निधि का वकार अहमद को पकड़ना
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आगे क्या होगा, बिना इस बात की फिक्र किए निधि वकार अहमद की खोज पर निकल चुकी थी। रात के तकरीबन 5:30 वह घर के पीछे बनी गली में थी। उससे चला नहीं जा रहा था लेकिन इसके बावजूद उसे वकार अहमद को ढूंढना था। गली में उसने एक बाइक की तारों से छेड़खानी की और उसे स्टार्ट कर सड़क पर निकल गई। वकार अहमद की लोकेशन उसके फोन पर शो हो रही थी जो यहां से तकरीबन 11 किलोमीटर की दूरी पर थी।
निधि ने मोटरसाइकिल उस लोकेशन की तरफ कर लिया जो उसे उसका मोबाइल दिखा रहा था। ठीक 7 से 8 मिनट बाद वह सीमावर्ती क्षेत्र में एक सैनिक कैंप के पास थी। लोकेशन उसे उसी जगह के बारे में दिखा रहा था। निधि ने बाइक की लाइट बंद की और बाइक को दूर ही रोक दिया। अक्सर एजेंसी के जासूसों को इस बात की ट्रेनिंग दी जाती थी कि कौनसे हालातों में कैसे कदम उठाने हैं। फिर वह पैदल ही झुकते हुए क्षेत्र की तरफ जाने लगी। रास्ते में कुछ कटीली तारे आई जहां आकर वह रुक गई। फिर उसने अंदर झांक कर देखा।
सामने तीन से चार तंबू थे, जिन के बीचों बीच रखी एक मेज कुर्सी पर वकार अहमद किसी से बात कर रहा था।
"देखो, मैं तुम्हें पूरे तीस लाख दूंगा.... तुम्हें मेरे समेत पांच और लोगों को बॉर्डर क्रास करवाना होगा" वकार अहमद बोला
"नहीं नहीं, इतने में सिर्फ तीन लोगों को बॉर्डर कोर्स करवाया जा सकता है" उस आदमी ने वकार अहमद से कहा जिसे वह बात कर रहा था।
यह सुनकर वकार अहमद ने पीछे की तरफ देखा जहां पांच आदमी, और उसकी पत्नी खड़ी थी। फिर अपना रिवाल्वर निकाला और उनमें से तीन आदमियों को मार दिया। अब सिर्फ एक आदमी, और उसकी पत्नी बची थी। "ठीक है, जैसा तुम्हें सही लगे"
बातें सुन रही निधि ने नजर घुमाकर आसपास देखना शुरू किया। वहां गिनती के चार पांच सैनिक ही दिखाई दे रहे थे। जैसा कि वकार अहमद ने बताया था कि उसकी मिलिट्री से अच्छी जान पहचान है, ऐसे में हो ना हो यह बंदा उसके काम आने वाला शख्स था।
निधि कदमों के बल तार के नीचे से निकली और तंबू के पीछे जाकर छिप गई। वहां से वकार अहमद सिर्फ 2 मीटर की दूरी पर था।
फिर निधि ने वापिस झुक कर अपने बगल वाले तंबू का रुख किया, तंबू के दरवाजे के सामने एक सैनिक खड़ा था जो सामने की ओर देख रहा था। यह सैनिक इस तरह खड़ा था कि वकार अहमद का ध्यान उन पर नहीं था।
निधि चुपके से उसके पीछे गई और उसके मुंह को दबाकर अंधेरे की ओर ले आई। सैनिक ने अपना मुंह निधि से छुड़ाने की कोशिश की, लेकिन निधि ने इतनी जोर से पकड़ रखा था कि वह अपनी कोशिश में कामयाब नहीं हो सका। 3 से 4 मिनट की देरी के बाद सैनिक तमाम कोशिशों के बाद दम तोड़ गया। सेनिक को खत्म करने के बाद निधि ने उसके हथियार उठाए और अपने पास रख लिए।
फिर वह वहां से दूसरे तंबू की ओर चली गई हो। इस तंबू के अंदर 2 सैनिक थे जो सोए हुए थे। निधि चुपके से उस में घुसी और चाकू की धार उनके गलों पर फेर दी।
3 सैनिकों को खत्म करने के बाद 2 सैनिक और बचे थे जो इस क्षेत्र का पहरा दे रहे थे।
यह 2 सैनिक अलग अलग खड़े थे। एक तंबू के आगे और एक तंबू के पीछे। निधि चुपके से सबसे पहले तंबू के पीछे वाले सैनिक के पास गई और पीछे से झपटते हुए उसका मुंह दबाकर चाकू उसकी पीठ में घोप दिया।
इसके बाद तंबू के अंदर से होते हुए उसके सामने खड़े बंदे को तंबू के अंदर पटक लिया और उसका भी काम तमाम कर दिया।
सभी सैनिकों को मारने के बाद अब कुल 4 और लोग थे जिनसे उसे लडना था। वकार अहमद, उसकी पत्नी, उसके साथ वाला आदमी.... और वह आदमी जिसे वकार अहमद बात कर रहा था।
इन लोगों से लड़ने के लिए निधि बेफिक्र थी, उसने सैनिक से चुराई हुई बंदूक साइड में रखी और दो पिस्तौल अपने हाथ में पकड़ लिए। फिर गोलियां चलाते हुए सीधे तंबू से बाहर निकली।
बाहर खड़े उन आदमियों का अफरा-तफरी मच गई, कुछ को बचने का समय मिला और कुछ को नहीं।
वकार अहमद बचकर टेबल के नीचे झुक गया, जबकि बाकी के लोग निधि द्वारा चलाई जा रही गोलियों की चपेट में आ गए।
एकदम से किए गए इस हमले के कारण निधि को ज्यादा लड़ाई करने की आवश्यकता नहीं पड़ी, वकार अहमद को छोड़कर बाकी सब मर चुके थे।
निधि ने पिस्तौल सीधे वकार अहमद के सर पर रखा और पूछा "बताओ, क्यों किया तुमने यह सब??"
