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Thursday, June 4, 2020

THE SECRET IDENTITY-15





   
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    विनम्र निधि को किस कर रहा था, लेकिन किसी गलत इरादे से नहीं बल्कि उसकी जान बचाने के लिए।
   
    अचानक निधि की सांस में सांस आई, उठते ही उसने खुद को संभाला और विनम्र को धक्का मारते हुए साइड में किया। "यह तुम क्या कर रहे हो ??"
   
    "पागल!!" विनम्र सामने से एक अलग ही अंदाज में कहा। इससे पहले जहां उसका चेहरा एटीट्यूड से भरा लगता था वहीं अब उसके चेहरे पर चिर परिचित होने की छवि झलक रही थी " तुम मर रही थी....... बचा रहा हूं "
   
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    15 मिनट बाद वह दोनों सीरिया के मिलिट्री बेस कैंप में एक तंबू के सामने बैठे थे। निधि की हाथ में चाय थी जबकि विनम्र खाली हाथ बेठा था। वह निधि को कुछ बता रहा था।
   
    "तुम्हारे मॉम-डेड की डेथ के बाद सब कुछ बदल गया था। भले ही मेरे पापा तुम्हारे पापा को बचपन से जानते थे लेकिन उनकी मौत के बाद उन्हें भी एक धक्का सा लगा। उन्हें खुद की और मेरी फिक्र होने लगी। एजेंसी अपने बहुत नाजुक मोड़ पर थी, तुम्हारे पापा के कत्ल के बाद और भी कई सारे कत्ल हुए। एजेंसी के पुराने एजेंट एक-एक कर मरने लगे, इन हालातों में मेरे पापा ने इस देश को छोड़ना बेहतर समझा। उन्होंने मेरा नाम एडवांस ट्रेनिंग में जोड़ा और मुझे लेकर सीरिया आ गए। यहां उनकी काफी अच्छी जान पहचान थी, इस वजह से कुछ दिनों में हमें सीरिया की नागरिकता मिल गई। एडवांस ट्रेनिंग में होने की वजह से एजेंसी को लगा कि मैं उनके लिए काम कर रहा हूं लेकिन ऐसा नहीं था। मुझे पापा पहले ही बोल चुके थे कि अब वह लोग एजेंसी के लिए काम नहीं करेंगे, ऐजसीं बंद होने की कगार पर खड़ी थी, और खुदा ना खासता एजेंसी बंद हो जाती है तो हम लोगों के जिने की संभावनाएं खत्म हो जाएगी। जान पहचान के चलते उन्होंने मुझे सीरिया की सेना में ट्रेनिंग के लिए भेज दिया, मैंने वहां ट्रेनिंग ली और धीरे-धीरे उनका कमांडर बन गया। ऐजंसी ने भी दोबारा कांटेक्ट नहीं किया इसलिए कभी वापस जाने का मूड ही नहीं बना।"
   
    निधि ने चाय का एक सीप पिया "तुम्हारे पापा सिर्फ हमारे पड़ोसी नहीं थे, बल्कि वह पड़ोसी से भी बढ़कर थे। लेकिन मैं नहीं जानती थी परिस्थितियां कुछ इस तरह बदलेगी। मॉम डैड की डेथ के बाद मुझे अंकल रोड अपने साथ ले गए, उस वक्त मेरे मन में तुम्हारा ख्याल नहीं आया था। वहां उन्होंने मेरी ट्रेनिंग शुरू कर दी, तब मेरी उम्र साढे दस साल होगी जब मैंने ट्रेनिंग लेना शुरू किया था। ढाई साल की ट्रेनिंग के बाद मुझे तुम्हारा ख्याल आया, लेकिन तुम फाइलों से गायब थे। तुम्हारे पापा का भी कोई अता-पता नहीं था। अंकल से पूछा तो उन्होंने बताया कि एडवांस ट्रेनिंग के चलते तुम लोगों को फाइलों से हटा दिया गया, लेकिन उन्हें यह नहीं बताया था कि तुम सीरीया आकर रह रहे हो। नियम और कायदे सब पर लागू होते हैं, जब यहां आई तो वकार अहमद ने तुम्हारे बारे में बताया, मैं उसी वक्त समझ गई थी कि यह तुम ही हो।"
   
