Journey Begins From A Call
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सुबह-सुबह का समय, सूरज की पहली किरण आसमान को चीरते हुए, सीधे निधि के हल्के गुलाबी गाल पर पड़ी।
"आह"
लाल मखमली कंबल में करवट बदलते हुए उसने अपना हाथ इधर-उधर मारा और पास पड़े तकिए को उठाकर अपने गुलाबी गाल पर रख लिया
कंबल में ही अपने पैरों को पसारते हुए उसने फिर से करवट बदली और अपनी छोटी बनियान को नीचे खिसकाती हुई लंबी आराम भरी सांस ली।
बाहर के वातावरण में पक्षियों का चहचहाना था तो कमरे के वातावरण में सिर्फ दो तरह की आवाजों का गूंजना - पहली घड़ी की टिकटिक और दूसरी पंखे की खच-खच ।
निधि के काले बाल उसकी गर्दन को चूमते हुए सीधे उसकी पीठ पर जमा हो रहे थे जिसे खिड़की से आने वाली हर एक ठंडी हवा का झोंका साइड में कर रहा था। उसकी नीली नशीली आंखें नींद की आगोश में खोई हुई थी जिससे जगने की चाहत उसे कतई नहीं ।
सब कुछ बिल्कुल सामान्य चल रहा था । कहीं कोई हलचल नहीं, पर सिर्फ तब तक, जब तक एक MP3 से निकलने वाली अंग्रेजी गाने ने इस चुप्पी को नहीं तोड़ा ।
MaKe mE SOmE SunsHinE
Let tHe 'akE feEl of lovE
BeGan tHe nEw movE Of JouRny
cmOn, cmOn wakE up nOw
हॉलीवुड का एक अत्यंत ही मोटिवेशनल Song , जिसे सुन हर किसी के रोंगटे खड़े हो जाए, Song में इतनी उर्जा थी कि वह हारे हुए बंदे को भी फिर से जीता दे, दिमाग के अंदर तक Song जोश भर रहा था ।
पर ...
फटाक...धांए
ये क्या ! निधि ने पास रखे रिवाल्वर से म्यूजिक प्लेयर की धज्जियां उड़ा दी । कुछ देर पहले म्यूजिक प्लेयर से निकलने वाला जोश भरा गाना अब एक बेसुरी आवाज वाली करकराहट में बदल गया ।
फटाक ...धांए
फटाक ...धांए
फटाक ...धांए
जिसे भी निधि के रिवाल्वर की बाकी गोलियों ने बंद कर दिया....!!
उफफ......क्या यही वो निधि है जो सतीश विजवर्गीय के केस को सॉल्व करेगी....!! लगता तो नहीं..!!
रिवाल्वर से निकलता धुआं, ऊपर उड़ते हुए पंखे की हवा में विलीन हो गया। कमरे में फिर से सन्नाटा छा गया । निधि ने पास रखे दूसरे तकिऐ को उठाया और उसे अपने सीने से लगा पैरों में पूरी तरह से जकड़ लिया और मीठी मीठी सांसे लेती हुई फिर से नींद के आगोश में खो गई।
भाड़ में जाए सब...!! अभी तो बस उसे सोना है...!!
