शाम के 6:00 बजे।
Aj2 फ्यूचर कंपनी।
रोजर्स और सेजो अब इस जगह पहुंच चुके थे। शाम का वक्त था इसलिए कंपनी में सन्नाटा पसरा हुआ था। काम करने वाले लोग अपने-अपने घरों की ओर जा चुके थे। बस कुछ गिने-चुने लोग ही दिखाई दे रहे। यह लोग भी ज्यादातर सिक्योरिटी गार्ड थे।
रोजर्स और सेजो दोनों एक कमरे में बैठ बोस के आने का इंतजार कर रहे थे। उन्हें ज्यादा देर इंतजार नहीं करना पड़ा, लगभग 2 मिनट की देरी के बाद एक हटा कटा मोटा सा आदमी कमरे में घुसा और दोनों को देखा। इस कंपनी का बॉस वही आदमी था जिसे खास तत्व अजिकसम की तलाश थी।
"जी कहिए मैं आपकी क्या मदद कर सकता हूं" कमरे में आते ही मोटा आदमी बोला।
"हेलो सर मेरा नाम रोजर्स हैं और मैं...." अभी रोजर्स इतना ही बोला था कि बॉस ने उसे टोक दिया।
"मुझे तुम्हारे नाम से कोई मतलब नहीं काम बताओ" यह सुनते ही रोजर्स उसके तो जैसे पैरों तले जमीन खिसक गई । आज तक कभी किसी ने उससे इस तरह से बात नहीं की।
"काम!!" रोजर्स एक पल ठहरा " हां वही तो बता रहे हैं। हम स्पेस अकैडमी से हैं और हम जानना चाहते हैं कि आपकी कंपनी सतीश विजयवर्गीय के बारे में क्या जानती हैं??"
"नहीं, हमारी कंपनी उनके बारे में कुछ नहीं जानती। वह बस यहां काम करते थे और इस्तीफा देकर चले गए" बॉस ने तुरंत से जवाब दिया।
"क्या आप शुयर हैं"
"व्हाट यू मीन बाय शुयर? कहा ना नहीं तो नहीं" बॉस रोजर्स पर चढ़कर उसे जवाब दे रहा था।
"जी शुक्रिया"
इसके बाद रोजर्स और सेजो दोनों उस कंपनी से बाहर आ गए और गेट के पास खड़े होकर वापस पीछे से कंपनी की ओर देखा।
"कुछ ना कुछ तो गड़बड़ है सेजो " रोजर्स ने हाथ हिलाते हुए सेजो को कहा" आज रात को हम यहां पर छापा मारेंगे और इस कंपनी की सच्चाई पता करेंगे, मुझे यहां दाल में कुछ काला लग रहा है"
सेजो ने भी रोजर्स की हां में हां मिलाई जिसके बाद दोनों वहीं पास की एक जगह पर रात होने का इंतजार करने लगे।
दूसरी ओर निधि और वह चाय वाला आदमी एक दूसरे के आमने सामने खड़े थे।
सीढ़ियों से उतरते वक्त निधि उस चाय वाले आदमी से पहले नीचे आ गई थी और आकर उस आदमी को घेर लिया था।
" अब तुम बचकर कहीं नहीं जा सकते" निधि ने कहा।
" अच्छा, तुम्हें क्या लगता है तुम जैसी लड़की मुझे पकड़ पाएगी"
" तुम पहले से ही पकड़े जा चुके हो"
निधि ने अपने कदम उस आदमी की तरफ बढ़ाएं। आदमी भी धीरे-धीरे पीछे हटने लगा पर कुछ कदम पीछे हट कर वह निधि की तरफ दौड़ा और पास आते ही उसने एक बैक फिलिप मारकर निधि को चौंका दिया। उसकी यह बैक फिलिप निधि को नीचे गिराने के लिए थी पर चौकन्नी निधि उससे बच गई।
खुद को संभालने के तुरंत बाद वह चाय वाला आदमी निधी की ओर कुदा और उसे लड़ने लगा। जवाबी कार्रवाई में निधि भी उसके हमलों का जवाब देने लगी। दोनों के बीच कराटे वाली फाइट हो रही थी।
