निधि और उसके मां-बाप की मृत्यु ।
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“कहते हैं वक्त कभी किसी का साथ नहीं देता, ना ही सबका वक्त एक जैसा होता है। कुछ लोग वक्त आते ही ऊँचाइयां छू लेते हैं, तो कुछ लोग वक्त आते ही गर्त में चले जाते हैं। यह वक्त हमेशा अपने अनोखे खेल खेलता रहता है, कुछ लोग इस खेल के राजा बन जाते हैं तो कुछ लोग रंक…...”
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गोवा,
एक खूबसूरत घर के बाहर का परिदृश्य।
पार्क की हरी घास पर लेटी एक मासूम 10 साल की लड़की अपने नाजुक हाथों से घास की बारीक हरी पत्तियों को उखाड़ रही थी। आस पास ठंडी हवा चल रही थी। सुबह का सूरज अभी अभी निकला था। 10 साल की लड़की ने एक सफेद रंग की बलयिन और छोटी निक्कर पहन रखी थी। उसके बाल भूरे रंग के थे और कटिंग डिजाइनदार, बालों का एक छोटा सा हिस्सा माथे पर भी था। आंखें नीले रंग की और गहराई से भरी हुई। चेहरे का तेज देखकर भविष्य में उसके प्रभावी व्यक्तित्व होने का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता था।
इतने में अंदर से एक साड़ी पहने औरत दूध का गिलास लेकर बाहर आई—“निधि अरे बेटा निधी…. लो दूध पी लो" वह बोली और उस लड़की के बगल में ही बैठ गई।
“नहीं मम्मा…. मुझे नहीं पीना” छोटी लड़की निधी ने कहा।
औरत ने अपने हाथों से उसे पास खींचा और अपनी गोद में ले लिया। वह उसके लंबे बालों को सहलाते हुए बोली—“ऐसे कैसे चलेगा बेटा, अगर दूध नहीं पिओगी तो बड़ी कैसे होगी…. और अगर बड़ी नहीं होगी तो पापा की तरह काम कैसे करोगी"
यह बात सुनते ही छोटी लड़की ने गुस्से वाला मुंह बना लिया। वह गुस्से से बोली "मुझे नहीं पापा की तरह काम करना, पापा बहुत गंदे हैं"
औरत मुस्कराई "नहीं बेटा नहीं, तुम्हारे पापा जो काम करते हैं वह इतिहास में सुनहरे अक्षरों से अंकित किया जाएगा। अहहहहह देखना जब तुम अपने पापा के नक्शे कदमों पर चलोगी तो तुम्हारा नाम भी….."
अचानक हॉर्न की एक आवाज ने औरत की बात को बीच में ही रोक दिया। निधि गोद से आकस्मिक खड़ी हुई और बाहर की तरफ भागने लगी। "पापा, पापा" वह रास्ते में ही चिल्ला रही थी।
गाड़ी की खिड़की बंद होने की आवाज के साथ काले कोट पेंट में एक आदमी नजर आया। आंखों पर काले चश्मे, भूरे बाल, उम्र तकरीबन 35 के आस-पास। उसने अपने दोनों हाथ फैलाए और निधि को गले से लगा लिया।
"अरे मेरी प्यारी बेटी, मेरी दुलारी बेटी, my one of the best think of world, ooh nidhiiiiiiii….." गले लगाने के बाद उसने अपना प्यार दिखाया। "wait just a minute, I have something for you" वह वापिस कार की तरफ मुड़ा और एक बड़ा सा टेडी बेयर बाहर निकालकर निधि को दें दिया।
टेडी बेयर देखते ही निधि उछल पड़ी। "वाव,दिस इस ग्रेट पापा"
उसने टेडी बेयर लिया और टेडी बेयर लेकर पूरे पार्क में गोल गोल घूमने लगी।
"निधि कितनी खुश है ना" औरत वीडियो कैमरा निकालकर निधि की वीडियो बनाने लगी।
आदमी ने अपने चश्मे उतारे और तंज कसा "हां, आखिरकर बेटी किसकी है। एक दिन अपने पापा का नाम रोशन करेगी ..."
