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Saturday, June 20, 2020

NIDHI VOL-2 THE SECRET AGENT-14



निधि एक छोटे से हॉल में सतीश विजयवर्गीय की पत्नी के सामने बैठी थी। उन्होंने सफेद साड़ी पहन रखी थी और वह सुबक सुबक कर रो रही थी।

"जब मुझे पता चला उनकी हत्या हुई है तब मैंने सबसे पहले आप ही को याद किया था" विजयवर्गीय की पत्नी ने अपने आंसू संभालते हुए कहा"लेकिन बाद में यहां की एजेंसी ने भी आप को चुन लिया। सब लोग कहते हैं कि वह अपने आप मरे हैं लेकिन मैं ऐसा बिल्कुल नहीं मानती"

"क्या मैं जान सकती हूं इसके पीछे का आप का कारण क्या है..." उसके ऐसा बोलते ही निधि ने सवाल पूछा।

"दरअसल 2 दिन पहले ही उन्होंने सभी कंपनियों मैं इस्तीफा दे दिया था। वो बोल रहे थे कोई भी कंपनी उनके टैलेंट का सही तरीके से उपयोग नहीं कर रही। मैंने यह बात पुलिस वालों को भी बताई लेकिन उन्होंने मेरी बात पर यकीन ही नहीं किया। इसके बाद उन्हें कुछ फोन कॉल आए और कहा गया तुम अंधविश्वास का प्रचार कर रहे हो। यह बेमतलब की धमकियां थी जिनका उनसे कोई लेना-देना नहीं था। फिर एक दिन उन्हें किसी ने बुलाया और उसके बाद वह वापस नहीं आए। फिर तो उनकी मौत की खबर ही आई...."


"कमाल है..!! समझ में नहीं आ रहा पुलिस ने आपकी बातों को सीरियसली क्यों नहीं लिया। अगर इतना कुछ हो जाए तो हत्या की साजिश तो अपने आप बनती। अच्छा क्या आप मुझे उस आदमी का एड्रेस दे सकते हैं जिसे आपके पति आखिरी बार मिलने गए थे"

"हां... रुकिए... मेरे पति ने वह एड्रेस एक नोट पैड पर लिखा था। मैं अभी लाकर देती हूं" इतना कहने के बाद विजयवर्गीय की पत्नी अंदर गई और एक नोटपैड लेकर बाहर आई। उसने वह नोटपैड निधि की ओर बढ़ा दिया।"यह लीजिए.... वह बता रहे थे कि उनकी कोई चाय की दुकान है"

"जी...मैं देख लूंगी...धन्यवाद...."

*****

अब तक दिन के 3:30 बज चुके थे। रोजर्स और निधी दोनों अपना काम अलग अलग तरीकों से कर रहे थे। निधि की गाड़ी कुछ छोटी-मोटी गलियों से होते हुए उस एड्रेस पर पहुंची जो एड्रेस उसे सतीश विजयवर्गीय की पत्नी के द्वारा दिया गया था।

देखने से यह महोला काफी देहाती टाइप का लग रहा था। आसपास के लोग मवाली टाइप और थोड़ी अजीब किस्म के थे। उनमें से ज्यादातर लोग किसी प्राचीन समुदाय का हिस्सा थे।


गाड़ी से जाते वक्त निधि आसपास की हर चीज पर नजर रख रही थी। उसने वहां के लोगों और उन निशानों को भी देखा जो उनके घरों के बाहर बने हुए थे। जैसे ही गाड़ी किसी नुक्कड़ चौराहे के पास से गुजरती वहां पर कुछ अजीब तरह की काली मूर्तियां बनी हुई नजर आ जाती। उन काली मूर्तियों पर भी अजीब रंग का लाल पीला सा रंग रंगा हुआ था जो खतरे के निशान के सापेक्ष ही था।

ठीक उस एड्रेस के सामने जाकर गाड़ी रुकी जो निधि को दिया गया था। निधि गाड़ी से बाहर निकली। स्पेस एकेडमी से निकलते वक्त निधि ने अपनी ड्रेस चेंज कर ली थी और इस वक्त वह एक जींस जैकेट और जींस पैंट मै थी। जींस जैकेट के नीचे उसने आसमानी रंग की टी-शर्ट पहन रखी थी जो उस पर काफी जच रही थी। आंखों पर लगा काले रंग का चश्मा भी उसकी खूबसूरती पर चार चांद लगा रहा था। ‌बालों का आधा हिस्सा पीछे बंधा हुआ था तो आधा हिस्सा बिखरा हुआ था।  कुल मिलाकर निधि की खूबसूरती की जितनी तारीफ की जाए उतनी कम है। उसके पास भगवान की दी हुई कुदरती खूबसूरती और अच्छे हेयर स्टाइल  दोनों का अच्छा खासा मेल था।

