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Thursday, June 4, 2020

THE SECRET IDENTITY-12




   
    निधि का सीरिया जाना और उसकी विनम्र से मुलाकात
   
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    ठीक डेढ़ घंटे बाद निधि अपने कह अनुसार घर आ गई। घर आकर उसने खाना खाया और वकार अहमद से दूसरी बातें करने लगी "आप मुझे विनम्र के बारे में कुछ बता रहे थे…कहीं उसका तो इसके पीछे हाथ नहीं" निधि ने एक सधे हुए अंदाज में अपनी बात शुरू की।
   
    "कुछ कह नहीं सकते, उसके पिता इंडिया में प्रोजेक्ट डिपार्टमेंट में काम करते थे। प्रोजेक्ट डिपार्टमेंट एक ऐसा ग्रुप था जो दूसरे देशों पर हमले करने की रणनीति बनाता था। इसके बाद उसके पिता ने विनम्र का नाम एडवांस ट्रेनिंग में जोड़ दिया, जिसके तहत उसे दूसरे देशों में छोटी उम्र के अंदर ही रहने सहने के लिए भेज दिया गया। विनम्र अपनी छोटी सी उम्र में सीरिया आया। फिर सीरिया की सेना में भर्ती होकर ट्रेनिंग ली। कई सालों तक एजेंसी उससे संपर्क में थी लेकिन बाद में वह संपर्क क्षेत्र से बाहर हो गया। सीरिया की सेना में शानदार काम करने की वजह से वह वहां का कमांडर बन गया और बाद में उन्हीं के लिए काम करने लग गया। वह एक शानदार जासूस था जो अपनी हर कला में माहिर है। उसकी सबसे अच्छी विशेषता दूसरों के चेहरे को पढ़ना है, जो वो पलक झपकते ही कर लेता है।
   
    "लेकिन फिर भी, उस एजेंट के मरने के बाद सबसे ज्यादा फायदा सीरिया का हुआ है। लेकिन जैसा कि आपने कहा है कि सीरिया को अभी तक पता नहीं चला कि हम उनके प्रधानमंत्री को मारने की योजना बना रहे हैं, तो फिर उसे मारने का कारण क्या है। आखिर ऐसी कौन सी वजह थी जिसे कातिल ने उसे मारने पर मजबूर किया....?" निधि गहरे सोच-विचार में डूब गई।
   
    "इसको तो वही बेहतर समझा सकता है जिसने उसका कत्ल किया। मैं तो अब इसका क्या जवाब दूं। हो सकता है पैसों का लालच हो या........फिर कुछ और…. या फिर हो सकता है बिना वजह ही कुछ"
   
    निधि ने मधुरता से कहा “ बिना वजह कुछ नहीं होता, कुछ तो खास होगा..... जो इसकी वजह बना। लेकिन वह वजह अभी नजर नहीं आ रही”
   
    "मैं तुम्हारी तर्कों से सहमत हूं" वकार अहमद बोला "लेकिन यहां पर ऐसा कुछ भी नहीं जिसके जरिए हम इन सब बातों का पता लगाए, तुम वापस गई थी ना….. क्या तुम्हें कुछ मिला" वकार अहमद ने बातों को घुमा कर तुरंत उस बात पर जोर दिया जिसके कारण वह वापिस गई थी।
   
    "नहीं" निधि ने सहजता से जवाब दिया। "मुझे वहां कुछ भी नहीं मिला, एक बार तो लगा था कि मैं कुछ भूल चुकी हूं पर जब वहां जाकर वापस चेक किया तो खाली हाथ आई"
   
    "ओह" वकार अहमद ने अफसोस जताया। "खैर, जल्दी कुछ हाथ लग जाएगा"
   
    "मुझे भी ऐसा ही लगता है" निधि ने वकार अहमद को देखा "वैसे अब हमें आगे क्या करना है?" निधि ने पूछा। "यहां के एजेंट के पास जो मिलना था वह मिल गया लेकिन अभी दो एजेंट बाकी है"
   
    "कुछ खास नहीं" वकार अहमद ने जवाब दिया "तुम्हारे सीरिया भेजने की तैयारी करनी है..."
   