"लेकिन!!" औरत के चेहरे पर असंतोषजनक लकीरें उभर आई।"वह आपको तो पसंद करती है, पर!!" वह बीच में ही रुक गई।
"पर क्या??
"पर!! वह आपको तो पसंद करती है पर आपके काम को बिल्कुल भी नहीं। आपका जासूसी वाला काम उसे पसंद नहीं। उसे लगता है यह जासूसी का काम आपको महीनों महीनों अपने परिवार से दूर रखता है। आप अपने इस काम में ना तो खुद को समय दे पाते है ना ही अपने परिवार को"
" बड़ी होने के साथ-साथ वह सब कुछ समझ जाएगी" आदमी हंसकर बोला "वक्त कभी किसी का साथ नहीं देता, हालात और किस्मत यह दोनों ऊपर वाले के हाथ हैं" इतना कहकर वह अंदर चला गया।
औरत ने वीडियो कैमरा चलते हुए नीचे रखा और वह भी पीछे-पीछे अंदर चली गई।
"मैं आपके लिए चाय बनाऊं..?" औरत ने अंदर जाकर पुछा।
"हां, लेकिन मीठा कम रखना" जवाब में आदमी बोला।
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दोनों के अंदर जाने के बाद निधी भी बाहर नहीं रुकी और वह भी टेडी बेयर के साथ अंदर आ गई। अंदर आने के बाद अपने टेडी बेयर के साथ आदमी के बगल में ही बैठ गई।
आदमी ने बगल में बैठी निधी को गोद में लिया और गुदगुदी करने लगे। "अच्छा, तो मेरी बेटी को अपने पापा का काम पसंद नहीं, क्यों" गुदगुदी के कारण निधि खिलखिला कर हंस पड़ी। थोड़ी देर ऐसे ही रहने के बाद उसने खुद को अपने पापा के चंगुल से छुड़ाया और बाहर की तरफ भागने लगी।
आदमी भी उसके पीछे पीछे भाग पड़ा "मुझसे बचकर नहीं जा सकती छिपकली…"
दोनों दौड़ते दौड़ते पार्क में आ गए जहां कैमरे के आगे आदमी ने उछलकर निधी को दबोच लिया। "देखा!! मैंने कहा था ना मुझसे बचकर नहीं जा सकती"
"हां पापा, I LUV U" वह मासूमियत से बोली।
उनकी यह सारी बातें कैमरे में रिकॉर्ड हो रही थी, उनका भागना, खेलना और यह लव यू वाला सीन।
अपनी बेटी के मुँह से लव यू सुनने के बाद पिता ने उसके माथे को चूमा और बोले" लव यू टू बेटा... लव यू टू"
पीछे से निधि की मां भी चाय के कप के साथ बाहर आ गई "कमाल है, बाप बेटी अपने प्यार में मां को तो भूल ही गए"
निधि और पिता दोनों यह सुनकर हंसने लगे।
कहते हैं वक्त सभी का एक जैसा नहीं रहता….. और यही सच है।
अचानक "धाएं" स्नाइपर की एक गोली चली और सीधे निधि की मां के सर के आर पार हो गई। उनके हाथ में पकड़ी चाय की ट्रे गोली लगते ही नीचे गिर पड़ी।
"धाएं" एक और स्नाइपर की गोली चली और उस आदमी के सर को अपना निशाना बनाया। गोली उनके भी सीधे सर के आर पार हो गई।
निधि जोर से चीख पड़ी। डर के मारे वह दुपक कर अपने पापा की लाश के अंदर ही सिमट गई और खुद को जमीन के बिल्कुल नजदीक कर लिया। इसके बाद तीसरा फायर हुआ जो निधि के लिए था। लेकिन निधि इतनी छोटी सी जगह पर सिमटी हुई थी कि निशाना सही से लगा नहीं। उसने निधि की बजाय उसके टेडी बेयर को निशाना बनाया।
थोड़ी देर बाद सब कुछ थम चुका था। वक्त भी…. और दो लोगों की सांसे भी। एक लाश सीढ़ियों पर पड़ी थी... और एक लाश बिल्कुल निधि के बगल में….। आज एक बेटी के सर से उसके मां-बाप का साया उठ गया।
