विनम्र का चार आदमियों को मारना और उसको ऑर्डर देने वाला अनजान आदमी
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सीरिया
किसी अनजान जगह पर।
विनम्र कि जीप एक गली के बाहर आकर रुकी। अंधेरा हो चुका था और गली में भी सन्नाटा छाया हुआ था। विनम्र जीप से उतरा और पैदल ही गली में चलने लगा। आगे चलकर उसने एक घर का दरवाजा खटखटाया।
अंदर से एक औरत ने दरवाजा खोला "जी कहिए"
विनम्र ने उस औरत को देखा और हल्के अंदाज़ में मुस्कुरा कर कहा "क्या यह साइंटिस्ट आदित्य का घर है"
"जी हां"
"मैं उनसे मिलने आया हूं"
"पर वह तो यहां नहीं है" औरत ने जवाब दिया।
"मैं इंतजार कर सकता हूं" विनम्र ने एक पल अपनी घड़ी की तरफ देखा और फिर उस औरत को। उसकी उम्र तकरीबन 28 साल होगी। औरत ने भी अंदर दीवार पर टंगी घड़ी की तरफ देखा।
"उन्हें 2 घंटे लग जाएंगे आने में"
"इतने तो बहुत हैं"
विनम्र अंदर जाकर सोफे पर बैठ गया। औरत किचन में गई और उसके लिए चाय बनाने लगी। "वैसे क्या मैं जान सकती हूं आप कौन हैं, और आपको उनसे क्या काम है" औरत ने किचन से ही पूछा।
"जी नहीं!!"
औरत यह सुनकर अजीब नजरों से उसकी तरफ देखने लगी। उसने कप में चाय डाली और उसके सामने जाकर रख दी। विनम्र भी उस औरत की तरफ देख रहा था। औरत को उसके इरादे ठीक नहीं लगे।
"क्या हुआ??" विनम्र ने पूछा।
औरत थोड़ा सा डर गई” कुछ नहीं..." वह हड़बड़ाते हुए बोली "मैं एक बार अपने पति को फोन कर लेती हूं"
"जी करिए"
यह सुनने के बाद औरत लैंडलाइन की तरफ गई और फोन उठाकर नंबर डायल करने लगी। लेकिन तभी..... पीछे से विनम्र मुस्कुराया और पिस्तौल निकालकर सीधे उसके सर पर गोली मार दी। गोली लगते ही उसका खून फोन पर गिरा और वह धड़ाम, नीचे फर्श पर।
"मेरा तो तुम पर दिल आया था.... लेकिन नहीं!! तुम्हें तो अपनी पति की पड़ी है। कोई बात नहीं... भेजता हूं उसे भी तुम्हारे पास" विनम्र वापिस इंतजार करने लगा।
रात के तकरीबन 11:00 बज विनम्र का इंतजार खत्म और एक अधेड़ 45 वर्ष की उम्र वाले व्यक्ति ने घर के अंदर दस्तक दी। सामने सोफे पर ही विनम्र बैठा था। उसे देखते ही वह चौंक गया।
"तुम!! तुम यहां क्या कर रहे हो...??" उसने विनम्र को देखते ही पूछा।
विनम्र मुस्कुराया और बोला "तुम्हारी मौत की तैयारी। सुना है तुमने सीरिया की मदद करने से इनकार कर दिया है। तुम अब उनके लिए एडवांस हथियार नहीं बनाओगे"
"हां" सामने से आदमी ने जोर से कहा "सीरिया के प्रधानमंत्री का मकसद इन हथियारों को लेकर बहुत गलत है, और मैं ऐसे काम में उनका साथ बिल्कुल नहीं दूंगा।"
"बेटा!!" विनम्र पिस्तौल निकालते हुए बोला "इसलिए तो तुम्हारी इस दुनिया से टिकट कट रही है" और धाएं इसके बाद उस पर भी गोली चला दी।
बिना आवाज किए गोली सीधे उसकी गर्दन के आर पार हो गई।
उन दोनों को मारने के बाद विनम्र ने जीप निकाली और वहां से चला गया।
ठीक अगले 2 घंटे बाद उसकी जीप एक बंगले के सामने जाकर रुकी। वह गाड़ी से उतरा और बंगले में चला गया।
बंगले में अगले पल वह टेबल पर डिनर कर रहा था। उसके साथ चार आदमी और थे। सब की दाढ़ी बड़ी बड़ी थी। दिखने में बगदादी आतंकवादी का समूह लग रहा था।
विनम्र ने उनसे बात करना शुरू किया "तुम लोग जिस साइंटिस्ट को किडनैप करके लाए थे उसने काम करने से मना कर दिया!!"
"हां हमने भी सुना है" सामने से एक आदमी ने जवाब दिया
"इसलिए आज उसे मार दिया"
"क्या" चारों एक साथ बोले।
"हां" विनम्र ने जवाब दिया। "ऊपर से ऑर्डर आए थे। उन्होंने कहा है कि हमें ऐसे लोगों की बिल्कुल जरूरत नहीं जो काम ना करें"
"तुमने बहुत अच्छा काम किया..." दूसरे आदमी ने कहा
"हां जानता हूं। लेकिन पूरी बात तो सुन लो, यह भी ऑर्डर आए हैं कि उन आदमियों का भी कोई काम नहीं जो खराब आदमियों को लेकर आए।"
"क्या मतलब" एक-एक कर चारों आदमियों ने विनम्र से कहा।
“धोखा इंसान के खून में होता है, यह उसका जन्मसिद्ध अधिकार है और तुम इसे छीन नहीं सकते” फिर वह अपनी जगह से खड़ा हुआ और अपनी पीठ में खंजर निकालते हुए सामने के एक आदमी की गर्दन के आर पार कर दिया।
सब सकते में आ गए और अपनी अपनी जगह पर खड़े होते हुए बंदूकें निकाल ली। विनम्र तुरंत सावधान हुआ और टेबल उठाकर उनके ऊपर फेंक दिया। सब टेबल के भार से नीचे गिर गए और अगले कदम के लिए असहाय हो गए।
पास ही खिड़की थी। विनम्र खिड़की की तरफ गया और पीछे उन्हें देख कर मुस्कुराया। फिर चार ग्रेनेड निकालें और वहां फेंककर नीचे कूद गया।
एक के बाद एक मकान में कई सारे धमाके हुए, धमाके इतने बड़े थे कि उसमें किसी के भी बचने की उम्मीद नहीं थी। अंदर मौजूद सभी लोग मारे गए।
इस घटना के बाद विनम्र दूर एक सड़क के एक किनारे बैठा था। उसने अपना फोन निकाला और मैसेज टाइप किया— "सारी मुसीबतें रास्ते से हट गई है, कोई और काम हो तो बता देना"
सामने से रिप्लाई आया "अमेरिका से किसी साइंटिस्ट को सीरिया लाने की तैयारी की जा रही हैं। साइंटिस्ट को एडवांस बेस में लेकर आना है पर वह अभी तैयार नहीं। उसकी सुरक्षा देश के लिए इंपोर्टेंट है। जब तक बेस तैयार नहीं हो जाती उसके साथ रहो।"
"ठीक है, हो जाएगा"
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