विनम्र का साइंटिस्ट को प्रधानमंत्री से मिलाना, उसका नया काम और साइंटिस्ट के एक्सपेरिमेंट
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अगले दिन सुबह-सुबह विनम्र उन दोनों के लिए चाय बना कर उनके कमरे में लेकर गया। उसके हमेशा साफ सुथरे दिखने वाले कमरे की हालत आज कबाड़ से भी बदतर हुई पड़ी थी। उसने गुस्से से अपने कमरे को देखा और फिर उन दोनों को। उसके बाद अपनी कमर में लटक रही पिस्तौल को ।
"मन तो कर रहा है अभी इन दोनों को शूट कर दूँ, पर मजबूर हूं "
उसने चाय साइड में रख कर अपनी लात साइंटिस्ट के पिछवाड़े में मारी। साइंटिस्ट सीधे बेड से नीचे गिर गया। नीचे गिरते ही उसकी आंख खुली और वह हड़बड़ी से उठा "क्या हुआ क्या हुआ..... भूकंप आ गया क्या"
"नहीं नहीं सर" विनम्र बोला "आप बेड से नीचे गिर गए थे"
फिर आगे बढ़कर उसने साइंटिस्ट को खड़े होने में उसकी मदद की। "आपके लिए चाय लेकर आया पी लीजिए"
"सिर्फ चाय, खाने के लिए कुछ नहीं है क्या"
विनम्र ने उसे गुस्से से देखा और मन ही मन कहा "तुम्हें खाने के लिए कुछ चाहिए...... दिमाग है, दिमाग खा लो सालो" जबकि सामने बोला" आपको खाने के लिए कुछ चाहिए.... मेरे पास तो सिर्फ ब्रेड है।।।।"
"ठीक है.... वही ले आओ"
विनम्र ने उन दोनों को ब्रेड लाकर दे दिए। फिर बाहर जाकर सोफे पर बैठ गया। बैठते ही उसके फोन की घंटी बजी और उसने फोन उठाया।
"सुनो" सामने से आवाज आई "बेस का इंतजाम हो गया है। मैं तुम्हें एड्रेस भेज रहा हूं उन दोनों को लेकर वहां आ जाओ। तुम्हारे लिए एक सरप्राइज भी है"
"सरप्राइज..!! लेकिन क्या"
"वह तो तुम्हें यहां आकर ही पता चलेगा"
"ठीक है" विनम्र ने जवाब दिया और फोन काट दिया।
ठीक 2 घंटे बाद वह फोन पर बताएंगे एड्रेस पर था। यह शहर से बाहर बनी एक अलग ही तरह की जगह थी। एक 6 मंजिला बिल्डिंग जिसके चारों ओर सख्त तारबंदी और कड़ी सुरक्षा थी। जगह-जगह सोल्जर बंदूक लेकर खड़े थे। विनम्र ने गाड़ी दरवाजे के पास खड़ी की और वहां के एक आदमी को बुलाया "पासकोड 00345"
आदमी ने पीछे जाकर वायरलेस पर कुछ बात की और फिर दरवाजा खोल दिया। विनम्र उस दरवाजे से अंदर चला गया।
अंदर भी कुछ ऐसा ही परिदृश्य था। बिल्डिंग में तकरीबन 70 से 80 सोल्जर खड़े थे। विनम्र गाड़ी से उतरा और साइंटिस्ट और उसके साथ की औरत को लेकर बिल्डिंग के अंदर चला गया।
अंदर दरवाजे पर उसे रोक लिया गया। वहां कुछ आदमी आए और उन सभी को चेक किया। इसके बाद एक आदमी उन्हें अंडरग्राउंड जगह की ओर ले गया। यह जमीन से तकरीबन 15 मीटर नीचे बनी जगह थी। चारों ओर कांच के कमरे थे.... उनकी आरपार भी देखा जा सकता था। जैसे ही विनम्र और उसके साथ के आदमी वहां पहुंचे विनम्र को एक अति प्रभावशाली छवि कांच की दूसरी और दिखी।
यह सीरिया के प्रधानमंत्री थे। "लुइस इल्लल्लाह" उसके साथ उसकी सुरक्षा करने वाले आदमी और विनम्र को ऑर्डर देने वाला भी था। विनम्र ने वहां जाकर सब से हाथ मिलाया और खासकर प्रधानमंत्री से।
"वेल डन माय बॉय" लुइस इल्लल्लाह ने विनम्र से कहा "तुम्हारे जैसे लोगों की हमारे देश को सख्त जरूरत है। तुम आगे चलकर हमारे देश का नाम रोशन करोगे"
"जी सर" जवाब देने के बाद विनम्र भी उन सभी लोगों के साथ साइड में खड़ा हो। प्रधानमंत्री ने आगे बढ़कर साइंटिस्ट से मुलाकात की। "और कैसे हो जार्ज इरविन, तुम्हारे किस्से दुनिया भर में मशहूर है।" और अपना हाथ साइंटिस्ट से मिलाया। "क्या तुम हमारे साथ काम करोगे" हाथ मिलाने के बाद उसने आगे पूछा।
"मैं तो मरा जा रहा हूं काम करने के लिए..." जार्ज इरविन ने एक पागल साइंटिस्ट की तरह जवाब दिया "मुझे इस दुनिया को दिखाना है कि उसने किस इंसान को इग्नोर किया है। मैं यह पूरी दुनिया तबाह कर दूंगा"