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रात के अंधेरे में तेज बारिश हो रही थी। समय तकरीबन 11:00 बजे का होगा। लोगों की लंबी कतार ताबूत के दोनों और थी। कब्रिस्तान में पादरी अपने शब्द पढ़ रहा था। "भगवान जो भी करता है अच्छा करता है। वह संदेव लोगों की भलाई के लिए, अपने सुनियोजित कदम उठाता है। भगवान की शक्ति अपरंपार है, भगवान सब का देन दाता हैं। "
इसके बाद पादरी ने कुछ सुनहरे शब्द कहे
"Father of all, we pray to you for N., and for all those whom we love but see no longer. Grant to them eternal rest. Let light perpetual shine upon them. May his soul and the souls of all the departed, through the mercy of God, rest in peace"
अपने शब्दों के आखिर में पादरी ने थोड़ी सी मिट्टी कब्र पर गिरा दी। इसके बाद बाकी के सदस्य भी एक-एक कर थोड़ी-थोड़ी मिट्टी कब्र पर गिराने लगे। आँखों को भिगोने वाला एक अंत्यंत ही संवेदनशील दृश्य था। सबके मिट्टी डालने के बाद अंत में निधि बची थी। उसके हाथ में अभी भी टेडी बेयर था। अपने लड़खड़ाते हुए कदमों से वह धीरे धीरे आगे बढ़ी और उसने भी मिट्टी कब्र पर गिरा दी। उसकी आंखों से आंसू झलक रहे थे।आसमान में हो रही बारिश उसके शरीर को भिगो रही थी।
इस पूरे परिदृश्य को दूर से कुछ आदमी देख रहे थे। सभी ने काले कोट पेंट वाले कपड़े पहन रखे थे और आँखों पर काले रंग के चश्मे भी लगे हुए थे। निधि के मिट्टी गिराने के बाद उन लोगों के समूह में से एक आदमी निकल कर आगे आया और आकर निधि के पास खड़ा हो गया। आदमी रोबदार था, चेहरे पर हल्की काले रंग की दाढ़ी, उम्र तकरीबन 40 साल के आसपास। हाथ में एक छाता था जो उसे बारिश के पानी से बचा रहा था। उसने निधि के कंधे पर हाथ रखा और कहां"डोंट वरी माय सन, भगवान जो भी करता है अच्छे के लिए करता है।" फिर उसने आसमान की तरफ देखा। "जिस तरह चांद की रोशनी अंधेरे में एक उम्मीद की किरण का काम करती है, वैसे ही तुम इस दुनिया के लिए एक मिसाल बनोगी, तुम्हारे पापा, उन्होंने समाज भलाई के लिए बहुत कुछ किया है। अब तुम भी उनके लक्ष्य कदमों पर चलोगी। ब्रह्मांड में जब भी किसी बड़ी हस्ती का खात्मा होता है तो उसकी जगह लेने के लिए नई हस्तियां पहले से ही तैयार रहती है। यह प्रकृति का नियम है। ... आओ!! आज से तुम मेरी जिम्मेदारी हो"
उन्होंने निधि की पीठ को सहलाया और उसे पीछे खड़ी गाड़ियों की तरफ ले जाने लगा।
"कुदरत को समझना किसी के लिए भी संभव नहीं। यह अपने हर नए मोड़ पर इंसान को चौंका देती है।" वह लगातार बोलते जा रहा था लेकिन निधि, उस पर इसका कोई प्रभाव नहीं था। वह सिर्फ और सिर्फ सिसक रही थी। सिर्फ और सिर्फ सिसक………..
बारिश के पानी में यह तक भी नजर नहीं आ रहा था कि उसकी आंखों से आंसू निकल रहे हैं या नहीं।
कहते हैं अल्फाज सब कुछ बयान कर देते हैं... लेकिन मेरे पास यहां शब्द नहीं है जो इस वक्त निधि के हालात बयां कर सके।
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