    "वकार अहमद एक नंबर का कमीना बदां है, ऐजंसी को बर्बाद करने में उसका हाथ है"
   
    "जानती हूं!!" निधि बोली "लेकिन तुम भी यही काम कर रहे हो, ऐजंसी खराब करने का....."
   
    "मैं कुछ नहीं कर सकता, मेरे हाथ पैर बधं चुके हैं, यहां मेरी अच्छी खासी लाइफ है..... मैं अब यहां सिर्फ और सिर्फ प्रधानमंत्री के लिए काम करता हूं।"
   
    निधि बोली, "पर यह तुम्हारा देश नहीं, यहां तुम जो भी करोगे वह देशद्रोह कहलाएगा।"
   
    "मैं कुछ नहीं कर सकता....." विनम्र खड़ा हुआ और वहां से चला गया। निधि उसे पीछे से जाते हुए देखती रही। आगे जाकर वह रेतीले टिब्बों पर बैठ गया। निधि भी उसके पीछे-पीछे गई और उसके बगल में ही बैठ गई। उसने बड़े ही नाजुक स्वर से कहा "मांनती हुं!! हालात इंसान को झुकने पर मजबूर कर देते हैं, उन्हें ऐसे फैसले लेने पड़ते हैं जो वह कभी नहीं लेना चाहता। तुम्हारे पापा अपनी जगह बिल्कुल सही थे, पर जरा एक नजर सोच कर देखो..... मुश्किल हालात किसके सामने नहीं आते। मैंने भी अपने मॉम डैड को खोया है पर इसके बावजूद एजेंसी के लिए काम कर रही हूं। हां!! इस वक्त एजेंसी बुरी परिस्थितियों से गुजर रही है, पर हालात जल्दी बदल जाएंगे।‌ तुम्हारे पास एक मौका है, तुम यहां बिन मकसद की जिंदगी जी रहे हो, पर वहां तुम्हें जीने का एक मकसद मिलेगा। वहां, जहां तुमने अपना बचपन बिताया, हम एक साथ खेले। आज भी वो जिंदगी तुम्हारा इंतजार कर रही है.... सिर्फ एक कदम, अगर तुम एक कदम उसकी तरफ बढ़ाओगे तो वह जिंदगी तुम्हारी तरफ 10 कदम आगे आएगी। ऐसा मौका कभी नहीं मिलेगा"
   
    "तुम क्या चाहती हो!!" विनम्र बोला "मैं सीरिया से गद्दारी करूं"
   
    "मैं तुम्हें ऐसा करने के लिए नहीं बोल रही। बस जो सही है उसका साथ दो, सीरिया के प्रधानमंत्री के इरादे क्या है यह बात तुम भी अच्छे से जानते हो। वह कहीं ना कहीं इस विश्व को जीतना चाहते हैं, यह किसी भी तरह से एक नेक काम नहीं। अगर वे ऐसा करेंगे तो चारों और शिवाए मौत की और कुछ नहीं मिलेगा"
   
    विनम्र खामोश रहा है। उसने कोई जवाब नहीं दिया। निधि बोलती रही "वकार अहमद के हाथ थंडर लाइन लग चुकी है, वह उन्हें लेकर प्रधानमंत्री के पास जाएगा। इसके बाद उसे प्रधानमंत्री को देगा.... जिसके बाद सिर्फ और सिर्फ तबाही मचेगीं। वह अपने पड़ोसी देशों पर हमला करेंगे, उन्हें जीतेंगे.... और कई निर्दोष लोगों को मारेंगे।"
   
    "मैं इसमें कुछ नहीं कर सकता!!"
   
