थंडर लाइंस, और मुश्किलों का आना।
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रात को निधि अपने कमरे में चुपचाप बैठी थी। उसके पास एक बल्ब था जिसे वह बार-बार जगा और बुझा रही थी। साफ है इस वक्त वह किसी के बारे में सोच रही थी
वह उतना भी बुरा नहीं जितना वह दिखता है। अपने देश के लिए उसके दिल में अब भी जज्बात है, भले ही आज वह सीरिया का साथ दे रहा है लेकिन अगर उसको सही तरीके से ट्रीट किया जाए तो वह इंडिया का भी साथ दे सकता है। ... वह बुरा नहीं ....तेरह साल की उम्र से वहां रह रहा है....उसके बाद एकेडमी ने भी उसे कांटेक्ट नहीं किया.... इतने साल एक ही देश में रहने के बाद उससे देशभक्ति तो जुड़ ही जाती है। उसके दिमाग में अभी सीरिया को लेकर मोह माया है..... उसे तोड़ा जा सकता है। विनम्र जैसे लोगों को एजेंसी के लिए ही काम करना चाहिए............."
कुछ देर विनम्र के बारे में सोचने के बाद वह खड़ी हुई और उसने पोस्टर की आड़ी टेढ़ी लकीरे निकाल ली। "इनका भी रहस्य समझ में नहीं आ रहा...... उन्हें यह लकीरें चाहिए पर क्यों..... आखिर ऐसा क्या खास है इसमें। अगर इसके बारे में सही तरीके से जानना है तो मुझे अंकल से बात करनी चाहिए...."
निधि ने दरवाजा खोला और बाहर वकार अहमद के सामने कुर्सी पर जाकर बैठ गई।
"मुझे आपसे कुछ जरूरी बात करनी है.. अंकल" उसने तुरंत आंखों में आंखें डाल कर कहा
"जरूरी बात” वह थोड़े हैरान हुए "लेकिन क्या??"
"कुछ है जो मुझे आपको बताना है" निधि ने अपना मोबाइल निकाल कर उसके सामने रख दिया। मोबाइल में आड़ी टेढ़ी लकीरों की तस्वीरें थी "इस तस्वीर का रहस्य क्या है...??"
वकार अहमद उन तस्वीर को देखा "अरे बेटा, तुम्हें यह लकीरें कहां से..... किसी और को तो नहीं पता..... किसी को बताया तो नहीं"
"अभी तक तो नहीं...!!"
"बहुत अच्छे!!" उसने फोन उठाकर अपने पास रख लिया।
"लेकिन यह है क्या..??"निधि ने पूछा
"यह बहुत ही बेशकीमती चीज है" वकार अहमद ने बताया "एक नहीं बल्कि कई देश इसके पीछे पड़े हैं।"
"कई देश!!"
"हां!!"
"पर यह है क्या??"