    "सीरिया" निधि चौंकी" लेकिन इराक से सीरिया... यह थोड़ा मुश्किल नहीं लगता" उसने अचंभित होते हुए कहा
   
    "ज्यादा मुश्किल नहीं है....." वकार अहमद मुस्कुराया "दरअसल यहां के चरवाहे दोनों देशों की साझा संपत्ति है। उन्हें बॉर्डर क्रॉस करने की इजाजत है। मैं कुछ चरवाहे वालों को जानता हूं और वह मेरे लिए काम भी करते हैं। उनके साथ तुम्हें बॉर्डर क्रॉस करवा दूंगा"
   
    "मुझे!! क्या आप नहीं जाएंगे??"
   
    "मैं नहीं जा सकता। यहां के आर्मी के लोग मुझे जानते हैं, जिस कारण वो मुझे चरवाहा बिल्कुल नहीं समझेंगे"
   
    "लेकिन मैं अकेली.... वह भी सीरिया में"
   
    "डरने की बात नहीं, तुम्हें ज्यादा दूर नहीं जाना…... बॉर्डर के साथ वाले शहर में ही हमारी छोटी सी बेस है। वहां उन दोनों एजेंट की मौत हुई थी। हालांकि हमारा वहां कोई आदमी नहीं जो तुम्हारे काम आ सके, लेकिन वो बेस पूरी तरह से खाली पड़ी है। पुलिस और आर्मी का भी वहां आना जाना नहीं...। बॉर्डर क्रॉस करने के बाद तुम्हें आधा घंटा लगेगा वहां तक पहुंचने में, वहां जाकर उस बेस की जांच करना और शाम को चरवाहे वापस आएंगे तो उनके साथ वापिस आ जाना।"
   
    वकार अहमद ने अपनी पूरी योजना निधि को बताई। योजना सुनने के बाद निधि गहन सोच-विचार करने लगी। "मुझे नहीं लगता किसी दूसरे देश में इस तरह जाकर ऐसे काम कर सकते हैं, लेकिन आपकी बातों से लगता है कि यह ज्यादा मुश्किल नहीं...... मुझे कोई आपत्ति नहीं" और जवाब दिया।
   
    "मैं एक नक्शे का इंतजाम कर दूंगा। शहर की गलियां काफी छोटी छोटी है। इससे तुम आसानी से बेस तक पहुंच जाओगी। यह चरवाहे वहां 6 घंटे तक रुकेंगे। ऐसे में तुम्हें अपना सारा काम 6 घंटे के अंदर निपटाना है"
   
    "अगर मुझे 6 घंटे से ज्यादा वक्त लगा तो"
   
    "तब तुम्हें अगले दिन तक का इंतजार करना होगा, जब यह चरवाहे वापस आएंगे तब उनके साथ आ जाना"
   
    "6 घंटे" निधि ने लंबी सांस लेकर कहां।
   
    इसके बाद दोनों तकरीबन आधा घंटा और बातें करते रहे और अंत में अपने अपने कमरे चले गए।
   
    अगले दिन सुबह होते ही निधि और वकार अहमद इराक के बॉर्डर का सफर कर रहे थे। उन दोनों ने औरतों के कपड़े पहन रखे थे। समय 5:00 बजे का होगा। दोनों बॉर्डर के आखिरी छोर पर आकर रुक गए। उनके सामने चरवाहों के समूह थे जो भेड़ों के साथ खड़े थे। वकार अहमद अकेले आगे बढ़ा और एक चरवाहे वाले से बात की। कुछ देर तक बात करने के बाद वह वापस निधि के पास आया "वह लोग मान गए हैं, शाम को तुम्हें वापस भी ले आएंगे"
   
    इसके बाद वकार अहमद ने कुछ कागज निकाले और उसे निधि को दे दिया। "यह वहां का नक्शा, और नागरिकता के कागज हैं। अगर किसी भी तरह का खतरा आए तो संभाल लेना"
   