घर को अच्छी तरह से देखने के बाद निधि घर की और गई और उसने वहां का दरवाजा खटखटाया।

अंदर से कोई आवाज नहीं आई।

निधि ने दोबारा दरवाजा खटखटाया।

इस बार एक औरत ने दरवाजा खोला। औरत ने काले रंग के कपड़े पहने हुए थे जो काफी अजीब लग रहे थे। यहां के समुदायों के बाकी लोगों ने भी कुछ ऐसा ही पहनावा अपना रखा था।

"यस टेल" अंदर से औरत ने कहा।

"आई वांट टू मिट विद हाउस ओनर व्हो हैव ए टी शॉप"

घर देखने से आसपास के घरों से अच्छा लग रहा था। कम से कम इतना अच्छा था कि इस घर के मालिक को चाय की दुकान खोलने की बिल्कुल जरूरत ना पड़े।

"ओह कम इन"

उस औरत ने निधि को अंदर आने के लिए कहा। घर पर लगी तस्वीरें घर का सामान सब यहां के मकान मालिक का अच्छा खासा पैसे होने की ओर इशारा कर रहा था। अंदर जाने के बाद औरत ने वहां से अंदर की ओर एक आवाज लगाई और अपनी भाषा में कहा कि बाहर आपको कोई बुला रहा। अंदर से किसी आदमी ने भी उसे अपनी भाषा में पूछा कि बाहर कौन है। तो औरत ने अपनी भाषा में जवाब दिया पता नहीं। दोनों की भाषा प्राचीन जमाने की लग रही थी जो आम लोगों को तो समझ में ही ना आए। अंदर बैठा आदमी उम्र में लगभग 50 साल के आस पास होगा पर उसका शरीर हष्ट पुष्ट था। दिखने में अंग्रेज जैसा था। उसके बाद आदमी ने कहा तुम पूछो कौन है मैं आता हूं।

बाहर खड़ी निधि यह सब सुन रही थी पर उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था वह दोनों क्या बातें कर रहे हैं। थोड़ी देर इधर-उधर ठहलने के बाद वह वहां पास पड़े सोफे पर बैठ गई।

औरत ने निधि से पूछा।

"वाए दे वे हु आ यू"

"एम निधि फ्रॉम स्पेस अकैडमी"

जैसे ही निधि ने स्पेस अकेडमी बोला अंदर से बाहर आ रहे आदमी के कानों में यह आवाज गूंज गई। वह अभी लगभग दरवाजे के पास ही खड़ा था। स्पेस अकैडमी का नाम सुनते ही उसके पैरों तले से मानो ज़मीन खिसक गई। वह उसी दरवाजे से पीछे की ओर मुड़ा और वहां की खिड़की से नीचे कूद गया वह भी इतनी जल्दी कि उसे यह भी याद नहीं रहा कि खिड़की की ओर जाते वक्त उसने काफी सारी आवाज कर दी । निधि ने उस आवाज को तुरंत भांप लिया और उसे पता लग गया कि कोई आदमी यहां से भाग रहा है।

निधि भी उस खिड़की की तरफ हो गई। बीच रास्ते में ही उसने अपनी जींस की जैकेट उतारी और खिड़की से नीचे की ओर छलांग लगा दी ठीक उस आदमी के पीछे।

निधि को पता था कि दौड़ते वक्त जैकेट उसके लिए परेशानी बनेगी इसलिए उसने जैकेट रास्ते में ही उतार दी और उस आदमी के पीछे पीछे दौड़ने लगी।

आदमी आगे था और निधि उसके पीछे। दोनों काफी तेजी से दोड़ रहे थे।

कुछ देर भागने के बाद आदमी संकरी गलियों में चला गया और निधि भी उसके पीछे-पीछे उन संकरी गलियों में हो गई। संकरी गलियां काफी छोटी थी इतनी कि उसमें से सिर्फ दो आदमियों के आने-जाने की जगह थी। ऐसे में वहां की भीड़ से बच बचाते दोनों आगे की ओर जा रहे थे।

यह इलाका दूसरे अन्य इलाकों से थोड़ा ऊपर था जिस वजह से इस इलाके के खत्म होते ही नीचे दुसरे घर शुरू हो गए। संकरी गलियों के खत्म होते ही सामने घरों की छतों वाला इलाका शुरू हो गया और उस आदमी ने उस छत पर छलांग लगा दी।