चाय वाला आदमी कभी ऊपर से हमला करता तो कभी नीचे से और निधि कभी ऊपर से अपना बचाव करती तो कभी नीचे से। दोनों अपनी अपनी कला में दक्ष लग रहे थे इसलिए कोई भी हमले में एक दूसरे को टच नहीं कर रहा था बस वह बच बच ही रहे थे।
थोड़ी देर ऐसे ही लड़ने के बाद चाय वाले आदमी ने निधि को चकमा देते हुए उसे नीचे गिरा दिया और वापस भाग खड़ा हुआ।
निधि भी तुरंत एक झटके से कुदते हुए खड़ी हुई और वापस उस आदमी के पीछे हो गई।
" जितना चाहो उतना भाग लो, मैं तुम्हें आज पकड़कर ही रहूंगी"
जल्द ही अंधेरा हो गया था। रात के अंधेरे का फायदा उठाते हुए रोजर्स बिल्डिंग के पीछे से सेजो को साथ लेकर कंपनी में घुस गया।
दोनों वहां के सुरक्षाकर्मियों को चकमा देते हुए सीडीओ के पास पहुंचे और वहां से इलेक्ट्रिक प्लग से सभी सीसीटीवी कैमरा को जाम कर दिया।
कैमरे जाम करने के बाद दोनों बिना किसी डर के हॉल में से होते हुए सीधे उस ऑफिस में पहुंचे जहां बोस का कमरा था।
दरवाजे के बाहर लोक लगा हुआ था। रोजर्स ने अपनी जेब से एक डिवाइस निकाला और उसे दरवाजे से चिपका दिया।
थोड़ी देर में वह दरवाजा अपने आप खुल गया जिसके बाद दोनों अंदर कमरे में घुस गए।
कमरे में जाते ही रोजर्स ने टेबल पर पड़े लैपटॉप को खोला और उसके बटनो को स्कैन करने लगा।
" यह तुम क्या कर रहे हो" पास खड़े सेजो ने पूछा।
" लैपटॉप का पासवर्ड जानने की कोशिश कर रहा हूं, इस डिवाइस से हमें उन बटनों के बारे में पता लग जाएगा जिन बटनो को सबसे ज्यादा बार दबाया गया"
थोड़ी देर में कुछ बटन स्केनर पर शो हुए जिन्हें रोजर्स ने दबा दिए। पर संयोगवश वह बटन लैपटॉप के पासवर्ड कि नहीं बल्कि कमरे के नीचे जाने वाली लिफ्ट के थे।
देखते ही देखते आसपास की दीवारों पर एक सफेद स्क्रीन छा गई और वह दोनों कमरे के फर्श के साथ-साथ नीचे जाने लगे।
" अरे यह क्या हो रहा है" सेजो चिल्लाया।
इधर वह आदमी भागता भागता एक डिस्को बार में जा घुसा। निधि भी उसके पीछे-पीछे उस डिस्को बार में चली गई।
अंदर काफी भीड़ थी और इस भीड़ के बीच किसी को भी पहचानना बहुत मुश्किल था। डिस्को में आज लोगों के कपड़ों का कोड भी यूनिक था जिस वजह से सभी लोग एक जैसे लग रहे थे। बस एक निधि ही थी जो भीड़ से अलग दिख रही थी। निधि ने अपनी नजरें चारों तरफ घुमाई और उस आदमी को ढूंढने की कोशिश की। बाहर डिस्को का दरवाजा बंद हो चुका था जिसके ऊपर लिखा था कि यह दरवाजा अब ठीक रात के 12:00 बजे ही खुलेगा उससे पहले नहीं।
डिस्को में शानदार नाच गाना हो रहा था। लड़कियां ना मात्र वस्त्र पहन इधर-उधर घूम रही थी जो इस बात का संकेत था कि यह डिस्को निधि के लिए किसी भी तरह से अनुकूल नहीं
और हुआ भी ऐसा। जब निधि आगे बढ़ रही थी तो एक मोटे गैंडे ने उसे "और छम्मक छल्लो आज चलें क्या, बड़ा मस्त माल लग रही है तू" कह कर संबोधित किया पर अगले ही पल वह जमीन पर गिरा था और निधि वहां से गायब थी।
उस आदमी की तलाश में वह ऊपर वाले फ्लोर पर आ चुकी थी।