ठीक बेड के पास वाले टेबल पर रखे गुलदस्ते से निकलने वाली खुशबू हवा के माध्यम से निधि के गुलाबी होठों को छुते हुए उसी में समा रही थी । निधि के गोल उभरे हुए गाल और उन पर छाया हल्की गुलाबीपन, उसके गाल और होठों के बीच बने काले तिल को छुपाने की कोशिश कर रहा था । उसकी गोल सुराहीदार गर्दन इस वक्त तकिऐ को जोर से दबा रही थी पर इस अवस्था में भी तकिए को जैसे, उसकी मुलायम गर्दन का तनिक भी दबाव महसूस नहीं हो रहा।
कमरे में शांति बनी हुई थी और घड़ी की टिकटिक और पंखे की खचखच के सिवा कुछ भी सुनने को नहीं मिल रहा। सब कुछ सही था पर पता नहीं कहां से अचानक एक तेजतर्रार आवाज कमरे की शांति को चीरते हुए सीधे निधि के कानों पर झुंझला उठी । यह अलार्म की आवाज थी जो बढ़ती हुई दर्दनाक तरीके से कमरे में गूंजने लगी ।
सोए हुए व्यक्ति के लिए यह आवाज किसी शारीरिक प्रताड़ना से कम नहीं । झुंझलाती निधि ने पैरों के बीच फंसे तकिए को निकाला और कसके अपने कानों को ढक लिया ।
सुबह-सुबह का समय और ऊपर से नींद का नशा, ऐसे में आपकी हर एक प्यारी चीज, जो आपको जगाने की कोशिश करती है, आपकी दुश्मन बन जाती है ।
निधि पूरे बेड से सिमटकर थोड़ी सी जगह पर आ चुकी थी, उसके शरीर से लिपटा कंबल धीरे-धीरे उसका साथ छोड़ नीचे गिर रहा था, तकिए पर पड़ने वाला दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है, कंबल उसकी पीठ से सरकता हुआ उसकी कमर तक आ पहुंचा जहां वह उसकी छोटी जींस पैंट के सहारे अटक गया । हवा के एक बाहरी झोंके ने उस हिस्से की बनियान को हटाते हुए साइड में कर दिया जिससे उसकी पीठ की गोरी त्वचा सीधे नजर आने लगी ।
पीठ की इस गोरी त्वचा पर छोटे भूरे बालों के बीच ठीक वैसा ही तिल था जैसा तिल उसके गोरे हल्की गुलाबी गाल पर था । पंखे की धीमी हवा भी लहराते हुए इस हिस्से पर अजीब ठंडक पैदा कर रही थी पर अचानक
धड़ाम ...
कुछ देर पहले जिस गुलदस्ते से भीनी खुशबू आ रही थी निधि ने वही गुलदस्ता उठा अलार्म घड़ी पर दे मारा ।
कमरे में एक बार फिर से सन्नाटा छा गया । तकिए को फेंक निधि फिर से सुव्यवस्थित हुई और खुद को लाल मखमली कंबल में लपेट लिया। आराम की सांस लेते हुए उसने अपने गुलाबी होठों का एक अजीब आकार बनाया और ऊपर की तरफ हवा का दबाव डालते हुए माथे पर आए बालों को हटाने लगी । कुछ देर में और......वह फिर मीठी मीठी सांसे लेकर नींद के आगोश में खो गई ।
गुलदस्ते के टेबल के दाहिने और एक और टेबल पड़ा था जिस पर एक लैपटॉप रखा हुआ था यह लैपटॉप सामान्य लैपटॉप से थोड़ा अलग था । इसका आकार एक छोटी अटैची के जैसा था, अगर इस लैपटॉप को बंद कर दिया जाए तो यह अटैची का ही रूप ले लेगा । बेड के सामने की ओर बने आलीशान फर्नीचर में कुछ अवॉर्ड्स रखे हुए थे जिनमें से एक पर लिखा था,"द बेस्ट एजेंट ऑफ द ईयर" और उसके पास ही एक सर्टिफिकेट था जिस पर बड़े बड़े अक्षरों में उस संस्था का नाम लिखा हुआ था जिसमें वह काम करती थी, और नीचे निधि का नाम । फर्नीचर के बीचोंबीच एक एलइडी स्क्रीन थी तो उसके जस्ट ऊपर वही म्यूजिक प्लेयर जिसके परखच्चे निधि ने अपनी रिवॉल्वर से उड़ाए ।
