विनम्र और लुईस इल्लल्लाह ( सिरिया का प्रधानमंत्री)
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इराक में एक नेता का कमरा।
कमरे में टेबल पर कुछ फाइलें रखी हुई थी। उनमें से 2 फाइलें खुली थी और बाकी की फाइलें बंद । एक नौजवान युवक उस कमरे में कुर्सी पर बैठा था। उसके सामने ही एक आदमी था, लेकिन मरा हुआ। उसके सर के बीचो-बीच गोली मारी गई थी। नवयुवक के हाथ में पिस्तौल थी जिससे यह जाहिर होता है कि इसी ने उस आदमी को मारा है। वह कुर्सी पर बैठा एक के बाद एक फाइलों को देख रहा था। कुछ फाइलें देखने के बाद उसने अफसोस में गर्दन हिलाई और कहा "यहां ऐसा कुछ नहीं........बेचारा यह बिना मतलब के मारा गया" और फिर खड़ा होकर दरवाजे के पास आ गया। "सीरिया जाकर इस बात की सूचना देनी होगी...."
सिरिया और इराक के बॉर्डर पर बनी एक जगह—
चारों ओर सख्त तारबंदी थी। दो देशों की सीमाएं यहां अलग होती हैं ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था अपने सर्वोत्तम प्रकोष्ठ पर थी। सुरक्षा व्यवस्था में तार के एक और सीरिया की सेना अपना पहरा दे रही थी तो एक और इराक की सेना। बीच-बीच में टैंकों की मौजूदगी भी दिख रही थी। टैंकों के करीब ही मिसाइल लांचर लगे हुए थे। इन मिसाइल लांचरों से हटकर सैनिक बेस बने हुए थे। प्रत्येक सैनिक बेस में 10 से 15 सैनिकों के ठहरने की जगह थी। इन सैनिकों के बेस के ऊपर सैनिक टावर थे। यह सैनिक टावर दूसरे देश की सीमा में तांका झांकी करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। जमीनी सतह पूरी तरह से रेतीली थी।
अचानक दूर से वही नवयुवक खुले मैदान में चलता हुआ दिखाई दिया, जिसने एक आदमी के सर पर गोली मारी थी। उसके हाथ ऊपर थे। उम्र तकरीबन 21 साल, शरीर पर फटे हुए भारी भरकम कपड़े। आंखें आकर्षित और पीले रंग की थी। वह इराक से सीरिया की तरफ जा रहा था।
टावर पर खड़े सेनिक की नजर उस पर पड़ी, उसने तुरंत अपना वायरलेस उठाया और नीचे बेस के लोगों को इस बात की सूचना दी।
देखते ही देखते 10 जवानों की एक टुकड़ी हथियारों के साथ वहां आ पहुंची।
"कौन हो तुम और यहां क्या कर रहे हो??" सैनिकों ने उससे पूछा।
"बताता हूं, लेकिन पहले मुझे कमांडर से मिलवाओ"
टुकड़ी ने उस आदमी को पकड़ा और बेस में ले गए। तकरीबन 5 मिनट बाद टुकड़ी का कमांडर वहां आया और पूछा "कौन हो तुम, और यहां किस मकसद से आए हो?? क्या तुम सीरिया के जासूसों या फिर इराक के कोई बागी हुए मुजरिम?? जो भी हो सच सच बताना, अगर झूठ बोलने की कोशिश की तो अल्लाह कसम पूरी की पूरी बंदूक तुम्हारे सीने में खाली कर दूंगा"
नवयुवक ने कुछ नहीं कहा। कमांडर दोबारा धमकी वाले अंदाज में बोला "बताओ! कौन हो तुम!"
"इराक का सीक्रेट एजेंट हूं" नवयुवक ने सामने से जवाब दिया।
"सीक्रेट एजेंट!!" कमांडर और वहां खड़े सब लोग हैरान हो गए।
"हां, सीक्रेट एजेंट। मेरा नाम विनम्र है और मैं यहां सीरिया के तानाशाही शासक लुईल इल्लल्लाह को मारने आया हूं।"
"तुम्हें क्या लगता है तुम कहोगे और हम मान लेंगे" कमांडर ने सख्त लहजे में कहा।
"मेरे पास सबूत है" विनम्र बोला और कुछ दस्तावेज निकालकर उनके सामने रख दिए। देखो!! इसमें मेरा तो कुछ नहीं जाता, अगर सीरिया का शासक मर गया तो तुम लोगों का ही भला होगा…. मुझे इस मिशन के लिए स्पेशल ट्रेन किया गया है"
कमांडर को कुछ समझ नहीं आ रहा था वह आगे क्या बोले। सीरिया और इराक के बीच वर्षों से चली आ रही जंग के कारण ऐसे एजेंट बॉर्डर पर इधर-उधर होते रहते हैं।
"तुम अकेले उसे कैसे मारोगे??" कमांडर ने थोड़ा नरम रुख अपनाया।