जबरदस्त शोर के बीच उसे अपने मोबाइल फोन की घंटी अभी सुनाई नहीं दे रही थी जो स्पेस एकेडमी से आ रही थी।
इधर उधर नजरे घुमाते उसने पूरे डिस्को को गौर से देखा। बाहर जाने और अंदर आने के सभी रास्तों को नोट किया।
***
रोजर्स और सेजो कंपनी के एक शानदार दृश्य के सामने खड़े थे जहां उनकी आंखों के आगे हजारों एक्सपेरिमेंट आधे अधूरे पड़े थे।
" साला, यह क्या?? यहां तो एक अलग ही खिचड़ी पक रही है" रोजर्स अपने आप में बोला।
दोनों अब आगे जाकर उन एक्सपेरिमेंटस को पास से देखने लगे। दोनों कभी कोई एक्सपेरिमेंट उठाते तो कभी कोई।
" ऐसा लग रहा है जैसे यह लोग किसी विश्व युद्ध की तैयारी कर रहे हैं, सब के सब एक्सपेरिमेंट बहुत ही उन्नत लेवल के हैं और अपनी दुनिया में तो ऐसे एक्सपेरिमेंट किसी ने किए भी नहीं"
अचानक बात करते करते रोजर्स का हाथ उस रिमोट पर पड़ा जो सामने वाली स्क्रीन को ऑन करता था। जाते वक्त बॉस वह रिमोट यही छोड़ गया था।
स्क्रीन के चलते ही उस पर वह दृश्य आने लगे जो उस खास तत्व को लेकर थे।
अजीकसम……. एक ऐसा तत्व….. जिसका टेंपरेचर अनंत है…... असीम शक्तियां….. कभी न खत्म होने वाली एनर्जी
यह सब चीजें फिर से आने लगी और उसे देख रोजर्स और सेजो की आंखें फटी की फटी रह गई।
" कौन है वहां" अचानक पीछे से एक सिक्योरिटी गार्ड की आवाज आई।
सिक्योरिटी गार्ड की आवाज सुनते ही दोनों आनन-फानन में इधर-उधर होने लगे।
" मैंने कहा रुको" सिक्योरिटी गार्ड की नजर उन पर पड़ चुकी थी। उसने अपनी शोल्डर पर टंगा एक डिवाइस निकाला और उस पर लाल बटन दबा दिया। जिससे पूरी कंपनी में एक खतरे वाला सायरन बजने लगा और देखते ही देखते वहां कई सारे सिक्योरिटी गार्ड आ धमके।
रोजर्स और उसके दोस्त के पास अब भागने के सिवा और कोई रास्ता नहीं था। दोनों अब बाहर की ओर जाने लगे पर उन्हें यह नहीं पता था कि बाहर कहां से निकला जाए।
इधर सिक्योरिटी गार्ड ने उन पर बंदूकें तान दी।
" मर गए अब तो" रोजर्स बोला और उन्होंने अपने हाथ ऊपर उठा लिए।
वहीं डिस्को में घूमते घूमते निधि की नजरें उस आदमी पर पड़ गई जो एक कोने पर एक लड़की के पीछे छुपा बैठा था। लड़की आधी निर्वस्त्र थी और कोरिया की लग रही थी। ध्यान से देखने पर पता चला कि उस आदमी ने उस लड़की पर चाकू तान रखा था।
" आगे मत बढना वरना मैं इसे खत्म कर दूंगा" वह आदमी चाकू दबाते हुए बोला।
" कर दो, मुझे इससे क्या" निधि भी मुस्कुराते हुए बोली और वह आगे की ओर बढ़ने लगी।
पास ही एक खिड़की थी जो नीचे एलिवेटर की ओर जा रही थी। नीचे जाने का रास्ता दुर्गम था और रास्ते में कई सारी कांच की दिवारें आ रही थी।
उस आदमी ने उस लड़की को निधि की तरफ धकेला और खिड़की से नीचे की और कूद गया।
कांच की दीवारों से टकराता हुआ और उन्हें तोड़ता हुआ वह सीधे नीचे जा गिरा। इस भयावहक कूद में उसकी हालत काफी खराब हो गई थी।