    "ठीक है" निधि ने जवाब दिया।
   
    इसके बाद निधि उन चरवाहों के साथ बॉर्डर क्रॉस करने लगी। यहां बॉर्डर पर ज्यादा पाबंदी नहीं थी। ‌मिलिट्री के कुछ आदमी जरूर थे पर वह किसी तरह की हरकत नहीं कर रहे थे। शायद वह चरवाहों को काफी समय से जानते हैं इसलिए बिना किसी कागज पत्र के उन्हें आने-जाने दिया जा रहा था। इराक का बॉर्डर पार करने के बाद वह सीरिया के सैनिक क्षेत्र में थे। यहां काफी सारे घास के मैदान थे जो उन भेड़ों को चरने के लिए दिए जाते हैं। वहां पहुंचने के बाद चरवाहे ने निधि के लिए सुरक्षित रास्ता बनाया और उसे रेतीले टीलों के पीछे से निकाल कर सड़क के रास्ते लगा दिया।
   
    सड़क का रास्ता सीधे शहर जाता था। सड़क पर चलते वक्त कई सारे विचार उसके मन में थे। "यहां बॉर्डर क्रॉस करना इतना आसान है, इस तरह से तो कोई भी बॉर्डर क्रॉस कर सकता है। बस आपको चरवाहों का साथ चाहिए। "
   
    लगभग आधे घंटे के सफर के बाद वह शहर में थी। सुबह होते ही शहर में लोगों की चहल कदमी बढ़ जाती हैं। यहां भी कुछ ऐसा ही हाल था। कुछ लोग काम से आ रहे थे तो कुछ लोग काम को जा रहे थे।
   
    निधि ने वहां पहुंच कर एक अच्छा सा रेस्टोरेंट ढूंढा और जाकर बैठ गई।
   
    आगे क्या करना है इसके बारे में सोचने के लिए उसे कुछ सुकून के पल चाहिए थे। ‌ रेस्टोरेंट में बैठने के बाद उसने दो कप चाय के ऑर्डर  दिए। दूसरे लोगों की नजरों से छुपा कर खुफिया तरीके से मेनू कार्ड के नीचे नक्शा निकाला और लोकेशन देखने लगी।
   
    जल्दी ही टेबल पर चाय के दो कप पड़े थे। "यह रास्ता मच्छी मार्केट का, और यह रास्ता रेस्टोरेंट का जहां पर मैं अभी बैठी हूं। और यहां पर है बेस। मतलब, “वह पीछे मुड़ी और वहां का बोर्ड देखा। "मुझे यहां से दाएं जाकर तीन गली सीधे जाना है और फिर बाय मुड़ जाना है" उसने खुद से कहा और अपनी चाय खत्म करने लगी।
   
    चाय खत्म करने के बाद वह अपने तय किए गए रास्ते पर चलने लगी। ‌ पहले बोर्ड से गुजरी, फिर तीन गली तक का सीधा सफर... और उसके बाद बाएं मुड़ गई। गली में आगे जाने के बाद सामने ही बेस वाला घर था। ‌
   
    निधि ने आसपास देखा और चुपके से उस बेस वाले घर में चली गई। घर दो मंजिला था, दीवारें खुरदरी पीले रंग की, अगर सामान्य भाषा में कहूं तो दीवारों का रंग पीला था और पपड़ी उतरी हुई थी। उन्हें मरम्मत की काफी ज्यादा जरूरत थी। यहां के बाकी घरों का भी यही हाल था।
   
    घर का दरवाजा खोलने के बाद उसके सामने लंबे चौड़े हॉल का परिदृश्य था। इस हॉल के अंदर तीन कमरे, एक किचन, एक लोबी और दो बाथरूम थे। निधि ने सबसे पहले घर का दरवाजा बंद किया इसके बाद चारों ओर घूमकर कमरे को पहली नजर ऊपर से देखा। दीवारों पर तस्वीर टंगी हुई थी, किचन में बर्तन पड़े थे जो धोने वाले थे। इन्हीं तस्वीरों के बीच अलग-अलग निशान थे। निधि ने उन निशानों को करीब से देखा। "यह तो गोली लगने के निशान, मतलब यहां गोलीबारी हुई है।" उसने सोचा और फिर निशानों की गहराई नापने के लिए माचिस की तीली निकाली। गहराई देखने के बाद उसने निशानों के विपरीत दिशा में गौर किया। वहां एक खिड़की थी जो इस दीवार के सामने आती थी। खिड़की और निशानों की गहराई बता रही है यह गोलियां बाहर से चली है। निधि चलकर खिड़की के पास आई और वहां से बाहर देखा। बाहर एक और घर था जो तीन मंजिला था। यह घर खिड़की के ठीक सामने था जिस कारण वह निधि के लिए जिज्ञासा का विषय बन गया।
   
