केस
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रात के तकरीबन 11:00 बजे चाय के कप के साथ निधि ने केस के बारे में सुनना शुरू किया।
"यह बात पिछले साल से शुरू होती है। इराक के प्रधानमंत्री युनिस खान इंडिया के दौरे पर आए थे। उन दिनों इराक सीरिया के साथ जंगीय हालातों से जूझ रहा था जो आज भी जारी है। इराक के प्रधानमंत्री और भारत के प्रधानमंत्री दोनों के बीच लंबी वार्ता चली। गृहमंत्री के साथ साथ मैं भी उस वार्ता में शामिल था। इराक के प्रधानमंत्री ने इंडिया से उनकी मदद करने को कहा लेकिन अंतरराष्ट्रीय कानूनों के चलते इंडिया सीधे-सीधे उनकी मदद नहीं कर सकता था। अंत में भारत के प्रधानमंत्री ने फैसला किया कि वह खुफिया तरीके से इराक की मदद करेगा। देश के गृहमंत्री भी इस बात से सहमत थे। मैंने भी अपनी सहमति उन्हें दे दी। आखिर में योजना बनाई गई। भारत खुफिया तरीके से सीरिया के शासक को मार देगा। सीरिया का शासक तानाशाही था। उनके लोग भी उनसे परेशान थे। इराक ने इस मदद के बदले अपने तेल के भंडारों का 20% हिस्सा भारत को देने का वादा किया। तानाशाही शासन के चलते मुझे भी इस बात में कोई आपत्ति नहीं थी। इस काम का एग्रीमेंट बना लिया गया। एग्रीमेंट के बाद मुझे इस काम को पूरा करने की जिम्मेदारी सौपीं गई। तकरीबन तीन महीनों के अंदर अंदर हमने इस पर काम करना शुरू कर दिया। हम लोगों ने योजना बनाकर तीन मुख्य स्टेप डिसाइड किए। पहले स्टेप में हम लोग इराक में अपना बेस बनाएंगे। दूसरे स्टेप में सीरिया पहुंचेंगे। और तीसरे स्टेप में काम को अंजाम देंगे। काम शुरू करने के बाद सबसे पहले ईराक में सरकार की मदद से बेस बनाई। इसके बाद एक-एक कर अपने एजेंट भेजने शुरू कर दिए। उन एजेंट का काम सिर्फ इस मिशन को अंजाम देने के लिए एक जरूरी प्लेटफॉर्म तैयार करना था। धीरे-धीरे हमने वहां की एजेंट का कार्यक्षेत्र बढ़ाया और दूसरे स्टेप की तैयारी करने लगे।अगले तीन महीनों के अंदर हमारे एजेंट सीरिया में खुद को स्टेबलिश करने में कामयाब रहे। हमने खुफिया तरीके से सीरिया में भी अपने पैर जमा लिए। सब कुछ सही था। अब योजना के आखिरी चरण पर काम करना बाकी था। सीरिया के शासक को मारने के लिए हमने अपने सबसे बेस्ट तीन एजेंट चुने और उन्हें इराक भेज दिया। उन तीन एजेंट में से एक एजेंट इराक में ही रुका और बाकी के दो एजेंट सीरिया में गए। लेकिन....