उसके पीछे पीछे निधि भी कूद गई। कूदने के बाद वह जमीन पर गोल गोल घूमी और वापिस खड़ी हो गई। गोल गुमना कूदने से होने वाले लॉस को कम करने का एक अच्छा तरीका होता है।

अब दोनों छतों पर दौड़ रहे थे और दूसरे घरों की छतों को क्रॉस कर रहे थे पर एक बात अभी भी समझ में नहीं आ रही थी कि आखिर उस आदमी का भागना और उसका इस केस से लेना देना!! आखिर कौन सी ऐसी कड़ी है जो इन दोनों को जोड़ती है।



________

अनजान साइंस लैब, वही जगह यहां खतरनाक एक्सपेरिमेंट हो रहे थे और जहां के बॉस ने एक खास तरह के तत्व जिसे अजिकसम कहा जाता है को ढूंढने के लिए कहा था।

इस साइंस लैब में वही दो आदमी जो पहले दिखे थे वह अपने बॉस के पास दौड़ते दौड़ते पहुंचे। ‌

"सर!!" उन्होंने अपने बॉस को पीछे से टोका जो आगे की ओर जा रहा था।

"हां" बॉस ने भी पीछे मुड़ जवाब दिया।

"सर हमें इंडिया में लड़का मिल गया जो हमारा यह काम करेगा"

"वाह बहुत खूब मेरे जवानों"

"लड़के का नाम विनम्र हैं, हमने उस तक टारगेट के नक्शे पहुंचा दिए हैं। वह 1 हफ्ते के अंदर अंदर हमें अजिकसम लाकर दे देगा"

"क्या सच में, अगर ऐसा हो गया तो यह तो किसी अमृत मिलने से कम खुशी वाली खबर नहीं, मुझे अब इस संसार का सबसे हाईटेक हुमन होने से कोई नहीं रोक सकता। देखना मेरे पास ऐसी टेक्नोलॉजी होगी जिसके बारे में किसी ने सोचा भी नहीं होगा"

बॉस अंदर ही अंदर खुश हो रहा था। उसकी खुशी जायज भी थी क्योंकि वह किसी ऐसे तत्वों को पाने वाला था जो खतरनाक होने के साथ-साथ दिलचस्प भी था। एक ऐसा तत्व जिसका टेंपरेचर अनंत है अर्थात वह कभी पिघलता नहीं।


***


 निधि और चाय वाले आदमी की पकड़म पकड़ाई जारी थी। चाय वाला आदमी एक बिल्डिंग के ऊपर चढ़े जा रहा था वह भी सीडीओ से। निधि भी सीडीओ पर चढ़ रही थी।

सीढ़ियों पर चढ़ने के बाद आदमी एक कमरे में घुसा और बाल्कनी तक जा पहुंचा। बाल्कनी से आगे जाने का रास्ता नहीं था पर बाहर लटक रहे ए.सी. के ऊपर ऐसी जगह जरूर थी जिससे बिल्डिंग के नीचे वापस नीचे उतरा जा सके।

वह चाय वाला वाला आदमी अपनी कमाल की कला का प्रदर्शन करते हुए सीधे उस ऐ.सी. पर जा कुदा।

हैरत वाली बात थी कि उसे यह करने से बिल्कुल डर नहीं लगा। ‌ ऐसा लग रहा था जैसे उसे खुद पर इतना विश्वास है कि वह मरेगा नहीं या फिर उसने इतना अभ्यास कर रखा है कि उसके लिए यह चीज बिल्कुल आम हैं। वह spider-man की भांति एक जगह से दूसरी जगह की ओर जा रहा था।

निधि ने बालकनी से नीचे जाने का रिस्क नहीं लिया। वह वापस पीछे सीढियों की और मूड गई।

सीढ़ियों के पास पहुंचते ही वह कूदकर सिढियों से नीचे की ओर उतरने लगी। निधि भी spider-man से कम नहीं थी। सीडीओ के साइड में जो स्टिक लगी होती है निधि उन्ही स्टिक पर एक स्टिक से दूसरी स्टिक पर लटकते हुए नीचे जा रही थी जिस वजह से उसे नीचे पहुंचने में बहुत कम टाइम लगा । यहां निधि ने अपनी कमाल की एथलीट प्रतिभा का एक नमूना दिया था जिसमें वह इतनी परफेक्ट थी कि बिल्कुल भी चूक ना हो।



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