वकार अहमद खड़ा हुआ और दरवाजा बंद करके उसके पास आया "इन आड़ी टेढ़ी लकीरों को थंडर लाइन्स कहा जाता है। जैसा कि तुम जानती हो एक देश दूसरे देश पर हमेशा हमला करता रहता है। सीरिया और इराक के मामले में यह सब पिछले कई सालों से हो रहा है। एक सेना दूसरे देश की सेना पर हमला तो करती है लेकिन कभी कामयाब नहीं हो पाती, इसका मुख्य कारण है दोनों देश की सेनाओं का आमने सामने आना। पड़ोसी देश भी इस जंग में शामिल है। जिस वजह से कई देश एक साथ इस जंग में अपनी भूमिका निभा रहे थे। अगर किसी एक देश को दूसरे देश पर जीत हासिल करनी हैं तो उन्हें तीन चीजों की आवश्यकता है.... पहले, उनकी खुद की सेना.... दूसरी, खुफिया रास्ते... और तीसरी सामने वाली सेना का सामने ना मिलना। अगर एक बार सेना राजधानी पहुंचकर वहां के प्रधानमंत्री को घेर ले तो उस देश को घुटने टेकने पड़ते हैं। यह थंडर लाइन्स देशों के वही खुफिया रास्ते हैं जिससे वह एक बड़ी सेना को एक देश से दूसरे देश आराम से ले जा सकते हैं। इनकी कीमत सिर्फ वही समझ सकता है जिसके पास यह रास्ते हो....अगर किसी भी देश में से एक के पास भी यह रास्ते चले जाते हैं तो वह अपने देश के अंदर आने वाले खुफिया रास्तों को बंद कर दूसरे देश में अपनी सेना सुरक्षित भेज सकता है। मतलब.... कामयाबी उसके हाथों में होगी... और उसे कामयाब होने से कोई नहीं रोक सकता "
थंडर लाइन्स!! यह तो एक नया ही कॉन्सेप्ट था। दूसरे देश में घुसने के नए रास्ते जो पूरी तरह से खुफिया थे। निधि ने इनके बारे में पहले कभी नहीं सुना था, जो भी था वह आज ही सुन रही थी। "अब बात कुछ कुछ समझ में आ रही हैं। सीरिया के लोगों को इन लाइन्स की जरूरत थी, जो कि हमारे एजेंट के पास थी। उन्हें इस बात की जानकारी मिली और उन्होंने हमारे एजेंट को खत्म कर दिया। लेकिन यह तो बात सीरिया की थी..... यहाँ के एजेंट को किसने मारा" निधि कहते हुए खड़ी हुई और बिल्कुल बेकार अहमद के सामने आ गई।
"मैं इसका पता लगा लूंगा बेटी... जरूर सीरिया का कोई एजेंट यहां होगा" उसने अपनी आंखें निधि से छुपाते हुए नीचे देख कर कहा।
"हां, मुझे भी यही लगता है" निधि अपनी आंखें वकार अहमद से मिला रही थी। "चलिए, रात बहुत हो गई है अब सो जाना चाहिए!! सुबह इस पर बात करते हैं"
निधि ने लंबी सांस लेकर कहा और फिर अपने कमरे में चली गई।
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THE TRUBLE OF NIDHI BEGAN FROM HERE
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रात को तकरीबन 2:00 बजे निधि अपने कमरे में आराम से सो रही थी। इसी वक्त बाहर की गली में कुछ हलचल हो रही थी, चार से पांच अनजान आदमी किसी तरह के ज्वलनशील पदार्थ की गैलन लेकर वकार अहमद के घर में आ रहे थे। वह सब वहां वकार अहमद के सामने आकर खड़े हुए और आंखों ही आंखों से आगे क्या करना है इस बात का इशारा करने लगे। वकार अहमद ने आंखों से इशारा कर सबसे पहले दरवाजा बंद करने को कहा, एक आदमी ने आगे निकलकर दरवाजा बंद किया। इसके बाद वकार अहमद ने आंखों से इशारा कर उनके हाथ में जो ज्वलनशील पदार्थ की गैलन थी उसे निधि के कमरे में डालने को कहा।
कमरे का दरवाजा बंद था। अंदर से भी और बाहर से भी। अंदर निधि को इस बात का बिल्कुल नहीं पता था कि वह एक नए खतरे में फंसने वाली है। नींद को प्यार करने वाली निधि जल्दी उठने के लिए बिल्कुल नहीं जानी जाती। कमरे में पंखे की आवाज सन्नाटे को दूर कर रही थी। चारों और सिर्फ और सिर्फ दीवारें थी, किसी तरह की खिड़की नहीं। लकड़ी का सामान भी काफी सारा भरा हुआ था, अगर एक चिंगारी भी इन्हें छूती है तो पूरा कमरा आग से भड़क उठेगा।