    निधि ने अपना ध्यान वापिस सामने वाले कमरे से हटाया और गोलियों की जांच करने के बाद उसने कमरों की जांच करनी शुरू कर दी।। सबसे पहले इस निशान के ठीक बगल में बने कमरे की जांच की। वहां का सामान बिखरा हुआ था। बेड की चादर, अलमारी, कपड़े सब इधर-उधर पड़े थे। किसी ने इस कमरे की पहले ही तलाशी ले रखी थी।  लेकिन इसके बावजूद निधि वहां की चीजों को देखने लगी। सबसे पहले उसने कपड़ों को देखा, फिर अलमारी के हिस्से को और फिर बेड को। बेड के नीचे वाले साइड पर कुछ खरोंच के निशान थे। यह निशान उस जगह पर थे जहां आदमी सोते वक्त अपना सर रखता है।
   
    निधि ने उन निशानों को बड़े आश्चर्य से देखा और तेजी से हरकत में आई। वह उछल कर बैड के दूसरी तरफ गई और बेड को खिसका कर साइड में किया। वहां उसकी आंखें फटी की फटी रह गई क्योंकि एक बहुत ही बेशकीमती चीज उसके हाथ लग गई थी।
   
    बेड के ठीक नीचे एक बड़ा सा पोस्टर था जिस पर वैसी ही कुछ आड़ी टेढ़ी लकीरें थी जैसी उसे पहले मिली थी। निधि ने उस पोस्टर को उठाया और समेट कर अपनी पेंट के पीछे वाली साइड में डाल लिया‌। "हो ना हो जिन लोगों ने इन्हें मारा है उन्हें इसी की तलाश थी। एजेंट ने भी इसे काफी खुफिया तरीके से रखा है। जरूर इन लकीरों का कोई बड़ा मकसद है" निधि ने सोचा और दूसरे कमरे में चली गई।
   
    वहां की हालत भी बिगड़ी हुई थी। इस कमरे की उसके आने से पहले किसी ने तलाशी ले ली थी। निधि ने इस कमरे को ज्यादा नहीं देखा बस सिंपल देखकर छोड़ दिया। एक बार बैड के नीचे जरूर देखा था, पर वहां कुछ नहीं मिला।
   
    कमरे की जांच करने के बाद वह किचन में आई। किचन में धोने वाले बर्तन पड़े थे। निधि ने उन बर्तनों को छुआ और सूंघा "तकरीबन 10 दिन पुराने हैं" वह बोली और नल चला कर देखा। नल से पानी नहीं आ रहा था।
   
    "यह कैसे हो सकता है, अगर बर्तन यहां रखे गए हैं तो मतलब यहां पानी आता था, लेकिन अब पानी नहीं आ रहा।"  निधि अपने दिमाग के घोड़े बहुत तेजी से दौड़ा रही थी। वह कमरे से बाहर निकली और सीढ़ियों से छत पर पहुंची। सामने ही टंकी थी।
   
    टंकी के करीब जाकर उसने उसे चारों तरफ से देखा। टंकी की पाइप किसी ने बंद कर रखी था, और वहां टंकी के अंदर गोलियां लगने के निशान भी थे।
   
    निधि खुद से बोली " सब समझ में आ रहा है, इन लोगों को बहुत होशियारी से खत्म किया गया है। सबसे पहले किसी ने टंकी का पानी बंद किया, घर का एक आदमी  ऊपर आया तो उस पर गोलियां चला दी गई। ठीक इसी वक्त नीचे वाले आदमी को भी शूट कर दिया गया।
   