वकार अहमद बुरी तरह से डर गया। " त त त त तुम बच कैसे गई"
"जो पूछा है वह बताओ... वरना यह गोली सीधे सर में ठोक दूंगी" निधि ने धमकाने वाले अंदाज में कहा।
"बताता हूं बताता हूं, दरअसल, में सीरिया का एक खुफिया एजेंट हूं"
"लेकिन तुम तो एकेडमी के लिए काम करते हो...."
"अभी भी करता हूं, लेकिन....."
"लेकिन क्या" निधि ने पिस्तौल का जोर उसके सर पर देते हुए कहा
"इसमें मेरा कोई कसूर नहीं। यह तुम्हारी एकेडमी के ही कारण हुआ है। वह लोग बहुत सुस्त हैं" वकार अहमद बिना जान की फिक्र किए सीधे निधि के सामने खड़ा हो गया। "वह लोग एजेंट को दूसरे देशों में छोड़ तो देते हैं लेकिन इसके बाद उनका अता-पता ही नहीं पूछते। पैसों के भी किल्लत आए दिन बनी रहती है.... इन सबके चलते हमें दूसरे देशों का साथ देना पड़ता है।"
"तुम सीरिया का साथ क्यों दे रहे मुझे बस वो बताओ"
"दरअसल कुछ साल पहले की बात है... मैं किसी मिशन पर सीरिया गया था..... और उस मिशन में पकड़ा गया। सीरिया के प्रधानमंत्री ने मेरे सामने दो रास्ते रखें..... पहला रास्ता.... उनका साथ दुं और खूब सारा पैसा खाऊं... और दूसरा रास्ता.... मर जाऊं। मेरे पकड़े जाने के तुरंत बाद एकेडमी ने अपने हाथ पीछे खींच लिए, बचने की कोई उम्मीद नहीं थी..... इसलिए वहां मैंने पहले वाला रास्ता चुना। किसी को शक ना हो इसलिए एकेडमी के लिए भी काम करता रहा........ सीरिया के प्रधानमंत्री ने मुझे मिशन दिया कि मैं उनके लिए थंडर लाइनस ढूंढु..... यह उनके लिए सबसे ज्यादा कीमती थी.... जिस कारण और भी एजेंट उन्हें ढूंढने में लगे हुए थे..... थंडर लाइन के बदले उसे ढूंढने वाले इंसान को सीरिया के जनरल की गद्दी मिलेगी..... जो सच में बहुत बड़ा इनाम था। फिर मुझे पता चला कि एकेडमी प्रधानमंत्री को मारने के लिए कुछ एजेंट भेज रही है...... लेकिन मैंने यह जानकारी अपने तक सीमित रखी। वह एजेंट यहां आए तो प्रधानमंत्री को मारने थे..... लेकिन उनके हाथ थंडर लाइन लग गई...... सीरिया में विनम्र उनके पीछे था.... और यहां मैं...... इस वजह से कोई भी नहीं बचा। सीरिया में विनम्र ने उन्हें मार डाला.... और यहां मैंने। हम दोनों के मन में लालच था.... और यही वजह है कि हम अपने देश से गद्दारी कर रहे हैं"
निधि उसकी बात सुनकर किसी भी तरह से हैरान नहीं हुई। एजेंसी में गद्दारी का सिलसिला बहुत पुराना है, और खुद उसके सीओ कैप्टन रोड भी इस बात से परेशान है।
"लेकिन तुम्हें पता है देश से गद्दारी करने की सजा क्या होती है....??" निधि ने पिस्तौल का ट्रिगर दबाते हुए कहा।
"अपने देश में हो तब तो इसकी सजा मौत होती है, लेकिन जब देश ही दूसरा हो तो उसकी कोई सजा नहीं ...." अचानक वकार अहमद ने अपने एक हाथ से निधि के पिस्तौल को साइड में किया और दूसरे हाथ से खंजर निकालकर उसे निधि के पेट में घोंप दिया।
लेकिन इस से पहले खंजर पूरा पेट के अंदर जाता निधि ने उसे बीच में ही पकड़ लिया। फिर वकार अहमद को धक्का मारते हुए पीछे किया।