बाहर के आदमी ज्वलनशील पदार्थ को दरवाजे के नीचे से अंदर डालने लगे। धीरे धीरे ज्वलनशील पदार्थ लिक्विड की फॉर्म में दरवाजे के नीचे से निकलकर निधि के कमरे में फैलने लगा। यह पेट्रोल नहीं था, ना ही डीजल, बल्कि एक ऐसा ज्वलनशील पदार्थ था जो इराक में तेल के कुओं के अंदर पाया जाता है, इसे लिक्विड एलपीजी कहा जा सकता है जिसमें कोई गंध नहीं होती। अक्सर घरों में जो एलपीजी से गंध आती है वह उसके अंदर मिलाई गई दूसरी गैस की वजह से होती है न कि उस गैस की वजह से जो हम जलाने में काम लेते हैं।
निधि ने इधर बेड पर करवट बदली और उधर पूरा लिक्विड कमरे में फैल गया। बेड से लेकर कमरे की सभी लकड़ी की चीजों को वह लिक्विड भिगो चुका था।
बाहर खड़े दो अनजान व्यक्तियों ने माचिस की तीली जलाई और उसे लिक्विड पर फेंक दिया। माचिस की तीली के लिक्विड पर गिरते ही आग बाहर से अंदर की ओर जाने लगी।
आग सबसे पहले दरवाजे तक पहुंची, उसके बाद दरवाजे के नीचे से होते हुए अंदर, और फिर अंदर जाकर लकड़ी के सामान तक, ओर उसे जलाने लगी।
निधि अभी भी सोई हुई थी। लकड़ी का सामान धीरे-धीरे आग पकड़ने लगा और कमरे में गर्मी बढ़ने लगी।
निधि ने नींद में ही चद्दर को दूसरी तरफ कर दिया क्योंकि उसे गर्मी लग रही थी, लेकिन एक पल भी यह नहीं सोचा कि वह खतरे में है।
आग थोड़ी बढ़ी और बेड तक जा पहुंची। इस बार निधि को कुछ महसूस हुआ, एक गर्मी जो उसके शरीर को जला रही थी।
वह पलक झपकते ही उठी और सामने का खतरनाक नजारा देखा। उसका कमरा जल रहा था...
"ओह नो... यह क्या!! " वह तुरंत तेजी से बेड पर ही खड़ी हो गई।
पूरे कमरे में आग लग रही थी, कमरा में खिड़की नहीं थी ऐसे में निधि बचकर कहीं नहीं जा सकती थी।
बाहर के अनजान आदमियों ने एक भारी-भरकम अलमारी सरकाई और उसे दरवाजे के आगे लगा दिया, ताकी अंदर से निधि दरवाजा तोड़कर बाहर ना आ सके।
निधि को भी महसूस हो गया कि बाहर का दरवाजा बंद हो चुका है और वह किसी बड़े चक्रव्यूह में फंस चुकी है। पर अब बहुत देर हो चुकी थी.... उसके बचने का कोई रास्ता नहीं था।
उसने खुद का होश संभाला और तुरंत मुश्किल हालातों में बचने का रास्ता ढूंढने लगी...सबसे पहले बेड के भारी-भरकम गद्दों को समेटकर साइड में किया ताकि आग उसे ना लगे... अगर एक बार आग बेड के गद्दे को लग गई तो वह तेजी से कमरे में गर्मी बढ़ाएगी।
बाद में निधि बेड से उतरते हुए आसपास की लकड़ी के सामान को अलग करने लगी.... सिर्फ इस उद्देश्य से कि जितना हो सके उतना आग को फैलने से रोका जा सके।लेकिन इस तरह वह ज्यादा देर तक नहीं बच सकती थी... धीरे धीरे कमरे में लकड़ियों के जलने के कारण धुआँ बढ़ने लगा।
"मुझे जैसे तैसे कर यहां से बाहर निकलना होगा... वरना मेरी कब्र आज यही खुद जाएगी" उसने खुद से कहा और कमरे की चीजों को देखने लगी।
वह कुछ लोहे का सामान पड़ा था...." खुद जाएगी.... कब्र खुद जाएगी" पता नहीं उसके दिमाग में क्या आया वह खुद से यही बोली और फिर तेजी से कूदकर लोहे के सामान में से एक नुकीली पाइप उठा ली। पाइप मजबूत थी।
उसने पाइप उठाई और फर्श पर वार करने लगी। वह फर्श तोड़ने की कोशिश कर रही थी।
जैसा कि मैंने आपको पहले बताया था यहां की दीवारें और फर्श बहुत कमजोर है और उन्हें काफी समय से मरम्मत की आवश्यकता थी। इस वक्त निधि के मन में जो विचार आ रहा था वह इस फर्श को तोड़ने का था ताकि वह इस कमरे से बाहर निकल सके।
बाहर के अनजान लोग अब तक कमरे को छोड़ कर जा चुके थे.... वह पूरी तरह से आश्वस्त थे कि निधि अब नहीं बचेगी लेकिन निधि हिम्मत हारने वाली नहीं थी....