लेकिन प्रधानमंत्री को मारने से ठीक दो दिन पहले अचानक खबर आई कि हमारे तीनों एजेंट मारे गए। कैसे?? नहीं पता!! उनकी लाश वहां की सरकार ने जप्त कर ली। इससे पूरा डिपार्टमेंट सदमे में आ गया। यह काम बहुत ही खुफिया तरीके से किया गया था। एक भी गलती की गुंजाइश नहीं थी। इसके बावजूद यह हुआ। मैंने मिशन को कुछ समय के लिए रोक दिया और अंदरूनी तौर पर जांच करना शुरू कर दिया। जांच में सामने आया कि वहां के कुछ एजेंट और यहां के कुछ एजेंट, उन्होंने मिलकर हमें धोखा दिया है। हमारे हाथ पैर बंध चुके थे। इसके बाद हम चाह कर भी अगला कदम नहीं उठा सके। इसी समय सरकार ने हम पर इस काम को पूरा करने का दबाव बना दिया। अब यह 3 दिन पहले की बात जब मैं मीटिंग अटेंड करने गया था तो सरकार ने सीधे-सीधे शब्दों में कहा दिया कि जैसे तैसे कर इस काम को पूरा किया जाए। सीरिया के प्रधानमंत्री का तानाशाही शासन बढ़ता जा रहा है। उसने लोगों को जबरन सेना में भर्ती करना शुरू कर दिया है। अगर हालात ऐसे ही रहे तो एक दिन इराक जंग में हार जाएगा। अमेरिका जैसे देश भी इस मुद्दे में दखलअंदाजी नहीं दे रहे। ऐसे में एकमात्र उम्मीद सिर्फ और सिर्फ भारत देश से हैं। मेरे पास उनके इस दबाव के आगे किसी भी तरह के दूसरे कदम उठाने का सामर्थ्य नहीं था। एजेंसी के एजेंट धोखा दे रहे हैं .... ऐसे में "
निधि के हैरानी की कोई सीमा नहीं थी। यह एक ऐसा मिशन था जिसके बारे में उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था। उसे तो लगा था की कोई कत्ल का केस होगा या फिर चोरी का। जासूस अक्सर यही काम करते हैं.... लेकिन यह स्पेस एकेडमी थी। यहां पर ऐसे ही केस आते हैं। और यह मामला और भी अलग था। इसमें दूसरे देश में जाकर उस देश के प्रधानमंत्री को खत्म करना था......।
निधि के अंकल ने निधि की खामोशी देखी और खड़े होते हुए कहा "तुम घबराओ मत, तुम्हारा काम प्रधानमंत्री को मारना बिल्कुल भी नहीं!!"
"क्या!!" निधि की हैरानी कम होने की बजाए और बढ़ गई। "अगर प्रधानमंत्री को मारना मेरा मिशन है तो फिर क्या है...??" उसने अगले ही पल पूछा।
"तुम इस खतरनाक काम को अंजाम नहीं दे सकती, इसके लिए मैंने दूसरा आदमी रख रखा है पर उसको भेजने से पहले उसके लिए जमीन तैयार करनी होगी। तुम्हारा काम सिर्फ वहां जाकर यह पता करना है कि उन तीनों एजेंटों की मौत के पीछे कौन हैं?? इसके अतिरिक्त तुम यह भी पता करोगी वहां हमारे कितने लोग हैं जो हमारे खिलाफ काम कर रहे हैं??
"मतलब आप इस मिशन का सिर्फ आधा काम करने के लिए मुझे कह रहे हैं" निधि बोली
"हां क्योंकि तुम अभी इन्हीं कामों के काबिल हो। इन तीन एजेंटों की मौत की छानबीन कोई ऐसा वैसा काम नहीं, अगर यह हमारे खुद के देश में हुई होती तो शायद मुश्किल नहीं आती पर यह दूसरे देश के अंदर हुई है। तुम्हें सावधानी बरतनी पड़ेगी"
पूरी बात सुनने के बाद निधि ने आश्वासन देने वाले अंदाज में कहा "आप फिक्र मत कीजिए, हो जाएगा.... "
अंकल उसके पास आए और थोड़ा सहजता से बोले "मैं तो अभी भी चाह रहा हूं कि तुम्हें इस काम पर ना भेजूं"
"अरे अंकल!! आपने कौन सा मुझे मुश्किल काम दिया है। यहां चने के झाड़ से आम थोड़ी ना तोड़ने हैं... अगर प्रधानमंत्री को मारने को कहा होता तब भी मानती.... यह तो छोटा सा काम है....जो भी हो ...अब यह एजेंट निधि का केस है............."
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