    पूरे घर की जांच करने के बाद निधि नीचे उतरी और बाहर गली में आ गई। फिर आसपास देखा, पूरी गली सुनसान थी। इसके बाद वह सामने वाले घर में घुस गई। सीढ़ियां चढ़कर ऊपर टेरिस पर पहुंची और वहां की दीवारों को देखा। इन पर बंदूक रखने के निशान थे। "यह मिलिट्री द्वारा की गई कार्रवाई है जिसमें मिलिट्री के काफी हाई एडवांस सोल्जर शामिल थे।"
   
    थोड़ा सा और देखने के बाद वह सीढ़ियों से नीचे उतरने लगी  "अगर इसमें मिलिट्री के लोग शामिल है तो उन्हें पता होगा कि यह लोग एजेंट थे और यह भी पता होगा कि इनका मिशन क्या था। लेकिन इसके बावजूद उन्होंने बाकी के एजेंट नहीं मारे। यह बात हजम नहीं हो रही। इसका तो मतलब यही हुआ कि उन्हें पता था यह लोग एजेंट हैं पर यह नहीं पता था वह लोग प्रधानमंत्री को मारना चाहते हैं।  और अगर उन्होंने इस कारण से एजेंट को नहीं मारा तो उनका कारण क्या था, शायद तक यह लकीरें, उन्हें इन लकीरों की तलाश थी।" अहहह, निधि ने अपने सर के बाल नोच लिए "पूरा मामला उलझता जा रहा है....."
   
    निधि घर के दरवाजे तक पहुंची की उसे बाहर से कुछ गाड़ियों के चलने की आवाज सुनाई देने लगी। उसने तुरंत अपने कदमों की चाल धीमी की और ऊपर उठते हुए बाहर देखा। बाहर मिलिट्री की गाड़ियां थी। ‌वह तुरंत तेजी से पीछे हटी और वापिस टेरिस पर चली गई।
   
    मिलिट्री की गाड़ियां उसी घर के सामने आकर रुक गई। आगे वाली गाड़ी में विनम्र बैठा था।
   
    गाड़ियों के रुकते ही विनम्र उतरा और दूसरे सैनिकों को आर्डर दिया "जाओ और इस घर की तलाशी फिर से लो"
   
    विनम्र के कहने के बाद सारे सैनिक एक-एक कर घर के अंदर चले गए। निधि दूसरे वाले घर की छत से यह सब देख रही थी।
   
    निधि तेजी से पीछे हटी और अपनी नजरों को वहां से हटाया "मेरा यहां रुकना ठीक नहीं।" वह सीधे टेरिस की दूसरी और गई और नीचे देखा। नीचे उसे सामने वाले घर की छत दिखाई दे रही थी। छत तकरीबन 2 मीटर नीचे होगी। निधि ने मुड़ कर पीछे देखा, वहां से सामने वाले घर में मिलिट्री के जवान एजेंट के घर को चेक करते हुए दिखाई दे रहे थे। इसके बाद वह वापिस आगे देखने लगी।
   
    आगे देखने के बाद उसने एक लंबी सांस ली और कुछ कदम भरकर सामने वाले घर पर छलांग लगा दी। नीचे कूदते ही धड़ाम की एक आवाज हुई और फिर चारों ओर सन्नाटा छा गया।
   
    ***
   
    कुछ देर बाद निधि इस गली के ठीक बगल वाली गली में चलती हुई दिखाई दे रही थी। जैसे-तैसे कर उसे इस जगह से दूर जाना था। इन हालात में वह जितना दूर जाएगी उतना ही फायदा है। रास्ते में ही निधि ने अपनी शर्ट उतारी और उसे बदलकर उल्टा पहन लिया।
   
    आखिर में वह उसी रेस्टोरेंट पर पहुंच गई जहां पर पहले आई थी। रेस्टोरेंट पर आकर उसने अपने कमर के पीछे का पोस्टर निकाला और उसे सीट के नीचे रख दिया।
   
    फिर वेटर को आवाज लगाकर उसे कॉफी का ऑर्डर दिया।
   
    जल्द ही वहां से वही मिलिट्री वाली गाड़ियां वापिस जाते हुए दिखाई दी। निधि ने उन गाड़ियों को देख कर कोई हरकत नहीं की। वह ऐसे रिएक्ट कर रही थी जैसे वो यहीं पर रहती है। ‌थोड़ी देर बाद कॉफी वहां थी।‌
   
