Title - Tell me
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एक अनजान जगह
देखने से कोई साइंस लैब लग रही थी।
जगह के हावभाव, वहां का साजो सामान भी वैसा ही था।
दो आदमी डॉक्टर के वेश में या फिर यूं कह लो कि वह वहां के कर्मचारी होंगे जिन्होंने सफेद पोशाक पहन रखी थी। दोनों के हाथों में एक फाइल थी और वह एक कमरे की और जा रहें थे जहां एक मोटा आदमी लैपटॉप पर कुछ देखने में व्यस्त था।
मोटा आदमी शक्ल से उनका बॉस लग रहा था। उसके आसपास फाइलों का ढेर लगा पड़ा था। नजर सामने लैपटॉप स्क्रीन पर थी। आंखों पर बड़े-बड़े चश्मा और मुंह की सफेद दाढ़ी उसकी उम्र लगभग 50 साल के आसपास बता रही थी।
"सर एक बुरी खबर है।" दोनों सफेद पोशाक वाले आदमियों में से एक आदमी बोला। वह आदमी थोड़ा सहमा हुआ था मानो उसे अपने शब्द कहने से डर लग रहा हो।
"क्या" बॉस ने अपने चश्मे को थोड़े नीचे करते हुए पूछा।
"वोकसवर में हमारा आदमी पकड़ा गया, किसी निधि नाम की एजेंट ने पकड़ा है"
"इसमें कौन सी बुरी खबर है, पकड़ा गया तो पकड़ा गया"
"सर उसे जिस काम के लिए इंडिया में अपॉइंटमेंट दिया गया था वह अब नहीं हो सकता"बस यह सुनते ही बॉस का जैसे पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया ।
"क्या कहा, मेरा काम नहीं हो सकता। तुम्हें पता है ना मुझे वह चीज हर हाल में चाहिए और वह मुझे इंडिया में ही मिलेगी अब तुम क्या चाहते हो मैं खुद उसे इंडिया जाकर ढूंढूं" बॉस ने सख्त लहजे में कहा।
"नहीं सर हम कोशिश करेंगे कि कोई दूसरा आदमी मिल जाए जो हमारा यह काम कर सके बस आप हमें थोड़ा सा वक्त कीजिए"
"वक्त ही तो नहीं है हमारे पास"
इतना कहने के बाद उस आदमी ने अपने लैपटॉप की स्क्रीन पर एक बटन दबाया। बटन दबाने के तुरंत बाद कमरे की आस पास की दीवारें हिलने लगी। वहां का दरवाजा अचानक बंद हो गया और आसपास की खिड़कियों के सामने सफेद स्क्रीन आ गई। धीरे धीरे कमरे का फर्श नीचे खिसकने लगा और कमरा एक लिफ्ट की भांति नीचे जाने लगे। थोड़ी देर नीचे जाने के बाद उनके सामने एक दरवाजा खुला जिसके बाद अंदर से दूसरा ही शानदार दृश्य नजर आया।
अंदर कोई एक्सपेरिमेंट हो रहा था।
"वक्त ही तो नहीं है हमारे पास, हमारे एक्सपेरिमेंट धीरे धीरे फेल होते जा रहे हैं। उसके बिना हम वह हासिल नहीं कर सकते जो हमें हासिल करना है। उसका होना बहुत जरूरी है बहुत मतलब बहुत"
बॉस और दोनों सफेद पोशाक वाले आदमी पास ही टेबल पर हो रहे एक्सपेरिमेंट पर पहुंचे।
"क्या यह मशीन अब काम कर रही है??" बॉस ने उस एक्सपेरिमेंट को पूरा कर रहे आदमी से पूछा।
"हां सर बस एनर्जी की कमी है, अगर इसको 12000 वोल्ट के आसपास एनर्जी मिले तो यह परमाणु बम से भी ज्यादा तबाही मचा दे"
"बहुत शानदार"
इसके बाद वह दूसरे एक्सपेरिमेंट टेबल के पास गया।
"क्या तुमने वह केमिकल बना लिया जिससे एक इंसान की ताकत डेढ़ गुना हो जाती है"
"हां सारे केमिकल बना पड़ा है, बस उसमें एक एलिमिनेट की कमी है और अगर वह मिल जाए तो हम आदमी की ताकत डेढ़ गुना तो क्या 10 गुना भी बढ़ा सकते हैं"
"देखा" बॉस ने सफेद पोशाक वाले आदमियों से कहा"बस सभी एक्सपेरिमेंट में सिर्फ एक चीज की कमी है वह खास एलिमिनेट जो इंडिया में है"
इसके बाद बोस ने अपनी जेब से एक रिमोट निकाला और उसका बटन दबाकर सामने एक बड़ी सी स्क्रीन को ऑन किया।
स्क्रीन को ऑन करने के बाद वहां एक डीएनए जैसी संरचना आ रही थी जो काले रंग की थी। ( डीएनए कि रचना सफेद रंग की होती है पर जहां जो सरचना दिखाई दे रही थी वह काले रंग की थी)
"पिछले कई सालों से हमें इसी एलिमिनेट की तलाश थी। एक खास तरह का तत्व जिसे अजीकसम कहा जाता है। यह तीन प्रकार का होता है और तीनों ही अवस्थाएं इस धरती पर उपलब्ध है। 2021 के आसपास इस तत्व को अंतरिक्ष से धरती पर लाया गया था जहां इससे अद्भुत प्रयोग किए गए। इसके खास गुणों का पता लगाया गया। इसका सबसे शानदार गुण था कि इसका टेंपरेचर अनंत है अर्थात यह कभी पिघलता नहीं। "
जैसे-जैसे बॉस कह रहा था वैसे वैसे स्क्रीन के परिदृश्य भी बदल रहे थे और वहां उसके शब्दों से मेल खाते चित्र आ रहे थे।