    निधि की कोशिश काम नहीं आ रही थी। विनम्र मानने को तैयार नहीं था। "तुम भले ही ना करो, मैं तो करूंगी....मैं उस वकार अहमद को अपने मकसद में कामयाब नहीं होने दूंगी"
   
    "तुम मर जाओगी" विनम्र उसकी तरफ देखते हूए बोला।
   
    "मेरे लिए मायने नहीं रखता, देश के लिए जान गवाना मरना नहीं कहलाता। और मैं तो यहां लाखों करोड़ों लोगों की जिंदगी बचाने वाली हुं"
   
    निधि ने कहा और खड़ी होकर वहां से जाने लगी। विनम्र को आगे क्या करना है यह उस पर ही छोड़ दिया। अगर साथ दें तो ठीक है, नहीं दे तो भी ठीक है। उसे तो जो करना है वह करेगी। निधि के कुछ दूर जाने के बाद विनम्र उसके पीछे आया"रुको" उसने पीछे से निधि को रोक लिया। "मैं तुम्हारा साथ नहीं दूंगा, लेकिन तुम्हारी थोड़ी बहुत मदद कर दूंगा.... तुम्हारा मिशन सिर्फ वकार अहमद को रोकना और उन लाइंस को लेना है.... तुम सिर्फ इतना ही करोगी और यहां से चली जाओगी"
   
    "मुझे मंजूर है" निधि मुस्कुराए और खुशी से बोली
   
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    "मेरी योजना ध्यान से सुनो" विनम्र और निधि एक तंबू के अंदर बैठकर आगे क्या करना है, इस चीज की योजना बना रहे थें। "आज प्रधानमंत्री की सालगिरह है, इसलिए वह पूरा दिन बाहर रहेंगे। इन हालातों में वकार अहमद का प्रधानमंत्री से मिलना संभव नहीं। शाम को ठीक 5:00 बजे प्रधानमंत्री अपने ऑफिस में जाएंगे, वही वकार अहमद अहमद उनसे मुलाकात करेगा। यही वह समय होगा जब तुम वकार अहमद को ठीक प्रधानमंत्री से मिलने से पहले पकड़ लोगी। इसके बाद तुम्हें जो करना है तुम करना, 6:00 बजे के बाद में तुम्हे वापिस इराक पहुंचा दूंगा। ‌वहां से तुम फ्लाइट पकड़ना और इंडिया चले जाना।"
   
    "अगर इस योजना में कोई गड़बड़ हुई तो" निधि ने पूछा
   
    "बिल्कुल भी नहीं होगी, अगर बाई चांस गड़बड़ हो भी जाती है तो मैं आज पूरा दिन प्रधानमंत्री के साथ रहूंगा, उनका अंगरक्षक बंन कर। मैं किसी तरह बहाना करके वकार अहमद को फिर से अलग कर दूंगा। लेकिन तुम्हें भी वहां रहना होगा"
   
    "मैं वहां कैसे रहूंगी....."
   
    "कुछ न्यूज़ रिपोर्टर प्रधानमंत्री को कवर करेंगे। मैं नकली डॉक्यूमेंट बनाकर तुम्हें एक न्यूज़ रिपोर्टर बना दूंगा, बस इसके बाद अगले छह-सात घंटे तुम प्रधानमंत्री के आसपास रहोगी, उन्हें कवर करने के बहाने।"
   
    निधि को विनम्र की योजना अच्छी लगी। यह एक सुरक्षित और कामयाब होने वाली योजना थी। लेकिन तब तक जब तक निधि चाहे, वह 6 से 7 घंटे प्रधानमंत्री के आसपास रहेगी, एजेंसी का मीशन है कि प्रधानमंत्री को खत्म करना है, ऐसे में अगर निधि का मन बदल जाता है तो हालात बेकाबू हो सकते हैं।
   
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