"बहुत आसान है, उसके देश में घुसुगां, वहां जाकर बोलूंगा कि मैं सीरिया का जासूस हुं और इराक कि सेना से जुड़े कुछ जरूरी दस्तावेज लेकर आया हूं, वो लोग मुझे अपना जासुस समझेंगे और आसानी से लुईल इल्लल्लाह तक पहुंचा देंगे, जैसे ही मैं उसके सामने जाऊंगा गोली से उड़ा दूंगा"
"यह काम इतना आसान नहीं बरखुरदर" कमांडर हंसता हुआ बोला।
"उसकी चिंता आप मत कीजिए। मेरी वहां बड़े-बड़े लोगों से जान-पहचान हैं, कब कहां से कहां तक पहुंच जाऊंगा किसी को पता नहीं चलेगा"
कमांडर सोच विचार में पड़ गया। "लेकिन तुम्हारे पास तो किसी भी तरह के दस्तावेज नहीं"
"तो तुम लोग दे देना ना" विनम्र मुस्कुराकर बोला"वैसे भी अच्छे काम के लिए गलत काम किए जा सकते हैं"
"हम लोग तुम्हें क्यों दस्तावेज दे, यह तो देश से गद्दारी करना होगा"कमांडर की आंखों में शिकन आ गई।
"अरे मेरे मालिक" विनम्र खड़ा हुआ और कमांडर के करीब जाकर बोला "मैं कौन सा सही दस्तावेज देने को कह रहा हूं, झूठे दस्तावेज देने है आपको"
इस बात ने कमांडर को फिर से सोचने पर मजबूर कर दिया। उसने सैनिकों के साथ सलाह मशविरा किया। फिर कैबिन में गया और कुछ कागज के टुकड़े लेकर उसके पास आ गया "यह लो, मेरे सैनिक तुम्हें बॉर्डर पार करवा देंगे... उसके बाद तुम जानो तुम्हारा काम जाने"
विनम्र एक मुस्कुराहट दिखाई। "आप बहुत होशियार है मेरे मालिक" और दस्तावेज उठाकर वहां से चला गया।
उसके साथ एक सैनिक और था। वह सैनिक उसे बॉर्डर पार करवा रहा था। बॉर्डर के नजदीक पहुंचते ही विनम्र ने सैनिक को देखा और कहा "तुम लोगों को नहीं लगता तुम्हारा कमांडर बेवकूफ है"
"क्या मतलब!!"
"यही कि उसने एक अनजान शख्स पर इतनी आसानी से भरोसा कर लिया"
"इराक की सेना अमन चाहती है,ऐसे में वह हर एक शख्स पर विश्वास करेगी जो सीरिया को खत्म करने की चाह रखता हो"
विनम्र यह सुनकर हंसने लगा "शायद यही बात तुम लोगों की सबसे बड़ी कमजोरी है"
सैनिक ने विनम्र की शक्ल देखी "तुम कहना क्या चाहते हो... अपनी बात साफ-साफ कहो"
विनम्र रुका और सैनिक की तरफ पलटा। "मेरे भाई!! मेरा नाम विनम्र हैं और मुझे धोखा देना बहुत अच्छे से आता है"
तभी पीछे एक जोरदार धमाका हुआ और बेस कैंप पूरा का पूरा उड़ गया। सैनिकों ने पलट कर पीछे अपने बेस की तरफ देखा। वहां एक के बाद एक धमाके हो रहे थे।
"मतलब तुमने हमें धोखा दिया है" सैनिक गुस्से से बोला और पीछे मुड़ा, पर इससे पहले वह और कुछ करता विनम्र ने उसकी पीठ से उसका खंजर निकाला और उसी के सीने में घोप दिया। "मैंने कहा था ना…. विनम्र सिर्फ धोखा देता है"
सैनिक को मारने के बाद उसने उसकी गर्दन काटी और खंजर वहीं फेंक दिया। इसके बाद वह बॉर्डर पार कर दूसरी तरफ सीरिया चला गया। उसके पास दस्तावेज के साथ-साथ एक सैनिक का सर भी थे।
सीरिया के सैनिक विनम्र को देखते ही उसकी तरफ भागे और खुशी से उछलने लगे।"कमांडर आ गए.... कमांडर आ गए"
"सर हमें नहीं पता आप अपना मिशन इतनी आसानी से पूरा करेंगे"सीरिया के एक सैनिक ने कहा
"क्यों!!" विनम्र अजीब सी आंखें बनाकर उसे देखने लगा "क्या तुम्हें मुझ पर यकीन नहीं"
"कैसी बातें कर रहे हैं सर आप!! आप हमारे कमांडर हो और हमें आप पर यकीन नहीं होगा, ऐसे कैसे हो सकता है"
यह सुनकर विनम्र एक हल्की मुस्कान दिखाइए "यह हुई ना बात, वैसे जिस काम के लिए गया था वह पूरा नहीं हुआ। तुम ऊपर सूचना भिजवा दो कि हमें वह चीज नहीं मिली"
"कौन सी चीज सर??" सैनिक ने एक पल रुक कर पूछा।
"वह लोग अपने आप समझ जाएंगे.... तुम बस काम करो जिसके लिए कहा गया है। " विनम्र ने अपने चेहरे पर रौब दिखाते हुए उस आर्डर दिया। "अभी और भी बहुत सारे काम है जो मुझे निपटाने हैं"
इतना कहकर विनम्र ने वहां खड़ी एक जीप पकड़ी और उस जगह से चला गया।
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