वहां मौजूद सब आदमी यह सुनकर मुस्कुराने लगे। "जरूर मेरे मालिक जरूर" लुइस इल्लल्लाह ने उसके कंधे पर हाथ रख कर कहा "यह पूरी दुनिया अब हमारे कदमों में झुकेगी, आओ तुम्हें हमारी लैब दिखा देता हूं"
सब एक साथ लैब देखने के लिए चलने लगे। लैब सच में शानदार थी। वहां हर तरह का सामान मौजूद था। एक सुई से लेकर परमाणु बम बनाने तक का सामान, किसी भी चीज की कमी नहीं थी। पूरी लैब देखने के बाद साइंटिस्ट बोला "यह बिल्कुल वैसी ही लैब है जैसी कभी मैंने सपने में देखी थी"
"हम अच्छे से जानते हैं" लुइस इल्लल्लाह ने उसकी बात का जवाब दिया "यहां तुम्हें किसी चीज की कमी नहीं होगी, बस अब तुम वह काम करो जिसके बाद यह दुनिया हमारी आंखों से आंखें ना मिला सके"
"मैं आज से ही अपना काम शुरू कर दूंगा" जार्ज इरविन उछल कर लैब में चला गया "बस अब मुझे शांति चाहिए"
"ठीक है" प्रधानमंत्री ने सभी लोगों को वहां से जाने के लिए कहा। उनके साथ विनम्र भी जाने लगा और औरत भी।
साइंटिस्ट ने पीछे से जोर से आवाज लगाई "तुम कहां जा रही हो" यह उसने औरत के लिए कहा था।
औरत पीछे मुड़ी और प्रधानमंत्री की तरफ देखने लगी। प्रधानमंत्री ने आंखों ही आंखों में उसे उसके पास जाने का इशारा किया "अरे मैं कहां जाऊंगी, तुम तो जान हो मेरी" औरत ने कहा और वापिस साइंटिस्ट के पास चली गई।
प्रधानमंत्री, विनम्र और बाकी सब लोग अब ऊपर छत पर आ चुके थे। "मैंने तुम्हारी बहादुरी के बहुत किस्से सुने हैं। तुम्हें इसका इनाम मिलेगा” प्रधानमंत्री ने विनम्र से कहा।
" जी नहीं नहीं सर, मुझे इनाम नहीं चाहिए। बस आपका साथ बना रहे यही काफी है"
प्रधानमंत्री यह सुनकर मुस्कुरा दिए। "आने वाले समय में मैं तुम्हें सेना का जनरल बनाऊंगा।" इसके बाद उसने अपने साथ वाले आदमी को देखा। वह विनम्र को ऑर्डर देने का काम करता था। "तुम्हें पता है ना कि अब आगे क्या करना है, युसूफ "
"हां" युसूफ ने जवाब दिया।
इसके बाद प्रधानमंत्री वापिस विनम्र को देख कर बोला "यह तुम्हारा आखिरी काम है... इसे करने के बाद तुम्हारी जनरल की गद्दी पक्की समझो"
"जी सर, चिंता मत कीजिए काम हो जाएगा" विनम्र ने प्रधानमंत्री को सैल्यूट किया।
ठीक 25 मिनट बाद विनम्र और युसूफ दोनों उस जगह से दूर जा रहे थे। कार की स्पीड सामान्य थी।
"प्रधानमंत्री चाहते हैं कि तुम एक खास चीज की तलाश करो..…...वह सिर्फ हमारे लिए नहीं बल्कि बाकी के देशों के लिए भी बहुत इंपोर्टेंट है"
"ऐसा क्या खास है उसमें....."
"ना ही पूछो तो बेहतर है...... आखिरी बार उसे इंडिया के एजेंट के पास देखा गया था। शायद अब भी वही मिलेगी"
"इंडिया के एजेंट हर जगह अपनी टांग क्यों अड़ा रहे हैं.... जब अमेरिका इस चीज में अपने हाथ नहीं डाल रहा तो उन्हें इतनी क्या पड़ी है" विनम्र ने गाड़ी को मोड़ कर दूसरी तरफ किया।
"शायद वह खुद को शक्तिशाली साबित करना चाहते हैं। यह मत भूलो कि वह अब वैश्विक शक्ति बनने की कगार पर खड़ा है। अगर वह इस मुद्दे को सुलझा देता है तो उसे वैश्विक शक्ति बनने से कोई नहीं रोक सकता।"
"लेकिन मुझे नहीं लगता वह अब अपनी इरादों में कामयाब होंगे।" विनम्र ने गाड़ी के गियर को हल्का किया। "उनके सभी होनहार एजेंट हम खत्म कर चुके.... बाकी बचे खुचे एजेंट में इतनी हिम्मत नहीं कि वह यह काम करें... इंडिया तो वैश्विक शक्ति बनने से गया"
"इसी में हमारी भलाई है।"
इसके बाद विनम्र की जीप लंबी सड़क पर हवा से बातें कर रही थी।
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