तभी डिस्को में भी एक अजीब सा साउंड होने लगा जो इस बात का संकेत था कि डिस्को के अंदर आग लग गई है और यह आग और किसी ने नहीं उस आदमी ने ही जाते वक्त लगाई थी।
डिस्को में पूरी तरह से भगदड़ मंच गई और निधि के लिए अब उस रास्ते से कुदना भी आसान नहीं था जिस रास्ते से वह आदमी कूदा था । क्योंकि पहले वहां कांच की दीवारे थी जो अब टूट चुकी थी पर पास में ही नीचे जाने का एक और रास्ता था जो उसे भी ज्यादा दुर्गम था।
कई सारे नुकीले भालों के बीच से थोड़ी सी जगह थी जिससे आगे जाकर वापस कांच वाला रास्ता शुरू हो जाता था। जगह इतनी कम थी कि वहां से आदमी बड़ी मुश्किल से ही निकल पाए और वह भी जब ऊंचाई से कूदे तो इस बात का अनुमान लगाना मुश्किल हो जाए कि वह उस जगह से ही गुजरेगा या भालों से टकराएगा।
पर इन सबके बावजूद निधि ने रिश्क लिया और वह काम किया जिसके लिए वह जानी जाती है। अर्थात हथेली पर जान लेकर घूमने वाली बात।
उसने कुछ कदम पीछे की ओर खींचे और फिर आगे उन भालों की और कूद गई।
कुदत्ते वक्त उसकी निगाहें ठीक उस रास्ते की ओर थी जिस रास्ते से गुजरना था। यह बिल्कुल वैसा ही दृश्य था जैसा दृश्य सर्कस में होता है और जहां सर्कस में एक आदमी ऊपर से कुदता हुआ वह एक छोटे सी सर्कल रिंग से निकलता है।
निधि ने भी एक ऐसे ही कारनामे का परिचय दिया। उस छोटे से रास्ते के पास आते ही उसने अपने शरीर को अजीब तरीके से मोड़ा और शानदार एथलीट्स वाली कला का प्रदर्शन करते हुए वहां से निकल गई और सीधे जाकर कांच की दीवार पर एक सुपर हीरो वाली लैंडिंग की। उसकी लैंडिंग से कांच टूटा नहीं। वह बहुत हल्के से उस कांच पर कूदी थी। सच में यह दृश्य देखने वाला था और इसको जितनी बार देखा जाए उतना ही मजा आए। स्लो मोशन में प्रतीत होने वाला यह दृश्य किसी फिल्मी सीन से कम नहीं था। उन भालाओं के बीच में से एक छोटे सी जगह से निकलना एक चुनौतीपूर्ण काम था जिसे निधि ने बेझिझक पूरा किया।
वह आदमी अब तक दौड़ता हुआ सामने की एक पुरानी विरान फैक्ट्री में घुस चुका था। निधि भी उस कांच से नीचे उतरी और उस फैक्ट्री की ओर चल दी।
निधि को उसका पीछा करते हुए काफी समय हो गया। दूसरी तरफ रोजर्स भी भारी मुसीबत में फंस चुका था और वह कई सारे सिक्योरिटी गार्डों से गिरा पड़ा था।
रोजर्स और सेजो दोनों एक फर्श पर घुटनों के बल बैठे हुए थे और उनकी आसपास सिक्योरिटी गार्डों की बंदूके तनी हुई थी। सिक्योरिटी गार्ड को अपने बॉस के आने का इंतजार था जिन्हें फैसला करना था कि अब इन दोनों का आगे क्या किया जाए।
कंपनी में मौजूद सिक्योरिटी गार्ड उनके साथ बहुत बुरा व्यवहार कर रहे थे। इस व्यवहार को देखकर अंदाजा तो यही लग रहा है कि इन दोनों का बचना शायद मुमकिन नहीं।
लगभग चंद मिनटों की देरी के बाद बॉस वहां आ पहुंचा। उसने आते ही दोनों को देखा और गुस्से से लाल हो गया।
" मैंने तुम लोगों को कहा था ना मेरी कंपनी से दूर रहना"
इसके बाद वह परेशानी से इधर-उधर घूमने लगा।