बॉस ने आगे कहना शुरू किया"हजारों कोशिशें कर ली गई इसका टेंपरेचर ढूंढने की पर इसका टेंपरेचर नहीं मिला, धीरे-धीरे इसकी उपलब्धता के बारे में बाकी लोगों को भी पता लग गया और दुनिया में इसे पाने की होड़ मच गई जिसके बाद यह अचानक से गायब हो गया, या फिर गायब कर दिया गया कुछ लोगों द्वारा। पर अभी कुछ दिन पहले हमें पता चला कि इस तत्व के कुछ अंश किसी विशेष तरह के समुदायों के पास हैं और हमें इसे उन्हीं समुदायों से हासिल करना है।"
"सर आपका काम जल्दी हो जाएगा"
"होना चाहिए, इस तत्व जो गुण हैं वह किसी गॉड पार्टिकल से कम नहीं, यह अनंत ऊर्जा अवशोषित कर सकता है और उत्सर्जित भी, अगर इसकी क्रिया साथ वाले तत्वों से करवा दी जाए तो वह उसे भी अपने अनुरूप कर देता है। अर्थात यह तत्व दूसरे तत्वों को भी अपनी भांति बना देता है"
"जी सर अबकी बार पक्का हो जाएगा"
दोनों सफेद पोशाक वाले आदमियों ने कहा और उसके बाद वह वहां से चले गए। उनके जाने के बाद बॉस कुछ देर तक स्क्रीन को देखता रहा और उसके बाद वह भी वहां से चला गया।
बॉस के जाने के बाद जो आदमी अपने एक्सपेरिमेंट से ध्यान हटा चुके थे वह वापस अपने एक्सपेरिमेंट की ओर लग गए। उनके एक्सपेरिमेंट सच में बहुत खतरनाक थे और उनकी तलाश और खतरनाक होने वाली थी।
फिलहाल अब तक सुबह के 7:00 बज चुके थे। स्पेस एकेडमी के ऑफिस में सभी आदमी अपनी अपनी दिनचर्या पर लग गए थे। 8:00 बजे मीटिंग शुरू होनी थी जो ट्रेन वाली घटना को लेकर थी। सुबह होते ही एकेडमी में लोगों की आवाजाही ऐसी थी जैसे दोपहर के 2:00 बजे हो।
पर इस हलचल से कोसों दूर निधि के कमरे में।।
यहां तो तहलका मचा हुआ था।
निधि बेड की बचाए नीचे लेटी हुई थी। पास ही उसका रिवाल्वर पड़ा था जिसके नोक पर साइलेंसर लगा हुआ था। रिवाल्वर का धुआ बता रहा था कि इससे गोलियां चल चुकी है। आसपास गोलियों के कुछ निशान भी थे।
अलार्म घड़ी अगैरा वगैरह तो निधि रात ही बंद कर चुकी थी पर यह जो गोली चली थी वह दरवाजे के बाहर लगी डुर बेल को बताने वाले स्पीकर पर चली थी।
सुबह के समय से लेकर अब तक चार आदमी निधि के कमरे का राउंड लगा चुके थे और उन्होंने कमरे वाली बेल भी बजाई थी। पर मजाल है कि निधि उठ जाए। यही कारण है कि आज सुबह यह स्पीकर निधि के रिवाल्वर का निशाना बना। बाद में आने वाले 2 आदमी तो हैरान थे कि बेल बजाने के बाद भी बज क्यों नहीं रही। उनमें इतनी हिम्मत भी नहीं थी कि वो दरवाजा खटखटाए तो वह बस वापस लौट वहीं से वापस लौट गए। ऊपर से निधि के ऑर्डर भी थे कि सुबह कोई उसका दरवाजा ना बजाएं जबकि उसने तो उसे डिस्टर्ब ना करने को भी कहा था पर वह आदमी भी क्या करते बॉस का ऑर्डर था कि निधि को जगा दिया जाए।
अंदर निधि फर्श पर लेटी पड़ी थी। बेड वाली चद्दर उसके आधे बदन को ढक रही थी जबकि बाकी वह जयों की त्यों थी। उसने एक छोटी सफेद कलर की बनियान और पजामा पहन रखा था।
खिड़की बंद थी तो उसे आने वाली हवा भी नहीं आ रही थी जिस वजह से उसके बाल जैसे थे वैसे के वैसे ही पड़े थे, बिखरे हुए उसकी कमर पर। बालों की लंबाई कुछ ज्यादा ही थी क्योंकि वह कमर तक आराम से आ रहे थे।
गुलाबी गाल फर्श पर सटे हुए थे और चेहरे के दबाव के कारण थोड़ा रूखसाए हुए भी।
उसने एक लंबी ऊवासी ली और चद्दर को अपने ऊपर पूरा ओढ लिया।
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वहीं निधि के कमरे के बाहर भी हलचल मची हुई थी। यह मैडम अभी तक बाहर क्यों नहीं आई, मैडम अभी तक जगी क्यों नहीं, क्या मैडम अभी भी सो रही है, यह मैडम कितना सोती है। बाहर लोग तरह-तरह की बातें कर रहे थें। मीटिंग शुरू होने में अभी आधे घंटे का वक्त था। ठीक 7:30 से लेकर 8:00 बजे के बीच बीच मीटिंग शुरू होनी थी और निधि की नींद है कि अभी भी पूरी नहीं हुई।
रोजर्स और उसका दोस्त ऑफिस में आ चुके थे। दोनों ऑफिस की कैंटीन में बैठ कर नाश्ता कर रहे थे।
अचानक खाना खाते खाते रोजर्स धीरे से फुसफुसाया।
"किसी को पता नहीं चलना चाहिए हम कल रात कहां थे?"