जल्द ही उसकी कोशिश रंग लाई और एक हल्के से झटके के साथ पूरा का पूरा फर्श नीचे गिर गया। फर्श नहीं बल्कि वहां का सामान भी, बचने के चक्कर में उसने एक और नई आफत मोल ले ली...नीचे वाली मंजिल में गिरते ही कई सारी ईंट और गर्म गर्म कोयले उसके ऊपर आ गिरे।
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कुछ समय बीत जाने के बाद उस जगह पर कुछ ईंटें ऊपर उठती हुई दिखाई दी, निधि उन ईंटों को अपने ऊपर से हटा रही थी। पता नहीं आज सुबह उसने किस की शक्ल देखी थी जो उसे इन मुश्किल हालातों का सामना करना पड़ रहा है। उसने अपने जख्मी हाथ से बाकी की ईंटों को साइड में किया और खुद बाहर सुरक्षित निकली। उसके कपड़े कई जगहों से फट चुके थे... शरीर के कई हिस्सों से खून निकल रहा था.. मुंह पर खरोंच और दाग के निशान थे। शरीर की त्वचा हल्की सांवली पड़ चुकी थी।
जैसे ही वह निकल कर बाहर आई, उसने चलने की कोशिश की, सामने दूसरा कमरा था जहां से सीढियां निकलकर वापस ऊपर जा रही थी। निधि उन सीढ़ियों पर चढ़कर ऊपर जाने लगी... वहां पहुंचकर उसने कुछ कपड़े के टुकड़े उठाए और उसे अपने घावों पर बांधा..... सुबह के तकरीबन 3:00 बज रहे होंगे और बाहर काफी ज्यादा अंधेरा था।
घर खाली था... ना वहां वकार अहमद था ना ही उसकी पत्नी। जख्मों की मरहम पट्टी करने के बाद निधि ने फ्रिज खोली और वहां से वाईन की एक बोतल निकाल ली। फिर बोतल को टेबल पर रखा है और एक के बाद एक आधी बोतल पी गई। इससे वह दर्द को कम महसूस करेगी।
"वकार अहमद धोखा देगा.... यह नहीं सोचा था" उसने तुरंत अपनी पॉकेट में हाथ डाला और दूसरा फोन निकाला। जल्दी उस पर वकार अहमद की लोकेशन ट्रैक की। वकार के पास निधि का फोन था ऐसे में लोकेशन ट्रैक करना ज्यादा मुश्किल नहीं। निधि के पास दो फोन थे। एक फोन उसने वकार अहमद को दे दिया था और एक उसके खुद के पास था।
"सुबह होने से पहले मुझे वकार अहमद को ढूंढना होगा......क्योंकि यह तो सिर्फ पहला खतरा था.... अगर वकार अहमद मुझे ना मिला....तो पता नहीं आगे और कौन-कौन से खतरे आएंगे। थंडर लाइनस बहुत बेशकिम्मती
है"
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