    लेकिन, कॉफी को लाने वाला शख्स वेटर नहीं बल्कि कोई और था....वह विनम्र था।
   
    विनम्र ने कॉफी टेबल पर रखी और उसके सामने बैठ गया। निधि पूरी तरह से समझ चुकी थी कि वह फंस चुकी है, लेकिन इसके बावजूद वह आराम से बैठी रही। "मुझे नहीं पता था, एक स्पेस एकेडमी के एजेंट होकर तुम्हें अकेले कॉफी पीनी पड़ेगी" विनम्र ने कहा।
   
    शानदार!! विनम्र एक नजर में ही जान गया की निधि कौन है। निधि ने कोई जवाब नहीं दिया,बल्कि वे सोच विचार में पड़ गई कि यह शख्स कौन हो सकता है...हो ना हो
   
    यह विनम्र ही है।
   
    "तुम शायद विनम्र होगे" निधि ने कॉफी का कप उठाया और सधे हुए लहजे में उससे कह दिया।
   
    विनम्र सुनकर मुस्कुराया"शायद तक, यह बात तुम बेहतर जानती हो....."
   
    "मैं निधि हूं... अभी-अभी एकेडमी ज्वाइन की है" निधि ने उससे ऐसा कहा जैसे वह यहां पर रिश्तेदारी निकालेगी।
   
    "मुझे इस से कोई मतलब नहीं" विनम्र ने सामने से उसकी बात को इग्नोर कर दिया।
   
    "लेकिन, मुझे है...." निधि बोली "तुम्हारे किस्से दुनिया भर में मशहूर है, तुम एजेंसी के एक शानदार एजेंट हुआ करते थे
   
    "
   
    "उन बातों की अब कोई अहमियत नहीं। मैं पहले एजेंट था पर अब नहीं.... अब तो बस अफवाह बची है"
   
    निधि मुस्कुरा कर बोली "अफवाहों अक्सर तभी फैलती है जब उनके सच होने की गुंजाइश हो"
   
    "तुम काम की बात पर आओ....." विनम्र ने अपना हाथ टेबल पर रखा और जबरदस्त तरीके से धमकी वाले अंदाज में कहा। ‌
   
    "बोलो.... क्या काम की बात??"निधि ने उससे पूछा
   
    "तुम्हारे पास हमारी कोई चीज है।।।।" विनम्र ने कहा "मुझे बस वही चाहिए"
   
    "मेरे पास ऐसा कुछ नहीं...."निधि ने अपने कंधे चटका कर जवाब दिया।
   
    "माना कि तुम होशियार हो.... पर मेरे से ज्यादा नहीं। तुमने उस एजेंट के घर की तलाशी ली थी जिन्हें हम ने मारा था, जरूर तुम्हें वहां से कुछ मिला होगा"
   
    "नहीं!! मुझे वहां कुछ नहीं मिला" निधि ने साफ मना कर दिया। "वैसे अगर बुरा ना मानो तो मैं एक बात पूछूं....उसमें आखिर ऐसा क्या था जो तुम लोग उसकी तलाश कर रहे हो"
   
    "तुम्हें इससे क्या लेना देना" विनम्र अपनी जगह से खड़ा हुआ "यह मिलिट्री के अपने पर्सनल मामले हैं, तुम इसमें ना आए तो ही बेहतर हैं। इसकी वजह से तीन एजेंट पहले ही मारे जा चुके हैं और तुम भी खतरे से बाहर नहीं। भलाई इसी में है कि आज शाम को वापस लौट जाओ... और फिर यहां दोबारा नजर मत आना।" वह थोड़ा सा करीब आया और बिल्कुल निधि के पास आकर बोला “इस बार तो छोड़ रहा हूं... लेकिन अगली बार बिल्कुल नहीं छोडूंगा"
   
    और वहां से चला गया। निधि पीछे से उसे जाते हुए देखती रही "बेटा भले ही तुम यहां के खतरनाक इंसान हो, लेकिन मेरा नाम भी निधि है, किसी भी हाल में मुझे कम मत समझना" इसके बाद निधि भी वहां से चली गई।
   
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