"क्यों , हम तो कल केस की छानबीन कर रहे थे!!" सेजो ने चुपके से जवाब दिया।( उसने दोस्त का नाम सेजो था)
"अरे वह नहीं, केस के बाद हम कहां गए थे उसका किसी को पता नहीं चलना चाहिए वरना बहुत मार पड़ेगी"
"तो वह मैं थोड़ी ना गया था, तुम गए थे, तुम मरोगे... मैं तो नहीं मरता, किसने बोला था तुझे पब मे जाने को और लड़कियों के साथ मस्ती करने को"
"अबे अबे अबे धीरे बोल, मरवाएगा क्या, यार जवान है अब मस्ती नहीं करेंगे तो कब करेंगे, जब बूढ़े हो जाएंगे तब। ऐसा थोड़ी ना होता है"
"ठीक है तो फिर पकड़े गए तो मुझे मत कहना कुछ"
"हां बस तुम बताना मत किसी को"रोजर्स बोला और खाना खाने लगा।
वहीं दूसरी ओर मीटिंग में लोग धीरे-धीरे आने लगे थे। सबसे पहले सीनियर और बड़े लोग आए जिन्हें काम करते हुए काफी वक्त हो गया था।
सभी पूरी तरह से अनुशासित तरीके में सुव्यवस्थित थे। सही ढंग के कपड़े बूट इत्यादि सब बढ़िया था। आने के बाद सभी अपनी-अपनी फाइलों को देखने लगे और उन्होंने इस केस के बारे में जो भी छानबीन की है उस पर एक नजर दौड़ाने लगे।
दूसरी एजेंसियों के कुछ लोग भी वहां आए हुए थे जो अपनी प्रतिक्रिया इस केस पर देंगे।
स्पेस एकेडमी का बॉस अर्थात न्यूयॉर्क में बने स्पेस अकेडमी का बॉस या फिर रोजर्स के पिता वह भी यहीं बैठे थे और अपने साथी से कुछ बतिया रहे थे।
"तुम्हें क्या लगता है निधि अपना काम कर पाएगी" रोजर्स का पिता बोला ।
"शक तो मुझे भी हो रहा है , आपके हिसाब से हमें उसे आजमाना चाहिए जैसा कि आपने पहले कहा था" दूसरा आदमी बोला जिससे वह बतिया रहा था।
"सही कहा, हमने कल ही एक टेरेरिस्ट पकड़ा है वह कुछ भी बता नहीं रहा क्यों ना निधि को कहा जाए कि वह उससे सच उगलवाय, वह जिस ग्रुप का टेरेरिस्ट है उस ग्रुप का नियम है कि मर जाएंगे पर कुछ भी नहीं बताएंगे। अब से पहले भी हम ऐसे कई आदमी को पकड़ चुके हैं जिनसे कुछ पता नहीं चला। ऐसे में निधि ने अगर सच बुलवा लिया तो हमें उसकी काबिलियत पर यकीन करना पड़ेगा"
"नहीं कुछ और, निधि यह नहीं कर पाएगी। वह आदमी किसी भी हाल में सच्चाई नहीं बताएगा। "
दोनों ने एक नजर उस आदमी की तरफ घुमाई जो एक शीशे की दीवार के पीछे एक चेयर पर आराम से बैठा था।
आदमी काफी भयानक लग रहा था । बड़ी-बड़ी दाढ़ी। आंखों में खतरनाक लाल रंग, और डरावनी शक्ल।
"देख लेते हैं, निधि को कहते हैं फिर देखते हैं क्या होता है"
इसके बाद दोनों ने मीटिंग में आए बाकी आदमियों की तरफ ध्यान दिया और एक-एक कर उनसे भी हल्की फुल्की बातें करने लगे।
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