जल्द ही वहां सेना के सात से आठ सैनिक और आ गए.....उन्होंने पूरे क्षेत्र पर गोलाबारी शुरू कर दी। निधि घायल थी इस वजह से वह वही तब्बू के पीछे छुप गई.... जबकि वकार अहमद बॉर्डर की तरफ भागने गया।
निधि ने मुड़कर वकार अहमद की तरफ देखा वह बॉर्डर पार कर रहा था। वहां के सैनिकों की नजर भी उस पर पड़ गई.... और सभी सात से आठ सैनिक उसका पीछा करने लगे।
मौके का फायदा उठाकर निधि दूर खड़ी अपनी बाइक की तरफ भागी और वहां से निकल गई।
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सुबह होते ही निधि एक अस्पताल में अपने जख्म पर मरहम पट्टी करवा रही थी। डॉक्टर ने उसकी पट्टी करने के बाद कहा "आर यू वेल नो"
"हां" निधि ने जवाब दिया जिसके बाद डॉक्टर वहां से चला गया।
"वकार अहमद बॉर्डर क्रॉस कर चुका होगा, और वहां उसका मकसद प्रधानमंत्री से मिलना है....अगर एक बार वह प्रधानमंत्री से मिला तो उन्हें थंडर लाइन दे देगा" निधि खुद से ही बोली "कैसे ना कैसे कर...मुझे वकार अहमद को प्रधानमंत्री से मिलने से रोकना होगा"
निधि ने कहा और खड़ी होकर अस्पताल से बाहर जाने लगी। पीछे से उसे डॉक्टर कहते रहे...."मैम, यू आर नॉट फाइन..... स्टे हेयर" पर निधि ने उनकी एक बात नहीं सुनी।
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ठीक 1 घंटे बाद निधि चरवाहों से बात कर रही थी। उसने चरवाहों को कुछ पैसे दिए और बॉर्डर क्रॉस करवाने का सौदा किया।
चरवाहे सोदें के लिए मान गए और तकरीबन 7:30 बजे तक चरवाहों ने निधि के साथ बॉर्डर क्रॉस किया और निधि को सीरिया पहुंचा दिया।
सीरिया पहुंचते ही निधि ने सबसे पहले वहां के मिलिट्री कैंप से कांटेक्ट किया। उसे कमांडर विनम्र की तलाश थी। उन्होंने निधि को उस बेंच का रास्ता बताया जहां कमांडर विनम्र काम करता था।
निधि वहां पहुंची और एक ऑफिसर से पूछा "क्या मैं.... विनम्र से मिल सकती हूं"
"कमांडर विनम्र" सामने के आदमी ने कहा जिससे निधि ने पूछा था।
"हां वही" निधि तेजी से बोली।
"सुबह-सुबह वह जिम में होता है...." आदमी ने कहा और उसे बाहर निकलकर जिम का रास्ता दिखाया।
जिम के बाहर बड़े-बड़े बोर्ड लगे हुए थे, कई तरह के अलग अलग पोस्टर थे। सभी पोस्टर में सोल्जर दिखाई दे रहे थे। यह सैनिकों के लिए बनाया गया खास तरह का जिम था, जहां अलग-अलग टुकड़ियों के कमांडर और खास लोग आकर एक्सरसाइज किया करते थे। निधि के अंदर जाने से पहले ही वहां बाहर खड़े लोग उसे अजीब नजरों से देख रहे थे। लेकिन इस वक्त निधि के लिए सबसे जरूरी विनम्र से मिलना था। उससे मिलकर अगर एक बार पूरी बात क्लियर हो जाती है तो हो सकता है उसको कुछ मदद मिल जाए। निधि ने दरवाजा खोला और खोलकर जिम के अंदर दाखिला लिया लेकिन वह अंदर जाते ही समझ गई कि वह गलत जगह आई है।
वहां तकरीबन छह से सात हटे कट्टे आदमी थे। सबकी नजरें स्लो मोशन से एक वहिशे दरिंदे की तरह निधि को निहार रही थी। निधि ने इधर-उधर घूम कर विनम्र को ढूंढने की कोशिश की लेकिन वह वहां दिखाई नहीं दिया। उसने मुड़कर वापिस जाने का सोचा..... लेकिन एक आदमी उसके सामने आ खड़ा हुआ।
"बरसों से सुखी बंजर जमीन पर.... आज एक कली ने दस्तक दी है...... बरखुरद्दार यहां सिर्फ आने का रास्ता है.... जाने का नहीं, तुम सीरिया की नहीं लगती" उस आदमी ने कहा।