म्यूजिक प्लेयर के सारे पुर्जे, कंकाल की तरह बाहर निकले हुए थे जिनमे़ लगी कुछ बिजली के तारों में शॉर्ट सर्किट होने लगा । शॉर्ट सर्किट से निकलने वाले चिंगारियां लगातार फर्श पर बिछे कालीन पर गिर रही थी । पंखे की हल्की हवा और छोटी-छोटी चिंगारियां का लगातार प्रभाव, फर्श पर बिछे कालीन में आग सुलगाने के लिए काफी था ।
नऐ ट्रेंड वाला यह कालीन सूखी घास की पत्तियों से बना था जो एक बार आग पकड़ ले तो उसको कुछ ही क्षणों में भयानक रूप दे दे । निधि के बदंन से लिपटा कंबल भी उसकी कमर से होते हुए आधा जमीन पर गिरा था । उसके बेड की चदर भी इतनी बड़ी थी कि वह फर्श के कालीन को छू रही थी ।
सुलगती हुई आग धीरे-धीरे कालीन के जरिए होते हुए नीचे पड़े कंबल तक पहुंच गई। कालीन पूरे घर में बिछा हुआ था, जिसमें एक कमरा जहां निधि सो रही थी, एक छोटा किचन और एक हाॅल था । सुलगती आग का दूसरा छोर हॉल और किचन की तरफ जाने लगा ।
मीठी मीठी नींद में खोयी निधि, इस पूरी हलचल से अनजान, नींद के नशे के परम आनंद का लुफ्त ले रही थी । इस अवस्था में उसकी ऊपर नीचे होती हुई आंखों की भौंह और होठों की हल्की मुस्कुराहट उसकी सुंदरता को दुगनी कर रही थी ।
"आह"
आह भरते हुए निधि ने एक लंबी सांस ली ....पर हल्की ठंडी खुशबू भरी सांस में निधि को इस बार कुछ गर्माहटपन महसूस हुआ ।
निधि ने अपने नाक को सिंगोड़ा और झटके से दो चार और सांसे ली ।
फिर से गर्माहट भरी सांसे ।
कहीं ना कहीं कुछ तो गड़बड़ है, अपनी दोनों बंद आंखों में से उसने एक आंख को धीरे धीरे खोला इस उम्मीद में कि सब कुछ ठीक हो पर जैसे ही उसे सामने का दृश्य नजर आया जहां एक डेस्क पूरी तरह से जल रहा था ।
" What the Fuck bleedy " निधि सटाक से उठी
यह दृश्य देख निधि की सारी की सारी नींद एक ही झटके में उड़ गई । पूरा कमरा आग से घिर चुका था । निधि का बेड और कंबल भी आग की लपटों में झुलस रहा था ।
" Shit "
यह बोलते हुए उसने अपना हाथ सर से सटा दिया और तिरछी निगाहों से पूरे कमरे को देखा । कंबल में लगी आग निधि की तरफ आ रही थी , सारी नींद टूटने के बावजूद निधि पर नींद का हल्का नशा बाकि था और इस नशे में वह इस आग को अपनी ओर आते हुए देख रही थी ।
कमरे की हर एक चीज जल रही थी , फर्नीचर में रखी एलईडी स्क्रीन, फर्नीचर के जलने के बाद धड़ाम से नीचे आ गिरी। जलती हुई आग छत तक पहुंचने को तैयार थी, घर भी लकड़ी का बना हुआ था जिस वजह से घर का जलना भी तय था पर निधि वह अभी भी बेड पर बैठी जलती हुई चीजों को घुर रही थी ।
" उफ्फ , फिर से नहीं यार " उसने अपने सर को खुजाया और अपनी नजर किचन की तरफ की जहां
किचन में फैली आग धीरे-धीरे सिलेंडर तक पहुंच रही थी जो उस से कुछ मीटर की ही दूरी पर था और उसकी पाइप भी आग पकड़ चुकी थी ।
" ओह, मर गई "
बस फिर क्या निधि ने ना आव देखा न ताव
ऊपर लिया कम्बल साइड में उठा फैंका ।
टेबल पर रखे लैपटॉप को खिड़की से बाहर धकेला ।
टेबल के दूसरी और रखे फ़ोन को छोटी जींस स्कर्ट की पीछे वाली जेब में डाला ।
