं करता और ना ही मैंने इस मकान में लाइट लगवाई है। अब अकेले रहना है तो अपनी मर्जी से रहो और अपनी मर्जी में पुरानी चीजें शामिल करना में ज्यादा बेहतर समझता हूं" दरअसल इस लड़के को 70-80 के जमाने में रहने वाले लोगों की तरह रहना पसंद था।
" वह तो जानती हूं तुम्हें पुरानी चीजें कितनी पसंद है, क्या तुमने अभी वह म्यूजिक प्ले संभाल के रखा है जो तुम्हारे पास तब था जब तुम 10 साल के थे" निधि ने कुछ पुरानी यादों को ताजा किया। दोनों बाहर साथ साथ चल रहे थे।
" हां रखा है। उसे संभालकर क्यों नहीं रखूंगा तुम्हारा पहला गिफ्ट था वो"
सर्दी के मारे निधि के गाल लाल हो रहे थे ऊपर से इस जवाब ने उसे और खुश कर दिया पर उसके हाव अब अभी भी सामान्य थे। दोनों उस जगह पहुंच चुके थे जहां निधि के बॉडीगार्ड आसपास के इलाके को कवर किए हुए थे। उसके बाद पहुंचते ही चारों बॉडीगार्ड उसके पास आ गए। निधि ने इशारों इशारों में बॉडीगार्ड को हेलीकॉप्टर के पास चलने के लिए कहा।

" चलो ध्यान रखना अपना! अलविदा " निधि ने आखिरी बार लड़के को संबोधित किया।
" हां!! तुम भी ध्यान रखना अपना।" लड़का भी अपनी जवाबी प्रतिक्रिया देता है। "और अच्छे से जाना है"
"........." निधि के चेहरे पर खामोशी थी।
" मैं तुम्हें याद करूंगा"
" मी टु "
" अगली बार मिलने जल्दी आना "
"कोशिश करूंगी.."
"कोशिश नहीं।। पक्का आना।।"
" हां बाबा हां " निधि मुस्कुरा कर जवाब देती है।
" चल अब जा.. तुझे देर हो रही है"
" जा रहीं हुं" निधि ने जाने का कहां पर वह वही रुकी हुई थी।
" अरे जा ना "
" हमममम।।।बाए"
निधि ने कहा और वह तेजी से पीछे मुड़कर हेलीकॉप्टर की तरफ जाने लगी। इस दौरान निधि ने पलटकर पीछे मुड़कर लड़के को टाटा बाय भी किया उसके बाद वह, पीछे नहीं मुड़ी और सीधे हेलीकॉप्टर की तरफ चल दी । लड़का काफी देर तक निधि को जाते हुए देखता रहा। निधि के जाने के बाद उसने एक लंबी सांस ली और वह भी वापिस अपने कमरे की तरफ मुड़ गया। कुछ देर बाद निधि हेलीकॉप्टर में थी। हेलीकॉप्टर ने वापस अपनी उड़ान भरी। आसपास के पेड़ों से बचता हुआ वह ऊपर हवा में गया और वहां से अंधेरे में खो गया।

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