निधि कुछ नहीं बोली। वह साइड से हटकर बाहर जाने लगी लेकिन उस आदमी ने अपना हाथ उसके आगे कर वह रास्ता भी रोक लिया।
"मैंने बोला ना.... यहां सिर्फ आने का रास्ता, बाहर जाने का नहीं, बताओ तुम कौन हो??" उस आदमी ने दोबारा कहा।
"देखो!! मैं लड़ाई नहीं चाहती" निधी बोली
"अच्छा जी!! फिर जो चाहती है वह ले ले, लेकिन बताना तो तुम्हें पड़ेगा ही"
" काश मैं बताती " निधि ने कहा और उसका हाथ पकड़ जोर से घुमा दिया... इतनी जोर से की उस आदमी के अंदर की हड्डी तक टूट गई। वह जोर से चिल्लाया।
उसके चिल्लाने के कारण जिम के बाकी लोग भी इकट्ठा हो गए और एक-एक कर निधि पर टूट पड़े।
एक आदमी ने आगे बढ़कर हमले के लिए अपना हाथ उठाया लेकिन निधि ने उससे बचते हुए पास पड़ा डबल के पास चली गई। उसने वहां से एक डबल उठाया और उसके गर्दन पर दे मारा। वह आदमी एक निर्जीव इंसान की तरह सीधे नीचे गिर पड़ा।
यह देखकर सब चौंकाने हो गए। दो आदमी एक साथ निधी की तरफ बढ़े। निधि ने कुछ कदम पीछे हटते सबसे पहले कुछ डंबल हवा में उछालते हुए दोनों में से एक आदमी के ऊपर गिराया और फिर वहां पड़ी रोड उठा ली। रोड उठाते ही उसने आगे आ रहे आदमी के जांघ पर वार किया जिससे वह नीचे गिर गया।
बाकी के आदमी भी उस पर हमला करने के लिए लपके लेकिन निधि के पास रोड़ थी, उसने एक-एक कर सभी आदमियों का सामना किया। एक आदमी के सर पर रोड मारी, एक आदमी के कंधे पर...
वह आदमी जो सबसे पहले निधि को मिला था वह जमीन पर पड़ा था। निधि उसके पास गई और रोड उसके गर्दन पर रखते हुए बोली "जो लोग रास्ता रोकते हैं मैं रास्ते के साथ-साथ उन्हें भी तोड़ देती हूं......" और रोड वही गिरा कर बाहर की तरफ जाने लगी।
निधि को लगा कि वह आदमी अब कुछ नहीं करेगा, लेकिन वह होशियार था। पीछे से उसने एक पतली रस्सी उठाई और निधि के गले में डालते हुए उसे नीचे गिरा लिया। निधि ने पास पड़ी रोड उठाने की कोशिश की लेकिन वह उसकी पहुंच से दूर थी।
गला दबाने के कारण धीरे-धीरे उसकी आंखों के आगे अंधेरा छाने लगा, उसके बचने की उम्मीद शुन्य थी.... लेकिन तभी विनम्र वहां आ गया।
आते ही उसने अपना रिवाल्वर निकाला उस आदमी के सर के बीचो-बीच रखते हुए उसे निधि को छोड़ने को कहा" छोड़ो इसे"
आदमी ने गुस्सा दिखाते हुए निधि को छोड़ दिया। निधि बहोश हो चुकी थी। विनम्र ने निधि को उठाया और उसे वहां बेंच पर लिटा दिया। "तुम ठीक तो हो ना" वहां लिटाते ही उसने पूछा
लेकिन निधि ने कोई जवाब नहीं दिया। विनम्र ने तुरंत उसकी नब्ज चेक की। उसकी सांसे बंद हो रही थी।"शीट!! यह मर रही है" इन हालातों में किसी को बचाने के दो ही तरीके होता है, करंट देना या फिर सांस देना। विनम्र ने अपने आसपास देखा। उसे कोई भी ऐसी चीज नहीं दिखी जिससे वह उसे शोक दे सके। बिगड़ते हालात देखकर विनम्र ने तुरंत एक लंबी सांस ली और सांस लेकर उसके होठों को चूम लिया। इसके अलावा उसके पास निधि को बचाने का और कोई रास्ता नहीं था।
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