" समझ में नहीं आ रहा मैं तुम लोगों का क्या करूं, जिंदा भी नहीं छोड़ सकता और मार भी नहीं सकता। अगर जिंदा छोड़ा तो तुम लोग मेरे लिए सबसे बड़ा खतरा बन जाओगे। अगर मार दिया तो यह स्पेस अकैडमी मेरी जान खा लेगी। आखिर तुम लोगों को किसने कहा था मेरे एक्सपेरिमेंट देखने को, यह ऐसे वैसे एक्सपेरिमेंट नहीं दुनिया को कामयाब करने वाले एक्सपेरिमेंट हैं"
" वह तो दिख ही रहा है" रोजर्स बोला।
" ए नादान बच्चे , बच कर रहे मुझसे।"
इसके बाद वह एक कोने में गया और उसने अपनी जेब से फोन निकाल कर किसी बंदे को फोन किया।
" हेलो, मियारसो बोल रहा हूं, वक्त आ गया है मेरे एहसान का बदला चुकाने का।"
इसके बाद उसने कुछ और बातें की और वापस उन दोनों के पास आ गया। पास आकर उसने अपने आदमियों को ऑर्डर दिया।
" हम इन्हें नहीं मार सकते पर कोई और तो इन्हें खत्म कर सकता है, ऊपर हेलीकॉप्टर खड़ा है जाओ और जाकर इन्हें उस हेलीकॉप्टर से सीक्रेट चैंबर में ले जाओ"
सिक्योरिटी गार्ड ने हामी भरी और इसके बाद उन्होंने बंदूक की एक नोक से दोनों को बेहोश कर दिया। बहोश करने के बाद उन्होंने दोनों को उठाया और ऊपर छत की ओर ले गए।
इधर निधि एक फैक्ट्री के अंदर थी। फैक्ट्री चारों तरफ अंधेरे से भरी थी और कबाड़ के समान से भी। निधि ने अपनी पॉकेट से अपना सबसे प्यारा रिवाल्वर निकाला और उसे अपने हाथों में कस कर पकड़ लिया। यह उसके पिताजी का रिवाल्वर था जो सन उन्नीस सौ अस्सी के दशक का था और निधि आज भी उसी रिवाल्वर को यूज करती थी। रिवाल्वर से उसने कभी भी कोई निशाना नहीं चुका।
रिवाल्वर को इधर-उधर घुमाते हुए वह विरान फैक्ट्री में उस आदमी को ढूंढने लगी जो अंधेरे का फायदा उठाकर फैक्ट्री में जा छुपा था।
पर शायद नहीं!! यह हमारी गलतफहमी थी।
अंधेरे में छिपने की बजाय उसने पीछे से निधि पर झपटा मारा और उसे जमीन पर गिरा दिया।
जमीन पर गिरते ही निधि का रिवाल्वर भी उसके हाथ से छूट गया।
अब वह आदमी निधि के ऊपर था और निधि नीचे।
वह पूरी तरह से उस आदमी की लातों के बीच जकड़ी जा चुकी थी। उसके हाथ भी उस आदमी ने दबोच लिए थे। वह पूरी तरह से उसकी गिरफ्त में आ चुकी थी।
उसने अपने आप को छुड़ाने की कोशिश की पर उस आदमी की पकड़ इतनी मजबूत थी की निधि सिर्फ कोशिश ही कर सकी।
उस आदमी ने अपने हाथ के दो जबरदस्त मुक्के निधि के जबड़े पर मारे और उसे बहोश कर दिया।
बेहोश करने के बाद वह उसके ऊपर से खड़ा हुआ हूं और इधर उधर देखने लगा।
इस लड़की को यहां छोड़ना किसी भी तरह से सुरक्षित नहीं। उसने मन ही मन सोचा और फिर उस फैक्ट्री के एक कोने की ओर गया और वहां से पुरानी बोरी ले आया। उसने उस पुरानी बोरी में निधि को उठाया और उसमें डाल दिया। इसके बाद बोरी को कंधे पर उठा बाहर की तरफ चल दिया।
निधि और रोजर्स तथा रोजर्स का दोस्त, तीनों अब भारी मुसीबत में फंस चुके थे।

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