रिवाल्वर उठा पेंट की साइड में फंसाया और बेड से कुदते हुए सीधे पंखे से जा लटकी और झूलने लगी ।
दीवारों को लगी आग छत पर फैलती जा रही थी और सिलेंडर भी कुछ देर में फटने वाला था ऐसे में निधि पंखे से लटकी हुई थी जहां उसकी एक गलती उसके पूरे गोरे बदन को झुलसा सकती है ।
आग की लपटों का एक झुंड निधि की ओर बढ़ा , निधि थोड़ी पीछे की ओर गई और एक लंबा झूला लेते हुए उन आग की लपटों में से होते हुए सीधे खिड़की से बाहर आ गिरी ।
कुछ देर पहले मखमल के कंबल में लिपटी निधि अब रेतीली मिट्टी से दो दो हाथ कर रही थी , उसका गोरा बदन मिट्टी में चित हो चुका था , पर मुसीबत अभी खत्म नहीं हुई थी जिसका अंदाजा निधि को भी था ।
इसलिए उसने जल्दबाजी में खुद को संभाला और पास पड़ी अटैची को उठा सामने कि ओर भागने लगी , उतनी तेजी से , जितनी तेजी से वह भाग सकती थी ।
भागते भागते "बड़ाम" एक जोरदार धमाका हुआ, और हवा में उड़ती हुई निधि फिर से मिट्टी में जा धसीं ।
उसका घर और नींद दोनों एक साथ उड गए , घर के तो चिथड़े-चिथड़े हो चुके थे । पर निधि की शक्ल देख लग रहा था कि अभी भी उसे किसी बात का अफसोस नहीं ।
मिट्टी से अलग होते हुए उसने खुद को संभाला और पास रखी अटैची को सिरहाने रख फिर से लेट गई ।
" आह, ये भी गया " वह बोली
आसमान साफ था , पक्षी अपने अपने घरों से निकल आसमान की लंबी उड़ान भर रहे थे ,समुद्री बीच पर चलने वाली ठंडी हवा उत्तर से होते हुए दक्षिणी गोलार्ध की ओर जा रही थी । अटैची को सराहना बनाकर लेटी निधि ने अपना हाथ रेत में इधर-उधर करना शुरू किया और रेत के ठंडेपन को महसूस किया ।
" हम जिंदगी में कितना कुछ करते हैं, जिंदगी से जूझते है, लड़ते हैं, वह हमें हराती है और हम उसे , पर इन सब के बावजूद ऐसे पल बहुत कम देखने को मिलते हैं, काश यह पल कभी खत्म ना हो " आसमान की तरफ देखते हुए निधि ने अपने आप से कहा। "इस तरह का सुंदर नजारा तो इंसान को मरने के बाद भी नसीब नहीं होता...."
पर शायद ऐसा संभव नही था, कोई भी इंसान किसी एक अवस्था में लगातार नहीं रह सकता और निधि भी नहीं ।
इस मनमोहक पल का निधि ने अभी आनंद लेना शुरू ही किया था कि उसके सिरहाने रखे लैपटॉप से एक बीप की आवाज आई ।
" हेलो मिस निधि प्लीज कंफर्म योर पासवर्ड "
" क्या है बे..!!" उसने एक देहाती लैंग्वेज में लैपटॉप को ऐसा रिस्पांस दिया मानो वह उसकी कोई सौतन हो।
पासवर्ड कंफर्म ....मैसेजेस ईज रीडिंग
I am confirmly confident to saying that you are selected for a new mission of our agency. you have only 10 horse for solving this mission . Let's take the mission and complete it on time.
Thank you
and please change the password of your laptop
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और उसके बाद लैपटॉप के बीप की आवाज बंद हो गई।
"ओह .... आया है तो अब .... पूरा तो करना पड़ेगा..... यह एक एजेंट की जिंदगी भी ना.... ना तो चैन से सो सकते हैं और ना .......चल निधि.....चल....... बहुत आराम कर लिया ....अब थोड़ा काम भी कर लिया जाए"

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